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सूचना का अधिकार ।। RAS study material

 
Right to information act 2005

विधि का सिलेबस
प्रश्न पत्र - 3, इकाई - 3, खंड - स
विषय - विधि (Law) 
अंकभार - 20

• विधि की अवधारणा - स्वामित्व एवं कब्जा, व्यक्तित्व, दायित्व, अधिकार एवं कर्तव्य।
• वर्तमान विधिक मुद्दे - सूचना का अधिकार, सूचना प्रौद्योगिकी विधि साइबर अपराध सहित (अवधारणा, उद्देश्य, प्रत्याशायें), बौद्धिक संपदा अधिकार (अवधारणा, प्रकार एवं उद्देश्य)
• स्त्रियों एवं बालकों के विरुद्ध अपराध - घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, बाल श्रमिकों से संबंधित विधि।
• राजस्थान में महत्त्वपूर्ण भूमि विधियां -
(क) राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956
(ख) राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में पहले से ही सूचना का अधिकार दिया गया था लेकिन सूचनाएं मांगने के लिए विशेष नियम नहीं थे। फ्रीडम ऑफ़ इनफार्मेशन एक्ट 2002
आरटीआई एक्ट से पहले था।

अरुणा राय 
भारत में सूचना का अधिकार लागू करने के लिये उनके प्रयत्न एवं योगदान उल्लेखनीय हैं। वे मेवाड़ के राजसमन्द जिले में स्थित देवडूंगरी गांव से सम्पूर्ण देश में संचालित मजदूर किसान शक्ति संगठन की संस्थापिका एवं अध्यक्ष भी हैं।


सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

(Right to information)
आरटीआई एक्ट को 15 जून 2005 को लागू किया गया।
उद्देश्य - प्रशासन में पारदर्शिता (Transparency) एवं जवाबदेहिता (Accountability) लाना।
इस अधिनियम में 6 अध्याय, 31 धाराएं और 2 अनुसूचियां है।
यह अधिनियम संपूर्ण भारत में लागू होता है। (370 हटाने से पहले जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं था)

नोट - 15 जून को राष्ट्रपति की अनुमति मिली।
परंतु प्रभावी रूप से लागू 12 अक्टूबर को हुआ।

कानून की संरचना
कानून - अध्याय - धारा - उपधारा - वाक्य Clause - उपवाक्य Subclause

 अध्याय का नाम
 धाराएं
PRELIMINARY (प्रारंभिक)
 1-2
RIGHT TO INFORMATION AND OBLIGATIONS OF PUBLIC AUTHORIEIES (सूचना का अधिकार और लोक प्राधिकारियों के दायित्व)
 3-11
THE CENTRAL INFORMATTON COMMISSION (केंद्रीय सूचना आयोग)
 12-14
 THE STAIE INFORMATION.COMMISSION (राज्य सूचना आयोग)
 15-17
POWERS AND FUNCTION OF THE INFORMATIION COMMISSIONS APPELS AND PENALTIES (सूचना आयोगों की शक्तियां और कृत्य, अपील और शक्तियां)
 18-20
 MISCELLANEOUS (प्रकीर्ण/विविध)
 21-31
 
धारा - 1
• लघु शीर्षक (Short title)
• प्रसार (Extent)
• लागू करने की तिथि (Commencement)

धारा - 2:- परिभाषाएं
• लोक प्राधिकारी (2h)
• सूचना से अभिप्राय (2f)
• सूचना का अधिकार (2j)
• अभिलेख (2i)

लोक प्राधिकरण Public Authority (2h)
लोक प्राधिकरण का अर्थ किसी भी प्राधिकरण/अधिकारी या निकाय या स्वयं की संस्था, जिसे संसद या विधानमंडल या सरकार द्वारा गठित किया गया हो।
ये सरकार द्वारा वित्त पोषित संस्थाएं हैं।

