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नगा शांति वार्ता ।। Editorial

नगा शांति वार्ता

नगा शांति वार्ता

Naga peace talks
नगा समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो गया है और नागालैंड के विभिन्न संगठन इस पर कभी भी हस्ताक्षर कर सकते हैं। लेकिन नगा वार्ता के मुख्य पक्षकार NSCN (IM) अब इस समझौते से पीछे हट रहा है। अब वह उन मांगों पर भी अड़ गया है, जिन्हें छोड़ने के लिए वह पहले तैयार हो गया था।

हाल ही में NSCN (IM) संगठन के प्रमुख थुंगालेंग मुइवा ने शांति वार्ताकार R.N.Ravi (वर्तमान में नागालैंड के राज्यपाल) को हटाने की मांग के साथ-साथ भारत सरकार के सामने अन्य मांगे भी रखी है। जैसे- नागा शांति वार्ता किसी तीसरे देश में करवाने की मांग, अलग नगा संविधान, झंडा, राज्य चिन्ह आदि की मांग।

नगाओं का इतिहास :-
1826 ईस्वी में असम पर तथा 1892 ई. तक नागा हिल्स पर भी अंग्रेजों ने अपना अधिकार कर लिया। अर्थात् इस क्षेत्र में अंग्रेजों का शासन पूर्णतया स्थापित हो गया।
अंग्रेजों द्वारा इस क्षेत्र को भारत के अन्य क्षेत्रों से अलग-थलग रखा गया। अर्थात् मैदानी क्षेत्र के लोगों की इस क्षेत्र में आवाजाही प्रतिबंधित थी। केवल ईसाई मिशनरियों को प्रवेश की अनुमति थी। अतः नागालैंड में 97% आबादी ईसाई देखने को मिलती है।

नागा क्लब 
1918 ईस्वी में नागा क्लब स्थापित किया गया था। इसने 1929 ईस्वी में साइमन कमीशन से नागाओं के लिए भविष्य में अलग देश बनाने की अनुमति देने हेतु सिफारिश की थी।
Naga hills district tribal council - यह 1945 ईस्वी में स्थापित की गई थी। 
1946 ईस्वी में इसका नाम बदलकर नागा नेशनल काउंसिल (NNC) रखा गया। एनएनसी द्वारा ही अगले 30 वर्षों तक नागा विद्रोह का नेतृत्व किया गया। (एनएनसी के नेता- अंगामी जापु फिजो)
14 अगस्त 1947 को फिजो ने नागालैंड की आजादी की घोषणा की।
नेहरू -फिजो बातचीत असफल होने पर 1952 ईस्वी के बाद हिंसा की शुरुआत हुई जो 1956 ईस्वी तक लगातार बढ़ी।
1956 ईस्वी में फिजो द्वारा नागा फेडरल गवर्नमेंट (NFG) एवं नागा फेडरल आर्मी (NFA) की स्थापना की गई।

AFSPA = Armed Forces (special power) Act :-
हिंसा बढ़ने पर 1958 ईस्वी में नागा हिल्स जिले में यह लागू किया गया। (देश में पहली बार)
AFSPA उन क्षेत्रों में लागू किया जाता है, जहां भारत का संविधान एवं भारत की संप्रभुता खतरे में हो। यह अधिनियम सुरक्षाबलों को ऐसे क्षेत्रों में लोक व्यवस्था को बनाए रखने हेतु अधिक शक्तियां प्रदान करता है।
- जिन क्षेत्रों में AFSPA लागू होता है वहां एक साथ पांच लोग एकत्रित नहीं हो सकते हैं एवं संदेह के आधार पर व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
- वर्ष 2018 तक त्रिपुरा,मेघालय एवं अरुणाचल प्रदेश का अधिकांश भाग AFSPA से मुक्त हो गया है।

1967 ईस्वी में असम से नागा हिल्स के क्षेत्र को अलग करके नागालैंड नामक नया राज्य बनाया गया। (16 वां राज्य) 
* नागालैंड की संस्कृति व राजनीतिक ढांचे को नई पहचान देते हुए नागालैंड को संविधान में विशेष अधिकार दिया गया जो 5 वीं अनुसूची एवं अनुच्छेद - 371A के रूप में देखने को मिलते हैं। जिसमें संविधान के दायरे में रहते हुए नगा कानूनों एवं परंपराओं को वरीयता दी गई।

शिलौंग समझौता - 1975 ई. 
भारत सरकार एवं एनएनसी के मध्य यह समझौता हुआ था। इस समझौते में एनएनसी के प्रमुख अंगामी फिजो शामिल नहीं थे।
समझौते की मुख्य बातें:-
1. नागालैंड के विद्रोही गुट बिना किसी शर्त के भारतीय संविधान को सर्वोपरि मानेंगे।
2. विद्रोही गुटों द्वारा हथियार छोड़ने पर सहमति बनी।
3. अंतिम समझौते हेतु बातचीत की जाएगी।

एनएनसी के कुछ नेता शिलांग समझौते से सहमत नहीं थे। अतः 1980 ईस्वी में उन्होंने एनएनसी से अलग होकर एनएससीएन की स्थापना की।
NSCN= national socialist council of Nagaland/Nagalim.
एनएससीएन के प्रमुख नेता- 1.  इसाक चीशी  2. थुगांलेंग मुइवा 3. एस एस खापलांग 

