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केंद्रीय बजट 2021-22

Union Budget 2021


केंद्रीय बजट 2021-22

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2021- 22 के लिए बजट पेश किया गया। इस बार का बजट पेपरलेस था।


Note:- एनआईसी द्वारा विकसित यूनियन बजट मोबाइल ऐप भी वित्त मंत्रालय द्वारा लांच किया गया। जिसमें बजट से संबंधित सभी दस्तावेज आम आदमी के लिए उपलब्ध है।

बजट 2021 के छः प्रमुख आधार स्तंभ है:-
1. स्वास्थ्य और कल्याण
2. वास्तविक और वित्तीय पूंजी, बुनियादी ढांचा
3. आकांक्षी भारत के लिए समावेशी विकास
4. मानव पूंजी में नवजीवन का संचार
5. नवोन्मेष और अनुसंधान व विकास
6. न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन


बजट 2021 के मुख्य बिंदू:-

स्वास्थ्य सेक्टर:-
इस बजट में कोरोना महामारी को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट 137 फ़ीसदी बढ़ाकर 2,23,846 करोड रुपए के आवंटन की घोषणा की गई। यह पिछले बजट से 2.37 गुना ज्यादा है।

पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना की घोषणा की गई। जिसमें 6 वर्ष के लिए 64000 करोड़ रुपए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने हेतु आवंटित किए गए। 
(यह योजना *राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन* से इतर है।)
इस योजना के तहत देशभर में वैलनेस सेंटर, एकीकृत जन स्वास्थ्य लैब, विभिन्न जिलों में क्रिटिकल केयर सेंटर अस्पताल एवं 12 केंद्रीय संस्थान बनाए जाएंगे। 
पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं व महामारी की पहचान और जांच ढांचा तैयार किया जाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सहायता से दक्षिण पूर्वी एशिया क्षेत्र में क्षेत्रीय अनुसंधान प्लेटफार्म के रूप में एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान का निर्माण किया जाएगा।

• कोरोना टीकाकरण के लिए 35000 करोड रुपए के फंड की घोषणा की गई।

• न्यूमोनिया से बचाव हेतु भारत में निर्मित न्यूमोकोकल वैक्सीन को पूरे देश में लागू किया जाएगा। जो पहले केवल 5 राज्यों तक सीमित थी।

मिशन पोषण 2.0
भारत में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए पोषण अभियान एवं अतिरिक्त पोषण कार्यक्रम का विलय करके मिशन पोषण 2.0 के तहत देश भर के 112 जिलों में पोषण  बढ़ाया जाएगा।

शिक्षा क्षेत्र:-
इस बजट में शिक्षा जगत को 93,222 करोड रुपए के आवंटन की घोषणा की गई।

पीपीपी मॉडल (public private partnership model) की मदद से 100 नए सैनिक स्कूल खोले जाएंगे।

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु लेह में सेंट्रल यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी।

15000 आदर्श स्कूल बनाए जाएंगे।

आदिवासी क्षेत्रों में 750 एकलव्य आदर्श रेजिडेंशियल स्कूल खोले जाएंगे।
SC छात्रों की 'पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम' के लिए अगले 6 वर्षों में  35,219 करोड रुपए खर्च किए जाएंगे।

देश में शोध एवं शोध की गुणवत्ता को बढ़ावा देने हेतु नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी। जिसके लिए अगले 5 वर्षों में 50,000 करोड रुपए खर्च करने का प्रावधान किया गया है।

सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में:-
• 2.86 करोड़ *शहरी घरों में* नल से जल के कनेक्शन प्रदान करने हेतु जल जीवन मिशन  की शुरुआत की जाएगी। इस मिशन को 2.87 लाख करोड़ के खर्च के साथ 5 वर्षों में लागू किया जाएगा।

नोट:- 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य वर्ष 2024 तक हर घर नल जल कनेक्शन उपलब्ध करवाना है।
• 500 अमृत प्रोग्राम वाले शहरों में तरल अपशिष्ट का प्रबंधन किया जाएगा।

उज्जवला योजना के तहत 1 करोड़ और लाभार्थियों को इसके दायरे में लाया जाएगा।
• कश्मीर में एक गैस पाइप लाइन योजना शुरू की जाएगी।

पीएम स्वामित्व योजना के तहत लोगों को गांव में उनकी जमीन का पट्टा दिया जाएगा।
नोट:- यह योजना वर्ष 2020 में शुरू की गई थी जिसके तहत अब तक 1241 गांव में लोगों को पट्टे दिए जा चुके हैं।

