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वन एवं वन्य जीव संसाधन ।। कक्षा 10

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वन एवं वन्य जीव संसाधन

विश्व वन्यजीव दिवस कब मनाया जाता है ? - 3 मार्च

वायु, जल, मृदा पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख घटक है।
वायु - श्वसन क्रिया में उपयोगी।
जल - पेयजल के रूप में।
मृदा - अनाज पैदा करने में।

जैव विविधता क्या है ? यह मानव जीवन के लिए क्यों उपयोगी है ?
उत्तर - किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवो की अलग-अलग जातियों और उनकी विशेषताएं जैव-विविधता कहलाती है।

महत्वपूर्ण क्यों है -
• प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखती है।
• यह पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखती है।

भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 24.56 % भाग पर वन पाए जाते हैं।


जातियों का वर्गीकरण

अंतर्राष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण संघ (IUCN) के अनुसार पौधे और प्राणियों की जातियों  को निम्नलिखित श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है -
1. सामान्य जातियां
2. संकटग्रस्त जातियां
3. सुभेद्य जातियां (Vulnerable)
4. दुर्लभ जातियां
5. स्थानिक जातियां
6. लुप्त जातियां

1. सामान्य जातियां - वे जातियां जिनकी संख्या जीवित रहने के लिए सामान्य मानी जाती है।
जैसे - पशु, चील

2. संकटग्रस्त जातियां - वे जातियां जिनके लुप्त होने का खतरा है। यदि खतरा लगातार जारी रहा तो इन जाति का जीवित रहना कठिन है।
जैसे - काला हिरण, मगरमच्छ, गैंडा

3. सुभेद्य जातियां - वे जातियां जिनकी संख्या घट रही है। यदि संख्या लगातार घटती रही तो इन्हें संकटग्रस्त जातियों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
जैसे - नीली भेड़, एशियाई हाथी, गंगा नदी डॉल्फिन

4. दुर्लभ जातियां - वह जातियां जिनकी संख्या बहुत ज्यादा कम या सुभेद्य है।

5. स्थानिक जातियां - वे जातियां जो किन्हीं विशेष क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
जैसे - अंडमानी टील, अंडमानी जंगली सूअर, निकोबारी कबूतर

6. लुप्त जातियां - वे जातियां जो स्थानीय क्षेत्र, प्रदेश, देश महाद्वीप या पूरी पृथ्वी से ही लुप्त हो गई है। इनके आवासों में खोज करने पर ये अनुपस्थित पाई गई हैं।
जैसे - एशियाई चीता, गुलाबी सिर वाली बतख, पहाडी कोयल, जंगली चित्तीदार उल्लू

प्रश्न. भारत में वनों को सबसे बड़ा नुकसान किस काल में हुआ ?
                                     अथवा
भारत में वनों के ह्रास के लिए उपनिवेशिक वन नीति को दोषी माना जा सकता है क्या ?

उत्तर - अंग्रेजी शासन से पहले भारत में जनता द्वारा जंगलों का इस्तेमाल मुख्यत: स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार होता था।
• भारत में सर्वप्रथम लॉर्ड डलहौजी ने 1855 में एक वन नीति घोषित की जिसके तहत राज्य के वन क्षेत्र में जो भी इमारती लकड़ी के पेड़ है, वे सभी सरकार के हैं और उन पर किसी व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं होगा।
ब्रिटिश काल में भारत की पहली राष्ट्रीय वन नीति वर्ष 1894 में प्रकाशित की गई।
• भारत में वनों को सबसे बड़ा नुकसान उपनिवेश काल में रेल लाइन, कृषि, व्यवसाय, वाणिज्य, वानिकी और खनन क्रियाओं में वृद्धि से हुआ। इसलिए हम कह सकते हैं कि भारत में वनों का ह्रास उपनिवेशिक वन नीति के कारण हुआ।

प्रश्न. विस्तार पूर्वक बताओ कि मानव क्रियाएं किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पति और प्राणीजात के ह्रास के कारक हैं ?
उत्तर - संसाधनों को सर्वाधिक नुकसान औपनिवेशिक काल में हुआ जब 26,200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को खेती के लिए साफ कर दिया गया।
निम्नलिखित मानवीय क्रियाओं के कारण भी वनस्पतिजात एवं प्राणीजात को नुकसान हुआ -
• तीव्र औद्योगिकरण
• रेलवे का विकास
• अत्यधिक कृषि का दबाव
• आनंद प्राप्ति के लिए शिकार
• बढ़ती जनसंख्या के लिए आवास की आवश्यकता
• स्थानांतरित/ झूम/ स्लैश/ बर्न खेती

हिमालयन यव
यह एक सदाबहार औषधीय पौधा है, जो हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है।
इससे एक रसायन टकसोल निकाला जाता है, जिसका उपयोग विश्व में सबसे अधिक बिकने वाली कैंसर की औषधि बनाने में किया जाता है।

भारत में जैव विविधता को कम करने वाले कारक बताओं ?
• वन्य जीव के आवास का विनाश।
• जंगली जानवरों का शिकार।
• पर्यावरणीय प्रदूषण।

वनों को काटने के अप्रत्यक्ष परिणाम बताओं ?
• सूखे में वृद्धि।
• बाढ़।


भारत में वन एवं वन्य जीव संरक्षण के बारे में बताइए ?