सूचना से अभिप्राय (2f)
लोक प्राधिकरण से संबंधित विभिन्न प्रकार के दस्तावेज, आदेश, प्रेस विज्ञप्ति, ई-मेल, कंप्यूटर में स्टोर सूचना, मॉडल, रिपोर्ट, अधिसूचना, निविदा आदि को सूचना के अंतर्गत शामिल किया जाता है।

• किसी भी सरकारी विभाग, इकाई, मंत्रालय, संविधान के अंतर्गत बनाए गए संगठन/लोक प्राधिकरण आदि से सूचना ली जा सकती है।
• सरकारी कार्य कर रहे निजी संस्थानों से भी सूचना ली जा सकती है।
• अन्य निजी संस्थानों से संबंधित ऐसी सूचना जो लोक प्राधिकरण द्वारा किसी कानून के अंतर्गत मांगी जा सकती है, वह सूचना भी इस अधिनियम में शामिल की जाती है। जैसे - किसी कानून (कंपनी कानून -2013) के तहत कार्पोरेट मंत्रालय (MCA) रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) से कोई सूचना ले सकता है, तो उस सूचना को आम नागरिक भी आरटीआई के तहत मांग सकता है।

सूचना का अधिकार (2j)
यह अधिकार जनता को सरकारी कार्य को जांचने, जानकारी प्राप्त करने और कार्रवाई करने का अधिकार देता है।
इस अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित अधिकार दिए जाते हैं -
1. सूचना मांगना
2. किसी रिकॉर्ड, आदेश, दस्तावेज की जांच करना और प्रतिलिपि की मांग करना। (Inspect)
3. सामग्री के प्रमाणित नमूने लेने का अधिकार (Certified Sample)
4. इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्राप्त करना या प्रिंटआउट की मांग करना। (Soft copy)

अभिलेख (Record) (2i)
अभिलेख के अंतर्गत कोई दस्तावेज, पांडुलिपि, फाइल, किसी भी दस्तावेज की कोई माइक्रोफिल्म, प्रतिकृति प्रति, किसी कंप्यूटर द्वारा या किसी अन्य उपकरण द्वारा उत्पादित कोई अन्य सामग्री को शामिल किया जाता है।

प्रश्न.जानकारी प्राप्त करने का अधिकार किसके पास है ?
सूचना का अधिकार अधिनियम - 2005 की धारा - 3 के अनुसार भारत के सभी नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार है।

धारा:- 4 लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं/जिम्मेदारी/दायित्व
• सूचनाओं को इस प्रकार व्यवस्थित करना कि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सूचना दी जा सके।
• प्रारंभिक कर्त्तव्य (120 दिन) जैसे - कार्य, कर्मचारी, वेतन भत्ते, कानून/नियमावली।
• सूओ मोटू सूचना (Suo Motu Information)
विभिन्न माध्यमों से अधिकाधिक सूचनाएं जनता को देना ताकि आरटीआई अधिनियम की आवश्यकता कम से कम हो। जैसे - वेबसाइट या अखबारों के माध्यम से।
• सूचना अधिकारी नियुक्त करना। (सहायक सूचना अधिकारी भी)
• अपील अधिकारी नियुक्त करना।

धारा:- 6 सूचना के लिए आवेदन (Request to info.)
• सूचना अधिकारी को लिखित में आवेदन देना आवश्यक है।
• सूचना शुल्क :- 10 रुपए (BPL के लिए फ्री)
अतिरिक्त व्यय आ रहा हो तो वह भी वसूल किया जा सकता है।
• यदि आवेदक लिखित आवेदन करने में असमर्थ है, तो सूचना अधिकारी के द्वारा लिखने की व्यवस्था की जाएगी।
• सूचना मांगने का कारण और आवेदक की निजी जानकारियां देना आवश्यक नहीं है।

