राजस्थान में ग्रामीण विकास
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज
1 अप्रैल 1999 को राजस्थान में ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग की स्थापना की गई।
राजीविका:- राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (RGAVP)
RAJEEVIKA - Rajasthan Grameen Aajeevika Vikas Parishad.
• ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग राजस्थान सरकार द्वारा अक्टूबर 2010 में स्थापित।
• अध्यक्ष - मुख्यमंत्री
• उद्देश्य - ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ाकर निर्धन ग्रामीणों की आय में वृद्धि करना।
राजीविका द्वारा निम्नलिखित आजीविका परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही है -
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (2011)
• ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागू।
• उद्देश्य:- 2024-25 तक 10-12 करोड़ परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ना।
• संपूर्ण राज्य में लागू।
• केंद्र (60) : राज्य (40)
राजीविका द्वारा क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं में प्रमुख गतिविधियों में संस्था निर्माण, क्षमता निर्माण, वित्तीय समावेशन, आजीविका हस्तक्षेप और अभिसरण शामिल हैं।
नमो ड्रोन दीदी
• इस योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को 1,070 कृषि ड्रोन एवं उनके परिवहन के लिए वाहनों की खरीद हेतु लिए गए ऋणों पर अतिरिक्त 3% ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा।
• ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो यूरिया एवं कीटनाशकों के छिड़काव से उर्वरकों और कीटनाशकों का सटीक एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा। यह पहल पारंपरिक कृषि पद्धतियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगी।
लखपति दीदी
• इस योजना के अंतर्गत 796 लखपति मास्टर ट्रेनरों द्वारा 24,907 लखपति कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) को प्रशिक्षित किया गया है।
• वर्तमान में लखपति दीदी कार्यक्रम के तहत 19.90 लाख संभावित महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिनमें से कुल 12.98 लाख महिलाओं को 'लखपति दीदी' की श्रेणी में शामिल किया गया है ।
बैंक सखी
• कुल 7,104 महिलाएँ डिजिटल सखी (डीजी पे सखी) के रूप में तथा 6,053 महिलाएँ बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी (बी.सी. सखी) के रूप में कार्यरत हैं।
• कुल 7,104 महिलाएँ डिजिटल सखी (डीजी पे सखी) के रूप में तथा 6,053 महिलाएँ बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी (बी.सी. सखी) के रूप में कार्यरत हैं।
पशु सखी एवं कृषि सखी
• राजीविका की गतिविधियाँ मुख्यतः महिलाओं द्वारा क्रियान्वित की जाती हैं। कुल 37,369 SHG सदस्य पशु सखी एवं 36,787 SHG सदस्य कृषि सखी के रूप में कार्यरत हैं।
विभिन्न सखी संवर्गों के लिए नियमित और समय पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राज सखी मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है।
वन धन विकास योजना के तहत 8 जिलों (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर, कोटा, बारां, झालावाड़) में वन धन विकास केंद्रों का गठन किया गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA):-
• सितंबर 2005 में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम पारित किया गया।
• फरवरी 2006 में इसे योजनागत रुप दिया गया।
• उद्देश्य - ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन करना।
• इसके तहत ग्राम पंचायत के वयस्क एवं अकुशल सदस्यों को 100 दिन का रोजगार दिया जाता है।
• लाभार्थियों में कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होंगी।
• प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य को रोजगार दिया जाएगा।
• लाभार्थियों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) किया जाता है और जॉब कार्ड प्रदान किए जाते हैं।
• रजिस्ट्रेशन के 15 दिन के अंदर तथा 5 किलोमीटर के दायरे में रोजगार दिया जायेगा।
(5 किलोमीटर क्षेत्र से बाहर होने पर 10% अतिरिक्त मजदूरी दी जायेगी)
• 15 दिन के अंदर रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर राज्य सरकार बेरोजगारी भत्ता देगी।