आवश्यकता - संरक्षण से पारिस्थितिकी विविधता बनी रहती है और साथ ही हमारे जीवन संसाधन जल, वायु, मृदा भी बने रहते हैं।

वन्य जीवन संरक्षण हेतु भारत सरकार के कदम -
1. भारतीय वन्य जीवन (रक्षण) अधिनियम - 1972
2. राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव पशु विहार
3. विशेष प्राणियों के लिए विशेष योजनाएं
4. बाघ परियोजनाएं / प्रोजेक्ट टाइगर

1. भारतीय वन्य जीवन (रक्षण) अधिनियम - 1972
इस अधिनियम में संकटग्रस्त जातियों को बचाने हेतु नियम बनाए गए।
• वन्यजीवों के आवास को कानूनी संरक्षण दिया गया।
• जंगली जानवरों के शिकार व व्यापार पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया।

2. राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव पशु विहार
केंद्र सरकार व अनेक राज्य सरकारों ने राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव पशु विहार बनाए।
• भारत में 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान व 550 से अधिक वन्यजीव पशु विहार है।

3. विशेष प्राणियों के लिए विशेष योजनाएं
गंभीर खतरे में पड़े कुछ विशेष वन प्राणियों (बाघ, एक सींग वाला गैंडा, कश्मीरी हिरण, मगरमच्छ, घड़ियाल व एशियाई शेर) के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने अनेक परियोजनाओं की घोषणा की।

4. बाघ परियोजनाएं / प्रोजेक्ट टाइगर
यह विश्व की बेहतरीन वन्यजीव परियोजनाओं में से एक है और इनकी शुरुआत 1 अप्रैल 1973 में इंदिरा गांधी के समय हुई।
• वर्तमान में भारत में 50 टाइगर रिजर्व है।
उद्देश्य - बाघों की संख्या में वृद्धि करना।
        - बाघों की खाल के व्यापार को रोकना।
       - जैव जाति को बचाना।


प्रमुख बाघ रिजर्व क्षेत्र


 कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान
 उत्तराखंड
 सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान
 पश्चिम बंगाल
 बक्सा टाइगर उद्यान
 पश्चिम बंगाल
 बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान
 मध्य प्रदेश
 सरिस्का पशु विहार
 राजस्थान
 मानस बाघ रिजर्व 
 असम
 पेरियार बाघ रिजर्व
 केरल



नोट - डोलोमाइट खनिज के खनन के कारण बक्सा टाइगर रिजर्व गंभीर खतरे में है।

राजस्थान में 3 बाघ रिजर्व क्षेत्र है जबकि चौथा बाघ रिजर्व बूंदी में प्रस्तावित है -
• सरिस्का टाइगर रिजर्व
• रणथंभौर टाइगर रिजर्व
• मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व


वन और वन्य जीव संसाधनों के प्रकार एवं उनके क्षेत्र

प्रशासनिक आधार पर वनों को तीन भागों में बांटा जाता है -
1. आरक्षित वन (Reserve)
2. संरक्षित वन
3. अवर्गीकृत वन

1. आरक्षित (स्थाई) वन - ये वे वन है, जिन्हें इमारती लकड़ी या अन्य वन उत्पाद उत्पादित करने के लिए आरक्षित कर लिया गया है।
इनमें पशुओं को चराने व खेती की अनुमति नहीं होती है।
भारत का आधे से अधिक वन क्षेत्र आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया है।
क्षेत्र - मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड,...

प्रश्न.भारत में किस राज्य में स्थाई वन सर्वाधिक है ?
उत्तर - मध्य प्रदेश

2. संरक्षित वन - इन वनों को और अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए उनकी सुरक्षा की जाती है।
इनमें पशु चराने व खेती करने की अनुमति विशेष प्रतिबंधों के साथ दी जाती है।
देश के कुल वन क्षेत्र का एक-तिहाई हिस्सा संरक्षित है।
क्षेत्र - बिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान।

3. अवर्गीकृत वन - अन्य सभी प्रकार के वन और बंजर भूमि जो सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में होते हैं, अवर्गीकृत वन कहलाते हैं।
इनमें लकड़ी काटने व पशुचारण पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है।
क्षेत्र - पूर्वोत्तर के सभी राज्य एवं गुजरात।

