सशक्त और समृद्ध कृषि 2025-26
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में योगदान:-
प्रचलित मूल्य पर कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में योगदान 25.74% है।
• कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में फसल, पशुधन, मत्स्य, वानिकी को शामिल किया जाता है।
2024-25 में कृषि में योगदान (प्रचलित मूल्यों पर):-
शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल Net Sown Area | 53.02% |
कृषि योग्य बंजर भूमि Waste land | 10.11% |
वानिकी Forest land | 8.30% |
ऊसर तथा कृषि अयोग्य भूमि Barren and uncultivable land | 6.85% |
गैर कृषि उपयोग अंतर्गत भूमि चालू पड़त | 5.96% 5.22% |
प्रचालित जोत धारक (Operational land holdings):-
|
|
कृषि जनगणना 2010-11
|
कृषिजनगणना 2015-16
|
|
|
कुल जोतों का क्षेत्रफल
|
211.36 लाख हे.
|
-1.24%
|
|
|
कुल प्रचालित भूमि जोतों की संख्या
|
|
|
+11.44%
|
महिला प्रचालित जोत धारक
|
|
|
|
|
|
|
|
-11.07%
|
राज्य में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों को मुख्य रूप से खरीफ फसलें (जैसे बाजरा, मक्का, मूंगफली, कपास) रबी फसलें (जैसे गेहूं, सरसों, जौ, चना) और नकद फसलें व मसाले (जैसे ग्वार, जीरा, धनिया, मेथी) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
खरीफ तिलहन:- मूंगफली तिल सोयाबीन एवं अरंडी।
रबी तिलहन:- सरसों, तोरिया, तारामीरा एवं अलसी।
•कुल खाद्यान्न उत्पादन =283.98 लाख मैट्रिक टन (कमी) (89.55 खरीफ + 194.43 रबी) (दोनों में कमी) • अनाज = 69.03 (खरीफ) + 167.82 (रबी) • दलहन = 20.52 (खरीफ) + 26.61 (रबी) • तिलहन = 41.23 (खरीफ) + 59.23 (रबी) • गन्ना उत्पादन = 3.61 लाख मैट्रिक टन। (कमी) • कपास (रूई) = 17.94 लाख गांठें। | दूसरा:- मूंगफली (DM) तीसरा:- सोयाबीन, चना, कुल दलहन (सोच दल्ले) |
राजस्थान में कृषि जलवायु क्षेत्र
• राजस्थान को 10 कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
बाजरा, मोंठ, तिल | गेंहू, सरसों, जीरा | |||
डीग, सवाई माधोपुर | ||||
राजस्थान में पहली बार अलग से कृषि बजट कब पेश किया गया? - 2022-23
राज. का योगदान | ||||
ग्वार सरसों व राई बाजरा | हरियाणा उत्तर प्रदेश मध्यप्रदेश | गुजरात उत्तर प्रदेश गुजरात | 88.80 43.43 14.21 | |
18.76 | ||||
चना | मध्य प्रदेश | महाराष्ट्र महाराष्ट्र महाराष्ट्र | 8.96 |
राजस्थान में कृषि संबंधित योजनाएं
मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना (2017)
• उद्देश्य:- किसानों द्वारा स्वयं के खेतों में गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देना।
• यह योजना राज्य के सभी 10 कृषि जलवायु क्षेत्रों में लागू की गई है।
• इस योजना के तहत फसलों की विभिन्न किस्मों का बीज उत्पादन 10 साल तक लिया जा रहा है।
गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना
• उद्देश्य:- किसानों को रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने तथा जैविक उर्वरक, जैविक खाद और नैनों उर्वरक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
• प्रत्येक ब्लॉक में 50 किसानों को ₹10,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है जिससे वे पशु अपशिष्ट का उपयोग करके जैविक खाद (वर्मी-कम्पोस्ट) का उत्पादन कर सके।
कृषि क्लीनिक:- किसानों को मृदा परीक्षण, फसलों की जानकारी तथा कीट/रोग उपचार संबंधी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करवाने हेतु सभी जिला मुख्यालयों पर एग्री क्लीनिक स्थापित किए जा रहे हैं।
नमो ड्रोन दीदी योजना
• इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) को ड्रोन एवं सहायक उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण एवं सतत सहयोग प्रदान किया जाएगा।
• ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो यूरिया एवं कीटनाशकों के छिड़काव से उर्वरकों एवं कीटनाशकों का सटीक और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
सहकारी ऋण द्वारा समावेशी विकास
• राज्य में कुल 42,858 सहकारी समितियां है जिनमें 23 संघ (फेडरेशन), 24 दुग्ध संघ, 38 उपभोक्ता थोक भंडार, 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंक, 29 केन्द्रीय सहकारी बैंक, 9,086 प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां (PACS) है।
राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण कारीगरों, गैर-कृषि गतिविधियों से आजीविका अर्जित करने वाले ग्रामीण परिवारों के सदस्यों तथा अन्य पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले लघु एवं सीमांत किसानों के परिवारों को सहकारी बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
