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अध्याय- 1 सामान्य हिंदी ।। वर्ण विचार

Varn vichar, Hindi grammer

सामान्य हिंदी ।। वर्ण विचार 


हिन्दी वर्णमाला का क्रम निम्न प्रकार है -

स्वर क्रम -
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः, ऋ

 संख्या
 व्यंजन क्रम
 5
 क ख ग घ ड.
 10
 च छ ज झ ज़
 15
 ट ठ ड ढ ण
 20
 त थ द ध न
 25
 प फ ब भ म
 29
 य र ल व
 33
 श ष स ह

अन्त में संयुक्ताक्षर = क्ष  त्र  ज्ञ

शब्दकोश के लिए वर्णक्रम इस प्रकार है -

अं, अँ, अः, अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ,
तथा इसके बाद
क वर्ण से लेकर ह तक के क्रमानुसार वर्ण।
क (क्ष) ख ग घ ड.
च छ ज (ज्ञ) झ ज़
ट ठ ड (ड) ढ (ढ) ण
त (त्र) थ द ध न
प फ ब भ म
य र ल व
श (श्र) ष स ह

नोट - क़, ख़, ग़ ऐसे नीचे जो बिंदु लगा होता है, उसे नुक्ता कहते है।

वर्ण विचार

हिन्दी भाषा की वह होटी से छोटी ध्वनि जिसके और अधिक टुकड़े न किए जा सकें , वर्ण कहलाती है।
वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते है।
हिन्दी वर्णमाला में वर्णों की संख्या 44, हिन्दी बाल पोथी में 49 तथा देवनागरी हिन्दी लिपि में 52 होती है।

वर्ण के भेद-

वर्ण के दो भेद होते हैं-
1. स्वर
2. व्यजन

1. स्वर-

वे वर्ण जिनका उच्चारण स्वतन्त्र रूप से किया जा सके या अन्य किसी वर्ण की सहायता के बिना जिनका उच्चारण किया जा सके , स्वर कहलाते हैं।
ये संख्या में 11 होते हैं जबकि मात्राओं की संख्या 10 होती है।
अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ -- 11 संख्या
-

नोट- 'अ' एक ऐसा स्वर है जिसकी कोई मात्रा नहीं होती है।

स्वर के भेद -
(1) हस्व स्वर - अ. इ. उ, ऋ ---- 4     लघु/मूल रूढ़
(2) दीर्घ स्वर - आ, ई. ए, ऐ, ऊ, ओ, औ --- 7 गुरू|सन्धि / यौगिक

2. व्यंजन -

वे वर्ण जिनका उच्चारण स्वतन्त्र रूप से न होकर स्वरों की सहायता से किया जाता है ,व्यञ्जन वर्ण कहलाते हैं।
ये संख्या में 33 होते हैं । .
इन्हें वयक्त करने के लिए हलन्त (् ) का सहारा लिया जाता है।

व्यञ्जन के भेद -
(i) स्पर्श व्यञ्जन - क् से म् तक ----- 25
(ii) अन्त : स्थ व्यञ्जन - य् ,र् , ल् , व् ----4
(iii) ऊष्म व्यञ्जन - श् ,ष्, स् ह् --------4

(i) स्पर्श व्यञ्जन -
स्पर्श का शाब्दिक अर्थ होता है -  छूना।
वे वर्ण जिनका उच्चारण करते समय मुख के कोई दो भाग आपस में एक- दूसरे को स्पर्श करते हैं , स्पर्श व्यञ्जन कहलाते हैं।
ये संख्या में 25 होते है, जिन्हें पाँच-2 के 5 वर्गों में बाँटा गया है
क वर्ग - क् , ख् , ग् , घ् , ङ्
च वर्ग - च् , छ् , ज् , झ् , ञ्
ट वर्ग - ट् , ठ् , ड्, ढ्, ण्
त वर्ग - त्, च् , द् , ध् , न्
प वर्ग - प् , फ् , ब् , भ् , म्

(ii) अन्त : स्थ व्यञ्जन
अन्त : स्थ का शाब्दिक अर्थ होता है - अन्दर की ओर या मध्य में रहने वाला।
वे वर्ण जिनका उच्चारण करते समय श्वास वायु मुख में अन्दर की और प्रवेश करती है , अन्तः स्थ व्यञ्जन कहलाते हैं।
ये संख्या में 4 होते हैं।

(iii) ऊष्म व्यञ्जन -
ऊष्म का शाब्दिक अर्थ होता है - गर्म।
वे वर्ण जिनका उच्चारण करते समय श्वास वायु मुख से वाष्प के रूप में बाहर निकलती है , ऊष्म व्यञ्जन कहलाते हैं।
ये संख्या में चार होते हैं।

संयुक्त वर्ण

दो व्यजनों के मेल से बने वर्ण संयुक्त वर्ण कहलाते हैं।
क्ष् = क् + ष्
त्र् = त् + र्
ज्ञ् = ज् + ञ्
श्र् = श् + र्

अयोगवाह वर्ण
वे वर्ण जिनका योग न होने पर भी साथ-2 चलते हैं जो न
तो स्वर होते हैं और न ही व्यञ्जन, अयोगवाह वर्ण कहलाते हैं।
अं → अनुस्वार
अ : → विसर्ग

नोट - हिन्दी शब्दकोश की शुरुआत इन्हीं वर्णों से मानी गई है।

अं अँ  अः  अ
कं कँ  क: क ... ह

उत्क्षिप्त वर्ण 

जिन ध्वनियों के उच्चारण में जिहवा, मूर्धा को स्पर्श कर तुरन्त नीचे गिरती हैं, उन्हें उत्क्षिप्त वर्ण करते हैं। 
जैसे - ड़ , ढ़

नियम - 1 यदि शब्द की शुरुआत इन वर्णों से हो तो लिखते समय इनके नीचे बिंदु नहीं आता है। 
जैसे - डमरू, ढोलक , डलिया, ढक्कन, डाली

नियम - 2 यदि शब्द के अन्तर्गत इनसे पहले आधा वर्ण आता है, तो भी लिखते समय इनके नीचे बिंदु नहीं आता है। 
जैसे - पण्डित , बुड्डा , अड्डा , खण्ड , मण्डल आदि।

उपर्युक्त दोनों नियमों के अलावा प्रत्येक स्थिति में इनके नीचे बिंदु आता है। 
जैसे - पढ़ाई , लड़ाई , सड़क , पकड़ना , ढूँढ़ना आदि।

रकार / रेफ या र् सम्बन्धी नियम -

नियम -1 यदि र् के बाद व्यञ्जन वर्ण आए तो र् को उसी व्यञ्जन वर्ण के ऊपर लिखते हैं अर्थात् जिस व्यञ्जन वर्ण से पहले र् का उच्चारण किया जाता है, र् को उसी व्यञ्जन वर्ण के ऊपर लिखा जाता है। 
जैसे - कर्म , धर्म , वर्ण , दर्शक , स्वर्ग , अर्थात् , पुनर्निर्माण 
आशीर्वाद 

नियम - 2 यदि र् से पहले व्यञ्जन वर्ण आए तो र् को उसी व्यञ्जन वर्ण के मध्य में लिखा जाता है। 
जैसे - प्रकाश , प्रभात , प्रेम , क्रम , भ्रम , भ्रष्ट , भ्राता

नियम - 3 ट वर्ग में र् को हमेशा वर्ण के नीचे लिखा जाता है।
जैसे - राष्ट्र, ट्रक, ड्राइवर, ड्रग्स, ड्रामा, षड्राग, षड्रस

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