आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें यूट्यूब, टेलीग्राम, प्ले स्टोर पर DevEduNotes सर्च करें।

राजस्थान के प्रमुख मंदिर

 
Rajasthan ke pramukh mandir




राजस्थान के प्रमुख मंदिर

Famous temple of Rajasthan.

किराडू के मंदिर
माहवार (बाड़मेर) के समीप।
किराडू का पुराना नाम किरात कूप हैं, जो परमार राजाओं की राजधानी थी।
मुख्य मंदिर - सोमेश्वर
कामशास्त्र की मूर्तियों के कारण किराडू के मंदिरों को राजस्थान का खजुराहों कहते हैं।
ये मंदिर नागर शैली में बने हुये हैं।

सूर्य मंदिर:- झालरापाटन (झालावाड़)
इसे सात सहेलियों का मंदिर कहते हैं।
कर्नल जेम्स टॉड ने चारभुजा मंदिर भी कहा हैं।
इसे पद्मनाभ मंदिर भी कहते हैं।

अर्थुना के मंदिर
- बांसवाड़ा
अर्थुना भी परमारों की राजधानी थी।
मुख्य मंदिर - हनुमान जी का मंदिर।
11 वीं व 12 वीं शताब्दी के बने हुये हैं।
इन्हें वागड का खजुराहों कहते हैं।

रणकपुर के जैन मंदिर
- पाली
कुम्भा के समय धरणकशाह द्वारा निर्मित।
मुख्य मंदिर- चौमुखा मंदिर (वास्तुकार-देपाक)
इस मंदिर में 1444 खम्भे हैं, अत: इसे खम्भों का अजायबघर कहते हैं।
इस मंदिर के पास ही नेमिनाथ मंदिर हैं, जिसे वेश्याओं का मंदिर भी कहते हैं।

देलवाड़ा के जैन मंदिर
- सिरोही
विमलसिंह मंदिरः- इसका निर्माण 1031ई. में भीमशाह ( गुजरात ) के चालुक्य राजा का मंत्री ने करवाया था।

नेमिनाथ मंदिर:- चालुक्य राजा धवल के मंत्री तेजपाल एवं वास्तुपाल ने इसका निर्माण करवाया।
इसे देवरानी-जेठानी का मंदिर भी कहते हैं।

पुष्कर के मंदिर
- अजमेर
यहां ब्रह्म जी का मंदिर बना हुआ हैं, जिसका निर्माण गोकुल चन्द पारीक ने करवाया।
यहां कार्तिक पूर्णिमा को मेला भरता हैं।
यहां सावित्री माता का मंदिर भी हैं।
यहां रंगनाथ मंदिर भी बना हुआ हैं, जो द्रविड़ शैली का हैं।
पुष्कर को कोंकण तीर्थ भी कहा जाता हैं।
ब्रह्म जी के अन्य मंदिरः- आसोतरा (बाड़मेर), छींछ (बांसवाड़ा)

एकलिंगनाथ जी के मंदिर:-
- कैलाशपुरी (उदयपुर) - नागदा के समीप।
8वीं सदी में बापा रावल ने इसका निर्माण करवाया था।

सहस्त्रबाहु का मंदिर
- नागदा (उदयपुर)
इसे सास बहु का मंदिर भी कहते हैं।

नौ-ग्रहों का मंदिर:- किशनगढ़ ( अजमेर)

सावलिया जी का मंदिरः- मंडफिया (चित्तौड़गढ़)
इसे चोरों का मंदिर भी कहते हैं।

कपिल मुनि का मंदिर
- कोलायत (बीकानेर)
कार्तिक पूर्णिमा को मेला भरता है।
कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रणेता थे।

अम्बिका माता का मंदिर
- जगत (उदयपुर)
इसे मेवाड़ का खजुराहों कहते हैं।
इसे राजस्थान का मिनी खजुराहों कहते हैं।

कंसुआ मंदिर
- कोटा
मौर्य राजा धवल ने शिव मंदिर बनवाया था, जिसमें 1000 शिवलिंग हैं।
यहां गुप्तेश्वर महादेव का मंदिर भी हैं, जिसके दर्शन नहीं किये जाते हैं।

शीतलेश्वर महादेव
झालावाड़ (कर्नल टॉड ने झालरापाटन को घंटियों का शहर कहा हैं।)
इसका निर्माण 689 ई. में हुआ।
- यह राजस्थान का प्राचीनतम तिथि युक्त मंदिर हैं।