• कार्य का निर्धारण ग्राम पंचायत करेगी।
• ठेकेदारों व मशीनों से कार्य की अनुमति नहीं है।
• मजदूरी : सामग्री = 60:40
• ग्राम सभा:-
1. सामाजिक अंकेक्षण करेगी।
2. कार्य की गुणवत्ता एवं योजना की प्रगति का पर्यवेक्षण करना।
• केंद्र सरकार:-
1. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित।
2. मजदूरी का 100% वित्त पोषण केंद्र सरकार द्वारा
3. सामग्री का 75% वित्त पोषण केंद्र सरकार द्वारा।
नोट:- वर्ष 2025-26 के दौरान 1554.85 लाख मानव दिवसों का सृजन कर 42.03 लाख परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।
मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना:-
• इसके अंतर्गत मनरेगा के तहत 100 दिवस का रोजगार पूर्ण करने पर अतिरिक्त 25 दिवस का रोजगार राज्य मद से प्रदान किया जा रहा है।
मिशन अमृत सरोवर
• 24 अप्रैल 2022 को शुरू
• उद्देश्य:- देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवर (तालाबों) का निर्माण/विकास करना।
• राज्य का लक्ष्य 2,475 है।
प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन):-
• विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूहों (PVTG GROUP) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री PVTG विकास मिशन शुरू किया गया है।
• उद्देश्य:- देश में 75 PVTG समूहों का विकास करना।
• राजस्थान में एकमात्र जिला बारां है जहां PVTG समूह है।
• बारां जिले की सभी 8 पंचायत समितियां में निवासरत आवासहीन PVTG परिवारों को ₹2 लाख आवास निर्माण हेतु एवं ₹12,000 शौचालय निर्माण हेतु एवं मनरेगा से अकुशल मानव दिवस का देय अनुमानित पारिश्रमिक राशि ₹25,290 सहित कुल राशि ₹2.37 लाख का प्रावधान है।
• पात्रता:- समस्त आवासहीन सहरिया परिवार (परिवार में सरकारी कर्मचारी वाले परिवारों को छोड़कर)
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
• 2016 में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा शुरू।
• लाभार्थी का चयन:- सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना 2011 के आधार पर। (SECC)
• इसके तहत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए ₹1,20,000 दिये जाते है।
• स्वच्छ भारत मिशन के तहत अतिरिक्त ₹12,000 शौचालय निर्माण हेतु दिए जाते हैं।
• लाभार्थियों को मनरेगा के माध्यम से दैनिक मजदूरी (90 दिवस तक) भी उपलब्ध कराई जाती है।
• वित्त पोषण:- केंद्र (60) : राज्य (40)
विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MLA-LAD)
Member of legislative Assembly local area development scheme:-
उद्देश्य:- स्थानीय आवश्यकतानुसार आधारभूत संरचना का विकास, जनोपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना।
• विधायक को अपने निर्वाचन क्षेत्र (ग्रामीण या शहरी) में प्रतिवर्ष विकास कार्यों के लिए ₹5 करोड की राशि दी जाती है।
• इसमें से कम से कम 20% राशि SC-ST के विकास हेतु खर्च करनी होगी।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम:-
(MPLAD - member of Parliament local area development programme):-
शुरू - सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 23 दिसंबर 1993 से।
उद्देश्य:- स्थानीय आवश्यकतानुसार आधारभूत संरचना का विकास, जनोपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना।
• प्रत्येक सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में प्रतिवर्ष ₹5 करोड़ तक की राशि के विकास कार्यों हेतु जिला कलेक्टर को अनुशंसा कर सकता है।
लोकसभा के निर्वाचित सांसद अपने क्षेत्र में ही राशि खर्च कर सकते हैं।
राज्यसभा के निर्वाचित सांसद राज्य के किसी भी जिले में राशि खर्च कर सकते हैं।
मनोनीत सांसद (लोकसभा या राज्यसभा) संपूर्ण भारत में कहीं भी राशि खर्च कर सकते हैं।
• देश के किसी भी हिस्से में गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में एक सांसद प्रभावित क्षेत्र में अधिकतम ₹1 करोड़ की राशि खर्च कर सकता है।
मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम:-
• 1986-87 में आधारभूत सुविधाओं एवं रोजगार के अवसर सृजित करने हेतु शुरू किया गया।
• अलवर, खैरथल-तिजारा एवं डीग के मेव बाहुल्य 14 ब्लॉक के 807 गांवों में संचालित।
डांग क्षेत्र विकास कार्यक्रम:-
• 2005-06 से राजस्थान सरकार द्वारा पुनः प्रारंभ।
• पूर्वी राजस्थान के 8 जिलों की 21,92 गांवों में लागू।
