राजस्थान में औद्योगिक विकास। राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26

 

राजस्थान में औद्योगिक विकास 2025-26

Industrial development in Rajasthan.

उद्योग क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में योगदान 2025-26:-
1. स्थिर कीमतों पर (आधार वर्ष 2011-12):-
• ₹2.48 लाख करोड़ (4.36% वृद्धि)
2. प्रचलित कीमतों पर:-
• ₹4.54 लाख करोड़ (8.98% वृद्धि)
उद्योग क्षेत्र का योगदान प्रचलित मूल्य पर 26.55%

उद्योग क्षेत्र में उप-क्षेत्रों का योगदान (प्रचलित कीमत)

 उप-क्षेत्र
प्रचलित कीमतों पर योगदान 
 स्थिर कीमतों (2011-12) पर वृद्धि दर 
 विनिर्माण
 40.52%%
     7.84%
 निर्माण
 35.02%
     8.27%
 खनन-उत्खनन
 12.42%
     1.41% (कमी)
 अन्य 
 12.04% विद्युत, गैस, जलापूर्ति व अन्य
     9.37%

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)
• यह सूचकांक एक निश्चित अवधि के दौरान चयनित आधार वर्ष पर औद्योगिक उत्पादों की उत्पादन मात्रा में अल्पकालिक परिवर्तनों को मापता है।
• प्रतिमाह जारी किया जाता है।
• आधार वर्ष:- 2011-12
• जारीकर्ता:- केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO)
• 3 आधार:- विनिर्माण, खनन, विद्युत

भारत में 8 मुख्य उद्योग है (Core Industry):-
भारांश के घटते क्रम में -
1. रिफाइनरी उत्पाद 2. विद्युत Electricity 3. स्टील
Trick - RES
4. कोयला    5. कच्चा तेल  6. प्राकृतिक गैस
7. सीमेंट      8. उवर्रक

रीको द्वारा 19 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं:- 
(1) अजयमेरू पालरा, अजमेर (2) बोरावास, बालोतरा 
(3) सेरेमिक पार्क गजनेर, बीकानेर (4) धुंवाला, भीलवाड़ा 
(5) महुवा कलां, भीलवाड़ा (6) पण्डेर, भीलवाड़ा 
(7) आईटी पार्क, अजमेर (8) बंजारी सुहागपुरा, बांसवाड़ा 
(9) भिण्डर, सगतपुरा, उदयपुर (10) रूंध सौंखरी, कठूमर, अलवर 
(11) कचारिया, किशनगढ़, अजमेर (12) स्टोन पार्क, गुण्डी फतेहपुर, कोटा 
(13) वेस्ट रिसाईकलिंग पार्क, गुण्दी फतेहपुर, कोटा (14) पीपलखेडी, बारां 
(15) केकड़ी विस्तार, अजमेर (16) टेक्सटाइल पार्क, रूपाहेली, भीलवाड़ा 
(17) बरौली, धौलपुर (18) पीपलूंद, भीलवाड़ा (19) कीड़ीमाल, भीलवाड़ा।

राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) 2024
• 8 अक्टूबर 2024 को लॉन्च।
• उद्देश्य:- राज्य में सतत् आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देना।
औद्योगिक विकास नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और हरित विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित।
विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों के अंतर्गत संपत्ति सृजन हेतु प्रोत्साहन:-
• विनिर्माण क्षेत्र में ₹50 करोड़ से अधिक तथा सेवा क्षेत्र में ₹25 करोड़ से अधिक निवेश पर 7 वर्षों तक राज्य करों पर 75% निवेश सब्सिडी दी जाएगी।
• वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के 10 वर्ष पश्चात पूंजीगत सब्सिडी अथवा टर्नओवर से जुड़े प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
अतिरिक्त प्रोत्साहनों में विनिर्माण के लिए नियोक्ता बूस्टर (1-15%) और थ्रस्ट बूस्टर (10%) तथा रीजनल/सेक्टोरल एंकर इकाइयों हेतु एंकर बूस्टर (20%) शामिल है।
छूट:- विद्युत शुल्क, मंडी शुल्क, भूमि कर में 7 वर्षों के लिए 100% छूट।
क्षेत्र संचालित प्रोत्साहन
• 7 मानक पैकेज (विनिर्माण, सेवाएं, MSME, स्टार्ट-अप, R&D, ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स (GCC), औद्योगिक अवसंरचना और परीक्षण प्रयोगशालाएं)
• 3 राज्य प्राथमिकताएं (हरित विकास, निर्यात संवर्द्धन और क्षमतावर्द्धन) 
मानक विनिर्माण और सेवा प्रोत्साहन
• इसमें 7 वर्षों के लिए राज्य करों  का 75% प्रतिपूर्ति या 10 वर्षों के लिए पूंजीगत सब्सिडी और टर्नओवर लिंक्ड इंसेंटिव (TLI) शामिल हैं।
MSME हेतु प्रोत्साहन
• इसमें न्यूनतम निवेश आवश्यक नहीं है।
• इसमें 7 वर्षों हेतु 3-6% ब्याज अनुदान, 10 वर्षों के लिए 75% SGST प्रतिपूर्ति तथा रोजगार सृजन और पूंजी जुटाने के लिए विशेष सब्सिडी शामिल है।
औद्योगिक अवसंरचना प्रोत्साहन
• इसमें वेयरहाउस, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और कंटेनर फ्रेट स्टेशनों को शामिल किया गया है।
स्टार्ट-अप प्रोत्साहन
• व्यवसाय इनक्यूबेशन और महिला-नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप हेतु 2 वर्षों तक 100% SGST प्रतिपूर्ति।
नवीन क्षेत्र
• एयरो एंड स्पेस, रक्षा, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, कृषि-तकनीक, अपशिष्ट पुनर्चक्रण तथा उच्च शिक्षा एवं कौशल जैसे प्रमुख क्षेत्र हेतु प्रोत्साहन।
नई पहल
• पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, महिला-नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप, रुग्ण इकाइयों, क्लस्टरों और विद्युत गहन क्षेत्रों हेतु अतिरिक्त प्रोत्साहन।

राजस्थान लॉजिस्टिक्स नीति 2025 
• उद्देश्य:- राज्य की लॉजिस्टिक्स आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना तथा वृहद स्तर पर निजी निवेश आकर्षित करना।
प्रमुख प्रावधान:- 
साइलो, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, कंटेनर फ्रेट स्टेशन, एयर फ्रेट स्टेशन, कार्गों टर्मिनल एवं ड्राई पोर्ट जैसी लॉजिस्टिक्स अवसंरचनाओं हेतु पात्र स्थिर पूंजी निवेश का 25% पूंजी अनुदान देय होगा, जिसे 10 वर्षों की अवधि में वार्षिक रूप से वितरित किया जाएगा तथा यह अनुदान ₹5 करोड़ से ₹50 करोड़ तक की वार्षिक अधिकतम सीमा के अधीन
होगा।
• 7 वर्षों की अवधि के लिए 7% की दर से ब्याज अनुदान, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50 लाख प्रति वर्ष होगी।
कौशल विकास एवं प्रशिक्षण सहायता-
एकमुश्त प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम 6 माह की अवधि के लिए प्रति श्रमिक प्रति माह प्रशिक्षण लागत का 50 (अधिकतम ₹4,000 तक) प्रतिपूर्ति।
वित्तीय प्रोत्साहन:-
• स्टाम्प ड्यूटी एवं भूमि रूपांतरण शुल्क में 75% छूट एवं 25% प्रतिपूर्ति।
• 7 वर्षों के लिए विद्युत्त शुल्क एवं मण्डी शुल्क में 100 % छूट।
प्रौद्योगिकी अपनाने हेतु प्रोत्साहन:-
• लॉजिस्टिक्स प्रबंधन सॉफ्टवेयर की लागत का 50 % एकमुश्त प्रतिपूर्ति।
• फायर डिटेक्शन सिस्टम की लागत का 20% (₹10 लाख तक) एकमुश्त प्रतिपूर्ति ।
पर्यावरणीय सततता परियोजनाओं के लिए हरित प्रोत्साहन (ग्रीन इंसेंटिव) जिसमें परियोजना लागत का 50% (₹12.5 करोड़ तक) एकमुश्त प्रतिपूर्ति।

