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शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009

 

Right to education

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009

RTE - Right to education.

पूरा नाम - निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009

लागू क्यों किया गया 

• 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देना सुनिश्चित करना।

• मौलिक अधिकारों का व्यवहारिक क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।

• 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा देने के लिए

निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

• 1870 में इंग्लैंड निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को लागू करने वाला विश्व का पहला देश बना।

• 1906 बड़ौदा रियासत के शासक सयाजीराव गायकवाड ने अपनी रियासत में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का आयोजन किया।
यह भारत में पहला प्रयास था।

• 1910 ईस्वी में गोपाल कृष्ण गोखले ने संपूर्ण भारत में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा लागू करने की बात कही, जिसे अंग्रेजों ने अस्वीकार कर दिया।

• 86वां संविधान संशोधन 1 दिसंबर 2002

प्राथमिक शिक्षा को मूल अधिकार व मूल कर्त्तव्य का दर्जा दिया गया।

उद्देश्य - 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

गौरतलब है कि प्राथमिक शिक्षा अनुच्छेद 21 (क) में एक मूल अधिकार है और अनुच्छेद 51 (क) में एक मूल कर्त्तव्य है।

निःशुल्क एवं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने वाला भारत विश्व का 135वां देश बना।

आरटीई एक्ट कब पारित किया गया

20 जुलाई 2009 को विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया।

4 अगस्त 2009 को विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया गया।

26 अगस्त 2009 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने विधेयक पर हस्ताक्षर किए।

निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम संपूर्ण भारत में लागू हुआ, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान को छोड़कर।

29 मार्च 2011 को राजस्थान विधानसभा ने आवश्यक संशोधन करके प्रस्ताव पारित किया।

1 अप्रैल 2011 को राजस्थान निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2011 लागू हुआ।

नोट - धार्मिक शिक्षण संस्थाओं, मदरसों तथा ईसाई मिशनरियों  के लिए आरटीई लागू नहीं होता है।

आरटीई एक्ट की संरचना

आरटीई एक्ट में 7 अध्याय, 38 धाराएं1 अनुसूची है।

पहला अध्याय - आरटीई एक्ट की प्रस्तावना

दूसरा अध्याय - आरटीई एक्ट का विस्तृत उल्लेख

तीसरा अध्याय - समुचित सरकार के अधिकारी वर्ग, माता-पिता के अधिकार एवं दायित्व

चौथा अध्याय - विद्यालय के मानक, शिक्षक के अधिकार, दायित्व, शिक्षक की योग्यता

पांचवां अध्याय - पाठ्यक्रम निर्माण करने वाले अधिकारियों के अधिकार एवं दायित्व

छठा अध्याय - बालक अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 का उल्लेख जो बच्चों के अधिकारों को संरक्षण देता है।

सातवां अध्याय - समुचित सरकार के अधिकार तथा प्रकीर्णन दिए गए हैं।

सबसे छोटा अध्याय - पहला

सबसे बड़ा अध्याय - चौथा

38 धाराएं

धारा 1 - आरटीई एक्ट का विस्तृत उल्लेख

धारा 2 - आरटीई एक्ट की शब्दावली का उल्लेख

धारा 3 - समुचित सरकार का यह दायित्व है, कि वह निःशुल्क शिक्षा का आयोजन करें, यह बालक का अधिकार होगा।

धारा 4 - यदि कोई बालक शिक्षा की मुख्यधारा से हट जाए तो स्थानीय प्रशासन, विद्यालय प्रशासन व स्थानीय अभिभावक समुचित व समन्वित प्रयास करते हुए बालक को मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास करें तथा बालक को आयु वर्ग के अनुसार प्रवेश दिया जाए।

धारा 5 - प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने तक यदि कोई बालक अपने विद्यालय का स्थानांतरण करता है, तो विद्यालय स्थानांतरण के साथ बालक के सभी अधिकारों का स्वत: ही स्थानांतरण हो जाता है। (आरटीई को छोड़कर)

