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राजस्थान में जनजातीय आंदोलन

 
Tribal movement in Rajasthan

राजस्थान में जनजातीय आंदोलन

कारण:-
1. जनजातियां नई प्रशासनिक (Administration) व्यवस्था को समझ नहीं पाई थी।
2. जनजातियों के वनों में अधिकार समाप्त कर दिए गए।
3. जनजातियों के सामाजिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप किया गया था।
जैसे - मेवाड़ महाराणा स्वरूप सिंह ने 1853 में डाकन प्रथा पर रोक लगा दी।

भगत आंदोलन/लसाडिया आंदोलन

यह आंदोलन वागड़ क्षेत्र की भील जनजाति द्वारा किया गया।
नेता - गोविंद गुरु (बंजारा) और सुरजी भगत
• गोविंद गुरु स्वामी दयानंद सरस्वती से प्रभावित थे।
• आदिवासियों को हिंदू धर्म में रखने के लिए इन्होंने भगत पंथ की स्थापना की।
• भीलों में आपसी एकता को बढ़ाने के लिए 1883 ई.में सम्प सभा की स्थापना की।
• 1903 ई. मे मानगढ़ पहाड़ी (बांँसवाड़ा) पर सम्प सभा का पहला अधिवेशन हुआ।
• 1910 ई. में सम्प सभा ने सरकार के सामने अपनी 33 मांगे रखी लेकिन इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।

• मानगढ़ हत्याकांड:-  17 नवंबर 1913 ई.
सम्प सभा के अधिवेशन पर पुलिस द्वारा फायरिंग की गई। 1500 से अधिक भील मारे गए।
• इसे राजस्थान का जलियांवाला हत्याकांड कहा जाता है।
गोविंद गुरु को गिरफ्तार कर लिया गया।
• 10 वर्ष बाद (1923) गोविंद गुरु को रिहा कर दिया गया। इन्होंने अपना शेष जीवन कांबिया गांँव (गुजरात) में शांतिपूर्वक गुजारा।
• गोविंद गुरु अहिंसा के समर्थक थे। इनका सफेद झंडा शांति का प्रतीक था।
• गोविंद गुरु ने भीलो का नैतिक तथा आध्यात्मिक उत्थान किया था।
• गोविंद गुरु का जन्म वेदसा गांँव (डूंगरपुर) के एक बंजारा परिवार में हुआ था।


एकी आंदोलन/भोमट भील आंदोलन

• उदयपुर की भील व गरासिया जनजाति ने मातृकुंडिया (चित्तौड़) नामक स्थान से यह आंदोलन शुरू किया।
• मातृकुंड़िया - राजस्थान का हरिद्वार
मोतीलाल तेजावत ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया। मोतीलाल तेजावत ने मेवाड़ महाराणा के सामने 21 मांगे रखी। जिन्हें मेवाड़ की पुकार कहा जाता है। लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
• धीरे-धीरे यह आंदोलन मेवाड़, वागड़, ईड़र, विजयनगर रियासतों में फैल गया।

• नीमडा (विजयनगर) हत्याकांड:-6 मार्च 1922 ई.
भीलो की सभा पर पुलिस द्वारा फायरिंग की गई। 1200 से अधिक भील मारे गए। मोतीलाल तेजावत फरार हो गए।
गांधीजी की सलाह पर मोतीलाल तेजावत ने 1929 ई में ईडर में आत्मसमर्पण कर दिया।
1936 ई. में मणिलाल कोठारी (गांधीजी के सचिव) के कहने पर महेन्द्राज सभा ने मोतीलाल तेजावत को रिहा कर दिया।
इन्होंने अपना शेष जीवन गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों में बिताया।

महेन्द्राज सभा:- यह मेवाड़ का सुप्रीम कोर्ट था। 1880 ई. में महाराणा सज्जन सिंह द्वारा स्थापित किया गया।
मेवाड़ भील कोर:- यह मेवाड़ की बटालियन थी जिसकी स्थापना 1841 ईस्वी में भीलों पर नियंत्रण हेतु की गई।
मुख्यालय - खैरवाड़ा


राजस्थान में मीणा आंदोलन

1924 ई. में आपराधिक जनजाति अधिनियम पारित हुआ तथा इसमें मीणा जनजाति को शामिल किया गया।
• 1930 ई. में जरायम पेशा अधिनियम पारित हुआ तथा प्रत्येक मीणा महिला-पुरुष को थाने में हाजिरी लगाना अनिवार्य कर दिया गया।
• 1933 ई. में मीणा क्षेत्रीय महासभा का गठन हुआ।
• नीमकाथाना (सीकर) सम्मेलन:- 1944 ई.
संत मगन सागर ने इस सम्मेलन का आयोजन करवाया।
पुस्तक - मीण पुराण
इस पुस्तक में मीणा जनजाति का गौरवशाली इतिहास बताया गया।
• 1944 ई. में बंशीधर शर्मा (जयपुर) ने जयपुर मीणा सुधार समिति गठित की।
जयपुर मीणा सुधार समिति के अन्य नेता - लक्ष्मीनारायण झरवाल
• बागावास (जयपुर) सम्मेलन:- 28 अक्टूबर1946
चौकीदार मीणाओं ने अपने पदों से इस्तीफे दे दिए तथा इसे मुक्ति दिवस के रुप में मनाया।
•1952 ई. में जरायम पेशा अधिनियम समाप्त हुआ।


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