राजस्थान डेटा सेंटर नीति-2025
• 19 फरवरी, 2025 को अधिसूचित। 
• यह नीति क्लाउड कम्प्यूटिंग, डिजिटल ट्रान्सफॉर्मेशन, ई-गवर्नेस, AI, बिग डेटा एनालिटिक्स और डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने में डेटा सेंटर्स की अहम भूमिका को पहचानते हुए राजस्थान को नेशनल और इंटरनेशनल डेटा सेंटर इन्वेस्टमेंट के लिए पसंदीदा जगह बनाना चाहती है।
• उद्देश्य:- राज्य में एक मजबूत, सुरक्षित और सतत्‌ डेटा सेंटर इकोसिस्टम स्थापित करना।
वित्तीय प्रोत्साहन:-
पात्र उद्यम परिसंपत्ति सृजन आधारित प्रोत्साहन जिसमें निवेश अनुदान, पूंजी अनुदान या टर्नओवर-आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं, में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं ।
प्रथम तीन मेगा या अल्ट्रा-मेगा डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए विशेष सनराइज प्रोत्साहन उपलब्ध हैं, जिसमें अतिरिक्त प्रोत्साहन बूस्टर, सावधि ऋणों पर ब्याज अनुदान और कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग से संबंधित लाभ शामिल हैं ।
गैर-वित्तीय प्रोत्साहन और भवन मानदंड:- 
यह नीति भवन और विकास मानदंडों में शिथिलता के माध्यम से गैर-वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान करती है।
परिचालन और श्रम प्रावधान:-
डेटा सेंटर क्षेत्र को आवश्यक सेवा संरक्षण अधिनियम (ई.एस.एम.ए.) के
अंतर्गत एक आवश्यक सेवा के रूप में वर्गीकृत किया गया है तथा निर्धारित सुरक्षा नियमों के अधीन सभी
पारियों में महिलाओं के नियोजन सहित इन डाटा सेंटर्स को 24X7 संचालन की अनुमति दी गई है।
सतत्‌ता और क्षेत्रीय विकास:- 
नीति नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, ग्रीन बिल्डिंग और पर्यावरणीय संरक्षण प्रौद्योगिकियों के उपयोग को प्रोत्साहित करके सततता पर बल देती है । 

जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area):-
• 154 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल।
• 9 गांव शामिल।
• इसे विशेष निवेश क्षेत्र (SIR) घोषित किया गया।

खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र (Investment Region):-
• 165 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल।
• पूर्ववर्ती अलवर जिले के 43 गांव शामिल।

औद्योगिक पार्क एवं विशेष निवेश क्षेत्र
• सोलर पैनल निर्माण पार्क:- कंकाणी (जोधपुर)
• हस्तशिल्प एवं फर्नीचर पार्क, जोधपुर 
• राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड के डाउनस्ट्रीम उत्पादों के बेहतर उपयोग हेतु राजस्थान पेट्रो जोन विकसित किया जा रहा है।
•  प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जयपुर जिले के जमवारामगढ़ में थौलाई औद्योगिक क्षेत्र में इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क स्थापित किया गया है।
• स्टोन पार्क:- गुण्दी-फतेहपुर (कोटा)
• यूनिटी मॉल:- जयपुर

रीको द्वारा दो प्रमुख सिरेमिक जोन विकसित किया जा रहे हैं-
1. सोनियाना सिरेमिक एवं ग्लास जोन, चित्तौड़गढ़ 
2. गजनेर सिरेमिक एवं ग्लास जोन, बीकानेर 

रीको ने औद्योगिक इकाइयों को आगजनी की घटनाओं से बचाने के लिए 9 अग्निशमन केंद्र स्थापित किए हैं:- 
1. केशवाना (नीमराना) 2. खैरथल (अलवर)
3. खारा (बीकानेर) 4. कालड़वास (उदयपुर)
5. बगरू (जयपुर)  6.रतनगढ़ (चूरू)
7. भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा)

कनेक्टिविटी:- 

दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC):-
• उद्देश्य:- भारत के दो प्रमुख शहरों - दिल्ली (राजधानी) और मुंबई (वित्तीय राजधानी) के मध्य एक आधुनिक औद्योगिक केंद्र बनाना।
• इससे आर्थिक विकास तीव्र होगा, लाखों रोजगार सृजित होंगे और भारतीय की विनिर्माण एवं निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।
• फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ 150 किमी क्षेत्र में DMIC का प्रभाव रहेगा।
प्रथम चरण:-
1. खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र
2. जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र
इन दोनों के विकास हेतु राजस्थान इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (RIDCO) की स्थापना की गई।

वैस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC)
• उद्देश्य:- देश के पश्चिमी हिस्से में माल परिवहन को बेहतर बनाना।
• कुल लंबाई:- 1,504 किलोमीटर
• इसका 39% हिस्सा राजस्थान के 28 जिलों से होकर गुजरता है।
• यह भारत की अपने रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने तथा दादरी (उत्तर प्रदेश) एवं जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (मुंबई) के मध्य माल-परिवहन (लॉजिस्टिक्स) दक्षता बढ़ाने हेतु समर्पित माल ढुलाई गलियारा बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

• राज्य में व्यवसायों हेतु हवाई परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राजस्थान लघु उद्योग निगम (राजसीको) लिमिटेड वर्ष 1979 से जयपुर हवाई अड्डे पर एक एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स का संचालन कर रहा है। 
• निगम द्वारा निर्यात हेतु इनलैंड कंटेनर डिपो जयपुर, भीलवाड़ा एवं जोधपुर में ड्राई पोर्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाईयां (MSME):-
MSME:- micro, small and medium enterprises.

