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सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित अधिनियम

 
सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित अधिनियम

सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित अधिनियम

Bill passed in parliament september 2020

गुजरात सरकार ने आदतन अपराधियों और असामाजिक  तत्वों पर लगाम लगाने के लिए गुजरात गुंडा एवं सामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इसमें अपराधियों को 7 से 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है।

वायुयान संशोधन विधेयक-2020
15 सितंबर, 2020 को राज्यसभा द्वारा वायुयान संशोधन विधेयक-2020 पारित करने के साथ ही यह विधेयक संसद से पारित हो गया है।
इस विधेयक के जरिये वायुयान अधिनियम, 1934 में संशोधन करने का प्रस्ताव है।
इसमें नागर विमानन मंत्रालय के अंतर्गत तीन प्राधिकरणों को वैधानिक दर्जा दिये जाने का भी प्रावधान है। यह प्राधिकरण हैं- नागरिक विमानन महानिदेशालय, नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो और वायुयान दुर्घटना जांच ब्यूरो।
विधेयक में जुर्माने की मौजूदा राशि अधिकतम 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये की गई है।
ये जुर्माना विमान में हथियार, विस्फोटक और अन्य घातक सामग्री ले जाने तथा हवाई अड्डे के एक चिन्हित विशेष स्थान के आसपास के दायरे के भीतर निर्माण या कोई ढांचा खड़ा करने पर लगाया जायेगा।

बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम 2020 का मसौदा जारी
16 सितंबर को बिजली मंत्रालय ने बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम 2020 का मसौदा जारी किया है।
इसमें ग्राहकों को भरोसेमंद सेवा, बिजली कनेक्शन लेना आसान बनाने, वितरण कंपनियों की तरफ से सेवा में देरी के लिए मुआवजा तथा शिकायतों के समाधान के लिए 24 घंटे का कॉल सेंटर जैसे प्रावधान किए गए हैं।

आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्‍थान विधेयक 2020
16 सितंबर, 2020 को राज्य सभा द्वारा आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक- 2020 को पारित करने के साथ ही संसद ने इसे अपनी स्वीकृति दे दी है। लोक सभा द्वारा इसे पहले ही पारित किया जा चुका है।

विधेयक के तहत एक आधुनिक आयुर्वेदिक संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।
जामनगर, गुजरात में स्थापित होने वाले इस संस्थान का नाम आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए) होगा। इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया जाएगा।
इसमें गुजरात के जामगर में स्थित आयुर्वेद के तीन संस्थानों का एक ही संस्थान में विलय करने का भी प्रावधान है।

लोकसभा ने 15 सितंबर 2020 को  संसद सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेशन संशोधन विधेयक, 2020 को पारित कर दिया है। इस विधेयक में COVID-19 महामारी से उत्पन्न तत्काल वित्तीय आवश्यकता को पूरा करने के लिए सभी सांसदों के वेतन में 1 अप्रैल, 2020 से एक वर्ष की अवधि के लिए 30% की कटौती करने की मांग की गई है।

राष्‍ट्रीय होम्‍योपैथी आयोग विधेयक-2020
14 सितंबर, 2020 को लोकसभा की मंजूरी के साथ संसद द्वारा राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक-2020 और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति विधेयक-2020 पारित कर दिया गया।
उद्देश्य: होम्योपैथी तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए उच्चस्तरीय चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
यह विधेयक होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम 1973 का स्थान लेगा और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग की स्थापना करेगा।
होम्योपैथी आयोग में एक अध्यक्ष सहित 20 सदस्य होंगे।

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग विधेयक-2020: यह विधेयक भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद अधिनियम 1970 का स्थान लेगा और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग का गठन करेगा।
आयोग में एक अध्यक्ष सहित 29 सदस्य होंगे।

सलाहकार परिषद: इन दोनों विधेयकों में होम्योपैथी तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए सलाहकार परिषदों के गठन का प्रस्ताव किया गया है।

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020
संसद द्वारा 21 सितंबर, 2020 को भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 और होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 को पारित किया गया।

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020: इस विधेयक को 1970 के भारतीय चिकित्सा केन्द्रीय परिषद कानून में संशोधन के लिए लाया गया है। यह अधिनियिम आर्युवेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा सहित भारतीय चिकित्सा पद्धति की शिक्षा और प्रेक्टिस को नियंत्रित करता है।
यह विधेयक पारित होने पर अप्रैल 2020 में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा।
इस विधेयक में एक वर्ष के अंदर केन्द्रीय परिषद के पुनर्गठन का प्रस्ताव है। अन्तरिम अवधि तक केन्द्र सरकार निदेशक मंडल का गठन करेगी, जिसे केन्द्रीय परिषद के अधिकार होंगे। निदेशक मण्डल में अधिकतम दस सदस्य होंगे।

होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020: इस विधेयक द्वारा होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन किया गया है। इस अधिनियम में केंद्रीय होम्योपैथी परिषद की व्यवस्था की गई है, जो होम्योपैथिक शिक्षा और प्रेक्टिस को नियंत्रित करता है।
यह विधेयक अप्रैल 2020 में जारी होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन अध्यादेश का स्थान लेगा। 
इसके तहत केंद्रीय परिषद के पुनर्गठन की अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष किया गया है।
अन्तरिम अवधि तक केन्द्र सरकार निदेशक मंडल का गठन करेगी, जिसे केन्द्रीय परिषद के अधिकार होंगे।

बैंकिंग नियमन (संशोधन) विधेयक, 2020
लोकसभा में 16 सितम्बर 2020 को बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 को पारित कर दिया गया। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2020 में एक अध्यादेश के जरिये सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के नियंत्रण में लाने की मंजूरी दी थी। साथ ही वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होने वाले प्रावधानों को सहकारी बैंकों पर भी प्रभावी कर दिया गया था।
•  यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अवश्यकता पड़ने पर सहकारी बैंकों के प्रबंधन में बदलाव करने का अधिकार देता है.
• विधेयक में कहा गया है कि आरबीआई को सहकारी बैंकों के नियमित कामकाज पर रोक लगाये बिना उसके प्रबंधन में बदलाव के लिये योजना तैयार करने का अधिकार मिल जायेगा।
• कृषि सहकारी समितियां या मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में काम करने वाली सहकारी समितियां इस विधेयक के दायरे में नहीं आयेंगी। केवल बैंकिंग से संबंधित सहकारी समितियां इसके दायरे में आएंगी।
केंद्र सरकार बैंकिंग रेग्‍युलेशन एक्‍ट, 1949 में संशोधन कर बैंक उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना चाहती है।

बैंकिंग नियमन (संशोधन) विधेयक 2020
22 सितंबर, 2020 को संसद द्वारा बैंकिंग नियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित किया गया।
उद्देश्य: जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना।
मुख्य प्रावधान: संशोधित विधेयक जून 2020 में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा। विधेयक में बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 की धारा-3, धारा-45 और धारा-56 में संशोधन का प्रस्ताव है। इससे नियम कानून की दृष्टि से सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों में एकरूपता लाई जा सकेगी।
विधेयक के तहत रिजर्व बैंक को ऋण स्थगन (Moratorium) के बिना पुनर्गठन या एकीकरण की योजना शुरू करने की अनुमति दी गई है। अगर मौजूदा प्रतिबंधों के अलावा ऋण स्थगन किया जाता है, तो बैंक इस दौरान कोई ऋण मंजूर नहीं कर सकेंगे या किसी ऋण पत्र में निवेश नहीं कर सकेंगे।
आरबीआई सहकारी बैंकों के चेयरपर्सन के रोजगार की शर्तों और योग्यता को निर्दिष्ट कर सकता है। आरबीआई ऐसे चेयरपर्सन को हटा सकता है जोकि ‘फिट और उचित’ के मानदंड पर खरा न उतरे और उपयुक्त व्यक्ति को नियुक्त कर सकता है।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को इस विधेयक के दायरे में नहीं रखा गया है। जो सहकारी समितियां अपने नाम के साथ ‘बैंक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करती हैं और चेकों का समाशोधन नहीं करतीं हैं, उन्हें इस विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।


कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन
संसद द्वारा 20 सितंबर, 2020 को कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 पारित किया गया।
मुख्य प्रावधान: कृषकों को व्यापारियों, कंपनियों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों से सीधे जोड़ना। कृषि करार के माध्यम से बुवाई से पूर्व ही किसान को उसकी उपज के दाम निर्धारित करना। दाम बढ़ने पर न्यूनतम मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ।
मूल्य पूर्व में ही तय हो जाने से बाजार में कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव का प्रतिकूल प्रभाव किसान पर नहीं पड़ेगा।
किसानों की अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, कृषि उपकरण एवं उन्नत खाद बीज तक पहुँच होगी। विपणन की लागत कम होगी और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
किसी भी विवाद की स्थिति में उसका निपटारा 30 दिन में स्थानीय स्तर पर करने की व्यवस्था की गई है।
कृषि क्षेत्र में शोध एवं नई तकनीकी को बढ़ावा देना।

कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020
संसद द्वारा 20 सितंबर, 2020 को कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक, 2020 पारित किया गया।
मुख्य प्रावधान: राज्यों की अधिसूचित मंडियों के अतिरिक्त राज्य के भीतर एवं बाहर देश के किसी भी स्थान पर किसानों को स्वतंत्रता प्रदान करते हुए अपनी उपज निर्बाध रूप से बेचने के लिए अवसर एवं व्यवस्थाएं प्रदान करना।
किसानों को अपने उत्पाद के लिए कोई उपकर नहीं देना होगा और उन्हें माल ढुलाई का खर्च भी वहन नहीं करना होगा।
ई-ट्रेडिंग (इलेक्ट्रोनिक माध्यम) मंच से निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करना ।
मंडियों के अतिरिक्त व्यापार क्षेत्र में फॉर्मगेट, कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण यूनिटों पर भी व्यापार की स्वतंत्रता।
किसान खरीददार से सीधे जुड़ सकेंगे जिससे बिचौलियों को मिलने वाले लाभ के बजाए किसानों को उनके उत्पाद की पूरी कीमत मिल सके।

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA), 2010
FCRA अधिनियम गृह मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है। यह अधिनियम भारत में स्वैच्छिक संगठनों के विदेशी वित्त पोषण को नियंत्रित करता है।
• अधिनियम के तहत, दान करने वाले संगठनों को हर पांच साल में खुद को पंजीकृत करना होता है।
एक निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम वाला कोई भी व्यक्ति पंजीकरण करके या केंद्र सरकार से अनुमति के बाद विदेशी दान ले सकता है।
• चुनावी उम्मीदवार, कोई भी सांसद अथवा विधायक, राजनीतिक दलों का सदस्य, किसी पंजीकृत समाचार पत्र का प्रकाशक, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी अथवा सरकार के स्वामित्व वाले किसी भी निगम के कर्मचारी विदेशी अंशदान स्वीकार नहीं कर सकते।

विदेशी अंशदान नियमन संशोधन विधेयक 2020
संसद द्वारा 21 सितंबर, 2020 को विदेशी अंशदान नियमन संशोधन विधेयक, 2020 को मंजूरी प्रदान की गई।
उद्देश्य: देश के सामाजिक ताने-बाने या आंतरिक सुरक्षा को बिगाड़ने में विदेशी निधि के इस्तेमाल को रोकना।
• विदेशी सहायता पाने वाले गैर सरकारी संगठनों (NGO) के अधिकारियों के लिए आधार अनिवार्य कर दिया गया है।
• संशोधनों के तहत विदेशी सहायता से मिली रकम से ऑफिस के खर्चे की सीमा घटाकर 20% कर दी गई है।
एनजीओ को 80% राशि उस काम में खर्च करनी होगी जिसके लिए विदेशी धन दिया गया था।
• देश में स्थित कोई भी एनजीओ केवल दिल्ली में स्थित स्टेट बैंक की शाखा में ही विदेशी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
विधेयक मे विदेशी अंशदान नियामक अधिनियम, 2010 में संशोधन किया गया है, जो देश में व्यक्तियों, संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों और कंपनियों द्वारा विदेशी अंशदान की स्वीकृति और उपयोग को नियमित करने से संबंधित है।
लोक सेवकों को किसी भी विदेशी अंशदान को स्वीकार करने के लिए निषिद्ध संस्थाओं की सूची में शामिल करने का भी प्रावधान किया गया है।
इस सूची में चुनाव उम्मीदवार, समाचार पत्रों के संपादक या प्रकाशक, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी, किसी भी विधायिका के सदस्य, राजनीतिक दल और अन्य पहले से ही शामिल हैं।

महामारी रोग (संशोधन) विधेयक 2020
संसद ने 21 सितम्बर 2020 को महामारी रोग (संशोधन) विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी।
इस बिल के तहत स्वास्थ्य कर्मियों के जीवन को नुकसान, चोट, क्षति या खतरा पहुंचाने कर्तव्यों का पालन करने में बाधा उत्पन्न करने और स्वास्थ्य सेवा कर्मी की संपत्ति या दस्तावेजों को नुकसान या क्षति पहुंचाने पर जुर्माने और दंड का प्रावधान किया गया है।
राज्यसभा ने बिल को 19 सितंबर 2020 को पारित किया था।
 यह विधेयक सरकार द्वारा अप्रैल में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा।
बिल में सजा का प्रावधान
इस बिल में कोरोना वायरस या वर्तमान महामारी जैसी किसी स्थिति से लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले करने वालों के लिए अधिकतम पांच लाख रूपये तक जुर्माना और अधिकतम सात साल तक सजा का प्रावधान किया गया है‌।

