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राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में 1857 की क्रांति

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राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में 1857 की क्रांति

कारण
1. राज्यों के आंतरिक शासन में हस्तक्षेप। जैसे - 1821 ई. में मांगरोल युद्ध में कोटा महाराव के विरुद्ध दीवान जालिम सिंह की सहायता।
2. राज्यों के उत्तराधिकार मामलों में हस्तक्षेप। जैसे - अलवर, भरतपुर।
3. राज्यों की कमजोर वित्तीय स्थिति।
राज्यों को खिराज देने के साथ-2 कंपनी के लिए सेना रखनी होती थी। जोधपुर लीजियन (1835), मेवाड़ भील कोर (1841) की स्थापना राज्यों के खर्च पर की गई।
4. रियासतों का शिथिल प्रशासन - रेजिडेंट शक्तिशाली बने।
5. किसानों के हितों पर कुठराघात। जैसे - कर वृद्धि

क्रांति का स्वरूप/प्रकृति
• ब्रिटिश इतिहासकारों ने सैनिक विद्रोह तथा गैर-ब्रिटिशों ने इसे जनाक्रोश कहा है।
• भारतीय इतिहासकारों ने इसे जनसाधारण का राष्ट्रीय आंदोलन कहां है, जिसमें हिंदू-मुस्लिम सबने भाग लिया।
• वीर सावरकर ने अपनी पुस्तक भारत का स्वातंत्र्य समर में इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा। राजस्थान की आम जनता ने विद्रोहियों का साथ दिया।
• सूर्यमल मीसण व बांकीदास जैसे कवियों ने भी अपना योगदान दिया।
अत: हम कह सकते हैं कि 1857 का यह संघर्ष विदेशी शासन से मुक्त होने का प्रथम प्रयास था, जिसे राजस्थान का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा जाना अनुचित नहीं होगा।

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