 MSME
 सूक्ष्म
 लघु
 मध्यम
 निवेश
 < 2.5 करोड़
 < 25 करोड़
 < 125 करोड़
 टर्नओवर
 < 10 करोड़
 < 100 करोड़
 < 500 करोड़
 
राज्य के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के विलंबित भुगतानों के मामलों के निवारण के लिए 14 सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों का गठन किया गया है।

सुविधा केंद्र का निर्माण:-
• सभी जिला उद्योग केंद्रों पर MSME निवेशक सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। 

राजस्थान MSME नीति 2024
• 8 दिसंबर 2024 से लागू।
• 31 मार्च 2029 तक लागू।
• उद्देश्य:- MSME क्षेत्र के संतुलित और समावेशी विकास के माध्यम से राजस्थान में आर्थिक और सामाजिक सुदृढ़ीकरण बढ़ावा देना।
• लक्ष्य:- वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और स्थानीय रूप से प्रासंगिक MSME पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहयोग करना।
मुख्य प्रावधान:-
• नई MSME की स्थापना और मौजूदा MSME इकाइयों के विस्तार के लिए RIPS 2024 के तहत ₹50 करोड़ तक की ऋण राशि पर ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
• लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों द्वारा NSE/BSE माध्यम से इक्विटी पूंजी जुटाने हेतु ₹15 लाख तक की एकमुश्त सहायता।
• सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए सरकार द्वारा स्थापित प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों से उन्नत प्रौद्योगिकी/सॉफ्टवेयर प्राप्त करने के लिए किए गए व्यय का 50% (₹5 लाख तक) राशि सहायता के रूप में प्रदान की जाएगी।
• राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मानक प्रमाणन और बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त करने के लिए किए गए व्यय का 50% (अधिकतम ₹ 3लाख) की सहायता प्रतिपूर्ति के रूप में प्रदान की जाएगी।
• राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेकर MSME उत्पादों के विपणन के लिए, स्टॉल किराए और दो व्यक्तियों की यात्रा व्यय के लिए 75% (अधिकतम ₹1.5 लाख) सहायता प्रदान की जाएगी।
• उद्यमों के डिजिटलीकरण के लिए किए गए व्यय का 75% (अधिकतम ₹50,000) प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी।
• ई-कॉमर्स के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्लेटफाॉर्म शुल्क का 75% (अधिकतम ₹50,000) प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी।

राजस्थान सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (फैसिलिटेशन ऑफ एस्टेब्लिशमेंट एंड ऑपरेशन) अधिनियम 2019
• 17 जुलाई 2019 को लागू।
• उद्देश्य:- एमएसएमई की बाधारहित स्थापना को प्रोत्साहित करना।
• राज उद्योग मित्र पोर्टल की शुरूआत की गई है।
आशय की घोषणा (डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट) प्रस्तुत करने पर नोडल एजेंसी MSME को 'अभिस्वीकृति प्रमाण पत्र' जारी करती है।
यह प्रमाण पत्र जारी होने की तिथि से 5 साल तक MSME को राज्य के सभी कानूनों के तहत अनुमोदन (Approval) और निरीक्षण (Inspection) से छूट प्रदान करता है।

उद्यम पंजीकरण पोर्टल (URP)
• 1 जुलाई 2020 को लॉन्च।
• MSME पंजीकरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना। 

एकीकृत क्लस्टर विकास योजना 2024
• उद्देश्य:- राजस्थान में हस्तशिल्प, हथकरघा और MSME क्लस्टरों की उत्पादकता, गुणवत्ता और दक्षता को बढ़ाना।
• प्रारंभिक लक्ष्य 15 क्लस्टर विकसित करना।
मुख्य घटक:-
1.कारीगर/शिल्पकार/बुनकर क्लस्टरों को सहायता
 सॉफ्ट इंटरवेंशन:- कौशल विकास, डिजाइन, पैकेजिंग, विपणन आदि हेतु प्रशिक्षण, गुणवत्ता, प्रमाणन जैसी क्षमता निर्माण पहलों हेतु ₹50 लाख तक की सहायता।
• कच्चे माल के डिपो का संचालन।
• ई-कॉमर्स के माध्यम से विपणन प्रोत्साहन।
2.कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स की स्थापना हेतु 
• ₹10 करोड़ तक की परियोजना लागत का अधिकतम 90% तक की सहायता।
3.आधारभूत संरचना के विकास हेतु सहायता।

डॉ. भीमराव अंबडेकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना-2022
• उद्देश्य:- राज्य के गैर-कृषि क्षेत्रों (विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार) में SC-ST वर्गों की भागीदारी को बढ़ावा देना।
• इस योजना के तहत ब्याज अनुदान:-
1. ₹25 लाख तक के ऋण पर 9%, 
2. ₹5 करोड़ तक के ऋण पर 7% 
3. ₹10 करोड़ तक के ऋण पर 6%  
 परियोजना लागत का 25% अथवा ₹25 लाख तक की मार्जिन मनी अनुदान प्रदान किया जाएगा।

पीएम विश्वकर्मा योजना
• उद्देश्य:- कारीगरों के कौशल, आय, वित्तीय सुरक्षा में सुधार करना और डिजिटल व्यापार वृद्धि को प्रोत्साहित करना।
• इस योजना में बढ़ईगीरी, लोहार, मिट्टी के बर्तन, सिलाई और अन्य सहित 18 ट्रेड शामिल है।
• पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र:- कौशल प्राप्त पेशेवरों के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु।
• कौशल संवर्धन प्रशिक्षण:- प्रतिदिन ₹500 के स्टाइपेंड के साथ 5-7 दिवस का बुनियादी प्रशिक्षण और 15 दिवस का उन्नत प्रशिक्षण।
• टूलकिट सहायता:- उपकरण खरीदने हेतु ₹15,000
• बिना गारंटी ऋण:- 5% ब्याज पर ऋण दो किस्तों में ₹1 लाख (18 माह) और ₹2 लाख (30 माह) तक।
नोट:- राजस्थान में कुल 21.75 लाख आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं।

वित्तीय सहायता
युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना (YUPY):-
• उद्देश्य:- औद्योगिकीकरण में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
• युवाओं (अधिकतम 45 वर्ष की आयु) को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना।
• 1,000 इकाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
• राज्य सरकार द्वारा ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 6% ब्याज अनुदान दिया जा रहा है।

विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना (VKYUPY)
• राज्य सरकार द्वारा 3 सितंबर 2025 से लागू।
• उद्देश्य:- राज्य के युवाओं को विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों की स्थापना हेतु वित्तीय संस्थानों के माध्यम से मार्जिन मनी एवं ब्याज अनुदान युक्त ऋण उपलब्ध कराकर नए रोजगार के अवसर सृजित करना।
• इस योजना के तहत ब्याज अनुदान:-
1. ₹1 करोड़ तक के ऋण पर 8% 
2. ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 7%
• ऋण राशि के 25% अथवा अधिकतम ₹5 लाख (जो भी कम हो) तक की मार्जिन मनी अनुदान राशि देय है।
• महिला, SC, ST, दिव्यांग उद्यमियों, बुनकर, कारीगर, शिल्पकार एवं हस्तशिल्पियों को ₹1 करोड़ से ₹2 करोड़ तक के ऋण पर अतिरिक्त 1% ब्याज अनुदान की सुविधा उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (MYSY) 2026
• राज्य के 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 1 लाख युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 15 जनवरी 2026 से शुरू।
इस योजना के अन्तर्गत वित्तीय संस्थान उद्यमों की स्थापना, विस्तार, विविधीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु निम्नानुसार मार्जिन मनी और 100% ब्याज अनुदान प्रदान करेंगे-
1. 8वीं से 12वीं कक्षा पास आवेदक
(अ) ब्याज अनुदान :
• सेवा एवं व्यापार क्षेत्र- ₹3.5 लाख तक की अधिकतम ऋण सीमा।
• विनिर्माण क्षेत्र- ₹7.5 लाख तक की अधिकतम ऋण सीमा।
(ब) मार्जिन मनी सहायता- ऋण राशि का 10% (₹35 हजार तक) की मार्जिन मनी सहायता।
2. स्नातक /ITI प्रमाण पत्र धारक अथवा उच्च योग्यता वाले आवेदक
(अ) ब्याज अनुदान :
• सेवा एवं व्यापार क्षेत्र - ₹5 लाख तक की अधिकतम ऋण सीमा ।
• विनिर्माण क्षेत्र- ₹10 लाख रुपये तक की अधिकतम ऋण सीमा ।
(ब) मार्जिन मनी सहायता : ऋण राशि का 10% (₹50 हजार तक) की मार्जिन मनी सहायता।

