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जैव प्रौद्योगिकी। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग। जीन थेरेपी

 
जैव प्रौद्योगिकी


जैव प्रौद्योगिकी

तकनीकी की वह शाखा जिसमें जीवधारियों तथा जैविक प्रणालियों का उपयोग कर ऐसे उत्पाद विकसित किए जाते हैं, जो मनुष्य तथा अन्य जीवों हेतु उपयोगी हों।

डीएनए (DNA):-
डी ऑक्सी राइबो न्यूक्लिक अम्ल
• कोशिकाओं के गुणसूत्रों में पाए जाने वाले ततुनुमा अणु को डीएनए कहते है।
• इसमें अनुवांशिक कूट निहित होता है, जो जीवों की आनुवाशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानातरित करता है।
• डीएनए न्यूक्लियोटाइड का बहुलक होता है। न्यूक्लियोटाइड, न्यूक्लियोसाइड व फास्फेट अणु से मिलकर बनता है।
न्यूक्लियोसाइड, डीऑक्सी राइबो शर्करा व नाइट्रोजन क्षार से मिलकर बनता है।

नाइट्रोजन क्षार:- एडिनिन, गुवानिन (प्यूरिन) व थायमीन, साइटोसिन (पिरिमिडिन)

डीएनए की संरचना:- द्विकुडलित तंतुनुमा।

जीन:- जैन डीएनए में न्यूक्लियोटाइड्स का ऐसा अनुक्रम है, जो आनुवांशिक लक्षणों की जानकारी रखता है तथा उनका एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण करता है।
• यह शरीर में प्रोटीन संश्लेषण करवाता है।

जीनीय प्रौद्योगिकी (Genetic Engineering):-
किसी भी जीव की कोशिका के अनुवांशिक पदार्थ में कृत्रिम विधि द्वारा बदलाव करने की प्रक्रिया जीनीय प्रौद्योगिकी कहलाती है।
इसे जेनेटिक मोडिफिकेशन या जेनेटिक मेनिपुलेशन भी कहते है।
उदाहरण - डीएनए पुनर्सयोजी तकनीक ,जीन थेरेपी ,जीन एडिटिंग।


डीएनए पुनर्संयोजी तकनीक

ऐसी तकनीक जिसके द्वारा डीएनए की संरचना में बदलाव किया जाता है तथा अवांछित विशेषताओं वाले जीन को हटाकर वांछित विशेषताओं वाले जीन को जोड़ा जाता है।

स्टेप - 1 

वाछिंत  विशेषताओं वाले जीन की पहचान व पृथक्करण :- 

इस हेतु न्यूक्लिएज एंजाइम का प्रयोग किया जाता है।

इसे आण्विक कैची या रासायनिक चाकू भी कहते हैं।

यह द्विसूत्री डीएनए को एक विशिष्ट पहचान अनुक्रम पर काटता है। एक्सो- न्यूक्लिएज एंजाइम डीएनए को सिरे से जबकि एंडो- न्यूक्लिएज एंजाइम डीएनए को बीच से काटता है।

स्टेप - 2

वांछित डीएनए खंड का पॉलीमरेज  चेन रिएक्शन (PCR) द्वारा आवर्धन करना :- 

 पॉलिमरेज‌ एंजाइम डीएनए खंड का गुणन कर अनेक प्रतिलिपियां  तैयार करता है, जिन्हें सी - डीएनए कहते हैं( कॉपी डीएनए, कॉम्प्लीमेंट्री डीएनए) ।

स्टेप - 3

वांछित डीएनए खंड को लाइगेज एंजाइम की सहायता से वाहक(खुले प्लाज्मिड) के साथ जोड़ा जाता है।

इस प्रकार पुनर्संयोजी डीएनए प्राप्त होता है।

स्टेप - 4

पुनर्संयोजित डीएनए को होस्ट कोशिका में स्थानांतरित किया जाता है। तत्पश्चचात कोशिश विभाजन द्वारा वैसी अनेक कोशिकाएं प्राप्त कर ली जाती है।

