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चौहान वंश का इतिहास । भाग-2 । चौहानों की शाखाएं

 
Chauhan dynasty


चौहान वंश की शाखाएं

नाडोल (पाली) के चौहान:-
लक्ष्मणसिंह:- सांभर के चौहान राजा वाक्पतिराज का पुत्र था।
• 960 ई. नाडोल में स्वतंत्र चौहान राज्य की स्थापना की।
• नाडोल में आशापुरा माता (कुलदेवी) का मंदिर बनवाया।

अल्हण:-इसका पुत्र कीर्तिपाल जालौर में स्वतंत्र चौहान राज्य की स्थापना करता है।

जालौर के चौहान:-
• जालौर में चौहान वंश की सोनगरा शाखा का शासन था।

• सुवर्णगिरी किला - जालौर
• स्वर्णगिरी किला - जैसलमेर

कीर्तिपाल:-
1882 ई. मे जालौर में स्वतंत्र चौहान राज्य की स्थापना की।
• इसने चित्तौड़ के सामंतसिंह को हराया था।
• नैणसी री ख्यात के अनुसार कीर्तिपाल (कीतू) एक महान राजा था।

कान्हड़देव:-
अलाउद्दीन खिलजी का सिवाणा पर आक्रमण (1308 ईस्वी)
• सिवाणा को जालौर की चाबी कहां जाता था।
• अलाउद्दीन का सेनापति:- आइन-उल-मुल्क-मुल्तानी।
सातल व सोम के नेतृत्व में साका किया गया। यह दोनों कान्हड़देव के भतीजे थे।
•भायल सैनिक ने विश्वासघात किया था।
•अलाउद्दीन ने सिवाणा का नाम बदलकर खैराबाद कर दिया।

अलाउद्दीन खिलजी का जालौर पर आक्रमण - (1311 ईस्वी)
• अलाउद्दीन का सेनापति:- कमालुद्दीन गुर्ग।
• बीका दहिया ने विश्वासघात किया था।
• बीका दहिया को उसकी पत्नी ने मार दिया था।
• कान्हड़देव और वीरमदेव के नेतृत्व में साका किया गया।
• अलाउद्दीन ने जालौर का नाम बदलकर जलालाबाद कर दिया।
• जैता देवड़ा:- कान्हड़देव का सेनापति (खंडित शिव मूर्तियां लूटी)
• फिरोजा:- अलाउद्दीन की पुत्री जो वीरमदेव को पसंद करती थी।
• गुल विहिश्त:- फिरोजा की धाय मां (foster mother)
• पद्मनाथ की पुस्तकें - कान्हड़दे प्रबंध, वीरमदेव सोनगरा री वात

• सिवाणा का पहला साका - 1308
• सिवाणा का दूसरा साका - 1590

सिरोही के चौहान:-
•सिरोही में चौहान वंश की देवड़ा शाखा का शासन था।

लुम्बा:- 
इसने परमारो को हराकर आबू और चंद्रावती पर अधिकार कर लिया तथा चंद्रावती को अपनी राजधानी बनाया।
शिवभान:- इसने शिवपुरी (सिरोही) को राजधानी बनाया।
सहसमल देवड़ा:- 1425 ई. में सिरोही की स्थापना की तथा सिरोही को अपनी राजधानी बनाया।

सुरताण:-
दत्ताणी का युद्ध (1583 ई.)
• सुल्तान और अकबर के बीच।
अकबर के सेनापति:- रायसिंह (बीकानेर), जगमाल (प्रताप का भाई)
सुरताण जीत गया।
दरबारी विद्वान:-
1. दुरसा आढा - राव सुरताण रा कवित्त
• दत्ताणी युद्ध में अकबर की तरफ से लड़ा।

बेरीसाल:- जोधपुर के अजीतसिंह को शरण दी थी।
शिवसिंह:- 1823 ई. में अंग्रेजों से संधि कर लेता है।
सिरोही अंतिम रियासत थी, जिसने अंग्रेजों से संधि की।


बूंदी के चौहान:-
• बूंदी में चौहान वंश की हाडा शाखा का शासन था।
• पहले बूंदी पर मीणा राजाओं का अधिकार था। बूंदा मीणा के कारण इसका नाम बूंदी पड़ा।
रणकपुर अभिलेख में बूंदी का नाम वृन्दावती है।

देवा:- 1241 ई. में जैता मीणा को हराकर बूंदी में चौहान वंश की हाडा शाखा का शासन स्थापित किया।

जैत्रसिंह:- 1274 ई. में कोटा को जीतकर बूंदी राज्य में मिला लिया।

बरसिंह:- 1354 ई. में बूंदी में तारागढ़ किले का निर्माण करवाया। यह किला अपने भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।