एक देश एक राशन कार्ड योजना को शेष बचे हुए 4 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में भी जल्द लागू किया जाएगा। 

• ठेके पर काम करने वाले कर्मचारीयों (गिग वर्कर्स) के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाया जाएगा।
श्रमिकों के लिए एक पोर्टल भी बनाया जाएगा।

• महिला बाल विकास विभाग का बजट 24,435 करोड किया गया। महिलाओं को हर प्लेटफार्म पर कार्य करने की आजादी होगी और अब वे रात्रि शिफ्ट में भी काम कर सकेगी।

• इस बजट में पहली बार वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु  2,217 करोड रूपए का प्रावधान किया गया है।
वहीं क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने हेतु सौर ऊर्जा निगम को 1000 करोड रुपए एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास हेतु 1500 करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे।

कृषि क्षेत्र:-
• कृषि मंत्रालय को आगामी वित्त वर्ष हेतु कुल 1,31,530 करोड रुपए आवंटित किए गए हैं। (1.42 से घटाकर 1.31 लाख करोड़ रुपए)

• इस बजट में सरकार द्वारा कृषि ऋण बढ़ाकर 16.5 करोड रुपए करने का लक्ष्य निर्धारित किया है तथा इसमें सरकार द्वारा डेयरी और मत्स्य पालन के लिए कर्ज का प्रवाह बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

ऑपरेशन ग्रीन योजना में अब तक केवल 3 फसलें आलू, टमाटर और प्याज शामिल थी। इस बजट में अब इसका दायरा 22 फसलों तक बढ़ाया गया है।

• नाबार्ड की सहायता से शुरू 5,000 करोड रुपए के सूक्ष्म सिंचाई कोष (micro irrigation fund) को 5,000 करोड़ रुपए और आवंटित किए जाएंगे।

• ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष हेतु आवंटन 30,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया जाएगा।

• 1000 मंडियों को ई-नाम से और जोड़ा जाएगा।

• APMC/ कृषि मंडियों  को एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड दिया जाएगा जिससे वे अपना इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कर सकेंगे।

• कृषि मंत्रालय की सबसे बड़ी योजना पीएम किसान (कृषक सम्मान निधि योजना) के बजट आवंटन को 75,000 करोड़ रुपए से घटाकर 65,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

उद्योग क्षेत्र:-
इस बजट में सरकार द्वारा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 2 सबसे बड़े उद्योगों ऑटोमोबाइल एवं टेक्सटाइल पर विशेष ध्यान दिया गया है।

•  इस बजट में प्रदूषण समस्या को कम करने के उद्देश्य से स्वैच्छिक वाहन स्क्रैप पॉलिसी लाई गई है। 
इसके अंतर्गत 20 साल से पुराने निजी वाहन और 15 साल से पुराने कमर्शियल वाहनों का फिटनेस टेस्ट होगा तथा योग्य न पाए जाने पर इन्हें स्क्रैप में भेजना होगा।
इस पॉलिसी से ऑटोमोबाइल सेक्टर में 10,000 करोड रुपए के निवेश एवं 50,000 नई नौकरियां आने का अनुमान है।

• टेक्सटाइल सेक्टर को गति देने के उद्देश्य से 3 साल में 7 मेगा टैक्सटाइल पार्क बनाए जाने की घोषणा की गई है। जिससे यहां सभी तरह की एकीकृत सुविधाएं प्राप्त होंगी।
कपड़ा मंत्रालय को 3,631 करोड रुपए आवंटित किए गए है।

• टूरिज्म सेक्टर को 2026 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर:-
• इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को 5 वर्ष के लिए 1.97 लाख करोड रुपए आवंटित किए गए ताकि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम्स पर कार्य किया जा सके।

• 6,835 परियोजनाओं के साथ दिसंबर 2019 में लांच की गई नेशनल इन्फ्राट्रक्चर पाइपलाइन यानि NIP का विस्तार किया गया है।
अब इसमें 7,400 परियोजनाएं हो गई है।

• सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को 1,18,101 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

वर्ष 2017 में शुरू हुई 5.35 लाख करोड रुपए की भारतमाला परियोजना में अब तक 3,800 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा चुका है।
इस बजट में मार्च 2022 तक भारतमाला परियोजना के तहत 8,500 किलोमीटर लंबी सड़क, नए आर्थिक गलियारे, हाई-वे, एक्सप्रेस- वे और रेल कॉरिडोर का निर्माण शामिल है। 
जैसे -
* दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे
* दिल्ली-कटरा हाई-वे
* दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा

