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बांसवाड़ा का इतिहास। डूंगरपुर का इतिहास। प्रतापगढ़ का इतिहास

 
History of vagar

वागड़ का इतिहास

•  वागड़ में पहले परमार वंश का शासन था।
राजधानी- आर्थूणा (बांसवाड़ा)
   कालांतर में गुजरात के सोलंकियों ने वागड़ पर अधिकार कर लिया।
      कालांतर में मेवाड़ के सामंतसिंह ने वागड़ पर अधिकार किया तथा गुहिल राजवंश की स्थापना की। 
(राजधानी - बड़ौदा, डूंगरपुर)

डूंगरसिंह:-
डूंगरपुर की स्थापना कर इसे अपनी राजधानी बनाया।

गोपीनाथ:-

उदयसिंह (1497-1527 ई.):-
खानवा युद्ध में सांगा का साथ दिया तथा लड़ता हुआ मारा गया।
• इसकी मृत्यु के बाद वागड़ राज्य का 2 भागों में विभाजन हो गया।
• इसके पुत्र - पृथ्वीराज (डूंगरपुर), जगमाल (बांसवाड़ा)


डूंगरपुर का इतिहास

पृथ्वीराज:- यह डूंगरपुर का प्रथम स्वतंत्र राजा था।

आसकरण (1549-80 ई):-
• मारवाड़ के राजा चंद्रसेन को शरण दी थी।
 • कालांतर में अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली।
•निर्माण -वेणेश्वर धाम

सहसमल:-
राजमाता प्रेमल देवी ने नौलखा बावड़ी का निर्माण करवाया। (1586 ई. में)

जसवंतसिंह-II:-
• 1818 ई. में अंग्रेजों से संधि कर ली।
• 1845 ई. में अंग्रेजों ने इसे हटा दिया तथा वृंदावन भेज दिया था।

विजयसिंह:-
विधवा विवाह को प्रोत्साहन दिया था। 
• इसने राम-लक्ष्मण बैंक की स्थापना की।
• डूंगरपुर में एडवर्ड सागर झील का निर्माण करवाया।

बांसवाड़ा का इतिहास
 बांसवाड़ा में गुहिल वंश का शासन था।
• जगमाल:- बांसवाड़ा का पहला स्वतंत्र राजा था।
• प्रतापसिंह:- इसने अकबर की अधीनता स्वीकार की।
• उम्मेदसिंह:- 1818 ई. में अंग्रेजों से संधि कर लेता है।


प्रतापगढ़ का इतिहास

प्रतापगढ़ में भी गुहिल वंश का शासन था।
क्षेमकरण:-
• यह कुंभा का भाई था।
•1437 ई. में सादड़ी, प्रतापगढ़ को राजधानी बनाया।

बाघसिंह:-
खानवा के युद्ध में सांगा का साथ दिया तथा चित्तौड़ के दूसरे साके का नेतृत्व किया था।

विक्रमसिंह:- देवलिया को अपनी राजधानी बनाया।
सामंतसिंह:- 1818 ई. में अंग्रेजों के साथ संधि कर लेता है।
उदयसिंह:- इसने प्रतापगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।


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