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लव जिहाद क्या है ।। उत्तरप्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020

 
Love jihad


लव जिहाद


चर्चा में क्यों है -
27 अक्टूबर 2020 को हरियाणा के बल्लभगढ़ में बीकॉम अंतिम वर्ष की 20 वर्षीय छात्रा निकिता तोमर की तौशीफ नामक सिरफिरे ने गोली मारकर हत्या कर दी।
तौशीफ निकिता पर दबाव बना रहा था कि वह धर्म बदल कर उससे विवाह करें।
इस घटना के बाद से लव जिहाद को लेकर विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए एवं उत्तर प्रदेश , हरियाणा मध्यप्रदेश आदि राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने को लेकर चर्चा शुरू हुई। 

28 नवंबर 2020 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छल कपट, प्रलोभन या जबरन धर्मांतरण करने पर लगाम लगाने हेतु राज्य सरकार द्वारा पारित उत्तरप्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 को मंजूरी दी। 
• अध्यादेश को 6 महीने के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित कराना होगा।
• (नोट - इस अध्यादेश में कहीं पर भी लव जिहाद शब्द का उपयोग नहीं किया गया है, इसे अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए लाया गया है।)

अध्यादेश के प्रावधान -
1. छल कपट या प्रलोभन के माध्यम से अथवा जबरन धर्मांतरण करवाने के सामान्य मामलों में 1-5 वर्ष की सजा एवं न्यूनतम ₹15,000 के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

2. नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिला का जबरन धर्मांतरण करवाने पर दोषी को 3 से 10 वर्ष की सजा एवं ₹25,000 जुर्माने का प्रावधान है।

3. सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में 3 से 10 वर्ष की सजा एवं कम से कम ₹50,000 जुर्माने का प्रावधान है। 
4. सिर्फ विवाह करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन किया जाता है, तो यह विवाह शून्य घोषित किया जाएगा। 

5. स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन हेतु जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष  2 माह पूर्व आवेदन करना अनिवार्य है। जिसकी अनुमति मिलने पर ही धर्म परिवर्तन किया जा सकेगा।

6. यह अपराध गैर जमानती होने के साथ संज्ञेय अपराध की श्रेणी में शामिल होगा।

7. सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में शामिल संबंधित सामाजिक संगठनों का पंजीकरण निरस्त कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।


अध्यादेश के पक्ष में तर्क
1. ऐसे कानून से धोखाधड़ी व प्रलोभन अथवा जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने पर रोक लगेगी।

2. इसके प्रावधान केवल अवैध धर्मांतरण के ही खिलाफ है। स्वेच्छा से किया गया धर्मांतरण मान्य है।

3. इस तरह का कानून कोई नया नहीं है। ओड़िशा (1967 ई.) , अरुणाचल प्रदेश (1978 ई.) एवं तमिलनाडु (2002 में )  में इस तरह के कानून पहले से ही अस्तित्व में है।

4. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार राज्यों को ऐसा कानून बनाने का अधिकार है। 

नोट - 1977 ई. में स्टैनसलाउस बनाम मध्यप्रदेश मामले में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने अवैध धर्मांतरण रोकने हेतु मध्य प्रदेश व उड़ीसा सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को वैध ठहराया था।

5. केंद्रीय विधि आयोग द्वारा भी जबरन धर्मांतरण को अवैध घोषित किया गया है।


विपक्ष में तर्क
1. कानून में स्पष्टता का अभाव है।

2. अनुच्छेद 25 किसी भी व्यक्ति को कोई भी धर्म अपनाने एवं उसका प्रचार करने का अधिकार देता है। लेकिन इस नए कानून के कुछ प्रावधान (जैसे - विवाह पश्चात स्वैच्छिक धर्मांतरण हेतु 2 माह पूर्व अनुमति लेने का प्रावधान। ) कहीं न कहीं धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन करता है।

3. इस कानून की जटिलता अंतर धार्मिक विवाहों को हतोत्साहित करेगी। जो भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि एवं सांस्कृतिक समन्वय की मूल भावना पर प्रहार साबित होगी।

नोट - भारतीय संविधान विशेष विवाह अधिनियम - 1954  के तहत अंतर धार्मिक विवाहों को मान्यता देता है। इसके तहत कोई भी युगल जो अलग-अलग धर्म से संबंध रखते हैं, वह बिना धर्म परिवर्तन के विवाह कर सकते हैं।

4. आलोचकों के अनुसार ऐसा कोई भी कानून अनैतिक है, जो सच्चे प्रेम में अड़ंगा उत्पन्न करता है। 

5. आलोचकों का मानना है, कि यह कानून हिंदुओं व मुस्लिमों पर समान रूप से लागू नहीं होगा। अतः यह संवैधानिक प्रतीत नहीं होता है।