जिलें:- भरतपुर, करौली, धौलपुर (BCD), सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ (हाड़ौती)
मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम:-
• 2005-06 से राजस्थान सरकार द्वारा लागू।
दक्षिणी मध्य अरावली के 5 जिलों के 17,46 गांवों में लागू।
जिलें:- ब्यावर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, पाली (BBCRP)
• प्रमुख गतिविधियां:- जल ग्रहण विकास, लघु सिंचाई, पशुपालन, पेयजल, शिक्षा, विद्युतीकरण, स्वास्थ्य एवं सड़क निर्माण।
महात्मा गांधी जन-भागीदारी विकास योजना:-
• पुराना नाम:- गुरु गोलवलकर जन-भागीदारी विकास योजना।
• नाम परिवर्तन:- फरवरी 2020 में।
• वित्त पोषण:- राज्य सरकार द्वारा।
• उद्देश्य:- ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण व रखरखाव में जन भागीदारी सुनिश्चित करना।
बायोफ्यूल (जैव ईंधन)
• 2005 में राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बायोफ्यूल मिशन लाया गया।
• 2007 में राजस्थान सरकार द्वारा बायोफ्यूल नीति जारी कर बायोफ्यूल प्राधिकरण का गठन किया गया।
(ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधीन)
(ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधीन)
• 10 अगस्त 2019 - राजस्थान बायोडीजल नियम लागू किए गए।
बायोफ्यूल प्राधिकरण की उपलब्धियां:-
1. राजस्थान बायोडीजल नियम 2019 लागू किए गए।
राजस्थान बायोडीजल नियम लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
2. राजस्थान जैव ईंधन नियम 2019 के अंतर्गत राज्य में परिवहन प्रयोजन हेतु हाई स्पीड डीजल के साथ सम्मिश्रण के लिए बायोडीजल (B-100) की खुदरा बिक्री हेतु उत्पादकों, आपूर्तिकर्ताओं एवं खुदरा विक्रेताओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया गया है।
3. मनरेगा के अंतर्गत गैर खाद्य तैलीय फसलों (रतनजोत, करंज, महुआ व नीम) का पौधारोपण किया गया।
4. पौधारोपण की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया।
वर्ल्ड बायोफ्यूल डे:- 10 अगस्त बायोफ्यूल के निर्माण में उपयोगी पौधे - रतनजोत (जेट्रोफा) और करंज। |
राजस्थान बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड
• गठन:- 2016 में।
• पुनर्गठन:- 11 फरवरी 2022
सांसद आदर्श ग्राम योजना:-
• ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा।
• इसके अंतर्गत प्रतिवर्ष एक सांसद द्वारा एक गांव गोद लिया जाता है।
लोकसभा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी गांव।
राज्यसभा सांसद राज्य में कोई भी गांव।
मनोनीत सांसद संपूर्ण भारत में कोई भी गांव को गोद ले सकता है।
उद्देश्य:-चयनित गांव के निवासियों के जीवन स्तर और जीवन गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार लाना।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना
• जून, 2025 में सम्पूर्ण राज्य में जिला-विशिष्ट जरूरतों को पूर्ण करके आर्थिक विकास और समावेशी सामाजिक विकास के उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु प्रारंभ।
• यह योजना राज्य के सभी जिलों के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लागू की जा रही है, जिसमें भागीदारी आधारित योजना निर्माण, प्रमुख विकास परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करना तथा जिला स्तरीय विशेषज्ञ मिशन टीमों के माध्यम से त्वरित क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
• इस योजना का उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों, पर्यटन, MSME और खेल क्षेत्रों में क्षेत्रीय असन्तुलन को कम करना तथा सतत् एवं समेकित विकास को बढ़ावा देना है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त ग्राम योजना
• बीपीएल जनगणना 2002 के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे 22 लाख परिवारों का आर्थिक एवं सामाजिक विकास करते हुए गरीबी रेखा से ऊपर लाये जाने के क्रम में वर्ष 2025-26 में गरीबी मुक्त राजस्थान हेतु राज्य वित्त पोषित इस योजना को प्रदेश के समस्त ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारम्भ किया गया है।
• यह योजना प्रथम चरण में 5 हजार, द्वितीय चरण में 5 हजार एवं तृतीय चरण में 10 हजार गांवों में क्रियान्वित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम
