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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी। दिसंबर 2020

 Environment and Ecology


पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी दिसंबर 2020 

Environment and Ecology.

वाइन स्नेक की नई प्रजातियों की खोज 
नवंबर 2020 में सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज (सीईएस), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने प्रायद्वीपीय भारत में वाइन स्नेक (vine snakes) की नई प्रजातियों की खोज की है।
वाइन स्नेक प्रायद्वीपीय भारत में सबसे आम सांपों में से एक के रूप में जाना जाता है, यहां तक कि यह कई शहरी क्षेत्रों के आस-पास भी पाया जाता है जहां कुछ हरियाली हो, और पश्चिमी घाट में।  
पूरे महाद्वीप में वितरित एशियाई वाइन स्नेक, 'अहैतुल्ला' वंश और हाल ही में वर्णित 'प्राहेतुल्ला' वंश से संबंधित हैं। 
टीम को पश्चिमी घाटों के वर्षावनों में ही चार अलग-अलग छोटे शरीर वाली और छोटी नाक वाली प्रजातियाँ मिलीं: उत्तरी पश्चिमी घाट वाइन स्नेक, फर्नस्वर्थ वाइन स्नेक, मालाबार वाइन स्नेक और वॉल्स वाइन स्नेक।
पश्चिमी घाट में अब ‘वाइन स्नेक’ की छ: प्रजातियां स्थानिक हैं।

न्यूजीलैंड ने "जलवायु आपातकाल" की घोषणा करने साथ ही 2025 तक अपने सार्वजनिक क्षेत्र को कार्बन न्युट्रल बनाने घोषणा की है। इस घोषणा के बाद न्यूजीलैंड अब उन 32 अन्य देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने जलवायु आपातकाल घोषित किया है। इनमें देशों जापान, कनाडा, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं।

ब्रिटेन के सेंट हेलेना टापू पर दुनिया का सबसे उम्रदराज कछुए का नाम है ? - जोनाथन (1832 में जन्म)

दिसंबर 2020 में जलवायु परिवर्तन पर भारत की गंभीरता की पुष्टि करने वाले एक अन्य कदम में, 
हाल ही दिसंबर 2020 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में पेरिस समझौते के कार्यान्वयन के लिए एक उच्च-स्तरीय (Apex Committee for Implementation of Paris Agreement- AIPA) अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया है।
यह समिति पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत भारत में कार्बन बाजारों को विनियमित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्राधिकरण के रूप में काम करेगी।

महाराष्ट्र में 10 नए संरक्षण आरक्षिति
4 दिसंबर, 2020 को महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव बोर्ड ने राज्य के पश्चिमी भाग में आठ और विदर्भ में दो क्षेत्रों को 'संरक्षण आरक्षिति' (conservation reserves) और चंद्रपुर जिले में कन्हारगाँव को अभयारण्य (राज्य का 50वां वन्यजीव अभयारण्य) घोषित करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

केंद्र सरकार ने दो नए चिड़ियाघरों को मान्यता दी है -
1. राजगीर चिड़ियाघर सफारी - (नालंदा, बिहार)
2. शहीद अशफाक उल्लाह खान उद्यान - (गोरखपुर, यूपी)

प्रोजेक्ट टाइगर
देश में 7 अप्रैल 1973 को बाघ बचाओ परियोजना (प्रोजेक्ट टाइगर) की शुरुआत हुई थी। 9 टाइगर रिजर्व से शुरू हुई इस परियोजना में वर्तमान में 50 रिजर्व फॉरेस्ट है।
• 2006 में देश में विधिवत बाघों की गिनती शुरू की गई।
2010, 2014 के बाद चौथी गणना 2018 में हुई।
• इस गणना के अनुसार देश में 2967 बाघ पाए गए।
• मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट कहा जाता है।
गौरतलब है कि 2020 में मध्य प्रदेश में 26 बाघों की मौत हो चुकी है।
2012 से 2019 के बीच बाघों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है। (172 बाघों की मौत)

वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक 2021
7 दिसंबर, 2020 को जर्मनी में जारी वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक 2021 (Climate Change Performance Index-CCPI) में भारत लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष 10 में बना हुआ है।

