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भारत में आने वाले विदेशी यात्री

भारत में आने वाले विदेशी यात्री

भारत में आने वाले विदेशी यात्री


यूनानी यात्री

हेरोडोटस
• यह प्रथम यूनानी इतिहासकार था। इसे रोमन दार्शनिक सिसरो ने इतिहास का पिता कहा।
• सर्वप्रथम हिस्ट्री शब्द का प्रयोग किया।
• इसका ग्रंथ हिस्टोरिका का है। यह अनुश्रुतियों पर आधारित व्यापार संबंधित ग्रंथ है।
नोट - हेरोडोटस कभी भी भारत नहीं आया।

मेगस्थनीज
• 305 अथवा 304 BC में आया।
• यह सेल्यूकस निकेटर का राजदूत बनकर चंद्रगुप्त मौर्य के पाटलिपुत्र दरबार में आया था।
• इसका ग्रंथ इंडिका (ग्रीक भाषा में) है, परंतु यह मूल स्वरूप में उपलब्ध नहीं है।
इंडिका के उद्धरणों का उल्लेख स्ट्रेबो, एरियन, जस्टिन ने किया है।
• इंडिका में मौर्य काल के समाज, संस्कृति व नगर प्रशासन का वर्णन मिलता है।
• मौर्य काल में दास प्रथा का प्रचलन नहीं था।
लकड़ी से भी भवनों व राज महलों का निर्माण किया जाता था।
• भारत का सबसे बड़ा नगर पाटलिपुत्र था। जो की गंगा और सोन नदी के संगम पर स्थित है।
• मेगस्थनीज के अनुसार भारत में कभी अकाल नहीं पड़ा।
नोट - भारत का इतिहास लिखने वाला प्रथम विदेशी इतिहासकार मेगस्थनीज था।

नोट - सिकंदर के साथ आने वाले लेखकों में निर्याकस, आनेसिक्रटस, आस्टिबुलस के विवरण अधिक प्रमाणिक एवं विश्वसनीय है।

 राजदूत
 राजा
 दरबार
 मेगस्थनीज
 सेल्यूकस निकेटर 
 चंद्रगुप्त मौर्य
 डाइमेकस
 आन्तियोकस (सीरिया)
 बिंदुसार मौर्य
 डायोनिसियस
 टॉलमी फिलेडेल्फस (मिश्र)
 अशोक



टॉलमी
• यह रोम का रहने वाला था।
• 80 से 115 ईस्वी तक भारत के बंदरगाहों का भ्रमण किया और भारत का भूगोल नामक ग्रंथ लिखा। यह ग्रंथ बंदरगाहों एवं व्यापार से संबंधित है।

प्लिनी ने प्रथम शताब्दी में नेचुरल हिस्ट्री नामक ग्रंथ लिखा जिसमें भारतीय पशु, पेड़-पौधें, खनिजों का वर्णन है।


चीनी यात्री

शुभ चिन प्रथम चीनी लेखक था जिसने भारत के विषय में लिखा।

फाहियान
• 399 ईस्वी में चंद्रगुप्त / विक्रमादित्य (गुप्त वंश) के काल में भारत आया था। इसमें अपनी भारत यात्रा का वर्णन फो-क्यो-की नामक पुस्तक में किया है।
• यह 14 वर्षों तक भारत में रहा था।

सुंगयून (518 ईस्वी)
3 वर्षों तक बौद्ध धर्म की प्राप्तियां एकत्रित करके स्वदेश लौट गया।

ह्वेनसांग
• यह मध्य एशिया के सिल्क मार्ग से 629 ईस्वी के आसपास भारत आया था।
• पुस्तक - सी-यू-की
• यह हर्षवर्धन के दरबार कन्नोज में आया था।
• हर्ष से इसकी मुलाकात कजंगल नामक स्थान पर हुई।
• इसने हर्षवर्धन को शिलादित्य कहा है।
• इसके अनुसार हर्षवर्धन प्रत्येक 5वें वर्ष प्रयाग जाकर महा मोक्षपरिषद (प्रयाग सभा) का आयोजन करता था।
• इसने थानेश्वर में जयगुप्त नामक बौध्द विद्वान से शिक्षा ग्रहण की थी।
• इसने नालंदा विश्वविद्यालय में भी अध्ययन किया था।
• इसके मित्र ह्वीली ने इसकी जीवनी लिखी है।
• ह्वेनसांग को नीति का पंडित, वर्तमान शाक्यमुनि तथा यात्रियों का राजकुमार भी कहा जाता है।
• यह बैराठ (राजस्थान) भी आया था।
नोट - चालुक्यों के शासनकाल में चीन एवं भारत के संबंधों का वर्णन भी किया।

