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बीकानेर का इतिहास

History of Bikaner


बीकानेर का इतिहास

• बीकानेर में राठौड़ वंश का शासन था।
राव बीका:-
1465 ईस्वी में राव जोधा के पांचवे पुत्र बीका ने अपने चाचा कांधल व छोटे भाई बीदा की सहायता तथा करणी माता के आशीर्वाद से बीकानेर (राती घाटी, जांगल प्रदेश) को जीत लिया।

‌1488 ईस्वी में बीका ने बीकानेर की स्थापना की।
बीकानेर की स्थापना आखातीज/अक्षय तृतीया/वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन हुई। इसलिए बीकानेर में आखातीज के दिन पतंगे उड़ाई जाती हैं।

आखातीज को अबूझ सावा होता है। इस राजस्थान में सर्वाधिक बाल विवाह होते हैं।

बीका ने निम्न मंदिर बनवाए:-
भैरू जी का मंदिर - कोडमदेसर
करणी माता का मंदिर - नोखा गांव (देशनोक)
 
राव लूणकरण (1504-26 ई.):-
बीठू सूजा ने इसे कलयुग का कर्ण कहा।
कर्मचन्द वंशोत्कीर्तन काव्यम में दानशीलता की तुलना कर्ण से की गई।

राव जैतसी (1526-41ई.):-
रातीघाटी का युद्ध -1534 ई.
जैतसी और कामरान (हुमायूं का भाई) के बीच।
जैतसी युद्ध जीत गया।
बीठू सूजा की पुस्तक - राव जैतसी रो छंद                   
• गौरतलब है कि कामरान ने पहले भटनेर दुर्ग (हनुमानगढ़) पर भी अधिकार कर लिया था।
पाहेबा का युद्ध 1541 ईस्वी में जैतसी की हत्या राव मालदेव के सेनापति जैपा व कूंपा ने की।

राव कल्याणमल (1541-74 ई.):-
• खानवा के युद्ध में राणा सांगा की ओर से भाग लिया।
• नागौर दरबार में अकबर की अधीनता स्वीकार की।
• पाहेबा के युद्ध में जैतसी की मृत्यु के बाद दिल्ली सुल्तान शेरशाह सुरी से सहायता मांगी।
गिरी सुमेल युद्ध 1544 ईस्वी में शेरशाह सूरी का साथ दिया।

रायसिंह (1574-1615 ई.):- 
• यह अकबर तथा जहांगीर का मनसबदार था।
• अकबर ने इसे 4000 का मनसब दिया। जिसे जहांगीर ने बढ़ाकर 5000 कर दिया।
• 1577 ईस्वी में अकबर ने इसे 51 परगने दिए।
खुसरो के विद्रोह के समय जहांगीर ने रायसिंह को राजधानी आगरा की जिम्मेदारी सौंपी।
कर्मचन्द की देखरेख में बीकानेर में जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण (1589- 94 ई.) करवाया।

रायसिंह की पुस्तकें:-
1. रायसिंह महोत्सव
2. वैधक वंशावली (बीमारियों की जानकारी)
3. ज्योतिष रत्नमाला
4. बाल बोधिनी- (ज्योतिष ग्रंथों पर टिप्पणी)

दरबारी कवि:-
• जैन विद्वान - ज‌ईता - रायसिंह प्रशस्ति - जूनागढ़ दुर्ग में
• जयसोम - कर्मचन्द वशोत्कीर्तन काव्यम (रायसिंह को राजेंद्र कहा गया है।) 
•मुंशी देवी प्रसाद ने रायसिंह को राजपूताने का कर्ण कहा है।

पृथ्वीराज राठौड़:-
• यह रायसिंह का छोटा भाई था।
• अकबर का दरबारी विद्वान था। अकबर ने ही गागरोन का किला दिया था
पुस्तकें:-
1. वेलि कृष्ण रुकमणी री
भाषा- उत्तरी राजस्थानी /डिंगल
• दुरसा आढा (सिरोही) ने इस पुस्तक को 5वां वेद तथा 19वां पुराण बताया।
• जेम्स टाॅड़ के अनुसार इस पुस्तक में 10,000 घोड़ों का बल है।
2.गंगालहरी
3.दशरथ बराउत
4.दशम भागवत रा दूहा 
•एल.पी. टेस्सीटोरी (इटली) ने पृथ्वीराज राठौड़ को डिंगल का होरेस कहा था।