• वर्ष 2025-26 में राज्य की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे दूरस्थ, दुर्गम एवं रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के समग्र विकास को गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ।
• अपनी रणनीतिक महत्ता के बावजूद, भौगोलिक एवं परिस्थितिजन्य कारणों से ये क्षेत्र लंबे समय तक बुनियादी ढांचे तथा सामाजिक आर्थिक विकास से वंचित रहे हैं।
• यह राज्य वित्तपोषित कार्यक्रम सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने हेतु आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सतत् विकास के लिए सुदृढ़ बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित है।
पंचायती राज
• अनुच्छेद 243 में पंचायती राज का प्रावधान।
• पंडित जवाहरलाल नेहरू ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को बगदरी गांव (नागौर) से की।
• 24 अप्रैल 1993 को पंचायती राज संस्थाओं को प्रशासन के तृतीय स्तर के रूप में संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
• भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243 (जी) पंचायतों की शक्तियां, अधिकार और जिम्मेदारियां से संबंधित है।
• राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1953 को 1994 में संशोधित किया गया तथा पंचायती राज नियम 1996 में लागू किए गए।
पंचायती राज विभाग/संस्थाओं के मूल कार्य:-
• विकेंद्रीकरण को सुनिश्चित करना।
• अनुसूचित क्षेत्रों में नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन।
• पंचायती राज संस्थानों में कार्मिकों की भर्ती।
• महिला जन-प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की पेशेवर क्षमता का संवर्धन करना।
• क्षेत्रीय पिछड़ेपन को कम करना।
• सामाजिक अंकेक्षण के लिए ग्राम सभाओं को मजबूत बनाना ताकि पंचायती राज संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
• ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन।
• ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों के जीवन से सीधी जुड़ी विभिन्न योजनाओं की निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन द्वारा समावेशी विकास सुनिश्चित करना।
वर्तमान में राज्य में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियां और 14,403 ग्राम पंचायतें अस्तित्व में है।
वित्त आयोग:- प्रावधान अनुच्छेद 280 में।
गठन - राष्ट्रपति द्वारा।
15वां वित्त आयोग
• अवधि:- 2021-22 से 2025-26
• अध्यक्ष:- एनके सिंह
• सिफारिशें:- 15वें वित्त आयोग ने केंद्र द्वारा राजस्व कर में से 41% राज्यों को देने की सिफारिश की।
नोट:- 15वें वित्त आयोग ने कुल अनुदान के 40% अनटाईड अनुदान तथा 60% टाईड अनुदान की सिफारिश की।
Untide अनुदान:- स्थानीय निकायों की स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे स्ट्रीट लाइट, अन्य सार्वजनिक भवनों/परिसंपत्तियों जैसे - प्राथमिक/उच्च प्राथमिक स्कूल, स्वास्थ्य उपकेंद्र, सहकारी बीज और उर्वरक भंडारण केंद्र, सड़कों, पार्को, खेल मैदान, शमशान स्थलों की मरम्मत और रखरखाव हेतु Tide (बंधे) अनुदान:- केवल निश्चित क्षेत्र में उपयोग। जैसे:- स्वच्छता (खुले में शौच) एवं जल संचयन |
राज्य वित्त आयोग:-
73वें संविधान संशोधन के तहत इसका प्रावधान किया गया।
आयोग - अध्यक्ष | गठन | कार्यकाल |
प्रथम - के के गोयल*** | 24 अप्रैल 1994 | 1 अप्रैल 1995 से 31 मार्च 2000 |
दूसरा - हीरालाल देवपुरा | 7 मई 1999 | 1 अप्रैल 2000 से 31 मार्च 2005 |
| तीसरा - माणिक चंद सुराणा | मई 2004 | 1 अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2010 |
चौथा - डॉ बी डी कल्ला | 13 अप्रैल 2011 | 1 अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2015 |
पांचवा - डॉ ज्योति करण | जुलाई 2014 | 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 |
छठा - प्रद्युम्न सिंह** सदस्य - अशोक लाहोटी, लक्ष्मण सिंह रावत | अप्रैल 2021 | 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 |
7वें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष:- डॉ. अरुण चतुर्वेदी।
षष्टम राज्य वित्त आयोग (2020-2025)
• आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्य के शुद्ध कर राजस्व में से 7% स्थानीय स्वशासन को दिया जाए।
इसका 73.2% पंचायतों को जबकि 26.8% नगरपालिकाओं को दिया जाए।
