आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें PDF के लिए टेलीग्राम चैनल DevEduNotes से जुड़े।

अंग्रेजों का बंगाल पर अधिकार। प्लासी का युद्ध। बक्सर का युद्ध

History of Bengal

बंगाल का इतिहास

मुर्शिद कुली खां:
स्वतंत्र बंगाल राज्य की स्थापना की।
इसने मुर्शिदाबाद को बंगाल की राजधानी बनाया।

शुजाउद्दीन:-
सरफराज:-
अली वर्दी खान:- यह बिहार का गवर्नर था।
 घेरिया के युद्ध (1740) में सरफराज को मारकर नवाब बना।
 इसने यूरोपियन की तुलना मधुमक्खियों से की थी।

सिराजुद्दौला:- यह अली वर्दी खां का दोहिता था।
सिराजुद्दौला के विरोधी:-
मौसी - घसीटी बेगम
पूर्णिया का नवाब - शौकत जंग
सेनापति - मीर जाफर
सेठ - जगत सेठ
राय दुर्लभ
अमीर चंद

ईस्ट इंडिया कंपनी नवाब के विरोधियों को शरण देती थी।

दस्तक:- कर में दी जाने वाली छूट के लिए लाइसेंस।
• कंपनी ने दस्तक का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया था।
• कंपनी ने कोलकाता की किलेबंदी करना शुरू कर दिया था।
• अंग्रेजों ने नवाब को कासिम बाजार फैक्ट्री का निरीक्षण नहीं करने दिया।
• नवाब ने कोलकाता पर अधिकार कर लिया एवं उसका नाम अलीनगर कर दिया तथा माणिकचंद को कोलकाता सौंप दिया।

ब्लैक होल घटना (काल कोठरी की घटना) - 20 जून 1756 ईस्वी:-
146 अंग्रेजों को एक छोटे से कमरे में बंद कर दिया था। अगले दिन केवल 23 जीवित बचे। इस घटना की जानकारी हॉलवेल द्वारा दी गई।

• मद्रास से रॉबर्ट क्लाइव तथा वाटसन कोलकाता आए और माणिकचंद ने कोलकाता क्लाइव को सौंप दिया।

अलीनगर की संधि (9 फरवरी 1757):-
यह संधि सिराजुद्दौला व क्लाइव के मध्य हुई।
शर्तें:-
• कंपनी के व्यापारिक अधिकार वापस दे दिए गए।
• नवाब पर युद्ध हर्जाना लगाया गया।
• कंपनी कोलकाता की किलेबंदी कर सकती है।
• कंपनी नवाब के विरोधियों को शरण नहीं देगी।

दोनों पक्षों द्वारा संधि का पालन नहीं किया गया।


प्लासी का युद्ध (23 जून 1757 ई.):-

क्लाइव (अंग्रेज) और सिराजुद्दौला के बीच।
• इसमें सिराजुद्दौला की ओर से सेनापति मीर जाफर था। 
मीर जाफर क्लाइव से मिल गया।
इस युद्ध में मोहनलाल, मीर मदान तथा एक फ्रांसीसी टुकड़ी नवाब के वफादार थे। उन्होंने युद्ध किया और मारे गए।
अंग्रेज युद्ध जीत गए और उन्होंने सिराजुद्दौला को मारकर मीर जाफर को नवाब बना दिया।

के.एम.पन्निकर के अनुसार "प्लासी का युद्ध एक विश्वासघात था, जिसमें बंगाल के धनी सेठों तथा मीरजाफर ने नवाब को अंग्रेजों के हाथों बेच दिया था।"

जी.बी.मालेसन के अनुसार "किसी भी युद्ध के स्थाई तथा तात्कालिक परिणाम इतने महत्वपूर्ण नहीं रहे, जितने प्लासी के युद्ध के रहे।"

मीर जाफर:-
इसे क्लाइव का गीदड़ कहा जाता है।
इसने क्लाइव को 2 लाख 34 हजार पौंड उपहार में दिए तथा कंपनी को 24 परगने (गांव) दिए।

• मीर जाफर डचों के साथ मिलकर अंग्रेजों को बंगाल से बाहर निकालना चाहता था। अत: 1760 में बंगाल के गवर्नर वेन्सिटार्ट ने मीर जाफर को हटाकर मीर कासिम को नवाब बना दिया।

