राजस्थान में जल सुरक्षा एवं अनुकूलता
• राजस्थान में देश के कुल सतही जल (Surface water) का 1.16% है।
सिंचाई
• स्त्रोत:- नहर, ट्यूबवेल, कुआं, तालाब, अन्य।
• कुल सिंचित क्षेत्र:- 95,47,992 हेक्टेयर
राज्य के 40.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सतही जल परियोजनाओं से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।
• 6 वृहद् परियोजनाएं:- नर्मदा नहर परियोजना (जालोर एवं बाड़मेर), परवन (झालावाड़), धौलपुर लिफ्ट, उच्च स्तरीय नहर-माही, पीपलखूंट उच्च स्तरीय नहर, कालीतीर लिफ्ट।
• 5 मध्यम परियोजनाएं:- गरड़दा (बूँदी), ताकली (कोटा), गागरिन (झालावाड़), हथियादेह (बारां), अंधेरी।
• 34 लघु सिंचाई परियोजनाएं।
नर्मदा नहर परियोजना (जालोर एवं बाड़मेर)
यह देश की पहली प्रमुख सिंचाई परियोजना है, जिसमें संपूर्ण कमांड क्षेत्र में स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अनिवार्य किया गया है।
परवन वृहद् परियोजना
• परवन नदी पर झालावाड़ में।
• इससे कोटा, बारां एवं झालावाड़ जिलों के 571 गांवों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और 1,402 गांवों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ऊपरी उच्च स्तरीय नहर (माही) परियोजना:-
• बांसवाड़ा जिले में सिंचाई हेतु।
• इस परियोजना के तहत, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा प्रदान की जाएगी जिसमें लगभग 105 किलोमीटर मुख्य नहर और वितरण प्रणाली के माध्यम से सैडल बांध संख्या 1 से पानी दिया जाएगा।
पीपलखूंट उच्च स्तर नहर परियोजना
• प्रतापगढ़ जिले की पीपलखूंट तहसील के 24 गांवों में स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा प्रदान की जाएगी।
धौलपुर लिफ्ट परियोजना
• यह सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर आधारित एक पूर्ण लिफ्ट सिंचाई और पेयजल परियोजना है।
• इसमें 30 मेगावाट सौर पावर जनरेशन प्लांट की स्थापना शामिल है।
कालीतीर लिफ्ट परियोजना
यह परियोजना पार्वती बांध व रामसागर बांध से धौलपुर जिले के 483 गांव व 3 शहरों के लिए पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से शुरू की गई है।
गरडदा सिंचाई परियोजना
• बूंदी जिले के होलासपुरा गांव में मंगली डूंगरी नदी और गणेशनाले पर निर्माणाधीन है।
• बूंदी जिले के 44 गांवों को सिंचाई एवं 111 गांवों को पेयजल सुविधा प्रदान की जाएगी।
तकली सिंचाई परियोजना
• यह परियोजना कोटा जिले के रामगंजमंडी एवं चेचट तहसील के धाकिया गांव में स्थित तकली नदी पर निर्माणाधीन है।
• कोटा जिले की रामगंजमंडी एवं चेचट तहसीलों के 33 गांवों की 7800 हेक्टेयर क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई प्रणाली द्वारा सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित है।
गागरिन सिंचाई परियोजना
• यह परियोजना झालावाड़ जिले की पिड़ावा/पचपहाड़ तहसील के कालीपीपल (देवगढ़) गांव के निकट आहू नदी पर निर्माणाधीन है।
• इस परियोजना से पिड़ावा तहसील के 32 गांवों में 9999.83 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।
हथियादेह सिंचाई परियोजना
• हथियादेह मध्यम सिंचाई परियोजना बारां जिले की किशनगंज तहसील के करवारी खुर्द गांव में स्थित एक स्थानीय नदी पर
निर्माणाधीन है। इस परियोजना से बारां जिले के 49 गांवों की 8,979 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।
अंधेरी सिंचाई परियोजना
• अंधेरी सिंचाई परियोजना बारां जिले की छबड़ा तहसील के मुंडकिया गांव में अंधेरी नदी पर प्रस्तावित है।
प्रमुख नदी बेसिन एवं अंतर्राज्यीय परियोजनाएं
संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (एकीकृत ERCP):-
(नया नाम:- राम जल सेतु लिंक परियोजना)
• राज्य:- राजस्थान और मध्यप्रदेश
• केंद्र सरकार की नदी जोड़ो परियोजना में शामिल।
• वित्तपोषण:- केंद्र (90) : राज्य (10)
• मानसून के दौरान चंबल नदी के सहायक नदी बेसिनों (कुनू, कूल, पार्बती, कालीसिंध, मेज) में उपलब्ध अधिशेष (Surplus) जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीरी और पार्वती नदी बेसिनों में स्थानांतरित किया जायेगा।
• यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगी जिससे लगभग 32.5 मिलियन लोग लाभान्वित होंगे।
• यह परियोजना 2.51 लाख हेक्टेयर नई कृषि भूमि को सिंचाई प्रदान करके और 1.52 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी की आपूर्ति करके कृषि उत्पादकता को बढ़ाएगी।