स्टेप - 5

वांछित विशेषताओं वाले जीन वाली कोशिकाओं से पराजीनी जीव प्राप्त करना अथवा वांछित उत्पाद प्राप्त करना।
उदाहरण -
फ्लेवर सेवर टोमेटो- सड़नरोधी 
गोल्डन राइस- Vit A ( बीटा कैरोटीन युक्त) 
सुपर बनाना- प्रोटीन युक्त
सुपर पोटैटो- प्रोटीन युक्त( Delhi University) 
BT कॉटन- कीट प्रतिरोधी (बेसिलस थुरिंगिएन्सिस)
BT बैंगन- कीट प्रतिरोधी (बेसिलस थुरिंगिएन्सिस)
पराजीनी जंतु।

पराजीनी जीव (जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनिज्मस):-
ऐसे जीव जिनके अनुवांशिक पदार्थ में जेनेटिक इंजीनियरिंग की कृत्रिम विधियों द्वारा बदलाव किया जाता है, पराजीनी जीव कहलाते है।
उदाहरण
BT कॉटन
गोल्डन राइस
सुपर पोटैटो
GM जंतु


डीएनए फिंगरप्रिंटिंग/डीएनए प्रोफाइलिंग

मनुष्य के गुणसूत्र में मिलने वाले डीएनए की विशिष्टता के आधार पर व्यक्ति की पहचान करने की तकनीक डीएनए फिंगरप्रिंटिंग या डीएनए प्रोफाइलिंग कहलाती है।
इसकी खोज 1984 में ब्रिटिश वैज्ञानिक एलेक जेफ्री ने की थी।
डॉ लालजी सिंह को भारत में डीएनए फिंगर प्रिंटिंग का जनक कहा जाता है।
प्रक्रिया-
(i) सैंपल से डीएनए का पृथक्करण करना।
(ii) रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज‌ एंजाइम का प्रयोग कर डीएनए को विशिष्ट अनुक्रम पर काटा जाता है।
(iii) पॉलीमरेज चैन रिएक्शन (PCR) तकनीक का उपयोग कर डीएनए का आवर्धन किया जाता है।
(iv) डीएनए खंडों का जेल इलेक्ट्रोफॉरेसिस:- 
विखंडित डीएनए को अगारोस जैल में डुबाया जाता है।तत्पश्चात विद्युत आवेश प्रवाहित करने पर ये खंड अपनी लंबाई के अनुसार व्यवस्थित हो जाते हैं। यह प्रक्रिया इलेक्ट्रोफॉरेसिस कहलाती है।
(v) डीएनए खंडों की इस व्यवस्था को नाइट्रोसैलूलोज प्लेट पर स्थानांतरित कर लिया जाता है।
(vi) नाइट्रोसैलूलोज की प्लेट को रेडियो सक्रिय प्रोब से जोड़ा जाता है। रेडियो सक्रिय प्रोब‌ डीएनए में विशिष्ट खंडों (रेस्ट्रिक्टेड फ्रेगमेंट) की पहचान करता है।
(vii) एक्स-रे द्वारा डीएनए फिंगरप्रिंट प्राप्त कर लिया जाता है।

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग:-
• फॉरेंसिक साइंस में - अपराधियों की पहचान हेतु।
• पैतृकता संबंधी मामलों की जांच में।
• अस्पताल में बच्चों की अदला-बदली के मामले निपटाने में।
• मृत व्यक्ति की पहचान करने में उपयोगी है।


जीन थेरेपी (जीन चिकित्सा)

