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निर्यात तैयारी सूचकांक 2020

निर्यात तैयारी सूचकांक 2020


निर्यात तैयारी सूचकांक 2020

नीति आयोग ने प्रतिस्पर्धात्मकता संस्थान की साझीदारी में 26 अगस्त, 2020 को निर्यात तत्परता सूचकांक 2020 रिपोर्ट जारी की।

उद्देश्य: भारतीय राज्यों की निर्यात तैयारी और निष्पादन की जांच करने के लिए चुनौतियों और अवसरों की पहचान करना, सरकारी नीतियों की प्रभावोत्पादकता को बढ़ाना और एक सुविधाजनक नियामकीय संरचना को प्रोत्साहित करना।

सूचकांक की संरचना में 4 स्तंभ- नीति, व्यवसाय परितंत्र, निर्यात परितंत्र, निर्यात निष्पादन शामिल हैं।

तथा 11 उप स्तंभ - निर्यात संवर्धन नीति, संस्थागत संरचना, व्यवसाय वातावरण, अवसंरचना, परिवहन संपर्क, वित्त की सुविधा, निर्यात अवसंरचना, व्यापार सहायता, अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना, निर्यात विविधीकरण और विकास अनुकूलन शामिल हैं।

अधिकांश भारतीय राज्यों ने निर्यात विविधीकरण, परिवहन संपर्क एवं अवसंरचना के उप स्तंभों में 50 प्रतिशत से अधिक के औसत स्कोर के साथ औसतन अच्छा प्रदर्शन किया है।

छ: तटीय राज्य शीर्ष दस रैंकिंग में शामिल हैं, जो निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मजबूत सक्षमकारी और सुगमकारी कारकों की उपस्थिति का संकेत देते हैं।
गुजरात, महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु क्रमशः शीर्ष तीन स्थानों पर काबिज हैं।
राजस्थान को चौथा स्थान मिला है।
जम्मू-कश्मीर 36वें स्थान के साथ आखिरी स्थान पर है।

भूमि से घिरे हुए राज्यों में (मैदानी राज्यों में) राजस्थान का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है, जिसके बाद तेलंगाना और हरियाणा का स्थान है।

हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड शीर्ष पर है, जिसके बाद त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश का स्थान है।

केंद्र-शासित प्रदेशो में दिल्ली ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, जिसके बाद गोवा और चंडीगढ़ हैं।

• देश भर की सूची में उत्तर प्रदेश का स्थान 11वां और मैदानी राज्यों में पांचवा स्थान है।

• देश भर की सूची में बिहार के 30वें और मैदानी राज्यों में 10वें स्थान पर रहा है।

• देशभर में स्थान -
हरियाणा 7, छत्तीसगढ़ 8, मध्य प्रदेश 12, उत्तराखंड 13, झारखंड 14, दिल्ली 15 और पंजाब 18वें स्थान पर है।

• विश्व निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने और निर्यात को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने के लिए सरकार हर जिले में एक्सपोर्ट (निर्यात) हब बनाएगी।
गौरतलब है कि विश्व निर्यात में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1.7% है, जिसे इस दशक में 5% तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

एक जिला एक उत्पाद योजना पर भी भारत सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है, जिससे उत्पादन बढ़ने से निर्यात भी बढ़ेगा।

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