• इन जिलों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा।
चरण-1ए:-
• पेयजल हेतु नवनेरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक परियोजना की DPR तैयार की गई है।
इस कार्य में कुल नदी पर रामगढ़ बैराज, पार्वती नदी पर महलपुर बैराज का निर्माण तथा रामगढ़ बैराज से महलपुर बैराज, नवनेरा बैराज (कालीसिंध नदी) से गलवा बांध, बीसलपुर बांध एवं ईसरदा बांध में पानी पहुंचाने के लिए नहर प्रणाली/पम्पिंग स्टेशन/पाइपलाइन का निर्माण शामिल है।
चरण-1बी:-
मेज बांध (बूंदी)
डूंगरी बांध एवं राठौड़ बैराज (बनास नदी, सवाई माधोपुर)
बीसलपुर बांध से मोर सागर (अजमेर)
डूंगरी बांध से अलवर जलाशय तक कार्य।
डूंगरी बांध से बंध बरेठा से सुजान गंगा तक।
यमुना जल समझौता
• यमुना जल पर 1994 के समझौते के अनुसार ताजेवाला हेड (हथिनीकुंड बैराज) पर मानसून अवधि में 1917 क्यूसेक जल राजस्थान को आवंटित किया गया।
• 17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए जिसके तहत यह सहमति बनी कि ताजेवाला हेड (हथिनीकुंड बैराज) से पानी को सीकर, चूरू, झुंझुनू और राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में भूमिगत परिवहन प्रणाली के माध्यम से लाया जाएगा ताकि उनकी पेयजल और अन्य आवश्यकताओं को पूर्ण किया जा सके।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)
• पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा।
• उद्देश्य:- सिंचाई, पेयजल, सुखा-निवारण, पर्यावरण सुधार, वनीकरण, रोजगार सृजन और पुनर्वास।
• इसका लक्ष्य 16.17 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाना है।
उपनिवेशन विभाग
• इस विभाग का मुख्य कार्य इंदिरा गांधी नहर परियोजना में भूमि क्षेत्र में भूमि आवंटित करना है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
• उद्देश्य:- सिंचाई कवरेज का विस्तार करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना।
• इसमें हर खेत को पानी और प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC) जैसी पहलों को शामिल किया गया है।
• PMKSY का सूक्ष्म सिंचाई घटक:-
इसके तहत बूंद-बूंद एवं फव्वारा सिंचाई पद्धति को अपनाया गया है।
• जल ग्रहण विकास घटक - PMKSY 2.0
इस योजना के तहत प्रमुख गतिविधियां:-
- प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन
- जल संचयन संरचनाएं
- प्रभावी वर्षा प्रबंधन
- उत्पादन गतिविधियां:- नर्सरी स्थापना, वनारोपण, बागवानी, चारागाह विकास कार्य।
रिपेयर-रिनोवेशन-रिस्टोरेशन योजना (RRR)
(मरम्मत, नवीनीकरण पुनर्स्थापन योजना)
• यह योजना 2005 में भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार के सहयोग से छोटी जल संरचनाओं की मरम्मत और सुधार के लिए शुरू की गई थी।
• वित्त पोषण:- केंद्र (60) : राज्य (40)
• वर्ष 2017-18 में इस योजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0
• फरवरी 2024 में शुरू।
• आगामी 4 वर्षों में 20 हजार गांवों में 5 लाख जल संचयन और जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जायेगा।
• उद्देश्य- जल संरक्षण, जल संग्रहण, जल संचयन ढांचों का निर्माण और उपलब्ध जल स्त्रोतों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करना।
- गांव में पीने के पानी की समस्या को दूर करना।
- परंपरागत पेयजल एवं जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना।
- सघन वृक्षारोपण कर हरित क्षेत्र को बढ़ाना।
- सिंचित एवं कृषि योग्य क्षेत्रफल को बढ़ाना।
- जल संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करना।
- खाईया, खेत तालाब, खड़ीन, टांका, छोटे एनीकट, मिट्टी चेकडैम आदि जल भंडारण संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण करना।
बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं
राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना
मरू क्षेत्र के लिए राजस्थान जल क्षेत्र पुन: संरचना परियोजना
बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना-II (DRIP-II)
अटल भू-जल योजना
• यह एक विश्व बैंक सहायता प्राप्त केंद्रीय क्षेत्रीय योजना है।
• उद्देश्य:- ग्राम पंचायत स्तर पर भू-जल प्रबंधन को बढ़ावा देकर और समुदाय में जल उपयोग के लिए व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से भू-जल स्तर में गिरावट को रोकना ।
• अवधि:-अप्रैल 2020 से मार्च 2025