सुंदरबन फॉरेस्ट
सुंदरबन में मैंग्रोव फॉरेस्ट 10,000 वर्ग किलोमीटर से विधि क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका 6,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र बांग्लादेश और 4,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भारत में है।
सुंदरी पेड़ों की बाहुल्यता के कारण इसका नाम सुंदरबन पड़ा।
सुंदरबन को यूनेस्को द्वारा विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है।
• दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव फॉरेस्ट सुंदरबन से मैंग्रोव प्रजाति के पेड़-पौधे विलुप्त होते जा रहे हैं।
यह पौधे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ चक्रवात की तीव्रता को कम करने में उपयोगी है।
नदी किनारे भूमि कटान को भी नियंत्रित करते हैं।

अरुणाचल प्रदेश के किस फल को जैविक प्रमाण पत्र मिला है ? - कीवी
अरुणाचल प्रदेश कीवी के लिए जैविक प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाला पहला राज्य बना है। 

कृषि मंत्रालय द्वारा लक्षद्वीप को भारत का पहला 100% जैविक केंद्र शासित प्रदेश घोषित गया किया है। इस केंद्र शासित प्रदेश में सभी कृषि कार्य बिना सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल की जाती है।

12 दिसंबर को जलवायु शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
पेरिस समझौता के 5 साल पूरे होने पर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य पृथ्वी का तापमान बढ़ाने वाली ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में ज्यादा से ज्यादा कटौती करने के लिए विभिन्न देशों को प्रेरित करना है।

मायरिस्टिका स्वाम्प ट्रीफ्रॉग
दिसंबर 2020 में पश्चिमी घाट में पेड़ों पर पाये जानी वाली दुर्लभ प्रजाति 'मायरिस्टिका स्वाम्प ट्रीफ्रॉग' (Myristica swamp Treefrog) को केरल के त्रिशूर जिले में वाजचल रिजर्व फॉरेस्ट में पहली बार दर्ज किया गया।
इसका वैज्ञानिक नाम 'मरक्यूराना मायरिस्टिकापेल्युस्ट्रिस' (Mercurana myristicapalustris) है।

हिमालयन सीरो
दिसंबर 2020 में हिमालय के शीत मरुस्थल क्षेत्र में पहली बार 'हिमालयन सीरो' (Himalayan serow) को देखा गया। 
• हिमालयन सीरो या ‘केप्रिकार्निस सुमाट्रेन्सिस थार’ (Capricornis sumatraensis thar) मुख्य भूमि सीरो (केप्रिकार्निस सुमाट्रेन्सिस) की एक उप-प्रजाति है।
• 'हिमालयन सीरो' एक बकरी, एक गधा, एक गाय और एक सुअर का संकर (Cross) प्रतीत होता है। यह एक बड़े सिर, मोटी गर्दन, छोटे अंग, लंबे, खच्चर जैसे कान, और काले बालों के आवरण के साथ एक मध्यम आकार का स्तनपायी है।
• हिमालयन सीरो शाकाहारी हैं, और आमतौर पर 2,000 मीटर से 4,000 मीटर तक की ऊंचाई पर पाए जाते हैं। ये पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिमालय में पाए जाते हैं, लेकिन ट्रांस हिमालयन क्षेत्र में नहीं पाये जाते।
• हिमालयी सीरो का पहले 'संकटासन्न’ (Near threatened) के रूप में मूल्यांकन किया गया था, लेकिन अब इसे IUCN रेड लिस्ट में 'अतिसंवेदनशील’ (vulnerable) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

यंग चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार
संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण एजेंसी द्वारा नए विचारों और नवोन्मेषी कदमों के जरिए पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में कार्य करने  वालों को यंग चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड प्रदान किया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UN Environment Programme-UNEP) ने साल 2020 के चैंपियंस ऑफ़ अर्थ अवार्ड के 7 पुरस्कारों की घोषणा की है, जो UN का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान है।
यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंट प्रोग्राम द्वारा दिए जा रहे इस विशिष्ट पुरस्कार हेतु चयनित सात विजेताओं में एक भारतीय विद्युत मोहन भी शामिल है।
विद्युत मोहन टेकाचार कंपनी के सह-संस्थापक है। यह कंपनी किसानों से धान की भूसी, पराली, नारियल के छिलके आदि लेकर उन्हें चारकोल में परिवर्तित करती है।

लंदन के रॉयल बोटैनिकल गार्डेंस ने इसी साल मेडागास्कर के नमी वाले इलाके में खोजा गया गैस्ट्रोडिया एग्निसेल्ल्स को दुनिया का सबसे भद्दा ऑर्चिड फूल घोषित किया है।

हैदराबाद चिड़ियाघर ISO 9001: 2015 गुणवत्ता प्रबंधन मानक प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाला देश का पहला चिड़ियाघर बना है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा चिड़ियाघर बनाएगी।