• इस राशि का 5% जिला परिषद को, 20% पंचायत समिति को तथा 75% ग्राम पंचायतों को दिया जाए।
• सिफारिशों के अनुसार -
अनुदान की 55% राशि का उपयोग आधारभूत एवं विकास कार्यों के लिए,
40% राशि का उपयोग राष्ट्रीय और राज्य प्राथमिकता योजनाओं को लागू करने के लिए,
2% राशि लिंगानुकूल स्थान बनाने के लिए एवं
3% राशि पंचायती राज संस्थाओं द्वारा अपनी आय में वृद्धि के लिए प्रोत्साहन अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण):-
• 2 अक्टूबर 2014 को शुरू।
• वर्तमान में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित।
• प्रथम चरण:- 2014-2019 तक।
• उद्देश्य:- भारत को खुले में शौच से मुक्त करना।
• राजस्थान मार्च 2018 में खुले में शौच से मुक्त हो गया।
• दूसरा चरण:- 2020-21 से 2024-25 तक।
• उद्देश्य:- गांवों में ODF की स्थिति बनाए रखना तथा ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन करना।
• प्रावधान:-
1. व्यक्तिगत शौचालय:- बीपीएल एवं एपीएल परिवारों को शौचालय निर्माण एवं उपयोग करने पर ₹12000 प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
• केंद्र (60) : राज्य (40)
2. सामुदायिक स्वच्छता केंद्र:- के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत को 3 लाख रुपये।
इसमें 70% राशि - स्वच्छ भारत मिशन के तहत
जबकि 30% राशि - 15वें वित्त आयोग से। (टाईड अनुदान)
3. ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन:-
70% राशि - स्वच्छ भारत मिशन के तहत
जबकि 30% राशि - 15वें वित्त आयोग से। (टाईड अनुदान)
गोबर-धन परियोजना
• यह स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण घटक है।
• उद्देश्य:- पशुओं के गोबर और जैविक कचरे से गांवों को साफ करके तथा ऊर्जा और खाद का उत्पादन करके आय के स्रोत विकसित करना।
• वर्ष 2025-26 में कुल 7 गोबर-धन परियोजनाएं स्थापित।
पंचायत विकास योजना (PDP):-
• 2015 में पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा शुरू।
• उद्देश्य:- ग्राम पंचायतों में जनसहभागिता द्वारा विकास कार्यों को बढ़ावा देना।
• इस योजना के तहत भारत सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक संपूर्ण भारत में 'सबकी योजना सबका विकास' अभियान चलाया जा रहा है। (जन योजना अभियान)
इसके लिए 'ई-ग्राम स्वराज पोर्टल' बनाया गया है।
स्वामित्व योजना
• 24 अप्रैल 2020 को शुरू
• उद्देश्य:- गांवों का ड्रोन द्वारा सर्वे करके ग्रामीण भारत के लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक दिलाना।
श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना (ग्रामीण)
• 6 जनवरी 2024 से शुरू।
• इसका संचालन राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्रदेश के सभी चिन्हित ग्रामीण कस्बों में किया जा रहा है।
• 891 रसोईयों के माध्यम से संचालित।
• लाभार्थी से प्रति थाली ₹8 लिए जा रहे हैं तथा प्रति थाली ₹22 राज्य सरकार द्वारा भुगतान किया जा रहा है।
अटल ज्ञान केन्द्र
• ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं की Self study व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा आमजन की पठन प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए अटल ज्ञान केन्द्रों पर ई-पुस्तकालय की सुविधा विकसित की जायेगी।
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान:-
• 2018 में शुरू।
• उद्देश्य:- पंचायत क्षमता संवर्धन।
• केंद्र प्रायोजित योजना
• केंद्र (60) : राज्य (40)
• नया नाम:- पुनरूत्थान राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान
• 31 मार्च 2026 तक संचालित किया जायेगा।
अंबेडकर भवन
• नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम मुख्यालयों को छोड़कर सभी पंचायत समिति मुख्यालय पर अंबेडकर भवन का निर्माण किया जा रहा है।
ग्रामीण गैर-कृषि विकास एजेंसी (RUDA)
Rural non-farm development agency:-
• नवंबर 1995 में स्थापित।
• उद्देश्य:- ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना।
• दस्तकार परिवारों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
• 3 मुख्य क्षेत्र:- चमड़ा, ऊन व कपड़ा तथा लघु खनिज।
• पोकरण पोटरी, ब्लू पोटरी, सांगानेर प्रिंट, बगरू प्रिंट, कोटा डोरिया आदि हस्तशिल्पों के लिए रूडा ने जीआई टैग प्राप्त किया है।
SAVE WATER
0 Comments