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राजस्थान का साहित्य । आधुनिक राजस्थानी साहित्य

 
Literature of Rajasthan


राजस्थान का साहित्य

लेखक               पुस्तक
• वज्रसेन सूरि - भरतेश्वर बाहुबली घोर (1168 ई.)
राजस्थानी साहित्य की सबसे प्राचीन पुस्तक
• शालिभद्र सूरि - भरतेश्वर बाहुबली रास (1184ई.)
सन बताने वाली सबसे प्राचीन राजस्थानी पुस्तक।

• नयनचंद्र सूरि - हम्मीर महाकाव्य।
इसमें चौहानों को सूर्यवंशी बताया गया।
• सारंगधर - हम्मीर रासौ
जोधराज - हम्मीर रासौ 
(यह नीमराणा के चंद्रभान चौहान के दरबारी थे)
हम्मीर रासौ अहीरवाटी भाषा में लिखी गई है।

• जान कवि (न्यामत खाँ ) - कायम रासौ
फतेहपुर (सीकर) के कायमखानी नवाब थे।
चौहानों को ब्राह्मण बताया गया है।
• गिरधर आसिया - संगत सिंघ रासौ।
 प्रताप का भाई शक्तिसिंह की जानकारी।
• दलपत विजय - खुमाण रासौ।
बापा रावल से राजसिंह तक मेवाड़ राजाओं की जानकारी।
• दयाल - राणा रासौ
बापा रावल से जयसिंह तक मेवाड़ राजाओं की जानकारी।
• नल्ल सिंह - विजयपाल रासौ
बयाना के राजा विजयपाल (जादौन राजा) की जानकारी।
• डूंगरसिंह - शत्रुशाल रासौ
शत्रुशाल बूंदी का राजा था, जिसने रंगमहल का निर्माण करवाया।

• जग्गा खिड़िया - वचनिका राठौर रतनसिंह महेसदासोत री।
रतन सिंह राठौर रतलाम (MP) का राजा था तथा धरमत के युद्ध में लड़ता हुआ मारा गया।

• कृपाराम खेड़िया - राजिया रा दूहा
सीकर के राजा लक्ष्मणसिंह के दरबारी थे तथा राजिया इनका नौकर था।

• शिवदास गाडण - अचलदास खींची री वचनिका। 
अचलदास खींची गागरोन के राजा थे।
इसके समय 1423 ईस्वी में गागरोन का पहला साका हुआ। (मालवा के होशंगशाह ने आक्रमण किया)

• केशवदास गाडण - गजगुणरुपक, विवेक वार्ता
अमरसिंह रा दूहा।
यह मारवाड़ के गजसिंह के दरबारी थे।

• कवि कल्लोल - ढोला मारु रा दूहा।
कुशललाभ - ढोला मारू री चौपाई।
यह जैसलमेर के हरराज के दरबारी थे।

• दुरसा आढा -
विरूद छहतरी (राणा प्रताप की 76 उपाधियांँ)
किरतार बावनी (भगवान के 52 दोहे)

• जोगीदास - हरि पिंगल प्रबंध
प्रतापगढ़ के राजा हरिसिंह की जानकारी।

• खेतसी सांदू -
भाषा भारथ (महाभारत का डिंगल अनुवाद)

• मुरारीदास - जसवंत जसो भूषण
जसवंत सिंह II (जोधपुर) के दरबारी तथा बांकीदास के पुत्र थे।
• बख्तावर जी - केहर प्रकाश (प्रेम कहानी)

• उमरदान - दारु रा दोस, अमल रा औगण, भजन री महिमा।
• भाड़उ व्यास - हम्मीरायण
• बादर ढाढी - वीरमाण 
मारवाड़ के वीरमदेव का वर्णन। 
वीरमदेव चूंडा का पिता था।

• हरिनाभ - केसरी सिंह समर
खंडेला (सीकर) के सामंत केसर सिंह का वर्णन।
• नरहरि दास - अवतार चरित्र


आधुनिक राजस्थानी साहित्य 

सूर्यमल मीसण - वंश भास्कर, वीर सतसई, बलवंत विलास, सती रासौ, छंद मयूख, राम रजांट।
बूंदी के राजा रामसिंह के दरबारी थे।
वे चारणो की मिश्रण शाखा से संबंधित थे।
सूर्यमल जी ने वीर सतसई बीच में छोड़ दी थी। जिसे उनके दत्तक पुत्र मुरारीदान ने पूरी की थी।

अपडेट जारी....

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