अंततः सरकार को इस कानून के मसौदे में पर्याप्त स्पष्टता लाना आवश्यक है। ताकि इसके दुरुपयोग की संभावना कम से कम हो।

इस तरह की समस्या को दूर करने का एक समाधान समान नागरिक संहिता लागू करने के रूप में भी नजर आता है।
लोगों को जागरूक बनाने के साथ-साथ इस संबंध में शिक्षा व संस्कृति के क्षेत्र में भी काम करना आवश्यक है।

आगे
अध्यादेश को 6 महीने के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित कराना होगा।
केंद्रीय कानूनों से विरोधाभास होने की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत नए कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भी भेजा जा सकता है।
राज्यों के लव जिहाद से जुड़े प्रस्तावित कानून को हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।



लव जिहाद क्या है ?

वर्ष 2009 में प्रसिद्ध राजनीतिक-धार्मिक विश्लेषक स्टीफन ब्राउन ने पहली बार लव जिहाद की व्याख्या की।
स्टीफन ब्राउन के अनुसार लव जिहाद उन्मादी मजहबी लक्ष्य से प्रेरित एक ऐसा कृत्य हैं, जिसमें गैर-इस्लामिक लड़कियों के धर्म परिवर्तन के लिए कुछ सिरफिरे मुस्लिम पुरुष धोखा और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं।
• भारत में पहली बार लव जिहाद से संबंधित मामले 2009 में केरल में आए थे। वहां के पादरियों के अनुसार बड़ी संख्या में ईसाई लड़कियों को जबरन मुसलमान बनाया गया।
• लव जिहाद के मामले प्राय: मुसलमान लड़कों और हिंदू लड़कियों के बीच हो रहे हैं।
• लव जिहाद के अंतर्गत धर्मांतरण की घटनाएं महिला सशक्तिकरण की राह में भी बड़ी बाधा है, क्योंकि लड़कियों का ही धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

नोट - सरकार सहित देश में किसी भी संस्था के पास लव जिहाद से जुड़े आंकड़े नहीं है। स्वयं सरकार ने संसद में कहा है, कि लव जिहाद के तहत कोई केस किसी भी एजेंसी ने दर्ज नहीं किया है।

"एकं सदविप्रा बहुधा वदन्ति"

अर्थात सत्य तो एक ही है, लेकिन विद्वान उसे कई रूप में जानते हैं।
इसलिए भारत के हिंदू, जैन, बौध्द या सिख लोगों ने धर्म परिवर्तन के लिए कभी युद्ध या धनबल का सहारा नहीं लिया परंतु ईसाई और मुस्लिम धर्म में ईसा मसीह व पैगंबर मोहम्मद के बाद धर्मांतरण को बढ़ावा दिया गया।

भारत में विवाह
संविधान के अनुच्छेद 21 में पसंद का जीवनसाथी चुनने की छूट है।
स्वेच्छा से किया गया धर्म परिवर्तन वैध है।
सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में कह चुका है, कि सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन अवैध है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अनुच्छेद 141 में कानून की तरह लागू किया जा सकता है।
• भारत में दो अलग धर्मों के लोग विशेष विवाह अधिनियम 1954, हिंदू धर्म के लोग हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत और मुस्लिम धर्म के लोग मुस्लिम परंपराओं के अनुसार शादी कर सकते हैं।
• गलत दस्तावेज देने, उम्र या धर्म छिपा,ने वैवाहिक स्थिति छुपाने जैसी गलत जानकारी देने पर भारतीय कानूनों के तहत सजा का प्रावधान है।
• शादी और तलाक के मामले संविधान की सातवीं सूची के तहत समवर्ती सूची के विषय है। अतः शादी और तलाक के मामलों पर केंद्र के साथ राज्यों को भी कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

मध्यप्रदेश में लव जिहाद पर होगी 5 साल की सजा
26 दिसंबर 2020 को मध्य प्रदेश में लव जिहाद विरोधी विधेयक 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020' को शिवराज कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।  
विधेयक 28 दिसंबर से प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत होगा।
प्रावधान:- लव जिहाद के दोषी को 1 से 5 साल कैद की सजा। और कम से कम 25 हजार रुपए जुर्माना हो सकता है। 
यह अपराध गैर जमानती होगा।

अपराधों के प्रकार

 संज्ञेय अपराध Cognisable offence
 गिरफ्तारी हेतु वारंट जरूरी नहीं
 गैर-संज्ञेय अपराध Non-cognisable offence
 गिरफ्तारी हेतु वारंट जरूरी
 समझौता योग्य अपराध Compoundable Offence
 समझौता कर सकते है।
 गैर-समझौता योग्य अपराध Non-compoundable
 समझौता नहीं कर सकते है।
 जमानती अपराध Bailable Offence
 थाने से जमानत
 गैर-जमानती अपराध Non-bailable
 कोर्ट से जमानत

 

 


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