कर्णसिंह (1631-69ई.):-
• उपाधि - जांगलधर बादशाह
• पुस्तक - साहित्य कल्पद्रुम 
• दरबारी विद्वान:- 
गंगाधर मैथिल - कर्ण भूषण, काव्य डाकिनी

अनूपसिंह (1669-98ई.):-
• दक्षिण भारत की जीत के बाद औरंगजेब ने इसे माही भरातिव (धरती जीतने वाला) की उपाधि दी ।
• बीकानेर में अनूप पुस्तकालय का निर्माण करवाया ।
कुंभा के संगीत ग्रंथो का संकलन करवाया।
• संस्कृत ग्रंथों का राजस्थानी भाषा में अनुवाद करवाया।
1. सुक कारिका 
2. बेताल पचीसी
3. गीता
आनंदराम ने अनुवाद किया।

अनूपसिंह की पुस्तकें:-
1.अनूप विवेक
2.काम प्रबोध
3.श्राद्ध प्रयोग चिंतामणि
4.अनूपोदय (यह गीत-गोविंद पर टीका है)

अनूपसिंह के दरबारी विद्वान:-
भावभट्ट - अनूप संगीत अंकुश, अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर

अनूपसिंह दक्षिण भारत से हिंदू देवताओं की मूर्तियां लेकर आया तथा बीकानेर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का मंदिर बनवाया।
इसमें हेरम्ब गणपति की मूर्ति भी है। (शेर पर सवार  गणेशजी)

33 करोड़ देवी-देवताओं की साल मंडोर में है श, जिसे  अभयसिंह ने बनवाया था।

अनूपसिंह के समय बीकानेर में उस्ता कला का विकास हुआ। इसके कलाकार/कारीगर अली रजा और रूकनुद्दीन लाहौर से बुलाए गए।

सूरतसिंह (1765-1828 ई.):-
•1805 ई. में भटनेर पर कब्जा कर लिया। भटनेर का नाम हनुमानगढ़ (मंगलवार को) कर दिया।
•1814 ई. में चुरू पर अधिकार किया। इस समय चुरू के किले से चांदी के गोले दागे गए। चुरू का सामंत स्यौजीसिंह (शिवजी) था।
•1818 ई. - अंग्रेजों से संधि की। 

रतनसिंह (1828-51ई.):-
1839ई.- गया (बिहार) में कन्या वध पर रोक लगाई।
दरबारी विद्वान:-
1. दयालदास - बीकानेर रा राठौड़ री ख्यात (इससे बीका से लेकर सरदार सिंह तक की जानकारी तथा जोधपुर के राठौड़ों की भी जानकारी मिलती है)

गंगासिंह (1887-1943 ई.):-
•1839 ई. में चीन में बॉक्सर विद्रोह को दबाया। इसलिए अंग्रेजों ने केसर-ए-हिंद (सम्राट) की उपाधि दी।
•1913 ई. - प्रजा प्रतिनिधि सभा की स्थापना।
•1916 ई.- बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) की स्थापना के लिए गंगासिंह ने पंडित मदन मोहन मालवीय को सर्वाधिक आर्थिक सहायता दी।
•गंगासिंह की ऊंटों की सेना को गंगा रिसाला कहा जाता था।
•प्रथम विश्व युद्ध व द्वितीय विश्व युद्ध दोनों में भाग लिया।
•गंगासिंह ने पेरिस शांति सम्मेलन में भाग लिया।
•1912 ई. मे गवर्नर जनरल लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने Chamber of princes की स्थापना की तथा गंगासिंह को इसका चांसलर बनाया गया था।
•गंगासिंह को राजस्थान का भागीरथ कहा जाता है।
•गंगासिंह ने तीनों गोलमेज सम्मेलन (1930,1931,1932) में भाग लिया था।

गंगासिंह ने निम्नलिखित तीनों मंदिरों का वर्तमान स्वरूप बनवाया था -
1. रामदेवरा - जैसलमेर
2. देशनोक - बीकानेर
3. गोगामेड़ी - हनुमानगढ़

•अपने सिक्कों पर Victoria Empress लिखवाया था।
•मेवाड़ महाराणा स्वरूपसिंह ने अपने सिक्कों पर दोस्ती लंदन लिखवाया था।


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