• राजस्थान के 17 जिलें शामिल हैं।
कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान
• “जल शक्ति अभियान” वर्ष 2019 में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “कैच द रैन थीम” पर प्रारम्भ किया गया।
• वर्ष 2019 से प्रत्येक वर्ष जल शक्ति अभियान हेतु पृथक-पृथक थीम रखी गई, वर्ष 2025 में जल शक्ति अभियान का थीम जल संचय, जन भागीदारी और जन जागरूकता पर केन्द्रित है ।
• जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में मान्यता देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 6 सितंबर, 2024 को जल संचय जन-भागीदारी अभियान शुरू किया गया है।
• इसी क्रम में राजस्थान सरकार द्वारा 15 जनवरी, 2025 को "कर्मभूमि से मातृभूमि" अभियान का शुभारंभ किया गया ।
• जल संचय- जन भागीदारी अभियान “कर्मभूमि से मातृभूमि” के अन्तर्गत अगले 4 वर्षों में राज्य के 41 जिलों की लगभग 11,195 ग्राम पंचायतों में कुल 45,000 भूजल पुनर्भरण संरक्षण संरचनाओं का निर्माण भामाशाहों, प्रवासी राजस्थानियों के माध्यम से, क्राउड फण्डिंग व कॉरपोरेट की सामाजिक जिम्मेदारी निधि (CSR fund) के माध्यम से किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
• मुख्य उद्देश्य:- वर्षा जल की हर बूंद का संरक्षण करना और राज्य में भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए जनभागीदारी के साथ भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण करना, साथ ही जन जागरुकता पैदा करके पानी के उपयोग के बारे में जनता के विचार को बदलना।
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान
• गंगा दशहरा एवं विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा 5 जून से 20 जून, 2025 तक संपूर्ण
राज्य में “वंदे गंगा” जल संरक्षण जन अभियान का शुभारंभ किया गया।
• मुख्य उद्देश्य:- जल संग्रहण एवं जल संरक्षण को जन जागृति द्वारा जन आंदोलन बनाना है। इस हेतु आगामी मानसून से पूर्व राज्य में वर्षा जल के अधिक से अधिक संग्रहण हेतु अभियान अंतर्गत नवीन जल संचय संरचनाओं की शुरूआत एवं पूर्ण कार्यों का निरीक्षण/लोकार्पण।
किसान साथी ऐप
• इस ऐप को 14 अगस्त 2024 को जल संसाधन विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पार्वती परियोजना कमान क्षेत्र के किसानों के लिए एक डिजिटल संचार मंच के रूप में लॉन्च किया गया।
• पानी की उपलब्धता, बांध की स्थिति और नहर संचालन से संबंधित सटीक और पारदर्शी डेटा समय पर प्रदान करके किसानों और विभाग के बीच सूचना के अंतर को पाटना।
शहरी जल आपूर्ति
अमृत मिशन 2.0 (AMRUT)
(अटल मिशन ऑफ रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन)
(अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन)
• शुरू:- 1 अक्टूबर 2021
• उद्देश्य:- सीवरेज, जल निकायों का जीर्णोद्धार एवं जलापूर्ति के कार्य करवाना।
• लक्ष्य:- सभी शहरी निकायों में सभी घरों को वर्ष 2025-26 तक "हर घर नल" द्वारा पेयजल उपलब्ध कराना।
• केंद्र सरकार का हिस्सा:-
एक लाख से कम आबादी वाले शहर:- 50%
एक लाख से 10 लाख आबादी:- 33.33%
दस लाख से अधिक आबादी:- 25%
ग्रामीण जल आपूर्ति
जल जीवन मिशन
• घोषणा:- 15 अगस्त 2019
• उद्देश्य:- 2028 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति प्रदान करना।
• जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित।
• वित्त पोषण:- केंद्र (50) : राज्य (50)
• गोवा 100% घरों को नल से जलापूर्ति प्रदान करने वाला देश का पहला राज्य बना।
• इस मिशन के तहत वर्षा जल संग्रहण, भूमि जल पुनर्भरण और घरों से निकले अपशिष्ट जल का पुन:उपयोग करने पर भी बल दिया जा रहा है।
राजस्थान में क्रियान्वयन:-
• राज्य स्तर:- राज्य जल और स्वच्छता कमेटी
• जिला स्तर:- जिला जल एवं स्वच्छता कमेटी
• ग्राम स्तर:- ग्राम जल एवं स्वच्छता मिशन
• राजस्थान में 1.01 करोड़ ग्रामीण घर हैं।
• 62.40 लाख ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। (दिसंबर 2025 तक)
राज्य की उपलब्धि
• नवंबर 2025 में नई दिल्ली में जल संरक्षण और जन भागीदारी पुरस्कार के तहत उत्कृष्ट जल प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की श्रेणी में तीसरा पुरस्कार मिला।
• राष्ट्रीय स्तर पर जिला वर्ग में भीलवाड़ा जिले को प्रथम और बाड़मेर जिले को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
SAVE WATER
0 Comments