मात्वालिन के विवरण से हर्ष के पूर्वी अभियानों की जानकारी प्राप्त होती है।

इत्सिंग
• यह 671 ईस्वी में भारत आया तथा नालंदा में 400 संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन किया।
• इसके अनुसार गुप्त वंश का संस्थापक श्री गुप्त था।

चाऊ जु कुआ (1225 ई.) की पुस्तक चु-फान-चीन से चोल युगीन व्यवस्था की जानकारी प्राप्त होती है।


अरबी/ फारसी यात्री

चचनामा पुस्तक में अरबों की सिंध विजय का उल्लेख मिलता है।

सुलेमान
• 9वीं सदी में मिहिरभोज (गुर्जर-प्रतिहार वंश) के कन्नौज दरबार में आया।
• इसके अनुसार मिहिरभोज मुसलमानों का घोर विरोधी था।

अलमसूदी
• 10वीं सदी में महिपाल (गुर्जर-प्रतिहार वंश) के कन्नौज दरबार में आया।
• पुस्तक - मुरूजुज जहब
• अलमसूदी को अरब का हेरोडोटस कहते है।

अलबरूनी
• यह ईरान के खीवा (ख्वारिज्म) का निवासी था।
• 1017 ईस्वी में गजनी के शासक महमूद गजनवी ने खीवा पर आक्रमण किया और अलबरूनी को गजनी ले आया।
• अलबरूनी को गजनी का राज ज्योतिषी का पद दिया।
• अलबरूनी 1018 ईस्वी में महमूद गजनवी के साथ कन्नौज अभियान के समय भारत आया था।
• पुस्तक - तहकीक-ए-हिन्द
• यह प्रथम मुसलमान था जिसने वेद, पुराण तथा श्रीमद्भागवत गीता का अध्ययन किया तथा संस्कृत सीखी।

इब्नबतूता
• 14वीं सदी में मुहम्मद बिन तुगलक के समय दिल्ली आया।
• मुहम्मद बिन तुगलक ने इसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया था।
• पुस्तक - रिहला (सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के विषय में)

मिनहाजुद्दीन (मिनहाज उस सिराज) की पुस्तक तबकात-ए-नासिरी से मोहम्मद गौरी के हिंदुस्तान विजय की जानकारी मिलती है।

अन्य संबंधित

तिब्बत इतिहासकार तारानाथ ने कंग्यूर तथा तंग्यूर नामक पुस्तक लिखी है।

वेनिस (इटली) का मार्कपोलो 13वीं सदी के अंत में भारत (पाण्ड्य देश) आया था।
इसे मध्यकालीन यात्रियों का राजकुमार कहा जाता है।

मैक्स मूलर ने प्राचीन धर्म ग्रंथों का अनुवाद सैक्रेड बुक्स ऑफ द ईस्ट सीरीज में किया है।

विंसेंट आर्थर स्मिथ ने प्राचीन भारत का पहला सुव्यवस्थित इतिहास लिखा।

जेम्स मिल ने हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया नामक पुस्तक लिखी।

एशियाटिक सोसाइटी द्वारा अनुवादित प्रथम पुस्तक अभिज्ञान शाकुंतलम थी।

 यूनानी यात्री
 चीनी यात्री
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 टॉलमी
 सुंगयून 
 अलबरूनी
 प्लिनी
 ह्वेनसांग
 इब्नबतूता
 निर्याकस
 मात्वालिन
 मिनहाजुद्दीन
 आनेसिक्रटस
 इत्सिंग

 आस्टिबुलस
 चाऊ जु कुआ

 डाइमेकस


 डायोनिसियस




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