आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें यूट्यूब, टेलीग्राम, प्ले स्टोर पर DevEduNotes सर्च करें।

राजस्थान की छतरियां

 
Rajasthan ki chhatriya




राजस्थान की छतरियां

Rajasthan's Canopies

गैटोर की छतरियां:-
गैटोर की छतरियां जयपुर में स्थित है। गैटोर जयपुर के राजपरिवार का अंत्येष्टि स्थल है। इस ऐतिहासिक स्थल पर जयपुर के शासक सवाई जयसिंह द्वितीय से लेकर सवाई माधोसिंह तक के शासकों एवं उनके पुत्र आदि की स्मृति में पंचायतन शैली में छतरी बनी हुई है।  
ईश्वरीसिंह की छतरी यहां स्थित नहीं हैं, सवाई ईश्वरीसिंह की छतरी सिटी पैलेस परिसर में ईसरलाट के पास ही स्थित जय निवास बाग में बनी हुई है।

आहड़:-
यहां पर मेवाड़ के शासकों की छतरियाँ हैं।
सबसे पहले यहां अमरसिंह प्रथम की छतरी बनायी गयी थी।
इस स्थान को महासतियाँ कहते हैं।

पंचकुण्ड (मंडौर):-
यहां जोधपुर के राजाओं की छतरियाँ हैं।
जसवन्त थडा:- जोधपुर के महाराजा जसवन्तसिंह द्वितीय का स्मारक, इसका निर्माण उनके बेटे सरदारसिंह ने करवाया था।
इसे राजस्थान का ताजमहल कहते हैं।
कागा की छतरियाँ यहां जोधपुर के सामन्तों की छतरियां बनायी जाती हैं।
जोधपुर महाराजा जसवंतसिंह प्रथम के प्रधानमंत्री राजसिंह कुम्पावत की 18 खम्भों की छतरी बनी हैं।

देवीकुंड सागर (बीकानेर):-
यहां बीकानेर के राजाओं की छतरियां बनी हुयी हैं।
इनमें राव कल्याणमल की छतरी अधिक प्रसिद्ध हैं।

बड़ा बाग (जैसलमेर) (महारावल जैतसिंह की छतरी)
यहाँ जैसलमेर के राजाओं की छतरियां हुयी हैं।

क्षार बाग:-
कोटा के राजाओं की छतरियां बनी हुयी हैं।
क्षार बाग की छतरियों को छत्रविलास बाग की छतरियां भी कहते हैं।

बंजारों की छतरी- लालसोट (दौसा)
नाथों की छतरी- जालौर (छतरी पर तोता बना हुआ हैं।)
मिश्रजी की छतरी- अलवर जिले के नेहड़ा गांव में स्थित।
भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।
दशावतारों के चित्र बने हुए हैं।
कुत्ते की छतरी - जोधपुर
गोपालसिंह जी की छतरी - करौली
गंगूबाई की छतरी - गंगापुर सिटी (भीलवाड़ा)
रैदास जी, कल्ला जी की छतरी - चित्तौड़गढ़
संत पीपा की छतरी - गागरोन

एक खंभे की छतरी:- रणथंभौर (सवाई माधोपुर)

4 खंभों की छतरी:- श्रृंगार कंवरी की - चित्तौड़ दुर्ग में
निर्माता:-राणा कुम्भा

6 खंभों की छतरी:- गोराधाय की - जोधपुर
6 खंभों की छतरी:- बंजारे की - लालसोट (दौसा)
৪ खंभों की छतरी:- राणा सांगा की - मांडलगढ़(भीलवाड़ा)
निर्माता = अशोक परमार

৪ खंभों की छतरी:- राणा प्रताप की - बाडोली (उदयपुर)
नोट:- ये छतरी "केजड़ बाँध" के पास है।

৪ खंभों की छतरी:- रैदास की - चित्तौड़ दुर्ग
इनके गुरु का नाम - रामदास

10 खंभों की छतरी:- मामा-भांजा की - मेहरानगढ़ दुर्ग

नोट:- मामा-भांजा की मज़ार पल्लू (हनुमानगढ़)
मामा-भांजा का मंदिर - अटरू, बारां

12 खंभों की छतरी:- पृथ्वीराज सिसोदिया की - कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमन्द)
पृथ्वीराज सिसोदिया को उड़ना राजकुमार भी कहा जाता है।

16 खंभों की छतरी:- अमर सिंह राठौड़ की - नागौर दुर्ग

18 खंभों की छतरी:- राजसिंह चम्पावत की - जोधपुर

20 खंभों की छतरी:- अखेराज सिंघवी की - जोधपुर

32 खंभों की छतरी:- जैत्रसिंह की - रणथंभौर दुर्ग
उपनाम:-"न्याय की छतरी"
निर्माताः- हम्मीर देव चौहान
नोट:- यह छतरी धौलपुर के लाल पत्थरों से बनी है।

32 खंभों की छतरी:- जगन्नाथ कछवाहा की - मांडलगढ़ (भीलवाड़ा)
32 खंभों की छतरी:- रानी सूर्य कंवरी - जोधपुर
32 खंभों की छतरी:- बदनौर (भीलवाड़ा)

80 खंभों की छतरी:- मूसी महारानी की - सरिस्का (अलवर)
निर्माता:-विनयसिंह
यह दो मंजिला है -
एक मंज़िल लाल पत्थरों से निर्मित
दूसरी मंज़िल सफ़ेद संगममर से निर्मित
इस पर रामायण व महाभारत के चित्र अंकित है।

84 खंभों की छतरी:- मूसी रानी की - बूंदी

केसरबाग की छतरियां:- बूंदी

अकबर की छतरी:- भरतपुर
यह दो मंजिला है।
इन मंज़िलों पर पशु-पक्षियों के चित्र उकेरे गए।

84 खंभों का मंदिर:- श्रीनाथ मंदिर - बीकानेर
निर्माता - महाराजा मानसिंह

1444 खंभों का मंदिर:- रणकपुर जैन मंदिर, पाली
निर्माता - सेठ धरणकशाह
शासनकाल = राणा कुम्भा के समय
शिल्पी = देपाक

84 खंभों की छतरी:- धायबाई देवा की - देवपुरा (बूंदी)
निर्माता - अनिरुद्ध (1740 ई.)

SAVE WATER

Post a Comment

0 Comments