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भारत-भूटान संबंध

भारत-भूटान संबंध, www.devedunotes.com



भूटान सामान्य जानकारी

राजधानी - थिंपू
स्थिति - भारत के उत्तर-पूर्व और चीन के दक्षिण में
क्षेत्रफल - करीब 38000 वर्ग किमी
भूटान का करीब 75% भाग पहाड़ी क्षेत्र में है।
जनसंख्या - 7.42 लाख
वर्तमान प्रधानमंत्री - लोटे शेरिंग
वर्तमान राजा - जिग्मे सिंगे वांगचुक

भूटान जितना कार्बन उत्सर्जित करता है, उससे 3 गुना ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड उसके जंगल अवशोषित कर लेते हैं। इसीलिए इसे कार्बन निगेटिव देश कहा जाता है।

पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर भूटान में बढ़ते कार प्रयोग को कम करने के लिए भारी वाहन शुल्क, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अनिवार्य तथा बिजली चालित वाहनों को बढ़ावा दिया गया है।

भारत भूटान के साथ 699 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय भूटान दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे पहले भूटान गए थे और मई 2019 में फिर से प्रधानमंत्री बनने के बाद वह 17 अगस्त 2019 को दो दिवसीय यात्रा पर भूटान पहुंचे।
भारत और भूटान के बीच मांगदेछूू जलविद्युत परियोजना, नॉलेज नेटवर्क,मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, स्पेस सेटेलाइट और रुपे कार्ड के इस्तेमाल समेत 10 समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
मोदी और शेरिंग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से तैयार  ग्राउंड अर्थ स्टेशन और सैटकॉम नेटवर्क का उद्घाटन भी किया।
भारत ने इससे पहले भी भूटान को व्यक्तिगत स्तर पर सार्क सेटेलाइट का लाभ देने का प्रस्ताव किया था।
भारत ने भूटान के लोगों की जरूरत को देखते हुए घरेलू गैस (एलपीजी) की आपूर्ति 700 टन मासिक से 1,000 टन मासिक करने का फैसला किया है।
मोदी ने 1629 ईस्वी में निर्मित सिमतोखा जोंग (भूटान) में भारतीय रुपे कार्ड को भी लांच किया।
इससे पहले रूपे कार्ड सिंगापुर में ही लांच किया गया था।
भूटान की विदेशी मुद्रा की जरूरत को देखते हुए भूटान के साथ मौजूदा वैकल्पिक स्वैप व्यवस्था (स्टैंड बाय स्वैप अरेंजमेंट) के तहत भूटान को अतिरिक्त 10 करोड़ डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे।


मांगदेछूू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान में 720 मेगावाट क्षमता तथा 4,500 करोड़ रुपये लागत वाली मांगदेछूू पनबिजली परियोजना का उद्घाटन किया।
 भारत ने इसके लिए 70% राशि कर्ज के रूप में और 30% राशि अनुदान के रूप में दी है।

भारत-भूटान संबंध

साझा संस्कृति और धार्मिक विरासत

भूटान के साथ भारत का प्रामाणिक ऐतिहासिक संबंध 747 ईस्वी से है, जब महान भारतीय संत पद्म संभव ने वहां जाकर बौद्ध धर्म की शुरुआत की।
भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान दोनों देशों के बीच अन्य क्षेत्रों में भी संबंधों को गति मिली।
सिक्किम और भूटान पहले स्वतंत्र राज्य थे। दोनों की साझा विरासत है। 1975 में सिक्किम भारत में शामिल हुआ।
इस प्रकार सिक्किम के जरिए भूटान भारत से जुड़ा हुआ है।
विदेश नीति के कई जानकार भूटान को भारत का एकमात्र `हर परिस्थिति में मित्र' के रूप में परिभाषित करते हैं।



भारत-भूटान मैत्री संधि - 1949

1949 में संपन्न इस संधि में प्रावधान किया गया कि भूटान अपने आंतरिक मामलों में पूर्ण रूप से स्वतंत्र रहेगा लेकिन विदेशी मामलों में वह भारत के मार्गदर्शन और निर्देशन में काम करेगा।
वर्ष 2007 में दोनों देशों के बीच इस संधि की समीक्षा की गई और इसमें जोड़ा गया कि जिन विदेशी मामलों में भारत सीधे तौर पर जुड़ा होगा उन्हीं में भूटान उसे सूचित करेगा। अर्थात भारत ने भूटान को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के परिचालन के लिए प्रेरित किया।
वर्तमान में भारत उत्तर पूर्व के भारतीय राज्यों को चीन के कुत्सित मंसूबो से बचाने के लिए कुछ देशों को लामबंद करने की रणनीति पर चल रहा है।
भूटान इस रणनीति की अहम कड़ी बन रहा है।

भूटान का सामरिक महत्व

दो बड़े प्रतिद्वंदी देशों भारत और चीन के बीच बसे भूटान के महत्व का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। भले ही इसका झुकाव भारत के प्रति ज्यादा हो लेकिन चीन अपने पाले में करने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता है, परंतु चीन के साथ भूटान का अनसुलझा विवाद और चीन की आक्रामक नीति भूटान को सुरक्षा के लिए भारत की तरफ देखने को विवश करती है।
गौरतलब है कि 1954, 1958 और 1961 में चीन ने भूटान को अपने मानचित्र में दिखाकर अपना क्षेत्र होने का दावा किया था।

