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लाहौर अधिवेशन। सविनय अवज्ञा आंदोलन

 
Civil disobedience movement


लाहौर अधिवेशन (1929)

अध्यक्ष - जवाहरलाल नेहरू
✍️ पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी।
• 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की गई।
सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया।
आंदोलन का नेतृत्व गांधी जी को सौंपा गया। (रावी नदी के तट पर)

गांधीजी की 11 मांगें (जनवरी 1930)
गांधीजी ने गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन के सामने अपनी 11 मांगे रखी।
1. रुपए का अवमूल्यन (Devaluation) किया जाना चाहिए।
2. भू-राजस्व में 50% कमी की जाए।
3. सैनिक सर्च में 50% कमी की जाए।
4. उच्च वेतन वाले अधिकारियों की संख्या में 50% कमी की जाए।
5. नमक कानून समाप्त किया जाए।
6. शराबबंदी की जाए।
7. तटकर अधिनियम लागू किया जाए। (Coastal shipping act) (भारतीय जहाजों को आरक्षण)
8. विदेशी कपड़े पर विशेष आयात शुल्क लगाया जाए।
9. भारतीयों को आत्मरक्षा के लिए हथियार रखने के लिए अनुमति दी जाए।
10. केंद्रीय गुप्तचर विभाग को बंद किया जाना चाहिए।
11. राजनीतिक कैदियों को रिहा कर दिया जाए।
गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने किसी भी मांग को स्वीकार नहीं किया।


सविनय अवज्ञा आंदोलन

दो चरणों में -
1. 12 मार्च 1930 से 5 मार्च 1931
2 . 1932 - 1934 तक।

कारण:-
1. असहयोग आंदोलन को एक लंबा समय बीत चुका था इसलिए अब एक नए जन आंदोलन की आवश्यकता थी।
2. स्वराज पार्टी ने सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया जिससे जनता में राजनीतिक जागरूकता का विकास हुआ।
3. साइमन कमीशन के कारण भारतीयों में अंग्रेजों के प्रति असंतोष था‌।
4. नेहरू रिपोर्ट को नजरअंदाज किया जाना।
5. अंग्रेजों ने गांधी जी की 11 मांगे नहीं मानी। (तात्कालिक कारण)
6. लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी।
7. क्रांतिकारी आंदोलन चल रहा था, जिससे युवाओं में अंग्रेजो के खिलाफ असंतोष था।
8. समाजवादी आंदोलन चल रहा था, जिसके कारण किसानों और मजदूरों के बीच राजनीतिक जागरूकता का विकास हुआ।
9. नमक पर एकाधिकार के कारण भारतीयों में अंग्रेजो के खिलाफ असंतोष था। (कठोर नमक कानून) 
10. 1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण बेरोजगारी बढ़ गई थी।

दांडी यात्रा
(12 मार्च से 6 अप्रैल 1930)
• 78 सहयोगियों को लेकर साबरमती आश्रम से यात्रा प्रारंभ की‌। इनमें अमेरिकी पत्रकार वेब मिलर भी शामिल थे। (385 किमी)
• दांडी यात्रा से सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ हुआ।
दांडी पहुंचकर गांधी जी ने नमक कानून तोड़ा।

नोट:- सुभाष चंद्र बोस ने दांडी यात्रा की तुलना नेपोलियन की पेरिस यात्रा तथा मुसोलिनी की रोम यात्रा से की।

1. सी राजगोपालाचारी ने त्रिचनापल्ली (तमिलनाडु) से वेदारण्यम तक की यात्रा की। (तंजोर तट)
2. के केलप्पन व टीम माधवन ने कालीकट (केरल) से पयान्नूर तक की यात्रा की।
3. असम के लोगों ने सिल्हट से नोआखली तक की यात्रा की तथा इन सभी यात्राओं में नमक कानून तोड़ा गया।
4. बिहार में चौकीदारी कर के खिलाफ आंदोलन किया गया।
5. मध्य प्रांत में वन कानून के खिलाफ वन सत्याग्रह किया गया।
6. संयुक्त प्रांत तथा गुजरात में कर नहीं देने का आंदोलन चलाया गया।
7. महाराष्ट्र में सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में धरासना सत्याग्रह किया गया।
8. असम में कनिंघम सर्कुलर का विरोध किया गया।  
(अभिभावकों द्वारा बच्चों का चरित्र प्रमाण पत्र जमा करवाना)
9. नागालैंड में मदोनांग ने जियालरंग आंदोलन चलाया।
मदोनांग ने होर्का पंथ की स्थापना की।
मदोनांग की 13 वर्षीय बहन गेडिनेल्यू को गिरफ्तार कर लिया गया।
जवाहरलाल नेहरू ने गेडिनेल्यू को रानी की उपाधि दी थी।
10. पेशावर में चंद्र सिंह गढ़वाली नामक सैनिक ने आंदोलनकारियों पर गोली चलाने से मना कर दिया।
11. उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान (सीमांत गांधी) ने खुदाई खिदमतगार (लाल कुर्ती दल) की स्थापना की।
इनकी पत्रिका - दसरोजा (पश्तो भाषा में)

अपडेट जारी..

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