विपणन सहायता
• राजस्थान लघु उद्योग निगम (राजसीको) लिमिटेड जयपुर, उदयपुर, दिल्ली और कोलकाता में राजस्थली आउटलेट्स के माध्यम से हस्तशिल्प वस्तुओं का विपणन करता है।
• खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड ने 2 अक्टूबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक खादी वस्त्रों पर 50% की छूट दी‌।

ईज ऑफ डूईंग बिजनेस
• इसका उद्देश्य विकास दर को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और अधिक प्रतिस्पर्धी एवं पारदर्शी व्यवसाय वातावरण तैयार करना है।
• सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के तहत राज निवेश पोर्टल (वन स्टॉप शॉप सिस्टम) लॉन्च किया गया है जो राजस्थान में ₹10 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाता है।
• इसे सिंगल विंडो क्लीयरेंस के साथ मिलाकर अनुमोदन हेतु एकीकृत प्लेटफार्म बनाया गया है।
• रीको ने एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है जिसमें GST एवं TDS जैसी कर संबंधी प्रक्रियाओं के लिए मॉड्यल शामिल है।
• नए उद्यमों कैसा मुंह खाने वाली समस्याओं के समाधान और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विवाद और निवारण तंत्र स्थापित किया गया है।
 बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) 2024 के तहत राजस्थान टॉप अचीवर रहा है।

राजस्थान में निर्यात:-

राजस्थान द्वारा निर्यात (Export):-
• राजस्थान में मुख्यतः 16 उत्पादों का निर्यात किया जाता है।
• राजस्थान के निर्यात में 67% से अधिक योगदान देने वाली शीर्ष पांच वस्तुएं निम्नलिखित हैं:-
1. इंजीनियरिंग वस्तुएं > 2. रत्न एवं आभूषण > 3. मेटल (धातु) > 4. टेक्सटाइल (वस्त्र) > 5. हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प)  

निर्यात प्रोत्साहन हेतु किए गए प्रयास:-
1. राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति 2024
• उद्देश्य:- सतत् एवं समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देकर लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्थानीय हस्तशिल्प और निर्यात उत्पादों में विविधीकरण कारण लाने पर ध्यान केंद्रित करना।
• माल ढुलाई अनुदान, विपणन सहायता, निर्यात दस्तावेजीकरण और प्रमाणन हेतु सहायता, उत्पाद परीक्षण अनुदान, ई-कॉमर्स निर्यात सुविधा और निर्यात क्रेडिट बीमा प्रदान करना प्रमुख उपायों में शामिल है।
• निर्यातको की प्रतिस्पर्धात्मकता को रणनीतिक, वित्तीय और अवसंरचनात्मक सहायता के माध्यम से बढ़ाना।
• कनेक्टिविटी में सुधार, निर्यात उन्मुख क्लस्टर विकसित करने और MSME को लक्षित सहायता प्रदान करना।
• अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कौशल विकास, तकनीकी को अपनाने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने को प्रोत्साहित करना।
• निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाना, नवाचारों को प्रोत्साहित करना और रोजगार के अवसर सृजित करना।
प्रमुख प्रावधान:-
निर्यात दस्तावेजीकरण, गुणवत्ता एवं प्रबंधन प्रमाणन हेतु सहायता
• निर्यात प्रक्रियाओं एवं दस्तावेजीकरण हेतु प्रति इकाई वार्षिक लागत का 50%, अधिकतम ₹5 लाख तक सहायता प्रदान की जाती है।
विपणन सहायता 
• विदेशों में आयोजित होने वाले अनुमोदित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने वाले पात्र उद्यमों को खर्च की 75% प्रतिपूर्ति एवं आवागमन हेतु अधिकतम ₹3 लाख तक की सहायता (2 वर्ष में एक बार) प्रदान की जाती है।
उत्पाद परीक्षण प्रोत्साहन 
• निर्यात इकाइयों को उत्पाद संबंधी प्रमाणीकरण हेतु किए गए खर्च का 75% प्रतिपूर्ति अधिकतम ₹20,000 प्रति शिपमेंट।
ई-कॉमर्स सहायता 
• ई-कॉमर्स के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए देय कुल शुल्क का 75% प्रतिपूर्ति, अधिकतम ₹2 लाख तक प्रदान की जाती है।
प्रौद्योगिकी उन्नयन सहायता 
• खर्च का 75% प्रतिपूर्ति, अधिकतम ₹50 लाख तक प्रदान की जाती है।

2. एक जिला एक उत्पाद (ODOP) नीति 2024
• उद्देश्य:- प्रत्येक जिले से निर्यात क्षमता वाले उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान करना और उन्हें प्रोत्साहित करना तथा प्रत्येक जिले को संभावित निर्यात केंद्र के रूप में परिवर्तित करना।
• नए उद्योगों हेतु वित्तीय सहायता, तकनीकी अपनाना, गुणवत्ता प्रमाणन, नवीकरणीय ऊर्जा पहल, अवसंरचना विकास, विपणन सहायता, ई-कॉमर्स को बढ़ावा और ODOP में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों की सराहना मुख्य उपायों में शामिल है।
विपणन सहायता 
मार्जिन मनी सहायता 
गुणवत्ता प्रमाणन सहायता 
ई-कॉमर्स सहायता 
प्रौद्योगिकी उन्नयन सहायता।

