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घुमंतु समुदाय के लिए इदाते आयोग

घुमंतु समुदाय के लिए इदाते आयोग

घुमंतु समुदाय के लिए इदाते आयोग

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा घुमंतु समुदाय की खराब स्थिति को सुधारने हेतु इदाते आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग की है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार घुमंतु जातियों के लोगों की संख्या लगभग 15 करोड़ है। यह लोग आज भी समाज की मुख्यधारा में शामिल नहीं है। अतः यह समुदाय सामाजिक न्याय ,विकास एवं संवैधानिक संरक्षण से वंचित है।
NOTE:- घुमंतू जातियों को अंग्रेजी सरकार द्वारा सत्ता के खिलाफ सशस्त्र विद्रोही समुदाय मानते हुए इन्हें क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट  1871ई.  के तहत जन्मजात अपराधी घोषित किया गया।

विमुक्त जनजातियां 
वे जनजातियां जिन्हें  आजादी के बाद (1952 ई. में) भारत सरकार द्वारा क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट से मुक्त किया गया।

खानाबदोश जनजातियां (Nomadic tribes) 
वे जनजातियां जो निरंतर भौगोलिक गतिशीलता बनाए रखती है।

अर्द्ध खानाबदोश जनजातियां (semi-Nomadic tribes)
वे जनजातियां जो गतिशील तो रहती है लेकिन वर्ष में कम से कम एक बार मुख्य रूप से व्यवसायिक कारणों से एक निश्चित आवास पर लौट आती है।


घुमंतु समुदाय हेतु इदाते आयोग क्या है ?

केंद्र सरकार द्वारा NCDNT के कल्याण हेतु यह आयोग वर्ष 2015 में गठित किया गया था। (NCDNT = National commission for de-notified Nomadic and semi-nomadic tribes)
इसे भीखु इदाते आयोग भी कहा जाता है।
यह 3 वर्ष के लिए गठित किया गया था।
वर्ष 2018 में इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।


घुमंतु समुदाय के विकास हेतु इदाते आयोग की सिफारिशें

1. इस समुदाय के लोगों को एससी/ एसटी/ ओबीसी वर्ग में शामिल होने के बाद भी कोई लाभ प्राप्त नहीं हो पाया है अतः इस समुदाय हेतु स्थाई आयोग का गठन करना चाहिए।
2. विमुक्त घुमंतु समुदाय के प्रभावशाली नेता को इस स्थाई आयोग का अध्यक्ष एवं भारत सरकार के सचिव अथवा अतिरिक्त सचिव स्तर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को आयोग का सचिव बनाया जाना चाहिए।
3. इस आयोग को वैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए एवं इसे इस तरह से गठित जाना चाहिए कि यह घुमंतू जनजातियों की शिकायतें सुनने और उनको सुलझाने में सक्षम साबित हो।
4. प्रत्येक राज्य में एससी/ एसटी आदि के लिए अलग से बने विभाग और निदेशालय की तर्ज पर ही विमुक्त घुमंतू जनजातियों हेतु निदेशालय व विभाग गठित किए जाने चाहिए।
5. इस समुदाय का कम से कम एक प्रतिनिधि राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा एवं राज्य विधान परिषद में राज्यपाल द्वारा मनोनीत होना चाहिए।
6. इस समुदाय को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करना चाहिए एवं इसी के साथ इनको प्रोटेक्शन ऑफ एट्रोसिटी एक्ट के दायरे में भी लाना चाहिए।
7. वे राज्य जिनमें ऐसे समुदाय को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट - 1871ई.  के तहत अब भी जन्मजात अपराधी माना जाता है, उन्हें इससे मुक्त किया जाना चाहिए।
8. एनसीईआरटी एवं स्टेट स्कूल बोर्ड को इस समुदाय का इतिहास अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए।
9. भारत सरकार द्वारा इस समुदाय को विशेष आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। 
10. घुमंतु समुदाय के लोगों की सेहत में सुधार हेतु टीकाकरण, दवाइयों का वितरण, परिवार नियोजन के साथ गर्भवती महिलाओं की मदद भी सुनिश्चित  की जानी चाहिए।
11. इन समुदाय के लोगों को मकान बनाने हेतु जमीन के पट्टे एवं पर्याप्त अनुदान उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।
12. घुमंतू जनजातियों के युवाओं हेतु रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने चाहिए एवं इनके कौशल विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।
13. घुमंतू जनजातियों में शामिल ऐसे समुदाय जो किसी भी आरक्षित श्रेणी में नहीं आते हैं, उन्हें प्रथम दृष्टया ओबीसी वर्ग में शामिल किया जाना चाहिए तथा वहीं ऐसे समुदाय जो विभिन्न राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं, उन्हें एक ही श्रेणी में लाकर इस विसंगति को दूर किया जाना चाहिए।

स्त्रोत - दैनिक जागरण समाचार पत्र

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