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जी-7 समूह के बारे में जाने

जी-7 समूह क्या है ?



जी-7 समूह क्या है ?

जी-7 दुनिया की 7 सबसे अधिक औद्योगिक और विकसित अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है।
इस समूह में 7 सदस्य देश फ्रांस, इटली, जापान, जर्मनी, कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन है।
इसका वैश्विक जीडीपी में 40% योगदान है।
इसके अंतर्गत विश्व की जनसंख्या का 10% भाग आता है।
यह समूह खुद को `कम्युनिटी ऑफ वैल्यूज' अर्थात मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय मानता है।

प्रमुख सिद्धांत

स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतंत्र और कानून का शासन और समृद्धि और टिकाऊ विकास इसके प्रमुख सिद्धांत है।

चर्चा में क्यों

इसके सदस्य देशों के राजनीतिक नेता प्रतिवर्ष महत्वपूर्ण वैश्विक, आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा होते हैं।
जी-7 शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ का भी प्रतिनिधित्व किया जाता है।
वर्ष 2019 का जी-7 समूह का 45वां सम्मेलन फ्रांस के बिआरित्ज शहर में 24-26 अगस्त 2019 तक आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन में फ्रांस की तरफ से भारत को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
45वें सम्मेलन का उद्देश्य आय और लैंगिक असमानता से लड़ने और जैव विविधता की रक्षा पर केंद्रित है।



जी-7 समूह की कार्यप्रणाली

प्रारंभ में यह 6 देशों का समूह था जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी। इस बैठक में वैश्विक आर्थिक संकट के संभावित समाधानों पर विचार किया गया था।
1976 में कनाडा इसमें शामिल हो गया और यह जी-7 समूह बन गया।
प्रत्येक सदस्य देश बारी-2 से इस समूह की अध्यक्षता करता है और दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।
शिखर सम्मेलन में अन्य देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाता है।

रुस बाहर निकाला गया

1998 में इसमें रूस के शामिल होने के बाद इसे जी-8 समूह के रूप में जाना गया, परंतु 2014 में क्रीमिया पर कब्जा करने के कारण रुस को इस समूह से बाहर निकाल दिया गया।

चीन जी-7 समूह का हिस्सा क्यों नहीं है ?

चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भी इस समूह का हिस्सा नहीं है, क्योंकि यहां दुनिया की सबसे बड़ी आबादी रहती है और प्रति व्यक्ति आय जी-7 समूह देशों के मुकाबले बहुत कम है।
इस कारण चीन को विकसित अर्थव्यवस्था नहीं माना जाता है।
यही कारण है, कि चीन को इस समूह में शामिल नहीं किया गया है।

जी-7 का प्रभाव

जी-7 समूह कई सफलताओं का दावा करता है, जिनमें एड्स, टीबी और मलेरिया से लड़ने के लिए वैश्विक फंड की शुरुआत करना प्रमुख है।
समूह के अनुसार इसने साल 2002 के बाद से अब तक 2.7 करोड़ लोगों की जान बचाई है।
साथ ही समूह का दावा है, कि 2016 के पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने के पीछे भी इसकी प्रमुख भूमिका है।

जी-7 समूह की चुनौतियाँ

2018 में कनाडा में हुए शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई और आयात करो को लेकर अन्य सदस्यों के साथ भिड गए थे।
अफ्रीका, लैटिन अमेरिका से कोई भी देश जी-7 का सदस्य नहीं है।
अर्थव्यवस्था के मामले में तेजी से उभरते हुए भारत और ब्राजील भी इसके सदस्य नहीं है।

Update 31 May & 1 June 2020

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी-7 को समाप्त कर इसकी जगह जी-11 बनाने का प्रस्ताव किया है।
ट्रंप ने इस समूह में शामिल होने के लिए भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को आमंत्रित किया है।
उन्होंने सितंबर तक इसकी बैठक को टाल दिया है।
इस साल जी-7 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है।
ट्रंप चाहते हैं कि आमंत्रित देश सम्मेलन में चीन के मुद्दे पर चर्चा करें। उल्लेखनीय है कि जी-7 की बैठकों में उस वर्ष के  जी-7 के अध्यक्ष द्वारा दूसरे प्रमुख देशों को बुलाने की परंपरा रही है। पिछले साल फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था।
45वां सम्मेलन फ्रांस के बिआरित्ज शहर में 24-26 अगस्त 2019 तक आयोजित किया गया था।

जुलाई 2020 में जर्मनी ने कहा है कि यूक्रेन संकट का समाधान निकलने से पहले रूस को जी-7 समूह में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

स्त्रोत - विभिन्न समाचार पत्र

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घी डुल्यां म्हारा की नीं जासी।
पानी डुल्यां म्हारों जी बले।।

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