1988 ईस्वी में NSCN में विभाजन हो गया। 
1. NSCN (IM)
2. NSCN (K)- म्यांमार में सक्रिय।

एनएससीएन संगठन 1980 के दशक से नागालैंड में अपनी समानांतर सरकार चला रहा है। (GPRN= the Government of the people republic of Nagaland)

Note:- GPRN द्वारा अलग से टैक्स वसूल किए जाते हैं।
एनएससीएन का मुख्य उद्देश्य - नागालिम  या ग्रेटर नागालैंड बनाना (अलग देश) जो अन्य राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर,असम) के नगा क्षेत्रों को मिलाकर बनाया जाएगा। (म्यांमार का भी नगा क्षेत्र मिलाकर)

युद्ध विराम समझौता (ceasefire agreement) -1997 ई. 
यह समझौता भारत सरकार एवं NSCN (IM) के मध्य हुआ था।
समझौते के अनुसार- 
1. भारतीय सेना द्वारा एनएससीएन के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी।
2. एनएससीएन द्वारा भारतीय सुरक्षाबलों पर हमला नहीं किया जाएगा।

इस समझौते के बाद नागालैंड में शांति व्यवस्था कुछ हद तक बहाल हुई जिससे राज्य में पर्यटन ,बिज़नेस आदि की शुरुआत हुई।

👉🏽 फ्रेमवर्क एग्रीमेंट - अगस्त 2015 
यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं NSCN (IM)  प्रमुख मुइवा के बीच में हुआ।
इस समझौते का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। लेकिन दोनों पक्ष एक दूसरे से सहमत नजर आए।

वर्ष 2017 में भारत सरकार द्वारा एनएससीएन के अतिरिक्त अन्य संगठनों से भी बातचीत की गई।
(NNPG= Naga National political group ) 
NNPG में 6 संगठन शामिल हैं।

अक्टूबर 2019 में NSCN के 18 नेताओं ने NNPG ज्वाइन किया था।

वर्ष 2015 के बाद से भारत सरकार की विद्रोही गुटों से लगातार बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक भी दोनों पक्षों के मध्य सफल समझौता नहीं हो पाया है। क्योंकि NSCN (IM) की कई नई मांगो ने इस समझौते में चुनौतियों को और अधिक बढ़ा दिया है।

नगा समस्या को हल करने हेतु सुझाव:-
1. जनजातीय समूहों में शक्तियों का अधिकतम विकेंद्रीकरण और शीर्ष स्तर पर न्यूनतम केंद्रीकरण इसका एक विकल्प हो सकता है। जिससे शासन को लोकतांत्रिक रूप देने और व्यापक विकास परियोजनाएं शुरू करने में आसानी होगी।
2. अन्य राज्य में रहने वाले नागाओ को भी विशेष अधिकार एवं सुविधाएं दी जानी चाहिए।
3. नागालैंड में विरोधी गुटों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करके इन्हें प्राप्त होने वाले विदेशी फंड पर भी रोक लगानी चाहिए।
4. अलग संविधान के स्थान पर अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए।
5. अलग झंडे की मांग को केवल सांस्कृतिक मंच एवं कार्यक्रमों तक ही सीमित रखना चाहिए।
6. शांति समझौते के तहत विद्रोही नेताओं को वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में शामिल करना चाहिए।
7. NSCN(IM) को अधिक महत्व न देते हुए अन्य सभी विद्रोही गुटों के साथ भी सरकार को बातचीत करनी चाहिए।
8. नगा युवाओं हेतु बेहतर शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने चाहिए।
9. नगा समझोते को शीघ्र ही अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

नगाओ के साथ किया गया सफल समझौता ही पूर्वोत्तर के अन्य जातीय संघर्ष को हल करने की राह खोज सकता है। अतः सभी पक्षों द्वारा मिलकर इस समस्या का समग्र हल निकाला जाना चाहिए। अन्यथा दशकों से शांति स्थापित करने का प्रयास एक बार फिर से धूमिल नजर आएगा।

नागालैंड के बारे में अन्य महत्वपूर्ण तथ्य -
* नागालैंड का क्षेत्रफल- 16579 वर्ग किलोमीटर।
* नागालैंड राज्य की जनसंख्या - लगभग 22 लाख (2011 की जनगणना के अनुसार) 
* नागालैंड राज्य की सीमा अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और म्यांमार से लगती है।
* 2020 में नागालैंड के मुख्यमंत्री - नेफियू रियो 
* नगा लगभग 35 छोटी-छोटी उप जातियों से मिलकर बनी एक जनजाति है।

नागालैंड को संविधान के अनुच्छेद 371 (ए) के तहत विशेष दर्जा प्राप्त है।

अनुच्छेद 371 (ए)
जमीन के मालिकाना हक, हस्तांतरण, नगा समुदाय की सामाजिक-धार्मिक परंपराओं, संसाधनों, नागरिक प्रशासन, आपराधिक न्याय संबंधी नियमों में संसद का कानून लागू नहीं होता। केंद्र इस पर तभी फैसला ले सकता है जब विधानसभा संकल्प पारित करें।
जो व्यक्ति नगालैंड का नागरिक नहीं है, वह यहां जमीन नहीं खरीद सकता है।

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