धारा: - 7 शिकायतों का निपटारा (Disposal of request)
• यदि सूचना आवेदनकर्त्ता विभाग से संबंधित नहीं है, तो आवेदन संबंधित विभाग को भेजा जाएगा और आवेदक को सूचना दी जाएगी। (Transfer)
• सूचना प्रदान करना :-
आवेदन प्राप्ति से 30 दिन के भीतर सूचना प्रदान की जाएगी। (Acceptance)
यदि आवेदन सहायक सूचना अधिकारी को किया गया हो तो 35 दिन का समय लिया जा सकता है।
अन्य विभाग को आवेदन भेजने पर 35 दिन का समय लिया जा सकता है।
यदि सूचना व्यक्ति के जीवन व स्वतंत्रता से संबंधित हो तो 48 घंटे का समय दिया जाता है।
• निरस्तीकरण (Reject)
कारण (Reason), अपील के लिए समय, अपील अधिकारी (Particulars of appellate authority)

धारा:- 8 & 9 सूचना देने से छूट
• ऐसी सूचनाएं जो देश की स्वतंत्रता, अखंडता व संप्रभुता को प्रभावित कर सकती हो।
• ऐसी सूचनाएं जो देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था या वैज्ञानिक रुचि को प्रभावित कर सकती हो।
• ऐसी सूचनाएं जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकती हो।
• ऐसी सूचनाएं जो संसद/राज्य विधानसभा के विशेष अधिकारों का हनन करती हो।
• ऐसी सूचनाएं जो व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती हो।
• ऐसी सूचनाएं जो विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त की गई हो।
• कैबिनेट के कागजात।
• किसी के जीवन को खतरे में डालना।
• जांच/अभियोजन को प्रभावित करती हो।
• ऐसी सूचनाएं जिन्हें साझा करना न्यायालय की अवमानना हो। 
• ऐसी सूचनाएं जो शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के अंतर्गत आती हो। (Official Secrets Act 1923)
• 20 साल के भीतर की सूचनाएं ही मांगी जा सकती है।
• ऐसी सूचनाएं जो Copyright का उल्लंघन हो। (धारा - 9)

तीसरे पक्ष की सूचना (Third party information)
तीसरे पक्ष की सूचना गोपनीय होने की स्थिति में सूचना अधिकारी 5 दिन में तीसरे पक्ष को नोटिस देगा।
10 दिनों में तीसरे पक्ष द्वारा जवाब दिया जाएगा।
तीसरे पक्ष की अनुमति होने पर ही गोपनीय सूचना दी जाएगी।RAS study material. RAS gk notes.


केंद्रीय सूचना आयोग (धारा 12-14) 

Central Information Commission.

मुख्यालय - दिल्ली
सदस्य - (1 मुख्य सूचना आयुक्त + केंद्रीय सूचना आयुक्त 10 तक)
नियुक्ति - राष्ट्रपति द्वारा
नियुक्ति एक समिति की सिफारिशों के आधार पर की जाती है जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री तथा सदस्य लोकसभा में विपक्ष का नेता और एक कैबिनेट मंत्री होता है।
कार्यकाल - जैसा कि केंद्रीय सरकार द्वारा तय किया गया है। अधिकतम आयु 65 वर्ष।
अर्थात केंद्र सरकार चाहे तो 6 महीने, 1 साल या 4 साल के लिए नियुक्त कर सकती है परंतु 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर पद से हट जाएगा।

हटाने की प्रक्रिया - सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा।

वेतन - केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित।

 

राज्य सूचना आयोग (धारा 15-17) 

State Information Commission.