भारत में तेंदुओं की स्थिति पर रिपोर्ट
केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 21 दिसंबर, 2020 को नई दिल्ली में ‘भारत में तेंदुओं की स्थिति पर रिपोर्ट’ जारी की।
• रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेंदुओं की संख्या 12,852 तक पहुंच गई है। जबकि इससे पहले 2014 में हुई गणना के अनुसार देश में 7,910 तेंदुए थे। इस अवधि में तेंदुओं की संख्या में 60% बढ़ोतरी हुई है।
कैमरा ट्रैपिंग विधि का उपयोग करके तेंदुए की आबादी का अनुमान लगाया गया है।
गणना के अनुसार सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में 3,421 तेंदुए, कर्नाटक में 1,783 तेंदुए और महाराष्ट्र में 1,690 तेंदुए पाए गए हैं। भारत में, तेंदुओं ने पिछले 120-200 वर्षों में संभवतः ‘मानव-जनित 75-90% आबादी गिरावट’ का अनुभव किया है।
भारतीय उपमहाद्वीप में अवैध शिकार, पर्यावास नुकसान, प्राकृतिक शिकार में कमी और संघर्ष तेंदुए की आबादी के लिए बड़े खतरे हैं। इन सभी के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा प्रजाति की स्थिति को 'संकटासन्न' (Near Threatened) से 'अतिसंवेदंशील' (Vulnerable) कर दिया गया ।
क्षेत्रवार वितरण:- मध्य भारत और पूर्वी घाटों में तेंदुओं की संख्या सबसे ज्यादा 8,071 है।

बंदरों के लिए बचाव और पुनर्वास केंद्र
20 दिसंबर, 2020 को तेलंगाना में निर्मल जिले के चिंचोली गांव के पास गांधी रमन्ना हरितावनम में 'बंदरों के लिए बचाव और पुनर्वास केंद्र' का उद्घाटन किया गया। यह राज्य का पहला ऐसा केंद्र है।
मानव बस्तियों में प्रवेश करने वाले बंदरों को चरणबद्ध तरीके से पकड़ा जाएगा और पुनर्वसन केंद्र में लाया जाएगा।
पुनर्वसन केंद्र में उनका गर्भ-निरोधी ऑपरेशन किया जाएगा और पुनर्वसन अवधि के बाद जंगलों में छोड़ दिया जाएगा।

मीठे-खारे पानी की झीले वेटलैंड घोषित
हाल ही दिसंबर 2020 में लद्दाख के चांगथांग स्थित आपस में जुड़ी दो झीलों को वेटलैंड (आर्द्रभूमि) घोषित किया गया है। इनकी खासियत यह है कि ‘स्तार्तासापुक त्सो’ झील का पानी मीठा है, जबकि ‘त्सो कर’ का पानी खारा है।
• इसी के साथ ये झीलें लद्दाख की पहली और देश की 42वीं रामसर साइट बन गई हैं।

हिमालयन ट्रिलियम
दिसंबर 2020 में हिमालय में पाई जाने वाली एक आम जड़ी बूटी, 'हिमालयन ट्रिलियम' (Himalayan trillium) को आईसीयूएन (IUCN) द्वारा ‘संकटग्रस्त’ (endangered) घोषित किया गया है।
• इसका वैज्ञानिक नाम 'ट्रिलियम गोवैनियनम' (Trillium govanianum) है। 
• इसे पेचिश, घाव, त्वचा के फोड़े, सूजन, सेप्सिस, साथ ही साथ मासिक धर्म और यौन विकारों जैसे रोगों को ठीक करने के लिए पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता है।
• यह 2400 मीटर से 4000 मीटर की ऊँचाई पर हिमालय के समशीतोष्ण और उप-अल्पाइन क्षेत्र में उगती है।
• यह जड़ी-बूटी भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान में पाई जाती है।

मध्यप्रदेश के वन मंत्री विजय शाह द्वारा विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में भारत की पहली हॉट एयर बैलून वाइल्डलाइफ़ सफारी की शुरुआत की गई है।

दिल्ली सरकार की वृक्ष प्रत्यारोपण नीति 2020
दिल्ली सरकार ने वृक्ष प्रत्यारोपण नीति 2020 को अधिसूचित कर दिया है। नई नीति में विकास कार्यों के दौरान 80% पेड़ों का प्रत्यारोपण किया जाना अनिवार्य किया गया है।

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