3. राजस्थान व्यापार संवर्द्धन नीति 2025
• 7 दिसम्बर 2025 से लागू। 
• उद्देश्य:- सूक्ष्म व्यापार उद्यमों सहित छोटे व्यापारियों को रियायती ब्याज दरों पर संस्थागत ऋण की सुविधा प्रदान करना तथा बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करना है, साथ ही व्यापार क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
प्रमुख प्रावधान:-
ब्याज अनुदान : नए सूक्ष्म व्यापार उद्यमों की स्थापना के लिए, ₹1 करोड़ तक के ऋण पर 6% ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा और ₹1 करोड़ से अधिक और ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 4% ब्याज अनुदान प्रदान किया जाएगा।
क्रेडिट गारंटी सहायता : क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) योजना के अंतर्गत, नवीन सूक्ष्म व्यापारिक उद्यमों को ₹5 करोड़ तक के ऋण कवरेज पर देय गारंटी शुल्क की 50% प्रतिपूर्ति पाँच वर्षों की अवधि के लिए दी जाएगी।
बीमा प्रीमियम की प्रतिपूर्ति : सूक्ष्म श्रेणी के खुदरा व्यापारियों के लिए, प्रति वर्ष बीमा प्रीमियम की 50% (₹1
लाख तक) प्रतिपूर्ति, पाँच वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की जाएगी।
ई-कॉमर्स प्रोत्साहन : सूक्ष्म व्यापार उद्यमों को एक वर्ष की अवधि के लिए प्रति वर्ष ₹50,000 तक की ई-कॉमर्स
प्लेटफॉर्म शुल्क (शिपिंग शुल्क को छोड़कर) की 75% प्रतिपूर्ति की जाएगी ।

विशेष श्रेणियों हेतु अतिरिक्त प्रोत्साहन : महिलाओं, SC / ST और बेंचमार्क दिव्यांग व्यक्तियों के स्वामित्व वाले व्यापार उद्यमों को ₹1 करोड़ से अधिक और ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 1% अतिरिक्त ब्याज अनुदान प्रदान किया जायेगा।

4. राजस्थान वस्त्र एवं परिधान नीति 2025
• 13 फरवरी 2025 को अधिसूचित।
• उद्देश्य:- राज्य को वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र के लिए एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना।
प्रमुख प्रावधान:-
• वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने हेतु 10 वर्षों की अवधि के लिए परिसंपत्ति सृजन प्रोत्साहन, जिसमें
निवेश अनुदान, पूंजी अनुदान तथा टर्नओवर आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं।
• स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में लाभ, जिसमें 75% छूट एवं 25% प्रतिपूर्ति शामिल है।
• विद्युत खपत पर 7 वर्षों की अवधि के लिए विद्युत शुल्क से 100 प्रतिशत छूट।
• वस्त्र एवं परिधान उद्योग में पर्यावरणीय रूप से सतत प्रथाओं को प्रोत्साहित करने हेतु पर्यावरण परियोजनाओं पर किए गए व्यय की 50% प्रतिपूर्ति, अधिकतम ₹12.5 करोड़ की सीमा तक।
• कौशल विकास सहायता जिसमें योजना के प्रावधानों के अनुसार कार्मिकों के प्रशिक्षण पर किए गए व्यय की 50% प्रतिपूर्ति।
• बौद्धिक संपदा सहायता, जिसमें पेटेंट एवं कॉपीराइट पंजीकरण हेतु किए गए व्यय की 50% प्रतिपूर्ति।

राजस्थान फाउण्डेशन:-
• देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियों (NRR) से निरन्तर सम्पर्क एवं संवाद बनाये रखने हेतु राजस्थान फाउण्डेशन की स्थापना 30 मार्च 2001 को की गई ताकि राज्य के विकास की गतिविधियों में उनकी सहभागिता को बढ़ाया जा सके।
• अध्यक्ष:- मुख्यमंत्री 
• राजस्थान फाउण्डेशन के 26 चैप्टर्स क्रियाशील किए गए हैं।
• इसके अतिरिक्त 10 दिसंबर 2025 को आयोजित प्रथम प्रवासी राजस्थानी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश विदेश में राजस्थान फाउंडेशन के 14 नए चैप्टर्स स्थापित करने की घोषणा की।
• इस अवसर पर प्रवासी राजस्थानी नीति 2025 लॉन्च की गई और राजस्थान डेवलपमेंट सपोर्ट पोर्टल का भी उद्घाटन किया गया।
• प्रवासी राजस्थानियों के हितों की सुरक्षा एवं संवद्धर्न हेतु समर्पित एक विभाग “डिपार्टमेंट ऑफ डोमेस्टिक एंड ओवरसीज राजस्थानी अफेयर्स (DORA)' का गठन किया गया है। 
• राज्य सरकार की विभिन्‍न क्षेत्रवार नीतियों के प्रावधानों एवं लाभों के बारे में प्रवासी राजस्थानियों को जानकारी देने हेतु राजस्थान फाउण्डेशन द्वारा "नॉलेज सीरीज-एक वर्चुअल कनेक्ट' की शुरुआत की गई है। 

प्रवासी राजस्थानी नीति 2025
• विश्वभर में बसे राजस्थानी प्रवासियों के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक सम्बन्धों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ
राजस्थान को एक विशिष्ट वैश्विक पहचान प्रदान करने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार द्वारा 10 दिसम्बर 2025 को “प्रवासी
राजस्थानी नीति 2025” जारी की गयी।
• उद्देश्य:- प्रवासी राजस्थानियों की राज्य के विकास में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना तथा उन्हें उनकी जड़ों से पुनः जोड़ने के लिए एक व्यापक एवं संरचित ढांचा प्रदान करना। 
• यह नीति निम्नलिखित पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित हैः
1. एक्सिलरेट
2. एन्श्योर
3. ब्रिज
4. सेलिब्रेट
5. ड्राइव

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
उद्देश्य:- यह एक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से  स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न करना।

राजस्थान में खनन

• राजस्थान को खनिजों का अजायबघर कहा जाता है।
यहां 82 प्रकार के खनिजों के भंडार हैं, जिनमें से 57 प्रकार के खनिजों का उत्पादन किया जा रहा है।
• खनन की अनुमति ई-नीलामी द्वारा दी जाती है।

राजस्थान की खनिज उत्पादन में स्थिति:-

एकमात्र उत्पादक (Sole Producer)
• सीसा • जस्ता (जिंक) • सेलेनाईट • वोलेस्टोनाइट
Trick - सीसा जैसी वॉल
• चांदी (सिल्वर)  • केल्साइट • जिप्सम

पत्थर उद्योग में प्रमुख स्थान
• मार्बल      M
• सेंड स्टोन  S
• ग्रेनाइट     G
अग्रणी उत्पादक (Leading Producer)
चूना पत्थर 
सीसा - जस्ता (जिंक) 
वोलेस्टोनाइट
गार्नेट
बैराइट्स
सिलिका सैण्ड
ग्रेनाइट 
संगमरमर
तांबा

राजस्थान राज्य खनिज अन्वेषण न्यास:- जयपुर 

राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML):-
• स्थापना - 30 अक्टूबर 1974
• राज्य सरकार का उपक्रम (PSU)
• उद्देश्य:- 
खनिजों का वैज्ञानिक रूप से अन्वेषण/उत्खनन करना।
खनिज विपणन (Marketing) का कार्य।
लागत प्रभावी (Cost effective) तकनीक का प्रयोग करना।
खनन क्षेत्रों के निकट स्थान का विकास करना।
• चार केंद्र:-
1. रॉक फास्फेट - झामरकोटडा (उदयपुर)
2. जिप्सम - बीकानेर
3. लाइमस्टोन (चूना पत्थर) - जोधपुर
4. लिग्नाईट - जयपुर

डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाऊंडेशन ट्रस्ट (DMFT):-
• भारत सरकार द्वारा 2015 में स्थापित।
• खनन कार्यों से प्रभावित जिलों के विकास हेतु।

