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जैव प्रौद्योगिकी। टेस्ट ट्यूब बेबी। सरोगेसी। क्लोनिंग

 
टेस्ट ट्यूब बेबी


टेस्ट ट्यूब बेबी (परखनली शिशु)

IVF गर्भाधान/निषेचन की एक प्रक्रिया है, जिसमें एक अंडाणु शरीर के बाहर परखनली में (प्रयोगशाला में) शुक्राणु के साथ निषेचित करवाया जाता है।

माइटोकांड्रियल रिप्लेसमेंट थेरेपी / थ्री पेरेंट बेबी
MRT (एमआरटी) :-
• यह IVF का ही एक प्रकार है।
• इसमें IVF प्रक्रिया के दौरान जैविक माता के दोषपूर्ण • माइटोकांड्रियल DNA को डोनर महिला के स्वस्थ माइटोकांड्रियल DNA से प्रतिस्थापित किया जाता है।
• इस प्रकार उत्पन्न संतान में जैविक माता-पिता के नाभिकीय DNA के साथ-2 डोनर महिला का माइटोकांड्रियल DNA भी उपस्थित होता है। इसी कारण बच्चे को थ्री पैरेंट बेबी के नाम से जाना जाता है।

सरोगेसी
सरोगेसी का अर्थ है - किराए की कोख।
इसके तहत एक महिला(सरोगेट माता) तथा एक दंपत्ती या व्यक्ति के बीच, गर्भाधान, गर्भावस्था व बच्चे की जन्म से संबंधित अनुबंध किया जाता है।

सरोगेसी(विनियमन) विधेयक 2019
यह वाणिज्यिक सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाता है और नैतिक परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है।

पात्र लाभार्थी - 
• केवल भारतीय युगल।
• महिलाओं के लिए 23 - 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 26 - 55 वर्ष के बीच ।
• कम से कम 5 साल के लिए शादी की जानी चाहिए।
अनिवार्यता का प्रमाण पत्र और पात्रता का प्रमाण पत्र भी आवश्यक है।
• सरोगेट को इच्छुक जोड़े का करीबी रिश्तेदार होना चाहिए और एक विवाहित महिला होनी चाहिए, जिसका खुद का एक बच्चा हो।
• उसकी आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए, उसे पहले सेरोगेट नहीं किया गया हो और प्रमाणित रूप से मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।
• सेरोगेट को गर्भावस्था के दौरान और गर्भावस्था के बाद बीमा कवरेज प्रदान किया जाना चाहिए।
• इच्छुक दंपत्ति को सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे को किसी भी हालत में नहीं छोड़ना चाहिए। नवजात शिशु उन सभी अधिकारों और विशेषाधिकारों का हकदार होगा जो एक प्राकृतिक बच्चे को उपलब्ध होता है। सरोगेसी में कोई भी लिंग चयन नहीं किया जा सकता है।
• देश में सभी सरोगेसी क्लिनिको को सरोगेसी या इससे संबंधित प्रक्रिया को करने के लिए उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा पंजीकृत होने की आवश्यकता है।
• प्रभावी विनियमन सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सरोगेसी बोर्डों का गठन।

क्लोनिंग
• क्लोन एक ऐसी जैविक संरचना है, जो एकमात्र जनक से अलैंगिक विधि द्वारा उत्पन्न होती है।
• उत्पादित क्लोन अपने जनक से शारीरिक व अनुवांशिक रूप से पूर्णतः समरूप होता है।
• किसी जीव का प्रतिरूप बनाने की प्रक्रिया क्लोनिंग कहलाती है ।

जैव सूचना विज्ञान
जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें कंप्यूटर विज्ञान व सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग जैविक आंकड़ों के संकलन, भंडारण व विश्लेषण हेतु किया जाता है, जैव सूचना विज्ञान कहलाती है।

उपयोग
• DNA  मैपिंग व विश्लेषण में (HGP,GIP)
• प्रोटीन अनुक्रम विश्लेषण में।
• जानलेवा बीमारी हेतु उत्तरदायी जीन का पता लगाने में।
• औषधि निर्माण में।

जैव संसूचक
• इनका उपयोग शरीर में होने वाले विभिन्न जैव रासायनिक बदलावों का पता लगाने तथा रोगों की पहचान करने में किया जाता है।
उदाहरण - रक्त में ग्लूकोज के स्तर का पता लगाना, गर्भावस्था का पता लगाना।

जैव हस्ताक्षर
कोई भी पदार्थ, अणु या परिघटना जो अतीत या वर्तमान के किसी जीवन का वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करती है, जैव हस्ताक्षर कहलाती है।
उदाहरण - 
• पृथ्वी पर प्रारंभिक जीवन का जैव हस्ताक्षर - सूक्ष्मजीवाश्म
• एक्सोप्लेनेट्स पर प्रारंभिक जीवन के जैव हस्ताक्षर - जल के अणु, मिथेन, फॉस्फीन ।

जैव उपचार
• पर्यावरण (मृदा ,जल, वायुमंडल) में उपस्थित प्रदूषकों के प्रभाव को कम करने हेतु सूक्ष्मजीवों का प्रयोग करना, जैव उपचार कहलाता है।
• जैव उपचार का उपयोग मुख्यतः पेट्रोलियम पदार्थों के रिसाव पर किया जाता है।
• स्यूडोमोनास प्यूटिडा आदि जीवाणु जटिल पेट्रोलियम यौगिकों को सरल अणुओं में तोड़ देते हैं, जिनका आसानी से निम्नीकरण हो जाता है।
उदाहरण -  ऑयल जैपर‌
ओइलिवोरस -S(TERI द्वारा विकसित)

जैव ईंधन 
बायोएथेनॉल - 
यह जैविक पदार्थों के किण्वन  प्रक्रिया द्वारा उत्पादित किए जाते हैं।
स्रोत - गन्ना, चुकंदर, ज्वार ,आलू।

बायोडीजल -
यह वनस्पति वसा व जंतु वसा‌ के एस्टरीकरण द्वारा उत्पादित किए जाते हैं।
स्रोत- सोयाबीन, रतनजोत, जेट्रोफा, जंतु वसा।

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