• बजट में रेलवे के लिए 1,10,055 करोड रुपए आवंटित किए गए।
• रेलवे ने 2030 तक राष्ट्रीय रेल योजना तैयार की है। इसके जरिए  रेल को 2030 की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया जाएगा।

• जून 2022 तक माल गाड़ियों के लिए पश्चिमी और पूर्वी डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शुरू किए जाएंगे।
• वर्ष 2023 तक ब्रॉड गेज लाइन वाली रैलों का 100% विद्युतीकरण किया जाएगा।
• इस बजट में 18,998 करोड़ रुपए मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आवंटित किए गए हैं।

बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर:-
• इंश्योरेंस अधिनियम -1938 में संशोधन किया जाएगा।
इंश्योरेंस कंपनियों में FDI सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% कर दिया गया है।

SARFAESI act 2002 के तहत वसूली हेतु न्यूनतम ऋण राशि 50 लाख रुपए से घटाकर 20 लाख रुपए की जाएगी।
1. SEBI act 1992 
2. Depository act 1996
3. Security contract regulation act 1956
4. Govt. Securities act 2007
उपरोक्त सभी कानूनों को मिलाकर एक सिक्योरिटीज मार्केट कोड बनाया जाएगा।

• देश में शेयर बाजार एक्सचेंज की तरह ही गोल्ड एक्सचेंज बनाया जाएगा जिसका रेगुलेटर SEBI होगा।
सोने-चांदी से कस्टम ड्यूटी 12.5% से घटाकर 7.5% किया गया। 
साथ ही सोने के आयात पर 2.5% का एग्रीकल्चर सेस भी लगेगा।

• सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में 1.75 लाख करोड रुपए के विनिवेश का लक्ष्य रखा गया है। 

विनिवेश विभाग:-
10 दिसंबर 1999 को विनिवेश विभाग की स्थापना स्तंवत्र विभाग के रूप में की।
2001 में विनिवेश विभाग को एक स्वतंत्र मंत्रालय बनाया गया। अरुण शौरी विनिवेश मंत्री बने।
14 अप्रैल 2016 को यह निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) हो गया।
 
• एलआईसी का आईपीओ लाने की घोषणा की गई।

• companies act 2013 में छोटी कंपनियों की परिभाषा को बदला जाएगा -
जिन कंपनियों की पैड अप कैपिटल लिमिट 2 करोड़ (पहले 50 लाख) एवं टर्नओवर 20 करोड़ (पहले 2 करोड़) है, वह छोटी कंपनियों की श्रेणी में रखी जाएगी।
इससे भारत में 2 लाख कंपनियों को फायदा होगा।

• नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के लिए रजिस्ट्रेशन की लिमिट 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ की जाएगी।

• देश में स्टार्ट-अप एवं इन्नोवेटर्स को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा One person companies (OPCs) का कंसेप्ट लाया जाएगा।
• 31 मार्च 2022 तक स्टार्टअप पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

प्रत्यक्ष करों  (आयकर) में कोई बदलाव नहीं किया गया।
75 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को आयकर रिटर्न भरने में छूट दी गई है। लेकिन इसके लिए अनिवार्य है कि पेंशन और ब्याज एक ही बैंक में आए।

• छोटे करदाताओं को मुकदमेबाजी से राहत देने के लिए विवाद समाधान समिति गठित की जाएगी।
50 लाख रुपए तक की कर योग्य आय वाले और 10 लाख रुपए तक की विवादित आय वाले लोग यहां जा सकेंगे।

• इनकम टैक्स असेसमेंट फेसलेस होगा इसके लिए नेशनल ई-असेसमेंट सेंटर बनाए गए हैं।

राष्ट्रीय आपदा पर व्यय फंड हेतु एक्साइज ड्यूटी में संशोधन किए गए हैं। 
प्रति लीटर पेट्रोल पर ₹2.5 और प्रति लीटर डीजल पर ₹4 का एग्रीकल्चर इंफ्रा एंड डेवलपमेंट सेस लगाया जाएगा।

• अफॉर्डेबल हाउस पर ब्याज की छूट 1 साल बढ़ा दी गई। (31 मार्च 2022 तक)
इसके तहत 45 लाख रुपए तक का घर खरीदने वालों के लिए डेढ़ लाख रुपए की टैक्स छूट मिलेगी।