राजस्थान खनिज नीति 2024
• उद्देश्य:- पर्यावरण संरक्षण एवं सामुदायिक कल्याण सुनिश्चित करते हुए आर्थिक विकास के लिए राज्य के प्रचुर खनिज संसाधनों का लाभ उठाते हुए टिकाऊ, पारदर्शी और जिम्मेदार खनिज विकास को बढ़ावा देना।
मुख्य विशेषताएं:-
1. खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और राज्य की जीडीपी में खनिज क्षेत्र के योगदान को बढ़ाना।
2. वर्ष 2047 तक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 1 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
3. शून्य-अपशिष्ट खनन, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों को लागू करना।
4. उन्नत अन्वेषण तकनीक, AI आधारित निगरानी और डिजिटल प्रशासन अपनाकर पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
5. GPS आधारित ट्रैकिंग, जियो-फेंसिंग और रीयल-टाइम निगरानी का उपयोग कर अवैध गतिविधियों को रोकना।

राजस्थान एम-सैंड नीति 2024
• यह एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य निर्माण कार्यों में नदी रेत (बजरी) के स्थान पर एक स्थायी विकल्प के रूप में निर्मित रेत (एम-सैंड) के उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहन देना है।
मुख्य विशेषताएं:-
1. एम-सैंड इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जायेगा।
2. एम-सैंड इकाइयों के लिए प्रोत्साहन:-
• वित्तीय लाभ:- रॉयल्टी में छूट (50%)
• निवेश सब्सिडी:- 10 वर्षों के लिए 75% राज्य कर प्रतिपूर्ति।
• बिजली शुल्क छूट:- 7 वर्षों के लिए 100%
• स्टाम्प शुल्क में छूट।
3.एम-सैंड इकाइयों में ऑन-साइट गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं को प्रोत्साहन।
4. अपशिष्ट प्रबंधन:-
• जल पुन: उपयोग के लिए जीरो डिस्चार्ज प्रणालियों को बढ़ावा देना।
• अपशिष्ट पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना।
• अपशिष्ट निपटान तंत्र विकसित करना।
• निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C & D) अपशिष्ट से एम-सैंड उत्पादन को प्रोत्साहन।
5. कार्यान्वयन रणनीति:-
• इस नीति के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु खान और भूविज्ञान विभाग के अंतर्गत एक एम-सैंड सेल की स्थापना करना।
• सरकारी परियोजनाओं में एम-सैंड के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाना। (2028-29 तक 50% का लक्ष्य)

तेल एवं प्राकृतिक गैस (Oil and natural gas)
• राज्य देश में स्थलीय (ऑनशोर) प्राकृतिक गैस उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है।
• भारत के कुल कच्चे तेल उत्पादन 28.70 MMTPA  (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) में राजस्थान का योगदान 3.42 MMTPA ( लगभग 12%) है।
• राज्य में पेट्रोलियम संभावनाओं वाला क्षेत्र लगभग 1.50 लाख वर्ग किमी में फैला हुआ है, जो 14 जिलों को मिलाकर 4 पेट्रोलियमयुक्त बेसिनों में विस्तृत है:-
1. जैसलमेर बेसिन (जैसलमेर, फलौदी तथा अंशत: बीकानेर जिला)
2. बाड़मेर-सांचोर बेसिन (बाड़मेर जिला तथा अंशत: जालौर एवं बालोतरा जिले)
3. बीकानेर-नागौर बेसिन (5 जिले)
Trick- हजन सिंह चेन्नई वाला + नागौर
हनुमानगढ़, बीकानेर, श्रीगंगानगर, चूरू + नागौर
4. विंध्यन बेसिन (6 जिले)
• हाड़ौती - कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़
 BC - भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़
• धौलपुर, करौली।

राज्य के 15 तेल एवं गैस उत्पादक क्षेत्रों (मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती, रागेश्वरी, कामेश्वरी आदि) से 57,000-59,000 बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का उत्पादन किया जा रहा है।

जैसलमेर के बाघेवाला क्षेत्र से 2025-26 में लगभग 2.04 लाख बैरल भारी कच्चे तेल का उत्पादन किया जा रहा है।

राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट:-
• क्षमता:- 9 MMTPA
• यह पचपदरा (बालोतरा) में स्थित देश का पहला पेट्रोकेमिकल कॉन्प्लेक्स है जिसकी शुरुआत 16 जनवरी 2018 को की गई।
• हिस्सेदारी:- राज्य सरकार (26%) और HPCL (74%)
• लागत:- ₹79,459 करोड़
• ऋण इक्विटी अनुपात:- 2:1 (2 भाग ऋण लिया जाएगा 1 भाग सरकार लगाएगी)
• यह रिफाइनरी बीएस-6 मानक के उत्पादों का उत्पादन करेगी।

राजस्थान सिटी गैस वितरण (CGD) नीति 2025
• 16 जुलाई 2025 को जारी।
• यह नीति गैस पाइपलाइन अवसंरचना को सुदृढ़ करने, CGD नेटवर्क के विकास में तेजी लाने तथा घरेलू एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) एवं संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) की उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित है।


श्रम 

भवन‌ एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड:- 2009

निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाएं:-

निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना:-  
• निर्माण श्रमिकों के आश्रित बच्चों को कक्षा 6 से आगे अध्ययनरत बच्चों के लिए ₹8,000 से ₹25,000 की छात्रवृत्ति दी जाती है एवं मेधावी बच्चों को ₹4,000 से ₹35,000 (पात्रता के अनुसार) प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

निर्माण श्रमिक औजार/टूलकिट सहायता योजना:-
• औजार/टूलकिट की खरीद पर ₹2,000 या उपकरणों की वास्तविक लागत, जो भी कम हो, की वित्तीय सहायता दी जाती है।

सामान्य मृत्यु/दुर्घटना मृत्यु/चोट लगने पर सहायता योजना 
• सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख
• आकस्मिक मृत्यु पर ₹5 लाख
• पूर्ण स्थायी विकलांगता पर ₹3 लाख

प्रसूति सहायता योजना:-
• लड़के के जन्म पर ₹20,000
• लड़की के जन्म पर ₹21,000

सिलिकोसिस सहायता योजना:-
• सिलिकोसिस पीड़ित को ₹3 लाख। 
• पीड़ित की मृत्यु पर उसके आश्रित को ₹2 लाख।

निर्माण श्रमिक जीवन भविष्य सुरक्षा योजना:-
• सामाजिक सुरक्षा हेतु निर्माण श्रमिकों द्वारा जमा कराये गये अंशदान पर बोर्ड द्वारा 50-100% तक सहायता दी जाती है।

सिविल सेवाओं में Pre पास करने पर प्रोत्साहन योजना:-
निर्माण श्रमिक एवं उनके आश्रित बच्चों द्वारा सिविल सेवाओं की प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
IAS Pre:- ₹1 लाख
RAS Pre:- ₹50,000

शुभ शक्ति योजना:-
• पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की वयस्क अविवाहित पुत्रियों को तथा महिला लाभार्थियों को ₹55,000 की वित्तीय सहायता उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास, स्वरोजगार अथवा विवाह संबंधी आवश्यकताओं हेतु प्रदान की जाती है।