कृषि उपज गिरवी ऋण योजना
किसानों को कृषि उपज गिरवी रखने पर 3% की दर से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
कृषि अवसंरचना निधि (AIF)
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा किसानों के लिए फार्म गेट अवसंरचना तैयार करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के कृषि अवसंरचना निधि की घोषणा 15 मई 2020 को की गई।
इसके तहत ₹2 करोड़ की सीमा तक के सभी ऋणों पर 3% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज सहायता दी जाती है।
इसकी राशि ₹1 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ कर दी गई है।
स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना
• इस योजना के तहत गैर कृषि गतिविधियों के लिए ₹50,000 तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है।
राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना
• उद्देश्य:- कृषि एवं डेयरी पर निर्भर परिवारों को सहयोग प्रदान करना तथा पशुधन संरक्षण को बढ़ावा देना।
• 2.5 लाख दुग्ध उत्पादक किसान परिवारों को ₹1 लाख तक का ब्याज मुक्त अल्पकालीन ऋण प्रदान किया जाता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
• 2016 से प्रारम्भ की गई है।
• उद्देश्य:- प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाले फसल नुकसान का बीमा कवर प्रदान करना।
• कृषक से निम्न प्रीमियम राशि लेकर बीमा किया जा रहा है -
रबी = 1.5%
खरीफ फसल = 2%
वाणिज्यिक/बागवानी = 5%
• फसल कटाई प्रयोग करने वाले प्राथमिक कार्मिकों को प्रीमियम अनुदान एवं प्रोत्साहन राशि के भुगतान हेतु राज्य पोषित योजना चल रही है।
राजस्थान में बागवानी (Horticulture):-
बागवानी निदेशालय (1989-90)
केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान:- बीकानेर।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)
• राज्य के 41 जिलों में संचालित।
• उद्यानिकी फसलों (फल, मसाले एवं फूल) के क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि हेतु संचालित।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
• उद्देश्य:- खजूर की खेती, बागवानी विकास तथा शहरी क्षेत्रों में सब्जी क्लस्टर जैसी पहले शामिल।
• केंद्र (60) : राज्य (40)
निम्नलिखित उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किये गए हैं:-
• खजूर - सागरा भोजका (जैसलमेर)
• अनार - बस्सी (जयपुर)
• सीताफल - चित्तौडगढ़
• फूल - सवाई माधोपुर
• Juicy (Citrus) fruit - नांता (कोटा)
• अमरूद - डयोडावास (टोंक)
• आम - धौलपुर
• संतरा - झालावाड़
एग्रो-फॉरेस्ट्री योजना
• सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों में नई नर्सरियों की स्थापना तथा विद्यमान नर्सरियों में पौध उत्पादन करना।
कृषि सुधार के लिए प्रमुख पहल
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM)
• 2007-08 से गेहूं एवं दलहन पर शुरू।
• 18 जिलों को गेहूं की खेती के लिए शामिल किया गया है।
• सभी 41 जिलों को दलहन की खेती के लिए शामिल किया गया।
नोट:- दलहन हेतु राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन को केंद्र प्रायोजित योजना "दलहन में आत्मनिर्भरता हेतु मिशन" में विलय कर दिया गया है।
न्यूट्रिसीरियल (पोषक अनाज) हेतु NFSNM मिशन
• 2018-19 से बाजरा एवं ज्वार शामिल।
मोटे अनाज हेतु NFSNM मिशन
• 2018-19 से मक्का एवं जौ शामिल।
नोट:- NFSNM वाले सभी मिशन का उद्देश्य:-
प्रमाणित बीज का वितरण एवं उत्पादन, उत्पादन तकनीक में सुधार, जैव उर्वरकों को बढ़ावा देना, सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग, समन्वित कीट प्रबंधन, कृषक प्रशिक्षण।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - तिलहन
• केंद्र : राज्य (60:40)
राष्ट्रीय सतत् कृषि मिशन
• उद्देश्य:- जलवायु परिवर्तन अनुकूलन।
• केंद्र : राज्य (60:40)
• राज्य के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में क्षेत्र विशेष के अनुसार विभिन्न प्रकार की एकीकृत कृषि प्रणालियां (जैसे - पशुधन आधारित, बागवानी आधारित तथा कृषि वानिकी) परिकल्पित की गई है।
अनुकूलन परीक्षण केंद्र (ATC)
• ये केंद्र राज्य कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में अनुशंसित नई कृषि तकनीक की अनुकूलता एवं आर्थिक व्यवहार्यता का परीक्षण करते हैं।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन
• 2025-26 से शुरू।
• केंद्र प्रायोजित योजना।
• इस योजना के तहत कुल 2000 क्लस्टर गठित किए गए हैं।
परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)
• उद्देश्य:- जैविक खेती को बढ़ावा देना।
• पर्यावरण अनुकूल न्यूनतम लागत तकनीकों के प्रयोग से रसायनों एवं कीटनाशकों का प्रयोग कम करना।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)