मीर कासिम:-
• मीर कासिम ने अंग्रेजों को 3 जिले दिए - चटगांव, वर्दमान तथा मिदनापुर।
• सिल्हट के चूने के व्यापार में कंपनी को 50% हिस्सा दिया गया।
• दक्षिण अभियानों के लिए कंपनी को 5 लाख रुपए दिए।

मीर कासिम के सुधार:-
• मुर्शिदाबाद से राजधानी को मुंगेर लाया।
• मुंगेर में तोपखाना लगवाया।
• यूरोपीय पद्धति पर सेना को प्रशिक्षित किया।
• इसने राजस्व अधिकारियों से खिजरी जमा नामक कर वसूला।
• सभी आंतरिक करो को समाप्त कर दिया ताकि दस्तक का दुरुपयोग रोका जा सके।
• विद्रोही अधिकारियों को दंडित किया। जैसे - बिहार का रामनारायण। 

गुलाम हुसैन ने अपनी पुस्तक "सियार-उल-मुत्खैरीन" में मीर कासिम के शासन की प्रशंसा की थी।

मीर कासिम बंगाल में अपनी शक्तियों को बचाना चाहता था, जबकि कंपनी बंगाल में अपनी शक्तियों को बढ़ाना चाहती थी। 
अतः मीर कासिम तथा कंपनी के बीच कई युद्ध हुए, जिनमें मीर कासिम की हार हुई।
जैसे:-  करवा का युद्ध
          गिरिया का युद्ध
          उदयनाला का युद्ध

पटना हत्याकांड (1763):- मीर कासिम ने 148 सैनिकों को मार दिया तथा अवध भाग गया।


बक्सर का युद्ध (22 OCT 1764 ई.)

मीर कासिम (बंगाल), शुजा-उद् दौला (अवध), शाह आलम-II (मुगल बादशाह) और हेक्टर मुनरो (अंग्रेजों) के बीच।

बीच युद्ध में ही शाह आलम -II अंग्रेजों से मिल गया तथा मीर कासिम युद्ध छोड़कर भाग गया।
इस युद्ध में अंग्रेजों की जीत हुई।

• 1765 ईस्वी में क्लाइव वापस भारत आया तथा उसने शाह आलम-II तथा शुजा-उद्-दौला के साथ इलाहाबाद की संधिया की।

इलाहाबाद की प्रथम संधि:- 12 अगस्त 1765 
क्लाइव तथा शाह आलम -II के बीच
शर्तें:-
1. इलाहाबाद व कड़ा नामक 2 जिले मुगल बादशाह को दिए गए।
2. बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा के दीवानी अधिकार अंग्रेजों को दिए गए।
3. मुगल बादशाह को प्रतिवर्ष 26 लाख रुपए पेंशन दी  जाएगी।

इलाहाबाद की दूसरी संधि:- 16 अगस्त 1765     
क्लाइव तथा शुजा-उद्-दौला (अवध) के बीच  
शर्तें:- 
1. इलाहाबाद व कड़ा नामक 2 जिले अवध से छीन लिए गए।
2. अवध पर 50 लाख ₹ का युद्ध हर्जाना लगाया गया।
3. अवध की सुरक्षा का जिम्मा अंग्रेजों के पास रहेगा।
इस प्रकार अवध को बफर स्टेट बना दिया गया।

• क्लाइव ने मीर जाफर को पुन: बंगाल का नवाब बना दिया।
मीर जाफर की मृत्यु के बाद नजमुद्दौला (मीर जाफर का बेटा) को बंगाल का नवाब बनाया गया तथा उसने अंग्रेजों के साथ संधि कर ली।

क्लाइव ने बंगाल में द्वैध शासन लागू कर दिया।
(1765 से 1772 तक)

द्वैध शासन:- 
दीवानी (राजस्व) मामले कम्पनी को दिए गए।      (उत्तरदायित्व विहीन अधिकार)
निजामत (प्रशासनिक) मामले नवाब को दिए गए।
(अधिकार विहीन उत्तरदायित्व)

• प्रशासनिक मामलों के लिए कंपनी नवाब को प्रतिवर्ष 53 लाख रुपए देगी।
• दीवानी मामलों के लिए कंपनी ने अधिकारियों की नियुक्ति की। 
- मोहम्मद रजा खान
- राजा शिनॉब रॉय

नोट:- मुबारक-उद्-दौला बंगाल का अंतिम नवाब था।

1772 में बंगाल के गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स ने द्वैध शासन को समाप्त कर दिया।
 
• अंग्रेज बंगाल में रेशम, चीनी तथा शोरे का व्यापार करते थे।

SAVE WATER

Post a Comment

0 Comments