निर्माण श्रमिक सुलभ्य आवास योजना 
• केंद्र या राज्य सरकार की आवास योजनाओं के तहत अपना घर खरीदने या निर्माण करने हेतु ₹1.5 लाख तक का अनुदान प्रदान किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में निर्माण श्रमिकों के बच्चों को प्रोत्साहित करने की योजना
• अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर ₹2 लाख, कांस्य पदक जीतने पर ₹5 लाख, रजत पदक जीतने पर ₹8 लाख तथा स्वर्ण पदक जीतने पर ₹11 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

ई-श्रम पोर्टल
• 26 अगस्त 2021 को लॉन्च।
• असंगठित श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल विकसित किया गया है जिसे आधार के साथ जोड़ा जाएगा।
उद्देश्य:- असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का एकीकरण।
• पोर्टल पर पंजीकरण की पात्रता:-
आयु:- 16-59 वर्ष के मध्य।

रोजगार (Employment)
16 मॉडल कैरियर सेंटर (MCC) स्थापित।

मुख्यमंत्री युवा संबल योजना (2019)
• 1 जनवरी 2022 से नए दिशा-निर्देशों के साथ लागू।
• पुरुष:- ₹4,000 बेरोजगारी भत्ता।
• महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर:- ₹4,500 बेरोजगारी भत्ता।
• बेरोजगारी भत्ता अधिकतम 2 वर्षों अथवा स्व-रोजगार या रोजगार प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, दिया जाता है।
• भत्ता प्राप्त करने के लिए कम से कम 3 महीने का कौशल प्रशिक्षण एवं विभिन्न विभागों में प्रतिदिन 4 घंटे की इंटर्नशिप अनिवार्य रूप से करनी होगी।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की सहायता के लिए 33 जिला पुस्तकालयों में सावित्री बाई फुले अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए हैं।

राजस्थान रोजगार नीति 2026
• राज्य की श्रम बल भागीदारी दर 64.4% है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है, तथापि 4.2% की बेरोजगारी दर राज्य की चिंता का विषय बनी हुई है। 
• यह नीति राज्य के जनसांख्यिकीय लाभ और क्षेत्रीय क्षमताओं का प्रभावी उपयोग कर इस चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास करती है।
विजन : राज्य के प्रत्येक युवा को सार्थक रोजगार उपलब्ध कराना तथा राजस्थान को समावेशी एवं सतत्‌ रोजगार का अग्रणी
केंद्र के रूप में स्थापित करना, जिससे राज्य वर्ष 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में
अग्रसर हो सके।
मिशन : स्वरोजगार, मजदूरी / वेतन आधारित रोजगार तथा उद्यमशीलता पर केन्द्रित बहु-आयामी रणनीति के माध्यम से मार्च 2029 तक 15 लाख रोजगार के अवसरों का सृजन सुनिश्चित करना।
रणनीतिक स्तंभ
• प्राथमिक क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुत्थान 
• द्वितीय क्षेत्र (विनिर्माण एवं हरित रोजगार) को गति प्रदान करना। 
• तृतीयक (सेवाओं) क्षेत्र का विस्तार
• सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार को सुदृढ़ करना।
• राजस्थान रोजगार पोर्टल:- यह एक ए.आई.-सक्षम, एकीकृत रोजगार मंच है, जो रोजगार के इच्छुक व्यक्तियों को सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं से जोड़ता है। इसमें विभिन्‍न विभागों एवं प्रशिक्षण संस्थानों का डेटा एकीकृत किया गया है तथा ई-जॉब फेयर और अंतर्राष्ट्रीय प्लेसमेंट की सुविधा भी उपलब्ध है।
क्षेत्रीय फोकस : समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर रोजगार योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा
रहा है, जिसमें विशेष रूप से जनजातीय उपयोजना (टी.एस.पी.) क्षेत्रों एवं आकांक्षी जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
• यह नीति विकास, प्रोत्साहन और डिजिटल शासन को एकीकृत कर एक कुशल एवं सशक्त कार्यबल का निर्माण करती है। यह “नियोजित युवा, समृद्ध राजस्थान” के विजन को साकार करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

सामाजिक सुरक्षा 
 संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तीन योजनाएं चलाई जा रही है।
1. कर्मचारी भविष्य निधि योजना (1952)
2. कर्मचारी पेंशन योजना (1995)
3. कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (1976)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा दो नई पहल/योजनाएं शुरू की गई हैं:-
1. प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना
• शुरू:- 1 अगस्त, 2025 से।
• यह एक रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन योजना है, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन, रोजगार क्षमता में वृद्धि तथा कार्यबल के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देना है। 
• योजना के लाभ 1 अगस्त, 2025 से 31 जुलाई, 2027 के मध्य सृजित रोजगारों पर लागू होंगे। 
• यह योजना दो भागों में विभाजित है, जिसमें प्रथम भाग पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों पर तथा द्वितीय भाग नियोक्ताओं पर केन्द्रित है-
भाग अ (प्रथम बार रोजगार पाने वाले कर्मचारी) : पहली बार ई.पी.एफ.ओ. के सदस्य बनने वाले कर्मचारी जिनका
वेतन ₹1 लाख प्रतिमाह तक है, को एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
भाग ब (नियोक्ता) : ई.पी.एफ.ओ. से पंजीकृत नियोक्ताओं को प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी पर प्रति माह अधिकतम
23,000 तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। 

2. कर्मचारी नामांकन अभियान 2025 : 
 1 नवम्बर, 2025 को लॉन्च।
• उद्देश्य:- स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना। इसके अंतर्गत नियोक्ताओं को उन पात्र कर्मचारियों का नामांकन करने की सुविधा दी गई है, जो 1 जुलाई, 2017 से 31 अक्टूबर, 2025 के बीच ई.पी.एफ.ओ. कवरेज से वंचित रह गए थे। ऐसे मामलों में, यदि पूर्व में कर्मचारी अंशदान की कटौती नहीं की गई है, तो कर्मचारी अंशदान को माफ कर दिया जाएगा तथा प्रति प्रतिष्ठान केवल 100 का नाममात्र क्षति शुल्क देय होगा।

राजस्थान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति 2025
• 27 नवम्बर 2025 को अधिसूचित।
• यह नीति एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य को वैश्विक सेवा मूल्य श्रृंखला से जोड़ना तथा राजस्थान को एक प्रतिस्पर्धी, भविष्य के लिए तैयार और सतत्‌ जी.सी.सी. गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

राजस्थान कौशल नीति 2025
• 16 अप्रैल 2025 को जारी।
• उद्देश्य:- कौशल प्रशिक्षण एवं व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं की रोजगार-क्षमता तथा आय में वृद्धि करना।
• यह नीति विशेष रूप से AI, साइबर सुरक्षा और इंडस्ट्री 4.0 जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में पुनः--कौशल (री-स्किलिंग) और उन्नयन कौशल (अप-स्किलिंग) पर जोर देती है। 
• नीति के प्रमुख प्रावधानों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) का आधुनिकीकरण एवं विस्तार, मॉडल करियर केन्द्रों की स्थापना, पूर्व शिक्षण को मान्यता (रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग), भर्ती-प्रशिक्षण-तैनाती (रिक्रूट-ट्रेन-डिप्लॉय) कार्यक्रम, राजस्थान राज्य व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद को सुदृढ़ करना, फिनिशिंग स्कूल, उत्कृष्टता केन्द्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) तथा अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप कार्यक्रम शामिल हैं।