प्रश्न.भारत के कोई दो उत्तरी पूर्वी राज्यों के नाम बताइए जिनमें 60% से अधिक वनावरण है। दो कारण भी दीजिए ?
उत्तर - 1. अरुणाचल प्रदेश
         2. मणिपुर

कारण - 1. बहुत अधिक वर्षा होना।
           2. भूमि, पहाड़ी व ऊंची नीची है जिसके कारण वनों का शोषण आसानी से नहीं हो सकता और वन सुरक्षित रहते हैं।

घनत्व के आधार पर वनों को सामान्यतः 3 वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है -

1. अत्यधिक सघन वन (Very Dense Forest)
ऐसे वन जहां वृक्ष वितान का घनत्व 70% से अधिक हो।

2. मध्यम सघन वन (Medium Dense Forest)
ऐसे वन जहां वृक्ष वितान का घनत्व 40% से 70% हो।

3. खुले वन (Open Forest)
ऐसे वन जहां वृक्ष वितान का घनत्व 10% से 40% हो।

झाड़ी क्षेत्र (Scrubs)
ऐसे वन जहां वृक्ष वितान का घनत्व 10% से कम हो।

कैनोपी और कैनोपी घनत्व अथवा वृक्ष वितान का घनत्व
पेड़ों की शाखाओं और पर्ण के आवरण को कैनोपी कहा जाता है।
पेड़ों की छतरी द्वारा कवर की गई भूमि के प्रतिशत क्षेत्र को कैनोपी घनत्व कहा जाता है।

 वन का प्रकार
 वृक्ष वितान का घनत्व 
 अत्यधिक सघन वन (Very Dense Forest)
 70% से अधिक
 मध्यम सघन वन (Medium Dense Forest)
 40% से 70%
 खुले वन (Open Forest)
 10% से 40%
 स्क्रब्स (Scrubs)
 10% से कम


समुदाय और वन संरक्षण

• राजस्थान के अलवर जिले में 5 गांव के लोगों ने 1200 हेक्टेयर भूमि भैरोदेव डाकव सेंचुरी घोषित कर दी है। जिसके अपने ही नियम कानून है जो कि शिकार वर्जित करते हैं।
• हिमालय क्षेत्र में प्रसिद्ध चिपको आंदोलन वन कटाई रोकने व सामुदायिक वानकीकरण अभियान को सफल बनाने में कामयाब रहा है।
टिहरी में किसानों द्वारा बीज बचाओ आंदोलन - 1987 के माध्यम से रासायनिक उर्वरक के बिना भी विभिन्न फसलों का उत्पादन किया गया।
• मुंडा और संथाल जनजातियां महुआ और कदम के पेड़ों की पूजा एवं संरक्षण करते हैं।

वन और वन्य जीव संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाज
• प्रकृति की पूजा करना
• पेड़ पौधों की पूजा करना - मुंडा और संथाल जनजाति के लोग महुआ और कदम के पेड़ों की पूजा एवं संरक्षण करते हैं।
• देश में अनेक संस्कृति के लोग मिलना - राजस्थान में विश्नोई समाज के लोग अपने आसपास के क्षेत्रों में निवास करने वाले हिरण, चिंकारा, नीलगाय, मोर आदि वन्य पशुओं की सुरक्षा करते हैं।

संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम
सबसे पहले उड़ीसा राज्य  में 1988 में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
• इसके अंतर्गत वन विभाग के अधिकारी एवं गांव के लोग (स्थानीय लोग) साथ मिलकर कार्य करते हैं।
• काम के बदले में गांव के लोगों को वन उत्पादों से होने वाले लाभ में हिस्सा दिया जाता है।

वनों के संरक्षण के उपायों का वर्णन कीजिए।
• वनों का काटना बिल्कुल बंद होना चाहिए। गैरकानूनी ढंग से वृक्ष काटने वालों पर भारी जुर्माना किया जाना चाहिए।
• संचार के मुख्य साधन जैसे समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविज़न और सिनेमा आदि भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।
• राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार प्राकृतिक वातावरण को शुद्ध करने के लिए वनों के अंतर्गत क्षेत्र को 33% लाना होगा।
• कहीं-कहीं लोगों ने वृक्ष काटने के विरुद्ध अपनी आवाज भी उठाई है। इस संबंध में चिपको आंदोलन महत्वपूर्ण है।

प्रश्न. भारत में किस क्षेत्र में बीज बचाओ आंदोलन प्रसिद्ध है ?
उत्तर - टिहरी क्षेत्र में

प्रश्न. भारत के किस राज्य में संयुक्त वन प्रबंधन पहला प्रस्ताव पास किया गया ?
उत्तर - उड़ीसा

प्रश्न. पृथ्वी के विविध वनस्पति जात और प्राणीजात पर किस कारण से दबाव बढ़ा है ?
उत्तर - पर्यावरण के प्रति असंवेदना।

SAVE WATER

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