• 2025-26 से शुरू। (अवधि - 6 वर्ष)
• यह योजना देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों के समग्र कृषि विकास हेतु शुरू की गई है।
• उद्देश्य:- कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, विविधता, आय एवं सततता को बढ़ावा देना।
• इस योजना के अंतर्गत राजस्थान से बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू एवं जालौर जिलों का चयन किया गया है।
• इस योजना में 11 मंत्रालयों एवं विभागों की प्रमुख योजनाओं को एकीकृत किया गया है।
• कृषि विभाग के घटक:- पाईप लाईन, डिग्गी, फार्म पॉण्ड, कृषि उपकरण, जिप्सम वितरण, बीज मिनी किट वितरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कांटेदार तारबंदी।
फसल कटाई के बाद प्रबंधन
• इसके अंतर्गत भंडारण इकाइयां, प्रसंस्करण संयंत्र और परिवहन नेटवर्क को शामिल किया जाता है।
• राज्य में सहकारी समितियों/संस्थाओं के तहत 8,912 गोदाम है।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना (PM-FME):-
(PM-Formalization of Microfood processing Enterprises.)
• आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत।
• 2020-21 से 2025-26 के लिए।
• खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू।
• केंद्र प्रायोजित योजना। (60:40)
• उद्देश्य:- देश में असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का उन्नयन करना।
• एक जिला एक उत्पाद (ODOP) दृष्टिकोण पर काम करेगी।
• खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना या विस्तार के लिए व्यक्तिगत श्रेणी के आवेदकों को 35% की दर से अधिकतम ₹10 लाख तक के अनुदान का प्रावधान है।
राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव 2025
• 8 सितंबर 2025 को
• बिड़ला ऑडिटोरियम, जयपुर में।
विपणन (Marketing)
• नए मंडी यार्डो की स्थापना।
कृषक उपहार योजना
• ई-नाम के माध्यम से अपनी उपज बेचने वाले सभी व्यक्तियों को कवर करने के लिए ई-नाम पोर्टल पर यह योजना शुरू की गई है।
• ₹10 हजार (या इसके गुणक) की बिक्री पर एक कूपन जारी किया जाता है।
सहकारी विपणन संरचना
• राज्य में 285 क्रय-विक्रय सहकारी समितियां किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलवाने एवं प्रमाणित बीज, खाद्य एवं कीटनाशक दवाईयां उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है।
• शीर्ष संस्था के रूप में राजस्थान क्रय-विक्रय सहकारी संघ (राजफैड) कार्यरत हैं।
सहकारी उपभोक्ता संरचना
• उपभोक्ताओं को कालाबाजारी और बाजार में वस्तुओं की कृत्रिम कमी से बचाने के लिए जिला स्तर पर 38 सहकारी उपभोक्ता थोक भण्डार तथा शीर्ष संस्था के रूप में राजस्थान सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (कॉनफेड) कार्यरत हैं।
समृद्ध खेती के लिए पशुधन
पशुधन गणना (प्रत्येक 5 वर्ष में)
• पहली:- 1919 (भारत में), 1951 (राजस्थान में)
• 20वीं पशुधन गणना 2019:-
राज्य में कुल 568.01 लाख पशुधन एवं 146.23 लाख कुक्कुट (Poultry) है।
देश के कुल पशुधन का 10.60% पशुधन राजस्थान में है।
यहां देश का 84.43% ऊंट, 14% बकरी, 12.47% भैंस, 10.64% भेड एवं 7.24% गौवंश उपलब्ध है।
• राजस्थान देश में दूध उत्पादन में 14.51% तथा ऊन उत्पादन में 47.53% योगदान देता है।
राजस्थान बकरी, ऊंट और गधों के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है। (BUG बग)
पशुधन विकास
1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (MVU)
• किसानों के घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने हेतु।
राजस्थान में ऊंट संरक्षण योजना के तहत ऊंट प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए टोडियों (बछड़ा) के जन्म पर पशुपालकों को ₹20,000 की सहायता।
पशुपालक कल्याण पहलें
राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना (9th चरण)
• 1 फरवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक।
• दुग्ध उत्पादकों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना।
• मृत्यु एवं पूर्ण स्थायी अपंगता पर ₹5 लाख।
• आंशिक स्थायी अपंगता पर ₹2.5 लाख मिलेंगे।
सरस सामूहिक आरोग्य बीमा
• इसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादकों का बीमा किया जाता हैं।
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना
• गाय, भैंस, भेड़, बकरी व ऊंट जैसे देशी पशुओं के लिए निःशुल्क बीमा कवरेज।
• बीमा प्रीमियम का 100 % राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना
• RCDF को दूध सप्लाई करने वाले दुग्ध उत्पादकों को इस योजना के तहत ₹5 प्रति लीटर बोनस दिया जा रहा है।
प्रश्न.राजस्थान में गौवंश संवर्द्धन के प्रयास ?
