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महिला हिंसा, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण

Essay on women empowerment





महिला हिंसा, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण

Essay on women empowerment.

महिला सशक्तिकरण। महिला हिंसा। महिला सुरक्षा। भारत में महिलाओं की स्थिति। महिला सशक्तिकरण पर निबंध। महिला हिंसा के विरुद्ध कानून।

प्रतिवर्ष 25 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को रोकने हेतु अधिक प्रयास करने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कोरोनाकाल में लगे लॉकडाउन के दौरान महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है।


भारत में महिलाओं की मौजूदा स्थिति - 

नारी जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी,
आंचल में दूध और आंखों में पानी।

उपरोक्त पंक्तियां भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति को बहुत हद तक बयां करती हैं।

पितृसत्तात्मक समाज महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने का हमेशा विरोध करता रहा है।

* महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम रोजगार एवं वेतन दिया जाता है।
* राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी कम देखने को मिलती है। जैसे - महिलाओं की संख्या के अनुपात में संसद में भी उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।
* महिलाओं द्वारा स्वतंत्र रूप से फैसला लेने के अधिकार को पितृसत्तात्मक समाज चुनौती प्रदान करता है। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक नजर आती है। जैसे- पत्नी के सरपंच होते हुए भी सभी फैसले पति द्वारा लिए जाते हैं।
* देश की कई महत्वपूर्ण सेवाओ में भी महिलाओं की संख्या कम नजर आती है। जैसे - आर्मी, नौसेना, वायु सेना, पुलिस सेवा आदि।
महिलाओं को केवल पिंक कॉलर जॉब के लिए उपयुक्त माना जाता है।
अतः देश के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका उनकी संख्या के मुकाबले बहुत कम है।

महिलाओं की स्थिति को दर्शाते अन्य आंकड़े -
* वर्ल्ड इकोनामिक फोरम द्वारा 14 दिसंबर 2019 को जारी जेंडर गैप इंडेक्स 2020 में भारत 153 देशों में से 112 वें पायदान पर है।
नोट:- UNDP द्वारा प्रकाशित जेंडर सोशल नॉर्म्स इंडेक्स के अनुसार दुनिया में ऐसा कोई भी देश नहीं है जहां लैंगिक समानता (gender equality) देखने को मिलती हो।

* राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ( NCRB ) के अनुसार भारत में 2018 के मुकाबले 2019 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई।
एनसीआरबी के अनुसार 2019 में महिलाओं के विरुद्ध लगभग 40500 मामले सामने आए। जिनमें प्रतिदिन औसतन 87 मामले दुष्कर्म के दर्ज किए गए।
* भारत, दुनिया में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों की सूची में शामिल है।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा व अपराध के कारण एवं महिला सशक्तिकरण की राह में बाधक कारक -
* महिला सुरक्षा हेतु बनाए गए कानूनों एवं महिला सशक्तिकरण हेतु बनाई गई योजनाओं का सही क्रियान्वयन ना होना।
* राजनीति में अपराधीकरण महिला अपराधों के विरुद्ध कड़े कानूनों के निर्माण में बाधक है।
* आसानी से उपलब्ध अश्लील मीडिया सामग्री जैसे - वेबसाइट , विज्ञापन , वीडियो , फ़िल्म, आइटम डांस आदि ने महिलाओं के प्रति लोगों की विकृत मानसिकता को जन्म दिया है। ऐसी मानसिकता ही महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों का सबसे बड़ा कारण है।
* पितृसत्तात्मक भारतीय संस्कृति में पुरुषों द्वारा महिलाओं पर किसी वस्तु की तरह अपना हक समझा जाता है।महिलाओं का आत्मनिर्भर न होना भी इसका एक बड़ा कारण है।
* पुरुषों की तुलना में महिलाओं को शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से कमजोर समझा जाता हैं।
* कोरोनाकाल में पूर्णबंदी से उत्पन्न बेरोजगारी व आर्थिक असुरक्षा ने महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा के मामलों को तेजी से बढ़ाया है।
* IUCN की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन से दुनिया भर में लैंगिक असमानता और यौन उत्पीड़न के मामलों में अप्रत्यक्ष रूप से वृद्धि हुई है।
* भारत में पुरुषों के अनुपात में महिलाओं की साक्षरता दर कम है।
( पुरुष साक्षरता दर 82% व महिला साक्षरता दर 52% )
* महिलाओं में जागरूकता एवं आत्मविश्वास की कमी होना।

महिलाओं के अधिकारों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान - 
संविधान ने समाज में उपस्थित लैंगिक असमानता को दूर करने का प्रयास किया है। संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्वो में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए हैं। 
संविधान राज्यों को भी यह शक्ति देता है, कि वे महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयासरत रहे।
* संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की बात करता है।
* अनुच्छेद 15 (3) के अनुसार राज्य महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण हेतु विशेष प्रयास करेगा।
* संविधान का अनुच्छेद 16 लोक नियोजन में महिला व पुरुषों हेतु समान अवसरों की बात करता है।
* अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
* अनुच्छेद 21 जीवन की सुरक्षा व निजता का अधिकार देता है।
* संविधान का अनुच्छेद 300A संपत्ति में अधिकार की बात करता है। जो बेटे की समान ही बेटी के लिए भी पिता की संपत्ति में अधिकार का प्रावधान करता है।
* संविधान के नीति निदेशक तत्वों में महिलाओं हेतु समान काम के लिए समान वेतन एवं स्त्री की क्षमता के अनुसार कार्य करवाने का प्रावधान किया गया है।

