आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें PDF के लिए टेलीग्राम चैनल DevEduNotes से जुड़े।

स्वराज पार्टी की स्थापना। साइमन कमीशन। नेहरू रिपोर्ट

 
Swaraj Party


स्वराज पार्टी की स्थापना

1 जनवरी 1923 को इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना की गई।
• अध्यक्ष - सी आर दास।  
• महासचिव - मोतीलाल नेहरू।
• अन्य सदस्य - विठ्ठल भाई पटेल, जयकर, केलकर।

• स्वराज पार्टी ने 1923 के चुनावों में भाग लिया तथा मध्य प्रांत में उसे पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ।
• बंगाल, बॉम्बे एवं संयुक्त प्रांत में इसे सर्वाधिक सीटें प्राप्त हुई।
• केंद्रीय विधानसभा में 101 में से 42 सीटें प्राप्त हुई।
विठ्ठल भाई पटेल को केंद्रीय विधानसभा का अध्यक्ष बनाया।
• स्वराज पार्टी ने विधानमंडलों में गलत सरकारी नीतियों का विरोध किया था। जैसे - ली कमीशन, मुडिमैन समिति, ट्रेड डिस्प्यूट बिल, पब्लिक सेफ्टी बिल।
ली कमीशन - उच्च पदों पर उच्च जाति के लोगों की नियुक्ति की सिफारिश की।
मुडिमैन समिति - द्वैध शासन संबंधी सुधार हेतु बनाई गई थी।

• स्वराज पार्टी ने स्थानीय निकाय चुनाव में भी भाग लिया था। सी आर दास कलकत्ता के मेयर बने थे।

स्वराज पार्टी के पतन के कारण:-
1. 1925 में सी आर दास का निधन हो गया तथा इसके बाद स्वराज पार्टी नेतृत्वविहीन हो गई।
2. कांग्रेस ने स्वराज पार्टी का समर्थन नहीं किया था।
3. स्वराज पार्टी ने विधानमंडल में सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया था तथा कई जन कल्याणकारी कार्य किए थे परंतु इन्हें जनता तक नहीं पहुंचा पाए।
4. स्वराज पार्टी के सदस्यों में मंत्री बनने की प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हुई तथा ये आपस में लड़ने लगे
5. स्वराज पार्टी ने अलग-2 विचारधारा के लोगों को लेकर गठबंधन बना लिया था जो सफल नहीं हुआ।

साइमन कमीशन

1919 के अधिनियम अनुसार भारत में 10 वर्ष बाद संवैधानिक सुधारों के लिए एक आयोग का गठन किया जाना था। 
अतः 1927 ईस्वी में सर साइमन के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया गया। 
• इस आयोग का गठन 2 वर्ष पूर्व ही कर दिया गया क्योंकि -
1. ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी सत्ता में थी तथा उसे आगामी चुनाव में हार का खतरा था तथा नई लिबरल पार्टी भारत में अधिक सुधार कर सकती थी।
2. असहयोग आंदोलन के बाद भारत में सांप्रदायिक समस्या बढ़ रही थी तथा अंग्रेज इसका फायदा उठाना चाहते थे।
3. भारत में क्रांतिकारी आंदोलन चल रहा था। अतः उसे रोकने, दबाने व नरमपंथियों को संतुष्ट करने के लिए आयोग का गठन किया गया।

इस आयोग में 7 सदस्य थे तथा ये सभी ब्रिटिश संसद के सदस्य थे। इनमें से एक भी भारतीय सदस्य नहीं था। इसलिए इसे श्वेत कमीशन भी कहा जाता है।
अतः भारतीयों ने इसका विरोध किया।

क्योंकि यह आयोग ब्रिटिश संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपने वाला था। ब्रिटिश संसद में दो भारतीय सदस्य भी थे। परंतु  उन्हें आयोग में शामिल नहीं किया गया।
1. सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा।
2. सपूरजी दोराबजी सकलातवाला।

लखनऊ में जवाहरलाल नेहरू तथा गोविंद वल्लभ पंत ने साइमन कमीशन का विरोध किया।
• लाहौर में लाला लाजपत राय ने साइमन कमीशन का विरोध किया। पुलिस लाठीचार्ज में लालाजी शहीद हो गए। लाला जी ने कहा था -
"मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी अंग्रेजी साम्राज्य के ताबूत की कील साबित होगी।"

साइमन कमीशन का समर्थन करने वाली पार्टियां:-
1. यूनिनिस्ट पार्टी (पंजाब)
2. जस्टिस पार्टी (मद्रास)
3. मुस्लिम लीग का शफी गुट।

साइमन कमीशन की सिफारिशें:-
1. ब्रिटिश प्रांत तथा देशी रियासतों को मिलाकर अखिल भारतीय संघ बनाये जाये।
2. भारत में संघात्मक व्यवस्था लागू की जाए। 
3. प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त किया जाए तथा उन्हें स्वायत्ता दी जाए।
4. केंद्र में भारतीयों को कोई उत्तरदायित्व नहीं दिया जाए।
5. पृथक निर्वाचन गलत है लेकिन फिर भी से जारी रखा जाए।
6. बर्मा को भारत से अलग किया जाये।
7. सिंध को नया राज्य बनाया जाए।
8. मताधिकार का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए लेकिन सार्वभौमिक मताधिकार नहीं होना चाहिए।

नेहरू रिपोर्ट (1928)
भारत सचिव लॉर्ड बिरकेन हेड ने भारतीयों को संविधान बनाने की चुनौती दी। हमने मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में समिति का गठन किया।
सुभाष चंद्र बोस भी समिति के सदस्य थे।

नेहरू समिति की सिफारिशे:-
1. ब्रिटिश प्रांत तथा देशी रियासतों को मिलाकर अखिल भारतीय संघ बनाये जाये।
2. भारत में संघात्मक व्यवस्था लागू की जाए। 
3. प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त किया जाए तथा उन्हें स्वायत्ता दी जाए।
4. अवशिष्ट शक्तियां केंद्र को दी जानी चाहिए।**
5. भारत को 'डोमिनियन स्टेट' बनाया जाए।
6. बर्मा को भारत से अलग किया जाये।
7. सिंध को नया राज्य बनाया जाए।
8. पृथक निर्वाचन समाप्त किया जाए तथा इसके स्थान पर सामान्य आरक्षण दिया जाए।
9. भारतीयों को मूल अधिकार दिये जाने चाहिए।**
10. भारतीयों को सार्वभौमिक मताधिकार दिया जाना चाहिए।
11. भारत में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की जाए।**

• मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा, सिख महासभा ने नेहरू रिपोर्ट का विरोध किया।
• जवाहरलाल नेहरू तथा सुभाष चंद्र बोस ने डोमिनियन स्टेट की मांग का विरोध किया तथा इन्होंने नई पार्टी इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग का गठन किया।
• नेहरू रिपोर्ट के विरोध में जिन्ना ने अपना 14 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया। इसमें अवशिष्ट शक्तियां प्रांतों को देने की बात कही गई।

आगे पढ़े 👉 लाहौर अधिवेशन। सविनय अवज्ञा आंदोलन

SAVE WATER 

Post a Comment

0 Comments