• गोपालन विभाग:- 13 मार्च 2014
गौशाला विकास योजना
• उद्देश्य:- गौशालाओं में बुनियादी ढांचे (पशु शेड, चारा भंडार, गोपालक आवास गृह, जल टंकी) के विकास हेतु 10 लाख रुपये की सहायता।
• सरकार (90) : जनसहभागिता (10)
नंदीशाला जनसहभागिता योजना
• पंचायत समिति स्तर पर नंदीशालाओं की स्थापना करके आवारा नर पशुओं की समस्या हल करना।
• सरकार (90) : जनसहभागिता (10)
ग्राम गौशाला/पशु आश्रय स्थल जनसहभागिता योजना
• ग्राम पंचायत स्तर पर।
राजस्थान में डेयरी विकास:-
राज्य में 24 जिला दुग्ध उत्पादक संघ है।
शीर्ष स्तर पर राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF), जयपुर स्थापित किया गया है।
• RCDF द्वारा पौष्टिक आहार, विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पादों का उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादकों को बीमा उपलब्ध करवाया जा रहा है।
• दुग्ध सहकारी समितियां:- 19,643
जलीय कृषि और मत्स्य पालन विकास
• राजस्थान जल संसाधनों की उपलब्धता के मामले में देश में 10वें स्थान पर है, जो मत्स्य उत्पादन में आगे बढ़ने की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है। Hi
• जलीय कृषि की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए चूरू में खारे पानी की जलीय कृषि प्रयोगशाला स्थापित की गई है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
• उद्देश्य:- मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को विकसित करना और मछुआरों तथा मत्स्य किसानों की आजीविका को सशक्त बनाना।
• इसके तहत मत्स्य तालाब निर्माण, झींगा पालन, केज कल्चर और फीड मिल्स जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए मत्स्य किसानों को अनुदान प्रदान किया जाता है।
किसानों और कृषि श्रमिकों का कल्याण
मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
• इसके तहत राज्य सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाभ प्राप्त करने वाले किसानों को प्रतिवर्ष ₹3,000 की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
राजस्थान कृषक समर्थन योजना
• राज्य सरकार द्वारा MSP पर प्रति क्विंटल ₹150 की दर से बोनस भुगतान किया गया।
किसान कलेवा योजना
• उद्देश्य:- कृषि मंडियों (फल और सब्जी मंडी को छोड़कर) में अनुदानित दरों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना।
मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना
• इस योजना के तहत कृषि कार्य जिसमें कृषि विपणन भी शामिल है के दौरान होने वाली मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में कृषकों, कृषि श्रमिकों और हमालों (बोझा उठाने वालों) को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना (2015):-
• शुरू:- 2015
• उद्देश्य:- कृषि उपज मंडियों में कार्यरत श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारना।
• प्रसूति सहायता:- 45 दिवस का मातृत्व अवकाश, 15 दिन का पितृत्व अवकाश दिया जाएगा।
इस दौरान अकुशल मजदूर के लिए निर्धारित प्रचलित मजदूरी दर से भुगतान किया जाएगा।
• विवाह के लिए सहायता:- लाइसेंस प्राप्त महिला श्रमिक को अपनी शादी या दो बेटियों तक की शादी के लिए ₹75,000 की सहायता।
• चिकित्सा सहायता:- लाइसेंस प्राप्त हमाल को गंभीर बीमारी होने पर अधिकतम ₹20,000 की सहायता।
• छात्रवृत्ति/मेरिट पुरस्कार:- लाइसेंसधारी श्रमिकों के पुत्र/पुत्री को 60% या अधिक अंक प्राप्त करने पर छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
कृषि शिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन राशि
• उच्च माध्यमिक के लिए:- ₹15,000 प्रति छात्रा प्रतिवर्ष
• Bsc/MSC (कृषि):- ₹25,000 प्रति छात्रा प्रतिवर्ष
• पीएचडी के लिए:- ₹40,000 प्रति छात्रा प्रतिवर्ष
लघु और सीमांत वृद्ध किसान सम्मान पेंशन योजना
• महिला किसान (55 वर्ष या अधिक)
• पुरुष किसान (58 वर्ष या अधिक)
• दोनों को प्रतिमाह ₹1,250 की पेंशन।
SAVE WATER