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हरित ऊर्जा और चुनौतियां

 

हरित ऊर्जा और चुनौतियां

हरित ऊर्जा और चुनौतियां

वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए किसी भी देश के लिए दो गुण आवश्यक है -
1. दुनिया के किसी भी हिस्से में सैन्य दखल की क्षमता।
2. दुनिया के किसी भी हिस्से में परमाणु मिसाइलें दागने की क्षमता।

यह दोनों क्षमता अमेरिका के पास है, परंतु वर्तमान में एक नई विश्व व्यवस्था की बात चल रही है। माना जा रहा है कि शक्ति का स्थानांतरण अब पश्चिम से पूर्व की ओर होगा। (अर्थात एशिया की ओर)
चीन 2035 तक वैश्विक शक्ति बनना चाहता है, परंतु हाल ही के समय में उसका वैश्विक स्वरूप खंडित हुआ है।
कारण -
1. कोरोना महामारी फैलाने के आरोप
2. पड़ोसी देशों के साथ व्यापार और सीमा विस्तार को लेकर विवाद
3. अंतर्राष्ट्रीय कानूनों एवं संगठनों की अवहेलना।

जिस नई व्यवस्था की संभावना बन रही है और जिसकी पूरी दुनिया को जरूरत है, वह हरित विश्व व्यवस्था है।
अमेरिका क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस संधि को नकारने के कारण कभी भी हरित व्यवस्था का नेतृत्व नहीं कर सकता।
चीन ने हरित ऊर्जा में अद्भुत क्षमता विकसित की है। उसके द्वारा 2018 में सौर ऊर्जा के जरिए 180 गीगावॉट ऊर्जा उत्पन्न की गई।
परंतु चीन देश के भीतर तो हरित ऊर्जा की बात करता है, लेकिन बाहरी दुनिया में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों में वह कार्बन जनित आर्थिक व्यवस्था को अहमियत दे रहा है। वह सबसे बड़ा कोल उत्पादक देश है।
इसलिए चीन कभी भी हरित व्यवस्था का नेतृत्व नहीं कर सकता है।

कुछ छोटे देश जैसे यूरोप के ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अफ्रीका के मोरक्को, घाना और एशिया का भूटान हरित ऊर्जा समृद्ध देश है परंतु छोटे होने के कारण ये वैश्विक नेतृत्व नहीं कर सकते।

ऊर्जा क्षेत्र में नई वैश्विक व्यवस्था को लेकर भारत पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई है।
कारण -
• भारत एक मजबूत लोकतंत्र है।
• 2022 तक भारत ने 175 गीगावॉट ऊर्जा हरित साधनों से पैदा करने का लक्ष्य रखा है।
और 2030 तक 450 गीगावॉट उत्पादन का अनुमान है।
• भारत और फ्रांस ने मिलकर अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा गठबंधन की शुरुआत की।
• भारत के पास हरित ऊर्जा के अन्य स्त्रोत हुई जैसे पवन ऊर्जा, बायोमास और छोटे-छोटे पनबिजली संयंत्र भी उपलब्ध है।
• भारत की प्राचीन आर्थिक व्यवस्था भी पूरी तरह से प्रकृति जनित और उस पर आधारित थी।

ऊर्जा का जलवायु परिवर्तन से सीधा संबंध है। प्राकृतिक आपदाओं के पीछे बड़ा कारण धरती और वायुमंडल में कार्बन की बढ़ती मात्रा है।
प्रकृति में कार्बन की मात्रा बढ़ने के सबसे ज्यादा दोषी यूरोप के औपनिवेशिक देश और बाद में अमेरिका रहा है।

आज भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है, कि दुनिया को एक सूत्र में बांधने के लिए वैश्विक भूमिका में उतरे और अपनी स्वीकार्यता मनवाए। हरित वैश्विक व्यवस्था की अगुवाई के लिए भारत के पास क्षमता और संसाधन दोनों उपलब्ध है, जरूरत है, कि इनका उपयुक्त तरीके से उपयोग किया जाए।

महत्वपूर्ण तथ्य

नवीकरणीय  ऊर्जा
प्राकृतिक संसाधनों, जैसे-सूर्य ताप , वायु , वर्षा , ज्वार और भूतापीय गर्मी से उत्पन्न ऊर्जा को नवीकरणीय  ऊर्जा कहते है। जैसे - सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, पनबिजली, बायोमास और जैव ईंधन।

भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है -
 सौर ऊर्जा से
 100 गीगावॉट
 पवन ऊर्जा से
  60 गीगावॉट
 बायोमास ऊर्जा से
  10 गीगावॉट
 लघु पनबिजली से
   5 गीगावॉट
                     कुल 
 175 गीगावॉट


एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना
10 जुलाई 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के रीवा में एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन किया।
यह परियोजना 750 मेगावाट की है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सौर ऊर्जा को श्योर, प्योर और सिक्योर बताया।

नवंबर 2015 में पेरिस में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति हॉलैंड द्वारा संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का आगाज किया गया था।

वन सन-वन वर्ल्ड-वन ग्रिड पहल ?
अगस्त 2020 में  पीएम मोदी ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG) योजना की घोषणा की है।

• 2018 के देहरादून इन्वेस्टर सम्मिट में प्रधानमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा में आगे बढ़ते हुए 'वन सन-वन वर्ल्ड-वन ग्रिड' का नारा दिया था।
• अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन से प्राप्त ऊर्जा को वन सन-वन वर्ल्ड-वन ग्रिड के तहत जोड़े जाने का नारा दिया गया था।

• ग्लोबल इलेक्टिसिटी ग्रिड परियोजना के तहत भारत का उद्देश्य दुनिया भर में सौर ऊर्जा की आपूर्ति के लिए एक ट्रांस-नेशनल इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड बनाना है।
OSOWOG 140 देशों को एक कॉमन ग्रिड के माध्यम से जोड़ेगा जो सौर ऊर्जा को स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किया जाएगा।

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