डोकलाम विवाद - डोकलाम तिब्बत की चुंबी घाटी, भूटान की हा घाटी व सिक्कम के त्रिकोणीय बिंदु पर स्थित है, जहां चीन ने सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया था।
भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है।
डोकलाम वही इलाका है जो भारत को सेवेन सिस्टर्स नाम से मशहूर उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
चीनी सेना डोकलाम का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करना चाहती है।

रणनीतिक महत्व - नेपाल के चीन की ओर झुकाव के बाद भारत चाहता है कि हिमालयी क्षेत्र में उसका प्रभाव बना रहे।
भूटान के चीन या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दूसरे किसी भी देश के साथ राजनयिक संबंध नहीं है जबकि भूटान ने भारत के साथ 1968 में ही राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए थे।

सासेक परियोजना - 2001 में भारत ने भूटान, नेपाल, बांग्लादेश व म्यांमार को जोड़ने के लिए सासेक ( साउथ एशियन सब रीजनल इकोनामिक को-ऑपरेशन) कॉरिडोर शुरू किया था।
इंफाल से मोरेह (म्यांमार) को जोड़ने वाले इस मार्ग को पूर्वी एशियाई बाजार के लिए भारत का प्रवेश द्वार माना जा रहा है।
भारत की योजना इस मार्ग के जरिए पूर्वी एशियाई बाजारों को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने की है।
इंफाल-मोरेह मार्ग के निर्माण के साथ ही बैंकाक तक पहुंचने के लिए भारत को एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो जाएगा।
2014 में मालदीव और श्रीलंका भी इसके सदस्य बन गए।
चीन की महत्वाकांक्षी ओबीओआर परियोजना के जवाब में भारत यह परियोजना लेकर आया है।

आर्थिक सहयोग

भारत भूटान का लगातार सबसे बड़ा कारोबारी और विकास सहयोगी रहा है।
1961 में भारत की सहायता से भूटान की पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की गई और आज भूटान अपनी 12वीं पंचवर्षीय योजना का क्रियान्वयन कर रहा है।

पनबिजली सहयोग

 भारत भूटान संबंधों का सबसे मजबूत आधार पनबिजली सहयोग रहा है।
भारत की वित्तीय मदद से भूटान की शुरुआती तीन पनबिजली परियोजनाएं  1.कुरीछू (60 मेगावाट) 2.ताला (170 मेगावाट)  3.चूखा (336 मेगावाट) आज कार्यशील है और इनसे उत्पादित पनबिजली भारत खरीदता है।
 2009 में दोनों देशों ने एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किया जिसमें यह सहमति बनी कि भारत 2020 तक भूटान को 10,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कराने में सहयोग करेगा तथा उससे अधिशेष बिजली खरीदेगा।
इसके बाद भारत ने भूटान के पुनातसंगछू (1,200 मेगावाट), वांगछू (570 मेगावाट), खोलांगचू परियोजना और हाल ही मांगदेछू (720 मेगावाट) पनबिजली परियोजनाओं में मदद की है।
भूटान की तीन-चौथाई बिजली भारत को निर्यात की जाती है।

कारोबार

भारत भूटान का सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है।
दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार अर्थव्यवस्था लागू है।
1972 में भारत-भूटान के बीच व्यापार एवं वाणिज्य समझौते (ट्रेड एंड कॉमर्स एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए गए। 2006 में इसका अगले 10 वर्षों के लिए नवीनकरण किया गया।
यही नहीं, भूटान अपना 98% निर्यात भारत को करता है और करीब 90% सामान भी भारत से ही आयात करता है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

डोकलाम में भूटान की सहायता से चीन को रोकने में मदद मिली थी।
1971 में भारत के समर्थन से भूटान यूएन में शामिल हुआ।
यूएन सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के दावे को भूटान का खुला समर्थन प्राप्त है।
भूटान में ग्रास नेशनल हैप्पीनेस इंडेक्स में देश के वन क्षेत्र को 60% से कम ना होने का संकल्प लिया गया है।
भारतीय सेना भूटान की शाही सेना को प्रशिक्षण देती रही है जो कि चीन के लिए कहीं ना कहीं परेशानी का सबब है।
भूटान सार्क का सदस्य है और भारत के पक्ष में पाकिस्तान के खिलाफ वह सार्क सम्मेलन का बहिष्कार भी कर चुका है।
श्रीलंका में हंबनटोटा पोर्ट और पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के विकास के नाम पर चीन वहां जम चुका है। म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल में भी चीन ने पैठ बना ली है।
दक्षिण एशिया में भूटान ही है, जो चीन के झांसे में नहीं आया है इसलिए भारत पड़ोसी प्रथम नीति के तहत संबंध मजबूत कर रहा है।

स्त्रोत - विभिन्न समाचार पत्र

SAVE WATER

घी डुल्यां म्हारा की नीं जासी।
पानी डुल्यां म्हारों जी बले।।

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