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ब्रू जनजाति। ब्रू शरणार्थी। ब्रू समझौता

 
Bru Tribals

ब्रू जनजाति

ब्रू जनजाति मिजोरम का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक आदिवासी समूह है।
इन्हें रियांग भी कहा जाता है। 
मूल निवास - ये म्यांमार के शान प्रांत के पहाड़ी इलाके के मूल निवासी हैं, जो कुछ सदियों पहले म्यांमार से आकर मिजोरम में बसे थे।
भाषा - रियांग 
रियांग में ब्रू का अर्थ मानव होता है।
समानता - मंगोलो से (चिन्ह - पैर छोटे, आंखें भारी व झुकी हुई, सिर बड़ा नाक चपटी, पीला रंग)

• ब्रू जनजाति 75 विशेष रुप से कमजोर जनजातीय समूहों में से एक है।

• त्रिपुरा और मिजोरम के अलावा इस जनजाति के सदस्य असम और मणिपुर में भी रहते हैं।

• मिजोरम की बहुसंख्यक जनजाति मिजो इन्हें बाहरी कहते हैं।

• ब्रू जनजाति मूल रूप से खेती और बुनाई पर आश्रित है।
महिलाएं पारंपरिक परिधान बुनती है।


ब्रू शरणार्थी

1996 में ब्रू जनजाति और मिजोरम की बहुसंख्यक जनजाति मिजो के बीच सांप्रदायिक दंगा हो गया।
ब्रू जनजाति के 30,000 लोगों (5,000 घरों) ने त्रिपुरा के कंचनपुरा ब्लॉक के डोबुरी गांव में शरण ली।
ब्रू जनजाति कि ज्यादातर परिवार मिजोरम के मामित और कोलासिब जिले में बसे थे।
• इस विवाद में ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (BNLF) और राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल यूनियन (BNU) उभर कर सामने आए।
इन्होंने अलग जिले की मांग की।

ब्रू समझौता

जनवरी 2020 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, ब्रू शरणार्थियों के प्रतिनिधियों, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव कुमार देब और मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा के बीच दिल्ली में एक समझौता किया गया। जिसके अनुसार -
1. ब्रू शरणार्थी त्रिपुरा में ही रहेंगे। त्रिपुरा के निवासी माने जाएंगे।
2. 600 करोड रुपए का पुनर्वास योजना पैकेज जारी करने का ऐलान किया गया।
इसके तहत सरकार ने सरकार ने 40 बाय 30 फीट का प्लॉट, चार लाख की एफडी, 2 साल तक हर महीने ₹5000 और 2 साल तक राशन व मकान बनाने के लिए 5लाख रुपए देने का वादा किया।

इससे पहले 2018 में भी समझौता हुआ था परंतु उस पर अमल नहीं हुआ।

हाल ही चर्चा में
ब्रू शरणार्थियों को त्रिपुरा में स्थाई रूप से बसाने को लेकर स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं और सड़कों पर उतर आए हैं।
आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र होता जा रहा है। लोगों ने वाहन जलाने शुरू कर दिए है। पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़ रहे हैं।

ब्रू शरणार्थियों के संगठन मिजोरम ब्रू डिस्प्लेस्ड पीपुल्स फोरम (MBDPF) ने हाल ही में स्थाई नागरिक और अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र देने की भी मांग उठाई है।

स्त्रोत - दैनिक जागरण समाचार पत्र

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