सुरजन हाडा:-
• 1569 ई. में अकबर की अधीनता स्वीकार की। इसमें आमेर के भगवंतदास की मुख्य भूमिका थी।
• निर्माण - रणछोड़ मंदिर (द्वारिका, गुजरात)
• दरबारी विद्वान:-
चंद्रशेखर - सुरजन चरित, हम्मीर हठ

बुद्धसिंह:-
• पुस्तक - नेहतरंग
• इसके दो पुत्रों उम्मेदसिंह (वास्तविक पुत्र) एवं दलेलसिंह (दत्तक पुत्र) में उत्तराधिकार संघर्ष हुआ।
• सवाई जयसिंह ने अपने दामाद दलेल सिंह (पत्नी कृष्णा कंवर) का पक्ष लिया तथा मराठों ने उम्मेद सिंह का पक्ष लिया था।
• सवाई जयसिंह की बहन अमर कंवर ने उम्मेद सिंह का पक्ष लिया।
• बूंदी राजस्थान की पहली रियासत थी जिसकी आंतरिक राजनीति में मराठों ने हस्तक्षेप किया था।
• अमर कंवर:- सवाई जयसिंह की बहन तथा बुद्धसिंह की रानी थी। इसने मराठा सेनापति मल्हार राव होल्कर को उम्मेद सिंह के पक्ष में बुलाया था।
• कृष्णा कंवर:- सवाई जय सिंह की बेटी तथा दलेल सिंह की रानी थी।

विष्णुसिंह:- 1818 ई. में अंग्रेजों के साथ संधि की।

कोटा के चौहान:-
• कोटा में चौहान वंश की हाडा शाखा का शासन था।

माधोसिंह:- बूंदी के राजा रतन सिंह का बेटा था।
•1631 ई. में मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे कोटा का स्वतंत्र राजा घोषित किया।

• 1631 ई. में ही मुगल बादशाह शाहजहां ने सुजानसिंह को शाहपुरा का स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया।
सुजान सिंह पहले मेवाड़ के फुलिया परगने का सामन्त था। इस समय मेवाड़ का राजा जगतसिंह-I था।
•शाहपुरा - राजस्थान की सबसे छोटी रियासत

मुकुंदसिंह:-
कोटा में अबली मीणी का महल बनवाया था तथा धरमत के युद्ध में दारा की तरफ से लड़ता हुआ मारा गया।

भीमसिंह:-
यह वल्लभ संप्रदाय का अनुयायी था।
इसने कोटा का नाम बदलकर नंदग्राम कर दिया था।
बारां में सांवरिया जी मंदिर का निर्माण करवाया था।
• मुगल बादशाह फर्रूखसियर के कहने पर बूंदी पर आक्रमण किया तथा बूंदी के राजा बुद्धसिंह को हराया तथा बूंदी का नाम बदलकर फर्रुखाबाद कर दिया।

उम्मेदसिंह:-1817 ई. में अंग्रेजों के साथ संधि कर ली।
संधि की शर्तें:-
1. उम्मेद सिंह तथा उसके वंशज हमेशा कोटा की राजा बने रहेंगे।
2. जालिम सिंह झाला तथा उसके वंशज हमेशा कोटा के दीवान बने रहेंगे तथा कोटा की सारी शक्तियां दीवान के पास होगी। (पूरक संधि)

किशोरसिंह-II:-
मांगरोल का युद्ध (1821 ई.)
• किशोरसिंह द्वितीय और जालिम सिंह झाला के बीच।
• जालिम सिंह झाला जीत गया। कर्नल जेम्स टॉड ने जालिम सिंह झाला का साथ दिया।

झालावाड़ राज्य का इतिहास:-
• झालावाड़ में झाला वंश का शासन था।

मदनसिंह:- यह जालिम सिंह झाला का  पुत्र था। 
• 1837 ई. में कोटा से अलग होकर स्वतंत्र झालावाड़ राज्य की स्थापना की। (राजधानी - झालरापाटन)
• 1838 ई. में अंग्रेजों ने झालावाड़ रियासत को मान्यता दे दी।
• झालावाड़ राजस्थान की अंतिम रियासत थी।
•झालरापाटन चंद्राभागा नदी के किनारे स्थित है।
• झालरापाटन को घंटियों का शहर कहा जाता है।

राजेंद्रसिंह:-
झालावाड़ में काष्ठ प्रासाद (लकडी के महल) का निर्माण करवाया।
• इसने झालावाड़ के सभी मंदिर हरिजनों के लिए भी खुलवा दिए।

अंग्रेजों द्वारा राजस्थान में स्थापित रियासतें:-
अंग्रेजों ने राजस्थान में 3 रियासतें बनायी।
1. धौलपुर
2. टोंक
3. झालावाड़

आगे पढ़े 👉 आमेर (जयपुर) का इतिहास

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