नोट - यह धारा स्वयं का ही विरोध करती है।

धारा 8 - सरकार का दायित्व है, कि वह संपूर्ण अधिनियम को लागू करें।

धारा 9 - समुचित सरकार के अधिकारी वर्ग के अधिकार एवं दायित्वों का उल्लेख

धारा 10 - माता-पिता के अधिकार एवं दायित्व

धारा 11 - 1 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बचपन के देखभाल की जिम्मेदारी सरकार की होगी।

धारा 12 - यह धारा निजी शिक्षण संस्थानों को आदेशित करती है, कि वे अपने विद्यालय की कक्षा प्रथम की कुल छात्र संख्या के 25% सीटों पर निर्धन वर्ग के बच्चों हेतु आरक्षण प्रदान करेंगे न कि विद्यालय की कुल छात्र संख्या पर आरक्षण दिया जाएगा।

• आरक्षण कक्षा प्रथम से शुरू होकर कक्षा 8 तक लागू होगा।

• आरक्षण 8 वर्षों के लिए लागू होगा।

• आरक्षण 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के लिए लागू होगा।

नोट - एक बार आरक्षण का लाभ छोड़ देने पर दोबारा आरक्षण प्राप्त नहीं होगा।

नोट - यदि कोई विद्यालय LKG, UKG तथा Prep जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करता है, तो आरक्षण 3 से 11 वर्ष तक तथा कक्षा 5 तक मिलेगा।

नोट - आरक्षण के बदले में सरकार विद्यालयों को पुनर्भरण राशि प्रदान करेगी।

धारा 13 - इसके अनुसार प्रवेश के समय किसी भी प्रकार का प्रवेश शुल्क तथा शिक्षण शुल्क नहीं लिया जाएगा।

धारा 14 - प्रवेश के समय बालक से आवश्यक से आवश्यक प्रमाण पत्रों की मांग नहीं की जाएगी।

धारा 15 - प्रवेश की अंतिम तिथि 3 सितंबर है, लेकिन फिर भी बालक को प्रवेश वर्षपर्यंत दिया जाएगा।

धारा 16 - बालक को किसी भी स्तर पर रोका नहीं जाएगा उसका ठहराव या अवरोधन नहीं किया जाएगा अर्थात बालक को फेल नहीं कर सकते है।

धारा 17 - बालक का शारीरिक व मानसिक शोषण नहीं किया जाएगा।

धारा 21 - प्रत्येक विद्यालय में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) का गठन किया जाएगा।

धारा 22 - स्कूल मैनेजमेंट कमेटी, विद्यालय विकास योजना का निर्माण करेगी।

धारा 23 - शिक्षक के अधिकार व योग्यता

धारा 24 - शिक्षक के दायित्व

धारा 25 - छात्र-शिक्षक का अनुपात

एक से कक्षा 5 तक छात्र-शिक्षक अनुपात - 40:1

कक्षा 6 से कक्षा 8 तक छात्र-शिक्षक अनुपात - 35:1

धारा 26 - किसी भी विद्यालय में 10% से अधिक शिक्षक पद रिक्त नहीं हो सकते।

नोट - इसी धारा के कारण यह अधिनियम राजस्थान में देरी से लागू हुआ।

धारा 30 - प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने तक बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जाएगा।

धारा 31 - बालक के अधिकारों के हनन के संबंध में शिकायत की प्राप्ति

धारा 32 - अधिकारी द्वारा शिकायत का सत्यापन, निदान एवं निवारण

धारा 33 - केंद्रीय सलाहकार परिषद का गठन जो बालक के अधिकारों को सुरक्षा देगी।

धारा 34 - राज्य सलाहकार परिषद का गठन जो बालक के अधिकारों को सुरक्षा देगी।

धारा 35 से 38 - सरकार की धाराएं जिनसे सरकार को अधिकार है, कि वह संपूर्ण अधिनियम में परिवर्तन का प्रावधान कर सकती है।

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