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राजस्थान के लोकगीत

Folk Songs of Rajasthan



राजस्थान के लोकगीत

Rajasthani folk songs

लोकगीत ही जनता की भाषा है, लोकगीत हमारी संस्कृति के पहरेदार है - महात्मा गांधी

राजस्थान में सबसे ज्यादा श्रृंगार रस के लोकगीत है।

लोकगीतों की विशेषता:- 
रचयिता का पता नहीं होता।
गाने के लिए लय, ताल, छंद की आवश्यकता नहीं होती।
भाषा से ज्यादा भाव महत्वपूर्ण होता है।
मानव मन की सहज सुख-दुख की अभिव्यक्ति लोकगीत है।

केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश-
यह राजस्थान का राज्य गीत है।
यह मांड गायन शैली में गाया जाता है। पत्नी अपने पति को परदेश से वापस बुलाती है।

नोट - मांड जैसलमेर का प्राचीन नाम है।
केसरिया बालम पहली बार उदयपुर निवासी मांगी  बाई द्वारा गाया गया जबकि सर्वाधिक बार अल्लाह जिलाई बाई द्वारा गाया गया।

मोरियो लोकगीत
ऐसी लड़कियों द्वारा गाया जाने वाला गीत जिनकी सगाई हो चुकी है तथा विवाह होना बाकी है।

मोरियो आछौ बोल्यौ रै ढलती रात में
म्हारे हिवडे में त्हैगी रे कटार मोरिया
मोरिया पीहू-2 की बोली छोड़ दे‌।

कुरजां लोकगीत
पत्नी कुरजां पक्षी के माध्यम से अपने परदेस गए पति को संदेश भेजती है। (कुरजां - साइबेरियन सारस/क्रेन)

तू है कुरजां भायली ए
तू छै धरम की ए भाण, पतरी लिख दू प्रेम की ए
दीजो पियाजी ने जाय कुरजां म्हारो भंवर मिला दीजे।

सुवटियो लोकगीत
भील महिला तोते के माध्यम से अपने पति के पास संदेश भेजती है। (सुआ - तोता)

कागा लोकगीत
पत्नी कौए को उड़ाकर अपने पति के घर आने का शगुन मनाती है।

उड़ उड़ रे म्हारा काला रै कागला
जद म्हारा पिवजी घर आवै।

बधावा लोकगीत
किसी शुभ कार्य के संपन्न होने पर गाया जाने वाला गीत।

पावणा लोकगीत
दामाद के ससुराल आने पर गाया जाने वाला गीत।

कामण लोकगीत
दूल्हे को जादू टोने से बचाने के लिए गाए जाने वाले गीत।

सीठणे लोकगीत
शादी के समय महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले गालियों से भरे गीत
 
गोरबन्द लोकगीत
गोरबंद ऊंट गले का आभूषण होता है जिसे बनाते समय महिलाओं द्वारा गोरबंद गीत गाया जाता है।

हिचकी लोकगीत
मेवात क्षेत्र में किसी की याद में गाया जाने वाला गीत।

बिच्छुडो लोकगीत
हाडोती क्षेत्र का लोकगीत है।
इसमें बिच्छू के काटने से मर रही पत्नी अपने पति को दूसरा विवाह करने की सलाह देती है।

झोरावा लोकगीत
जैसलमेर क्षेत्र में किसी की याद में गाया जाने वाला गीत। 

हमसीढो लोकगीत
भील महिला-पुरुष द्वारा गाए जाने वाला गीत।

पीपली लोकगीत
मारवाड़ व शेखावाटी क्षेत्र का लोकगीत है, जो तीज के त्यौहार पर गाया जाता है।
इसमें पत्नी अपने पति को परदेस से घर वापस आने को कहती है। 

चिरमी लोकगीत
ससुराल में रह रही लड़की चिरमी पौधे के माध्यम से अपने पीहर को याद करती है।

चिरजा लोकगीत: - लोक देवियों के गीत या भजन।

हरजस लोकगीत:- लोक देवताओं के गीत।

पणिहारी लोकगीत:- यह पतिव्रता नारी का गीत है।

ओल्यूं / कोयल
लड़की की विदाई पर गाया जाने वाला गीत।

ढोला मारू लोकगीत
सिरोही क्षेत्र का लोकगीत है।
यह ढोला मारू की प्रेम कहानी पर आधारित है।
ढाढ़ी जाति के लोगों द्वारा गाया जाता है।

केवडा लोकगीत
मरुस्थलीय क्षेत्र का प्रमुख लोक गीत है।
केवड़ा एक वृक्ष होता है।
यह गीत प्रेयसी द्वारा गाया जाता है।

जच्चा लोकगीत
बालक के जन्म पर गाया जाने वाला लोकगीत।
इसे होलर भी कहते है।

बादली लोकगीत
यह गीत मेवाड़ व हाड़ौती क्षेत्र में वर्षा ऋतु में गाया जाता हैं।

घूघरी लोकगीत
यह गीत जन्मोत्सव से संबंधित हैं, इस गीत को मांड गायन शैली में महिलाओं द्वारा जन्मोत्सव पर गाया जाता हैं।

प्रश्न.राजस्थानी लोकगीतों का महत्व बताइए।
उत्तर - ...........

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1 Comments

  1. जला गीत - वधू पक्ष की महिलाओं द्वारा बारातियो का डेरा देखने जाते समय

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