महामंदिर
- जोधपुर
राजा मानसिंह द्वारा निर्मित
नाथ सम्प्रदाय का सबसे बड़ा मंदिर।

सिरे मंदिर
- जालौर (जोधपुर के राजा मानसिंह ने इसका निर्माण करवाया था)

भांडाशाह जैन मंदिर:- बीकानेर
यह 5 वें जैन तीर्थकर सुमतिनाथ का मंदिर हैं।
इसके निर्माण में पानी की जगह घी का उपयोग किया गया था।

सतवीस मंदिर:- चित्तौड़गढ़
11वीं शताब्दी के जैन मंदिर।

थंडदेवरा मंदिर:- अटरू (बारां)
इसे हाडौती का खजुराहों कहते हैं। (राजस्थान का मिनि खजुराहों)

फुलदेवरा मंदिर:- बारां
इसे मामा-भान्जा मंदिर भी कहते हैं।

सोनी जी की नसियां :- अजमेर
इसे लाल मंदिर भी कहते हैं।
1864 में मूलचन्द सोनी ने इसका निर्माण करवाया।

खड़े गणेश का मंदिर:- कोटा

बाजणा गणेश मंदिर:- सिरोही

सारणश्वर महादेव मंदिर:- सिरोही

नाचणा गणेश मंदिर:- रणथम्भौर

हेरम्ब गणपति:-
बीकानेर (जूनागढ़ किले में।)
गणपति शेर पर सवार हैं।

रावण मंदिर:-
मण्डौर (जोधपुर)
श्रीमाली ब्राह्मण पूजा करते हैं।

विभीषण मंदिरः- कैथून (कोटा)

खोड़ा गणेश:- अजमेर

रोकड़िया गणेशः- जैसलमेर

सालासर बाजाली:- चुरू (बालाजी के दाढ़ी - मूंछ हैं।)

72 जिनालय:- भीनमाल (जालौर)

मेहन्दीपुर बाजाली:- दौसा (N.II.-11 आगरा से जयपुर)

पावापुरी जैन मंदिर:- सिरोही

नारेली के जैन मंदिर:- अजमेर

बालापरी:- नागौर (कुम्हारी) यहाँ खिलौने चढ़ाये जाते हैं।

मूछाला महावीर:- घाघेराव (पाली)

33 करोड़ देवी-देवताओं का मंदिरः- बीकानेर (जूनागढ़)

33 करोड़ देवी-देवताओं की साल:- मंडौर (अभयसिंह द्वारा निर्मित)

नीलकण्ड महादेव मंदिर:- अलवर (अजयपाल द्वारा निर्मित)

मालासी भैरू जी का मंदिर:- मालासी (चुरू)
यहां भैरू जी की उल्टी मूर्ति लगी हैं।

खाटू श्याम जी का मंदिर:-
खाटू (सीकर)
बर्बरीक का मंदिर

कल्याणजी का मंदिर:- डिग्गी (टोंक)

ऋषभदेव जी का मंदिर - उदयपुर
पूरे देश में एकमात्र यही ऐसा मंदिर हैं, जहां सभी सम्प्रदाय व जाति (श्वेताम्बर, दिगम्बर, जैन, शैव, वैष्णव, भील) के लोग आते हैं।

सिरयारी मंदिर - पाली
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ के प्रथम आचार्य भिक्षु स्वामी (भीखण) की निर्वाण स्थली।

मुकन्दरा का शिवमंदिर - कोटा

स्वर्ण मंदिर- पाली

सुन्धा माता का मंदिर:- जालौर
यहां राजस्थान का प्रथम रोप-वे बनाया गया हैं।

नागर शैली का अंतिम व सबसे भव्य मंदिर - सोमेश्वर (किराडू) (गुर्जर - प्रतिहार कालीन)

पंचायतन शैली का प्रथम उदाहरण राजस्थान में - औसियां का 'हरिहर मंदिर' (भारत में प्रथम उदाहरण- देवगढ़ (झांसी) का दशावतार मंदिर)

नाकोड़ा भैरव जी - बालोतरा।

SAVE WATER



Post a Comment

3 Comments

  1. Very nice collection Meena ji 👍
    Carry on 🙏

    ReplyDelete
  2. किराडू के मंदिर गुर्जर प्रतिहार शैली में निर्मित है न कि नागर शैली में ।

    ReplyDelete