रक्षा के क्षेत्र में:-
इस बजट में रक्षा मंत्रालय को 4,78,195 करोड़ रुपए आवंटित किये गये। (पेंशन को हटाने पर 3.12 लाख करोड रुपए)    

फ्लैगशिप योजनाएं:-
• मनरेगा योजना हेतु इस बार बजट में 15.8% की बढ़ोतरी करते हुए 73,000 करोड़ रुपए आवंटित की है।

• पीएम किसान योजना हेतु 15.4% की कमी करते हुए 65,000 करोड रुपए आवंटित किए गए।

• हेल्थ मिशन हेतु 37,130 करोड रुपए आवंटित किए गए।

• गांव में पानी (77% की बढ़ोतरी) और एनएच पर खर्च (25.9% की बढ़ोतरी) सबसे ज्यादा बढ़ाया गया है।

नोट:-
👉 जल संसाधन एवं स्वच्छता के बजट में 178.9% की वृद्धि करते हुए 2021 में 60,030 करोड रुपए आवंटित किए गए।

👉 हेल्थ सेक्टर के बजट में 137% की बढ़ोतरी की गई।

👉 एमएसएमई सेक्टर के बजट में 107.33% की बढ़ोतरी करते हुए 15,699 करोड रुपए आवंटित किए गए।

👉 रेलवे के बजट में 52.39% वृद्धि करते हुए 1,10,054 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया।

👉 एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी को 62% घटाया गया। इसका बजट 37,256 करोड रुपए से घटाकर 14,073 करोड रुपए कर दिया गया।

सरकार की आमदनी:-
* उधार 36%
* जीएसटी 15% 
* इनकम टैक्स 14%
* कॉरपोरेट टैक्स /निगम कर 13%
* केंद्रीय उत्पाद शुल्क 8%
* गैर-कर राजस्व 6%
* पूंजीगत प्राप्तियां 5%
* सीमा शुल्क /कस्टम ड्यूटी 3%

सरकार की व्यय मदे:-
* ब्याज भुगतान 20%
* टैक्स में राज्यों का हिस्सा 16%
* केंद्रीय योजनाएं 13%
* वित्त आयोग 10% 
* अन्य मद 10% 
* केंद्र प्रायोजित योजनाएं 9%
* सब्सिडी 9%
* डिफेंस 8%
* पेंशन 5%


बजट से संबंधित अन्य बिंदू:-

• संविधान में बजट शब्द का उल्लेख नहीं है। अनुच्छेद - 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में इसका वर्णन है।

• बजट प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की अनुमति ली जाती है।

• बजट में तीन तरह के आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं।
1. बजट ऐस्टिमेट:- इसमें सरकार आने वाले वित्त वर्ष में अपनी आमदनी और खर्च का अनुमान लगाती है।

2. रिवाइज्ड ऐस्टिमेट:- यह पिछले साल का होता है। पिछले वर्ष सरकार ने जो अनुमान लगाया था, उस अनुमान के हिसाब से कितनी कमाई और कितना खर्च हुआ है।
जैसे -  2020-21 का रिवाइज्ड ऐस्टिमेट 2021 के बजट में पेश किया गया है।

3. एक्चुअल:- यह 2 वर्ष पहले का होता है। इस बार बजट में 2019-20 का एक्चुअल बजट बताया गया है। अर्थात 2019-20 में सरकार को कितनी कमाई हुई और कितना खर्च हुआ।

• बजट प्रस्तुत करने से एक दिन पहले इकोनामिक सर्वे पेश किया जाता है। हालांकि इस बार इकोनामिक सर्वे बजट पेश करने से 2 दिन पहले प्रस्तुत किया गया।
(29 जनवरी को)
आर्थिक सर्वेक्षण में बीते वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा  और आने वाले वर्ष हेतु सुझाव, चुनौतियां और समाधान होते हैं।

• बजट पेश होने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों में पास कराना होता है। बजट पास होने के बाद यह 1 अप्रैल से लागू हो जाता है।

• देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन द्वारा प्रस्तुत किया गया।

• आजादी के बाद भारत का प्रथम बजट 26 नवंबर 1947 को वित्त मंत्री आर.के. षणमुखम शेट्टी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

• गणतंत्र की स्थापना के बाद प्रथम बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने प्रस्तुत किया।

• केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा यह तीसरा बजट प्रस्तुत किया गया।


बजट से संबंधित शब्दावली:-

वित्त वर्ष :- यह वित्तीय साल होता है, जो कि 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक चलता है। वर्तमान में सरकार वित्त वर्ष को बदलने पर विचार कर रही है।

कर निर्धारण साल :- यह कर निर्धारण साल होता है, जो किसी वित्तीय साल का अगला साल होता है। 
जैसे - 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 अगर वित्तीय वर्ष है तो कर निर्धारण वर्ष 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक होगा।

मुद्रास्फीति :- मुद्रास्फीति या महंगाई किसी अर्थव्यवस्था में समय के साथ विभिन्न माल और सेवाओं की कीमतों में होने वाली एक सामान्य बढ़ोतरी को  कहा जाता है।
• मुद्रास्फीति का विपरीत अपस्फीति होता है, यानि वह
स्थिति जिसमें समय के साथ-साथ माल और सेवाओं की कीमतें गिरती हैं।

अंतरिम बजट :- अंतरिम बजट हर साल पेश होने वाले पूर्ण बजट से काफी अलग होता है। अंतरिम बजट एक खास समय के लिए होता है।
चुनावी साल में सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। यह बजट चुनावी वर्ष में नई सरकार के गठ़न तक खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता होती है।

पिछला वित्त वर्ष :- यह वित्तीय साल है, जो कर निर्धारण वर्ष से ठीक पहले आता है।
यह एक अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च को खत्म
होता है। इस दौरान कमाई गई रकम पर कर निर्धारण साल में टैक्स देना होता है।
यानि 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 अगर वित्तीय
साल है तो कर निर्धारण साल एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक होगा।

विकास दर :- सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी एक वित्त वर्ष के दौरान देश के भीतर कुल वस्तुओं के उत्पादन और देश में दी जाने वाली सेवाओं का योग होता है।

वित्त विधेयक :- इस विधेयक के माध्यम से ही आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सरकारी आमदनी बढ़ाने के विचार से नए करों आदि का प्रस्ताव करते हैं। 
इसके साथ ही वित विधेयक में मौजूदा कर प्रणाली में किसी तरह का संशोधन आदि को प्रस्तावित किया जाता है।
संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाता है।

उत्पाद शुल्क :- उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) उन उत्पादों पर लगता है, जो देश के भीतर बनते है। यह शुल्क उत्पाद के बनने और उसकी खरीद पर लगता है। • फिलहाल देश में दो प्रमुख उत्पाद हैं, जिनसे सरकार को सबसे ज्यादा कमाई होती है।
उदाहरण - पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल, डीजल) और शराब

राजकोषीय घाटा :- सरकार की ओर से लिया जाने वाला अतिरिक्त कर्ज राजकोषीय घाटा कहलाता है। 
इससे सरकार आय और खर्च के अंतर को दूर करती है।
अथवा
सरकार का खर्च जब कमाई से ज्यादा होता है, तो राजकोषीय घाटे वाली स्थिति होती है। 
• राजकोषीय घाटे को जीडीपी के मुकाबले प्रतिशत % में दिखाया जाता है।

राजस्व घाटा :- सरकार हर साल कमाई का लक्ष्य तय करती है यदि वास्तविक कमाई लक्ष्य से कम होती है, तो इसे राजसव घाटा कहा जाता है।
यह घाटा पाटने के लिए सरकार कई बार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचती है, जिसे विनिवेश कहा जाता है।

प्रत्यक्ष कर :- प्रत्यक्ष कर वह कर होता है, जो व्यक्तियों और संगठनों की आमदनी पर लगाया जाता है, चाहे वह आमदनी किसी भी स्रोत से हुई हो। निवेश, वेतन, ब्याज, आयकर, कंपनी कर आदि प्रत्यक्ष कर के तहत ही आते हैं।

अप्रत्यक्ष कर :- ग्राहकों द्वारा सामान खरीदने और सेवाओं का इस्तेमाल करने के दौरान उन पर लगाया जाने वाला कर अप्रत्यक्ष कर कहलाता है।

शार्ट टर्म कैपिटल असेट :- 36 महीने से कम समय के लिए रखे जाने वाले पूंजीगत संसाधन को शार्ट टर्म कैपिटल असेट कहते है।
शेयर, सिक्योरिटी और बांड आदि के मामले में यह अवधि 36 महीने की बजाय 12 महीने की है।

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