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कानून (संशोधन) विधेयक, 2020
संसद द्वारा 22 सितंबर, 2020 को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित किया गया।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 के पारित होने से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 2014 तथा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) अधिनियम, 2017 के प्रमुख प्रावधानों में संशोधन होगा।
यह विधेयक सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला तथा रायचूर स्थित 5 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मोड में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में घोषित करेगा।
इन संस्थानों को किसी विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की तरह बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (B.Tech) या मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (M.Tech) या पीएचडी डिग्री जारी करने का अधिकार होगा।
कुल 20 नए भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों को सार्वजानिक निजी भागीदारी (आईआईआईटी पीपीपी) मोड में स्थापित करने की केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2010 में मंजूरी दी गई।
योजना के तहत, 15 आईआईआईटी पहले ही आईआईआईटी (पीपीपी) अधिनियम, 2017 द्वारा स्थापित किये जा चुके हैं।

जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक 2020
लोकसभा ने 22 सितंबर को जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक 2020 को मंजूरी प्रदान कर दी। इसमें 5 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी और डोगरी को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का प्रावधान है।

राष्‍ट्रीय फोरेन्सिक विज्ञान विश्‍वविद्यालय विधेयक 2020
संसद द्वारा 22 सितंबर, 2020 को राष्ट्रीय फोरेन्सिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक 2020 पारित किया गया।
विधेयक में गांधीनगर स्थित गुजरात फोरेन्सिक विज्ञान विश्वविद्यालय और नई दिल्ली स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय अपराध विज्ञान और फोरेन्सिक विज्ञान संस्थान के विलय से गुजरात में राष्ट्रीय फोरेन्सिक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना किए जाने का प्रावधान है।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020
संसद द्वारा 22 सितंबर, 2020 को कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित किया गया।
यह विधेयक केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जून 2020 में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन हेतु मंजूर किए गए ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश 2020’ का स्थान लेगा।
• आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020 अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान करता है।
केवल असाधारण परिस्थितियों जैसे युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि और गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा में ही केंद्र सरकार इन्हें नियंत्रित कर सकती है। अर्थात इन विशेष परिस्थितियों में ही इन पर स्टॉक की सीमा लगेगी।
हालांकि, एक मूल्य श्रृंखला भागीदार की स्थापित क्षमता और निर्यातक की निर्यात मांग को ऐसे स्टॉक सीमा लागू करने से छूट प्रदान की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कृषि में निवेश हतोत्साहित न हो।
• संसद ने आवश्यक वस्तु अधिनियम को 1955 में पारित किया था। तब से सरकार इस कानून की मदद से 'आवश्यक वस्तुओं' का उत्पादन, आपूर्ति और वितरण नियंत्रित करती है।

तीन श्रम संहिता में संशोधन को मंजूरी
8 सितंबर, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन श्रम संहिता में संशोधन को मंजूरी दी। ये तीन श्रम कोड औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 में प्रस्तावित किए गए थे।
तीन संहिताओं में व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक संबंध शामिल हैं।

औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 विधेयक का उद्देश्य ट्रेड यूनियंस एक्ट, 1926, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 तथा औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम,1946 को समेकित करके औद्योगिक सम्बन्धों को व्यवस्थित करना है।

यह चार विधेयकों की श्रृंखला में तीसरा विधेयक है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों से संबंधित 44 कानूनों को मिलाकर अधिक युक्तिसंगत बनाना है।
अन्य दो विधेयक हैं : -
व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितयां संहिता 2019 और वेतन संहिता 2019

तीन श्रम संहिता विधेयक पारित
संसद द्वारा 23 सितंबर, 2020 को श्रमिकों के कल्याण और सुरक्षा के लिए श्रम संहिता संबंधी तीन विधेयक पारित किए गए। तीन संहिताओं में सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य, और औद्योगिक संबंध शामिल हैं।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: जोखिमकारी क्षेत्रों में कार्यरत प्रतिष्ठान अनिवार्य रूप से ईएसआईसी से संबद्ध किए जाएंगे।
असंगठित क्षेत्र और गैर-स्थायी श्रमिकों को ईएसआईसी से संबद्ध करने के लिए योजना बनाने हेतु प्रावधान।
ईपीएफओ की कवरेज 20 या इससे अधिक कामगारों वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगी।
असंगठित क्षेत्र के कामगारों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार करने हेतु 'सामाजिक सुरक्षा निधि' सृजित की जाएगी।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020: नियोक्ता द्वारा एक निर्धारित आयु से अधिक आयु वाले कामगारों के लिए वर्ष में एक बार निःशुल्क चिकित्सा जांच।
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020: जिन कंपनियों में 300 तक कर्मचारी हैं, उन्हें कर्मचारियों की भर्ती या छंटनी के लिए श्रम विभाग की इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी।
इसके अलावा अनुबंध पर काम करने वालों कर्मचारियों की सीमा को 20 से बढ़ाकर 50 कर दिया गया है।

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