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पुलिस सुधार की आवश्यकता

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पुलिस सुधार की आवश्यकता

• हाल ही में अश्वेत अफ्रीकी अमेरिकी जॉर्ज फ्लायड की मृत्यु के बाद पूरे अमेरिका में पुलिस सुधार की मांग की गई।
परिणामस्वरूप 'जस्टिस इन पुलिसिंग' विधेयक का प्रस्ताव लाया गया, जिसमें पुलिस सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तौर-तरीकों की चर्चा की गई, ताकि पुलिस के दुराचरण, अत्यधिक बल प्रयोग और नस्लवादी पक्षपात पर अंकुश लगाया जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 जून को सुरक्षित पुलिसिंग का आदेश दिया। इसमें बल प्रयोग की आवश्यकता, चेतावनी, पुलिस का  प्रशिक्षण आदि बातों पर ध्यान दिया गया है।
इसके अलावा सामुदायिक पुलिसिंग और सामाजिक कार्यकर्ताओं को विधि प्रवर्तन तंत्र के साथ मिलकर कार्य करने पर जोर दिया गया है।

• हाल ही मई 2020 में राजस्थान में चूरू के राजगढ़ थाने के एसएचओ विष्णुदत्त विश्नोई जी ने दबाव सहन न कर पाने के कारण आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद पुलिस सुधार की मांग की गई।

• हाल ही में 2 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे द्वारा आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद भी पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत महसूस की गई।

भारत में पुलिस प्रणाली

भारत की पुलिस व्यवस्था औपनिवेशिक ढांचे पर आधारित है। चूंकि समय बदल गया है, इसलिए इस व्यवस्था में सुधार की मांग हमेशा की जाती रही है।

लॉर्ड कॉर्नवालिस ने ऐसे पुलिस प्रशासन की बात की, जो कंपनी के प्रति वफादारी निभाए। और दरोगा के पद का सृजन किया गया।
• 1860 में भारतीय दंड संहिता और 1861 में दंड प्रक्रिया संहिता के अस्तित्व में आने के बाद एक पुलिस संहिता की जरूरत महसूस की गई, जिससे आपराधिक विधि का प्रवर्तन कराया जा सके।
• 1860 में गठित पुलिस आयोग के आधार पर 1861 का पुलिस अधिनियम बनाया गया।
• 1902 में लॉर्ड कर्जन ने सर एंड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया और सुधार की संभावना तलाशी।

पुलिस पर कार्यभार अधिक है

पुलिस से हम सदा आज्ञाकारी, वफादार, सक्षम और कुशल होने की अपेक्षा करते हैं।
समाज के समस्त कार्यों का भार इस एक व्यवस्था पर ही टिका हुआ है। जैसे -
अपराध नियंत्रण और निवारण का कार्य।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
जेल की व्यवस्था बनाए रखना।
भीड़ नियंत्रण।
बीमारी, आपदा या कोई विशेष कार्यक्रम हो, किसी महत्त्वपूर्ण व्यक्ति का आगमन हो, हर जगह पुलिस से अपेक्षा की जाती है।

पुलिस प्रशासन में कमियां

• औपनिवेशिक ढांचा
अधिक कार्यभार के कारण पुलिस कुंठाग्रस्त होकर गरीब और लाचार जनता पर बरबस ही अत्याचार कर बैठती है।
पर्याप्त वेतन की कमी एवं आधुनिक जीवन शैली के कारण पुलिस प्रशासन में भ्रष्टाचार एक प्रमुख समस्या है।
• पुलिस विभाग दो भागों में विभक्त है - सवर्ण और अवर्ण। दोनों की ही अपनी-2 शिकायतें हैं।
• अपराधों की प्राथमिकी दर्ज न करने की प्रवृत्ति।

पुलिस सुधार के लिए किए गए प्रयास

• 1977 में गठित राष्ट्रीय पुलिस आयोग ने 1988 तक अपनी 8 रिपोर्टें प्रस्तुत की, पर उन सुझावों पर अमल नहीं किया गया।
• प्रकाश सिंह बनाम भारतीय संघ 2006 के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुलिस के कार्य को मूलभूत कार्य और नीतिगत कार्यों के बीच विभाजित करने को कहा गया।
पुलिस अधिकारियों के कार्यकाल को निर्धारित, पुलिस कल्याण ब्यूरो के गठन एवं पुलिस थानों में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई।
• 2006 में मॉडल पुलिस अधिनियम बनाया गया।
• प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में गुवाहाटी में एक कार्यक्रम में स्मार्ट पुलिस पर बल दिया। (SMART)
एस = स्ट्रिक्ट और सेंसेटिव
एम = मॉडर्न और मोबाइल
ए = अलर्ट और अकाउंटेबल
आर = रिलाएबल और रेस्पॉन्सिव
टी = टेक्नोसेवी और ट्रेंड

पुलिस सुधारों के लिए अभी तक समुचित ढंग से कार्य नहीं किया गया है।

पुलिस सुधार के लिए सुझाव

कार्यभार कम किया जाए और कार्य के घंटे निश्चित किए जाए। जैसे - केरल में एक पुलिसकर्मी को 8 घंटे अनिवार्य ड्यूटी का प्रावधान किया गया है। आपातकालीन स्थिति में ही उसे 12 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ेगी।
• कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के कार्यों को अलग-अलग किया जाए। जैसे - चेन्नई में
• भ्रष्टाचार निवारण हेतु वेतन एवं आवासीय सुविधाएं बढ़ाई जाए। एवं भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जाए।
• ईमानदार पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहित किया जाए।
• पेट्रोलिंग हेतु वाहनों की संख्या एवं सीसीटीवी कैमरे बढ़ाएं जाए।
पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और समय-समय पर पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाए।
• प्राथमिकी दर्ज करते समय अपराधों का विवरण बिना किसी जोड़-घटाव के लिखा जाना चाहिए, ताकि गिरफ्तारी और दोष सिद्धि के अंतराल को कम किया जा सके।
• सामुदायिक पुलिसिंग पर बल दिया जाना चाहिए।

नोट - हाल ही 26 जून 2020 को उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालतों, मेट्रो, एयरपोर्ट, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, प्रमुख धार्मिक स्थलों व बैंकों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तर्ज पर उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (UPSSF) के गठन को मंजूरी दी है।

CISF = Central Industrial Security Force.
UPSSF = Uttar Pradesh Special Security Force.

स्त्रोत - जनसत्ता समाचार पत्र

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