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साइंस एंड टेक्नोलॉजी मार्च 2021

     Science and technology


साइंस एंड टेक्नोलॉजी मार्च 2021

Science and technology March 2021

सिंधु नेत्र और अमेजोनिया-1 का प्रक्षेपण
28 फरवरी को इसरो ने सिंधु नेत्र और ब्राजील के अमेजोनिया-1 समेत 19 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी51 यान द्वारा इन सभी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया।
• यह न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड द्वारा पहला पूरी तरह से व्यवसायिक प्रक्षेपण था।
इसरो के व्यवसायिक प्रशिक्षण के काम को देखने के लिए 2019 में विज्ञान विभाग के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के तौर पर न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) का गठन किया गया था।
• यह इस वर्ष इसरो का पहला अंतरिक्ष मिशन है।
• श्रीमद भगवत गीता और प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी अंतरिक्ष में भेजी गई।
सिंधु नेत्र:- यह उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में संचालित युद्धपोत और व्यापारिक पोत कि खुद से पहचान कर लेगा। चीन से लगने वाले लद्दाख क्षेत्र से लेकर पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाके पर इसके जरिए नजदीकी नजर रखी जा सकेगी।
अमेजोनिया-1:- यह ब्राजील का पहला उपग्रह है, जिसे भारत से प्रक्षेपित किया गया। यह ऑप्टिकल पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है।

रूसी अंतरिक्ष निगम रॉसकॉसमॉस (Roscosmos) ने आर्कटिक की जलवायु और पर्यावरण की निगरानी के लिए अपना पहला उपग्रह  "अर्कटिका-एम" सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे 28 फरवरी 2021 को कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से सोयूज-2.1b वाहक रॉकेट पर लॉन्च किया गया।

डीआरडीओ ने ओडिशा तट से दूर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (Solid Fuel Ducted Ramjet-SFDR) तकनीक का सफल उड़ान परीक्षण किया। SFDR तकनीक DRDO को लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल विकसित करने में तकनीकी मदद करेगी।

सस्ते नैनोट्यूब हाइड्रोजन ईंधन की खोज
हाल ही में वैज्ञानिकों ने सस्ते नैनोट्यूब हाइड्रोजन ईंधन की खोज की है, जो सस्ती ऊर्जा का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कार्बन हाईड्रोजन ईंधन को ऊर्जा की तरह प्रयोग करने का विकल्प खोजा है । मोटे तौर पर समझें तो वैज्ञानिकों ने कार्बन नैनो ट्यूब को विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलेसिस) की मदद से हाईड्रोजन ईंधन में बदलने का तरीका खोज निकाला है।

आइएनएस करंज
स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आइएनएस करंज को 10 मार्च को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया।
• मेक इन इंडिया अभियान के तहत स्कॉर्पीन श्रेणी की छह पनडुब्बियों का निर्माण मजगांव डॉकयार्ड में चल रहा है।
• स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां डीजल-विद्युत चालित अटैक पनडुब्बियां है। इन्हें कलवरी श्रेणी के नाम से भी जाना जाता है।
• आइएनएस करंज मिसाइल, टॉरपीडो से लैस है, साथ ही समुद्र के भीतर ही माइंस बिछाकर दुश्मन को तबाह करने की क्षमता रखती है।

यूआर राव को सेटेलाइट मैन ऑफ इंडिया कहा जाता है।
उनके नेतृत्व में 1975 में भारत ने अपने प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट का अंतरिक्ष में सफल प्रक्षेपण किया था।

एस्टरएक्स क्या है ?
फ्रांस ने अंतरिक्ष में अपने सैन्य अभ्यास को एस्टरएक्स नाम दिया है। यह नाम उसने 1965 में अपने पहले उपग्रह के नाम पर रखा है।
इस अभ्यास को एक ऑपरेशन कक्ष में 18 सिम्युलेटेड घटनाओं के आधार पर कार्यान्वित किया जाएगा। यूरोप में इस तरह का अभ्यास करने वाला फ्रांस पहला देश है।

आईएनएस शार्दुल
भारतीय नौसेना के ‘पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन’ (First Training Squadron) के एक जहाज, आईएनएस शार्दुल ने 12 मार्च, 2021 को मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस पर आयोजित समारोह में हिस्सा लिया।
• आईएनएस शार्दुल भारतीय नौसेना का युद्धक पोत है, जो युद्धक टैंक, सैनिकों और एक साथ कई हेलीकॉप्टर ले जाने में सक्षम है।
• आईएनएस शार्दुल ने मार्च 2020 में मेडागास्कर में 600 टन खाद्यान्न सामग्री पहुँचाने के साथ ही कोविड-19 महामारी के दौरान विभिन्न देशों में फंसे प्रवासी भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए जून2020 में चलाये गए ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ में भी हिस्सा लिया था।

