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परमार वंश का इतिहास

 
History of Parmar Dynasty


परमार वंश का इतिहास

वागड़ में पहले परमार वंश का शासन था।
राजधानी- आर्थूणा (बांसवाड़ा)
  कालांतर में गुजरात के सोलंकियों ने वागड़ पर अधिकार कर लिया।

मालवा के परमारों का उत्पति स्थल आबू है।
इनकी राजधानी उज्जैन व धारा नगरी रही ।
मालवा के परमारों के अधीन कोटा राज्य का दक्षिणी भारत, झालावाड़, वागड़ तथा प्रतापगढ़ राज्य का पूर्वी भाग भी आते थे।

कृष्णराज
अन्य नाम:- उपेन्द्र
इसके पुत्र डंबरसिंह ने वागड़ में परमार राज्य स्थापना की थी।

मुंज
इसने शक्ति कुमार के शासन काल में मेवाड़ पर आक्रमण किया तथा आघाटपुर (आहड़) को नष्ट कर दिया, तथा चित्तौड पर अधिकार कर लिया। यह जानकारी धवल राठौड के हस्तिकुण्डी अभिलेख (997 ई.) से मिलती है।
• यह कर्नाटक के चालुक्य राजा तैलप के खिलाफ लड़ता हुआ मारा गया था।

दरबारी विद्वान:-
1. हलायुध - अभिधान रत्नमाला
2. पद्मगुप्त (परिमल) - नवसाहसांक चरित
3. धनंजय - दशरूपक
4. धनपाल - तिलकमंजरी

कवियों का आश्रयदाता होने के कारण मुंज को "कवि वृष" भी कहा जाता है ।
अन्य उपाधियाँ:-
1. वाक्पतिराज
2. अमोघवर्ष
3. उत्पलराज
4. पृथ्वीवल्लभ
5. श्रीवल्लभ

सिन्धुराज
यह मुंज का भाई था। मुंज ने सिन्धुराज के पुत्र भोज को गोद लिया था, परन्तु भोज की अल्प आयु के कारण सिन्धुराज ने शासन संभाला।
उपाधि - नवसाहसांक

भोज
इसने चित्तौड में त्रिभुवन नारायण मन्दिर का निर्माण करवाया था। कुमारपाल चालुक्य के समय इसका नाम बदलकर समिद्धेश्वर मन्दिर कर दिया था ।
• इसने भोजपुर झील का निर्माण करवाया था। कालान्तर में इसका नाम भोपाल कर दिया गया।
• इसने संस्कृत भाषा में श्रृंगारमंजरीकथा तथा प्राकृत भाषा में कूर्मशतक नामक ग्रन्थ लिखे।
• इसने सरस्वती कण्ठाभरण, राजमृगांक, विद्वज्जनमण्डल, समरांगण आदि पुस्तके भी लिखी।

इसने अपनी राजधानी धारा नगरी में सरस्वतीकण्ठाभरण (सरस्वतीसदन) नामक संस्कृत पाठशाला का निर्माण करवाया। इस पाठशाला में सरस्वती की जो मूर्ति थी। वही वर्तमान में हमारे ज्ञानपीठ पुरस्कार का चिन्ह है।
इस पाठशाला की दीवारों पर कूर्मशतक तथा "मदन" की पारिजातमंजरी की पंक्तियाँ लिखवाई गई थी।
कालान्तर में मुस्लिम आक्रमणकारियों ने इस पाठशाला को तोडकर मस्जिद का निर्माण करवाया था। जिसे कमालमौला मस्जिद कहा जाता है।

मुहम्मद बिन तुगलक के समय मालवा के परमार राज्य का अन्त हो गया, तथा इनकी शाखा अजमेर आ गई।

त्रिभुवन नारायण मंदिर किसने बनवाया - भोज परमार। 
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
भोज परमार की उपाधि - त्रिभुवन।
समिद्धेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण किसने करवाया ? - मोकल।

वागड़ के परमार
वागड़ के परमार मालवा के परमार राजा कृष्णराज के पुत्र डंबरसिंह के वंशज है। 
इनकी राजधानी अर्थूणा ( बांसवाड़ा) थी।

चामुण्डराज
1079 ई. में इसने अपनी राजधानी अर्थूणा में मण्डलेश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया।

नोट:- 1179 ई. में मेवाड का गुहिल शासक सामन्तसिंह कीर्तिपाल सोनगरा से हारकर वागड़ आ गया तथा उसने परमारों को हराकर वागड़ में गुहिल राज्य की स्थापना की।
• सामन्तसिंह तराईन के युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की तरफ से लड़ता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ।

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