आजीविका संवर्द्धन एवं कौशल विकास 

राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC):-
• 2010 में राजस्थान आजीविका मिशन की स्थापना की गई।
उद्देश्य:- गरीब और कमजोर लोगों के लिए आजीविका बढ़ाने के लिए अभिनव रणनीति विकसित करना।
• 2012 में इस मिशन को राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC) के रूप में परिवर्तित कर दिया गया।
RSLDC द्वारा क्रियान्वित योजनाएं:-

(A) केंद्र प्रायोजित योजनाएं:-

1. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY):- 
• भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक कौशल प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट आधारित योजना है।
• उद्देश्य:- 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के गरीब ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रदान करना ताकि वे न्यूनतम मजदूरी के बराबर या उससे अधिक नियमित मासिक वेतन वाली नौकरियां प्राप्त कर सकें।
• 1 अप्रैल 2025 से DDU-GKY 2.0 के नए दिशा-निर्देश जारी।

(B) राज्य प्रायोजित योजनाएं:-

1. रोजगार आधारित जन कौशल विकास कार्यक्रम (राजकेविक)
उद्देश्य:- बेरोजगार युवाओं को बाजार मांग के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करके रोजगार के अवसर प्रदान करना।
• यह भर्ती-प्रशिक्षण-तैनाती (रिक्रूट-ट्रेन-डिप्लॉय) मॉडल पर आधारित है।

2. नियमित कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम:-
इस योजना का नाम बदलकर इसे दो भागों में बांट दिया गया है -
a. स्वरोजगार आधारित कौशल शिक्षा महाअभियान (सक्षम)
Swarojgar Aadharit Kaushal Shiksha Mahabhiyan (SAKSHM):-
• महिला और युवाओं के लिए।
• उपयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़कर स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार सृजन करना।

b. समर्थ योजना:-
• सबसे गरीब, भिखारियों, दलितों, आदिवासियों, कैदियों और समाज के अन्य वंचित समुदायों को स्वरोजगार की संभावना वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा आत्म निर्भर बनाना। ‌

3. मुख्यमंत्री युवा कौशल योजना:-
• 7 नवंबर 2019 को शुरू।
• कॉलेज स्तर पर कौशल विकास करना।
• यह एक अंब्रेला योजना है, जिसके तहत राजकेविक, सक्षम, समर्थ तीनों योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

RSLDC में एक CSR प्रकोष्ठ का गठन किया गया है, जो राजस्थान कौशल विकास कोष हेतु धनराशि एकत्रित करता है।

राज्य में बाजार अनुरूप रोजगार सुनिश्चित करने के लिए रिक्रूट-ट्रेन-डिप्लॉय (RTD) मॉडल अपनाया गया है, जिसमें RSLDC उद्योग संघों के साथ मिलकर कार्य करता है।

मुख्यमंत्री नारी शक्ति कौशल सामर्थ्य योजना
• पुराना नाम:- आई-एम शक्ति 
• उद्देश्य:- महिलाओं के कौशल और रोजगार क्षमता में सुधार कर राज्य में उनके आर्थिक अवसरों को सुदृढ़ करना।

राजस्थान युवा नीति 2026 
• 12 जनवरी 2026 को जारी। 
• यह नीति 15-29 वर्ष आयु वर्ग के 2.25 से 2.30 करोड़ युवाओं की क्षमता को सशक्त रूप से विकसित करने हेतु एक समग्र रोडमैप प्रदान करती है, जो राज्य में 27.2% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं । यह नीति युवाओं को नेता (लीडर), नवप्रवर्तक (इनोवेटर) और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की परिकल्पना करती है, ताकि वे आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सतत राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सकें ।
• इसकी निगरानी जिला योजनाओं एवं वार्षिक डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी।
नीति के प्रमुख फोकस क्षेत्र निम्नलिखित हैं :
• नेतृत्व एवं स्वयंसेविता
• डिजिटल सशक्तिकरण एवं प्रौद्योगिकी
• शिक्षा एवं कौशल विकास
• रोजगार एवं उद्यमिता
• खेल, स्वास्थ्य एवं कल्याण
• संस्कृति, विरासत एवं कला
• समावेशन एवं सामाजिक समानता।

युवा मामलात एवं खेल

खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी एवं उपलब्धियाँ
• राजस्थान में 24 नवम्बर से 5 दिसम्बर 2025 तक सभी संभागीय मुख्यालयों में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स-2025 का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें 24 खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। 
• राजस्थान के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए बिहार में आयोजित खेलों इंडिया यूथ गेम्स 2025 में कुल 60 पदक (24 स्वर्ण, 12 रजत एवं 24 कांस्य) अर्जित कर तृतीय स्थान प्राप्त किया और उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में राजस्थान के खिलाड़ियों ने 43 पदक (9 स्वर्ण, 11 रजत एवं 23 कांस्य) जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया।

खिलाड़ी कल्याण एवं डिजिटल पहलें
• खिलाड़ियों को सुरक्षा कवरेज प्रदान करने हेतु खेल जीवन बीमा योजना प्रारम्भ की गई है, जिसके अन्तर्गत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को ₹25 लाख तक का दुर्घटना एवं जीवन बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत कुल 40 खिलाड़ियों को लाभान्वित किया गया है। 
• पारदर्शिता सुनिश्चित करने एवं सुगम पहुँच के लिए खेल प्रमाण-पत्रों हेतु डिजिटल रिपॉजिटरी पोर्टल का शुभारम्भ किया गया है ।

प्रमुख खेल योजनाएं एवं अवसंरचना विकास 
• जिला स्तर पर खेलों में विशेषज्ञता को सुदृढ़ करने हेतु एक जिला-एक खेल योजना प्रारम्भ की गई है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले के लिए एक प्रमुख खेल का चयन किया गया है।
खेलो राजस्थान युवा खेल प्रस्तावित हैं, जो खेलो इंडिया के अनुरूप होंगे तथा पारंपरिक एवं स्वदेशी खेलों को सम्मिलित करते हुए ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। 
मिशन ओलंपिक्स-2028 के अंतर्गत 50 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, खेल किट एवं कोचिंग सहायता प्रदान की जायेगी।
• 150 एथलीटों को प्रशिक्षित करने के लिए जयपुर में 220 करोड़ की लागत से एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्पोर्ट्स स्थापित किया जा रहा है।
• खेलों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए, जयपुर, भरतपुर और उदयपुर में आवासीय बालिका खेल संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं।
• जमीनी स्तर पर खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर चरणबद्ध तरीके से ओपन जिम एवं खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। 
• वर्तमान में राजस्थान राज्य खेल परिषद द्वारा 25 आवासीय खेल अकादमियां/आवासीय खेल विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

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