जैव-कैप्सूल
मार्च 2021 में भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (IISR) ने जैव-कैप्सूल के लिए पेटेंट प्राप्त किया है, यह एक ऐसी तकनीक है जो पिछले दशक में विकसित हुई थी।
जैव कैप्सूल संस्थान के तीन वैज्ञानिकों आनंद राज, आर. दिनेश और वाई.के. बीनी द्वारा विकसित किए गए थे।
• इस तकनीक में सूक्ष्म जीव शामिल होते हैं, जिन्हें एक कैप्सूल में एकत्र और संपीड़ित किया जाता है, जिसका उपयोग कृषि में उर्वरकों के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
जैव- कैप्सूल में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करने के अलावा मृदा की गुणवत्ता और पर्यावरणीय मानकों में सुधार करने की क्षमता पाई जाती है।

न्यूट्रिनोस के लिए रूस का टेलिस्कोप
रूस ने दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी झील बैकाल में न्यूट्रिनोस की खोज के लिए टेलिस्कोप स्थापित किया है।
न्यूट्रिनोस को ब्रह्मांड का सबसे छोटा कण माना जाता है।

इसरो ने भारत के पहले फ्री-स्पेस क्वांटम कम्युनिकेशन का सफल परीक्षण किया है।

पाकिस्तान में 26 मार्च को सतह से सतह पर 900 किलोमीटर तक मार करने वाली शाहीन-1ए मिसाइल का सफल परीक्षण किया।

डबल म्यूटेंट कोरोना वायरस रूप
24 मार्च, 2021 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘डबल म्यूटेंट’ कोरोनावायरस रूप (Double Mutant Coronavirus Variant) के भारत में पाये जाने की पुष्टि की है।
• कोरोना वायरस का यह रूप म्यूटेशन के संयोजन के साथ आता है, जो दुनिया में भारत के अलावा कहीं पर नहीं पाया गया है। वैज्ञानिक इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इससे संक्रामकता बढ़ी है या यह कोविड-19 को और अधिक गंभीर बना रहा है।

निसार
मार्च 2021 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ मिलकर सिंथेटिक एपर्चर रडार (Synthetic Aperture Radar- SAR) ‘निसार’ (NASA-ISRO SAR -NISAR) का विकास पूरा कर लिया है।
• इस सिंथेटिक एपर्चर रडार में ‘संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह मिशन’ के लिए अत्यधिक उच्च-रिजॉल्यूशन छवियों के उत्पादन की क्षमता है।
• निसार पृथ्वी अवलोकन के लिए दोहरे आवृत्ति एल-बैंड और एस-बैंड SAR के लिए एक संयुक्त सहयोग है।
निसार पहला उपग्रह मिशन है, जो एल-बैंड और एस-बैंड नामक दो अलग-अलग रडार फ़्रीक्वेंसी का उपयोग करेगा। इन रडार फ़्रीक्वेंसी का उपयोग पृथ्वी की सतह में बदलावों को मापने के लिए किया जाएगा।
यह मिशन वर्ष 2022 में आंध्र प्रदेश में इसरो के श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से लॉन्च किया जाएगा।
नासा इस मिशन के लिए एल-बैंड SAR प्रदान कर रहा है। यह जीपीएस रिसीवर, विज्ञान डेटा, पेलोड डेटा सबसिस्टम और एक सॉलिड स्टेट रिकॉर्डर के लिए एक उच्च दर संचार उपतंत्र है।
दूसरी ओर, इसरो एस-बैंड रडार, स्पेसक्राफ्ट बस, लॉन्च वाहन और मिशन से जुड़ी अन्य लॉन्च सेवाएं प्रदान कर रहा है।
निसार का उपयोग: यह मिशन पारिस्थितिकी तंत्र में गड़बड़ी, बर्फ की चादर ढहने और प्राकृतिक खतरों जैसे ज्वालामुखी, भूस्खलन, भूकंप और सुनामी जैसी अत्यधिक स्थानिक और अस्थायी रूप से जटिल प्रक्रियाओं के लिए उपयोगी होगा। यह मिशन बायोमास, प्राकृतिक खतरों, भूजल और समुद्र के स्तर में वृद्धि के बारे में भी जानकारी प्रदान करेगा।

SAVE WATER

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