• शरीर में पाई जाने वाली कोशिकाओं और ऊतकों में किसी जीन को प्रवेश कराकर अथवा दोषपूर्ण/खराब जीन‌ की मरम्मत कर बीमारियों का उपचार करना जीन चिकित्सा या जीन थेरेपी कहलाता है।
• जीन थेरेपी का उपयोग वर्तमान में मुख्यतः पौधों (पादप कोशिकाओं) पर किया जाता है।
• मनुष्य में इस तकनीक का उपयोग अल्जाइमर, पाकिंसन व सिकल सेल एनीमिया आदि के उपचार में किया जा रहा है।

जीन/जिनोम एडिटिंग (जीन संपादन):-
• यह जेनेटिक इंजीनियरिंग का एक प्रकार है जिसके तहत किसी कोशिकाओं में पाए जाने वाले डीएनए में किसी जीन का प्रवेश करवाया जाता है अथवा डीएनए के किसी भाग को हटाकर या प्रतिस्थापित किया जाता है।
• जीन एडिटिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग डीएनए को सटीक स्थान पर परिवर्तित करने हेतु किया जाता है।
• जीन एडिटिंग की क्रिया विशेष‌ एंजाइम  द्वारा होती है।
जिन्हें इंजीनियर्ड न्यूक्लिएज एंजाइम कहते हैं। 
• यह एंजाइम डीएनए को विशिष्ट पहचान अनुक्रम पर काटते हैं। 
इन्हें आणविक कैची या रसायनिक चाकू भी कहते हैं।

CRISPR - Cas Technique 
• पूरा नाम - क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शार्ट पेलिन्डोमिक रिपीट।
• यह जीन एडिटिंग की उन्नत तकनीक है।
CRISPR - यह DNA में पाए जाने वाले विशेष खंड होते हैं।
Cas9 : यह एक एंजाइम होता है।

गाइड RNA :- विशिष्ट RNA खंड

स्टेम सेल थेरेपी (स्तंभ कोशिका चिकित्सा):-
• स्टेम सेल अविभेदित प्राथमिक कोशिकाएं होती है, जो शरीर के किसी भी अंग विशेष की कोशिका में परिवर्तित होने की क्षमता रखती है।
• इन्हें मास्टर कोशिका भी कहते हैं।
• स्टेम सेल की सहायता से रोगों /बीमारियों का उपचार करना स्टेम सेल थेरेपी कहलाता है।

क्षमता के आधार पर स्टेम सेल के प्रकार:-
(1) यूनीपोटेंट‌ स्टेम सेल:- 
वे स्तंभ कोशिकाएं जो केवल एक ही प्रकार की कोशिका में परिवर्तित होने की क्षमता रखती है।
स्रोत - यकृत, रक्त वाहिनी, कंकाल, मेरुरज्जु।

(2) मल्टीपोटेंट स्टेम सेल:-
वे स्तंभ कोशिकाएं जो एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं में परिवर्तित होने की क्षमता रखती हैं।
स्रोत - मस्तिष्क अस्थि मज्जा इत्यादि।
(3) प्लूरिपोटेंट स्टेम सेल:-
वे स्तंभ कोशिकाएं जो प्लेसेंटा को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की कोशिका में परिवर्तित होने की क्षमता रखती हैं।
स्रोत - भ्रूण की ब्लास्टूला अवस्था।

(4) टोटीपोटेंट स्टेम सेल :-
वे स्तंभ कोशिकाएं जो शरीर की समस्त कोशिकाओं में परिवर्तित होने की क्षमता रखती है।
स्रोत - जायगोट से (3-4 दिन)

 स्त्रोत
 क्षमता
भ्रणीय  स्तंभ कोशिका 

भ्रूण

 प्लूरिपोटेंट
 गर्भनाल स्तंभ कोशिका
गर्भनाल

प्लूरिपोटेंट

 वयस्क स्तंभ कोशिका
 वयस्क(रक्त अस्थि मज्जा )
मल्टी पोटेंट
प्रेरित प्लूरिपोटेंट स्तंभ कोशिका
 कोशिकाओं से डीएनए पुनर्सयोजी तकनीक द्वारा विकसित
प्लूरिपोटेंट

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