मुख्यालय - अलग-अलग राज्य का अलग-अलग
सदस्य - (1 राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त + राज्य सूचना आयुक्त 10 तक)
नियुक्ति - राज्यपाल द्वारा, एक समिति की सिफारिश पर।

समिति में शामिल है -
मुख्यमंत्री तथा सदस्य राज्य सदन में विपक्ष का नेता और राज्य का कैबिनेट मंत्री।

कार्यकाल - जैसा कि राज्य सरकार द्वारा तय किया गया है। अधिकतम आयु 65 वर्ष।
अर्थात राज्य सरकार चाहे तो 6 महीने, 1 साल या 4 साल के लिए नियुक्त कर सकती है परंतु 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर पद से हट जाएगा।

हटाने की प्रक्रिया - सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर राज्यपाल द्वारा।

सूचना आयोग की शक्तियां
1. किसी मामले में पूछताछ करना
• आवेदन पर
• सूओ मोटू (Suo Motu)
2. जांच व पूछताछ के दौरान इन्हें सिविल कोर्ट के समान शक्तियां प्राप्त होती है।
• समन जारी करना (Summon)
• दस्तावेजों का निरीक्षण।

सूचना न मिलने पर अपील करना (धारा -19)
यदि नियम अनुसार आवेदन देने पर सूचना नहीं दी जाए, गलत  दी जाए या आवेदन निरस्त कर दिया जाए तो 30 दिन के अंदर अपील अधिकारी को शिकायत की जा सकती है।

दूसरी अपील :- यदि अपील अधिकारी को शिकायत करने पर भी आवेदक संतुष्ट ना हो तो 90 दिन के अंदर सूचना आयोग को शिकायत की जा सकती है।

अपील अधिकारी को मामले को निपटाने के लिए 45 दिन का समय दिया जाता है।

जुर्माना (धारा -20)
सूचना उपलब्ध नहीं करवाई जाए या गलत सूचना उपलब्ध करवाई जाए तो सूचना अधिकारी पर ₹250 प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जा सकता है।
• अधिकतम जुर्माना ₹25000 तक हो सकता है।
• अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जाती है। जैसे - ट्रांसफर कर देना डिमोशन कर देना।

विविध (धारा 21 से 31)

धारा 21 
सद्भाव में की गई कार्यवाही का संरक्षण।
प्रावधान - कोई दंड नहीं।

धारा 22 
अधिभावी (Overriding act)
प्रावधान - सूचना से संबंधित अन्य कानून भी होने पर आरटीआई को सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा।

धारा 23
न्यायालय का क्षेत्राधिकार
प्रावधान - आरटीआई से संबंधित वाद-विवाद न्यायालय में नहीं जाएंगे। सूचना आयोग के निर्णय अंतिम होंगे।

धारा 25
निगरानी और रिपोर्टिंग
प्रावधान - सूचना अधिकारी वार्षिक रिपोर्ट केंद्र या राज्य सूचना आयोग को देते है।
सूचना आयोग सरकार को रिपोर्ट करते हैं।
इसके बाद सरकार संसद/सदन में रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।

धारा 24
• सरकार द्वारा छूट प्राप्त विभाग आरटीआई के दायरे में नहीं आते हैं।
खुफिया संगठन और सुरक्षा संगठन आरटीआई के दायरे में नहीं आते हैं।
खुफिया संगठन - राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), RAW, IB, CBI
सुरक्षा संगठन - आर्मी, एयरफोर्स, सीआईएसफ, बीएसएफ, नेवी।

वर्तमान में भारत का मुख्य सूचना आयुक्त कौन है ?
उत्तर - यशवर्धन कुमार सिन्हा
यशवर्धन कुमार सिन्हा 7 नवंबर 2020 को भारत के नए मुख्य सूचना आयुक्त बने है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई।
सिन्हा के साथ तीन नए सूचना आयुक्त भी बने है -
पत्रकार उदय माहुरकर, हीरालाल सामारिया और सरोज पुन्हानी।

वर्तमान में राजस्थान का मुख्य सूचना आयुक्त कौन है ?
उत्तर - डीबी गुप्ता
4 दिसंबर 2020 को राज्य के पूर्व मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को राज्यपाल कलराज मिश्र ने राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया।
गुप्ता के साथ 2 नए सूचना आयुक्त भी नियुक्ति किए गए -
वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ और शीतल धनकड़

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