संविधान में महिलाओं को दिए गए अन्य कुछ और संवैधानिक प्रावधान -
* हिंदू कोड बिल के तहत हिंदू महिलाओं को तलाक, गोद लेने का अधिकार, पिता की संपत्ति में वारिस बनने का अधिकार, बहु पत्नी विवाह एवं प्रथम वैध पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह अमान्य करने का प्रावधान हिंदू महिलाओं को मिला है।
* महिलाओं को मताधिकार का प्रयोग, प्रसव छुट्टी का प्रावधान, भूमिगत कोल खदानों में महिलाओं के कार्य करने पर रोक लगाना, वेश्यावृत्ति, बाल विवाह, लिंग भेद आदि पर रोक लगाना एवं महिलाओं को गरिमा के साथ जीवन जीने (अनुच्छेद 21) का अधिकार दिया गया है।
अतः संविधान के प्रावधानों ने महिलाओं को सशक्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


महिलाओं से संबंधित कानूनी प्रावधान - 

* हिंदू विवाह अधिनियम 1955 एवं हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत हिंदू महिलाओं के अधिकारों में वृद्धि हुई।
* अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम -1956 ई.
* मातृत्व लाभ अधिनियम -1961 ई.
* दहेज प्रतिषेध अधिनियम -1961ई.
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 (b) के तहत आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।
* गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम 1971 ई. (MTP Act)
* द इंडीसेंट रिप्रेजेंटेशन आफ विमेन (प्रोहिबिशन) एक्ट - 1986
* द कमीशन ऑफ सती (प्रीवेंशन/निवारण) एक्ट - 1987 
* राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 ई.
इस अधिनियम के आधार पर 1992 ई. में राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया। 
* भ्रूण लिंग चयन निषेध अधिनियम - 1994 ई.
* घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम - 2005
* बाल विवाह निषेध अधिनियम - 2006
* कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (संरक्षण, प्रतिषेध) अधिनियम - 2013

महिला सशक्तिकरण हेतु सरकार द्वारा किए गए प्रयास -
महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों पर रोक लगाने हेतु विभिन्न कानून बनाने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने हेतु सरकार द्वारा समय-समय पर प्रयास किए जाते रहे हैं - 
* वर्ष 1993 में महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक विकास हेतु राष्ट्रीय महिला कोष की स्थापना की गई।
* महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा हेतु सरकार द्वारा वर्ष 2002 में स्वाधार योजना की शुरुआत की गई।
* पिछड़े क्षेत्रों में बालिकाओं की साक्षरता को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2004 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना की शुरुआत की गई।
* वर्ष 2013 में निर्भया फंड बनाया गया।
* सेना में स्थाई कमीशन दिया जा रहा है।
• लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
• तीन तलाक को गैर-कानूनी घोषित किया गया है।
• गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम 1971 में संशोधन किया है। (MTP Act)


महिलाओं से संबंधित योजनाएं -

* नारी शक्ति पुरस्कार - 1999
* इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना - 2010
* सुकन्या समृद्धि योजना - 2015
* बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम -2015
* प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना -2016
* महिला शक्ति केंद्र योजना- 2017


महिलाओं से संबंधित विभिन्न दिवस - 

* 8 मार्च - अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
* 23 जून - अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस
* 15 October - International Day of Rural Women
25 नवंबर - अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस

हालांकि मौजूदा वक्त में परिस्थितियां बदल रही है और सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव के चलते महिलाओं की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। लेकिन फिर भी महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा को रोकने, सुरक्षित माहौल देने एवं उनके सशक्तिकरण हेतु सरकार को और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
जैसे- 
* सरकार एवं नीति निर्माताओं द्वारा योजनाओं एवं कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
* महिला अधिकारों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को पूर्णतया लागू करने का प्रयास करना चाहिए
* घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं हेतु परामर्श सेवाएं एवं आश्रय स्थल उपलब्ध करवाने चाहिए।
* महिलाओं के खिलाफ गलत मानसिकता को जन्म देने वाली मीडिया सामग्री पर रोक लगानी चाहिए।
* पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं को कमतर आंकने वाली सोच को बदलने के लिए सरकार को विभिन्न कार्यक्रम एवं योजनाएं बनानी चाहिए।
* बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों से पीड़ित महिलाओं के प्रति पुलिस का रवैया संवेदनशील बनाने और समाज में उनके प्रति नजरिए को बदलने का प्रयास करना चाहिए।
* महिलाओं के खिलाफ अपराधों हेतु कड़े कानूनों का प्रावधान करना चाहिए।
* महिलाओं से संबंधित अपराधिक मामलों के निपटारे हेतु अधिकाधिक फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करना चाहिए।
* विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ में महिलाओं से संबंधित प्रावधानों संशोधन करते हुए समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास करना चाहिए।
* महिलाओं को देश की संसद में प्रतिनिधित्व हेतु आरक्षण की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
* महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित राजनेताओं को चुनाव लड़ने हेतु अयोग्य करार देना चाहिए और गंभीर अपराधों में दोषी राजनेताओं पर हमेशा के लिए राजनीतिक प्रतिबंध लगाना चाहिए।

उतारो मुझे जिस क्षेत्र में, सर्वश्रेष्ठ कर दिखाऊंगी
औरों से अलग हूं दिखने में , कुछ अलग करके ही जाऊंगी।

समाज के कल्याण का हिस्सा अब इज्जत से तुम भी बनो, 
अबला नहीं हो तुम नारी इस बात का अभिमान करो।


SAVE WATER

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