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क्या भारत को अफगान नीति में बदलाव लाना चाहिए ?

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क्या भारत को अफगान नीति में बदलाव लाना चाहिए ?


प्रश्न. अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति को देखते हुए क्या भारत को अफगान नीति में बदलाव लाना चाहिए ?

उत्तर- वर्तमान स्थिति में, एक तरफ 29 फरवरी 2020 को 'यूएसए- तालिबान समझौता' संपन्न हुआ जिसने यूएसए सैन्य-बल की अफगानिस्तान से वापसी तथा अफगानिस्तान धरती का प्रयोग आतंकवादी संगठनों की शरणार्थी व यूएसए विरोधी प्रतिक्रियाओं के लिए नहीं होगा का ज़िक्र था जिसे लागू नहीं किया जा सका, सरकार की बात करें तो सितंबर 2019 में अफ़गानिस्तान में चुनावी प्रक्रिया संपन्न हुई तथा 5 महीने के इंतजार के बाद अहमद गनी राष्ट्रपति बने वहीं विरोधी प्रतिद्वंदी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने भी चुनावी धांधली का हवाला देते हुए स्वयं को राष्ट्रपति घोषित किया।

हाल ही 17 मई 2020 को अफगानिस्तान में शक्ति-साझाकरण समझौता हुआ है, जिसके तहत अशरफ गनी राष्ट्रपति के पद पर बने रहेंगे जबकि अब्दुल्ला अब्दुल्ला राष्ट्रीय समाधान उच्च परिषद के प्रमुख का पद संभालेंगे। गौरतलब है कि सितंबर 2019 में हुए चुनाव में गनी की जीत को उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी अब्दुल्ला ने मानने से इनकार कर दिया था एवं एक समानांतर सरकार का गठन किया था।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सचिवालय ने अफगानिस्तान के भविष्य निर्धारण व शांति स्थापना हेतु 6 सीमावर्ती देशों की मीटिंग (चीन, पाक, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान उज़्बेकिस्तान) आयोजित की लेकिन भारत को शामिल नहीं किया गया यह न केवल भारत की प्रतिष्ठा को चुनौती थी बल्कि भारत द्वारा 2001 के बाद अफगान विकास के निवेश (3 बिलियन डॉलर से ज्यादा) पर प्रश्न चिह्न था।

भारत की वर्तमान नीति -
• सीधा सैन्य हस्तक्षेप नहीं
• सारे दांव अशरफ गनी सरकार पर
• तालिबान के साथ, उज्बेक व तज़ाकि  लीडर से कोई वार्ता नहीं (आतंकवाद विरोधी नीति )।
• अशरफ गनी भारतीय हितों को अफगानिस्तान में सुरक्षित नहीं कर पाए।

अफगान नीति में बदलाव क्यों जरूरी

• तालिबान के साथ वार्ता करनी चाहिए। (जैसे ही यूएसए- सैन्य वापसी होगी तालिबान की सत्ता में वापसी हो सकती है तथा 1996 से 2001 की स्थिति जिसमें भारत तालिबान के बीच कोई संबंध नहीं थे वापस आ सकती है)
• तालिबान वापसी के बाद भारत की निवेश संबंधी गतिविधियों को अफगानिस्तान में खतरा।
• अफगानिस्तान के भविष्य निर्धारण में सक्रिय भाग लेने के लिए तथा भारतीय उपमहाद्वीप की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाने हेतु।
• अफगानिस्तान में पाकिस्तानी प्रभाव कम करने के लिए, क्योंकि तालिबान ने स्पष्ट किया है कि "हम पाकिस्तान की कठपुतली नहीं है ,हम अफगानिस्तान के हितों की रक्षा हर हाल में करेंगे।"
'कनेक्ट टू सेंट्रल एशिया नीति 'को बनाए रखने के लिए तथा भारतीय उपमहाद्वीप में आतंकवाद खत्म करने के लिए।

अत: भारत को वैश्विक कोविड-19 महामारी के दौर में सुधारात्मक कूटनीतिक कार्यवाही करने की आवश्यकता है।

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