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ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल। लॉर्ड विलियम बैंटिक। लॉर्ड डलहौजी

 
Governor general of British India

ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल

चार्टर एक्ट (1833):-
(1) कंपनी के व्यापारिक अधिकार समाप्त कर दिए गए तथा कंपनी को पूर्णतः प्रशासनिक इकाई बना दिया गया।
(2) बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया।
(3) मुंबई तथा मद्रास प्रेसिडेंसी की कानून बनाने की शक्तियां समाप्त कर दी गई तथा उन्हें पूर्णतः बंगाल प्रेसिडेंसी के अधीन कर दिया गया।
(4) गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में एक विधि सदस्य जोड़ा गया परंतु उसे मताधिकार नहीं दिया गया।
(5) किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। (धारा-87)
(6) भारत में दास प्रथा को समाप्त किया जाएगा।

भारत का प्रथम गवर्नर जनरल - विलियम बैंटिक
प्रथम विधि सदस्य - लॉर्ड मैकाले

1. लॉर्ड विलियम बैंटिक (1828-33):-
• यह बंगाल का अंतिम गवर्नर जनरल तथा भारत का प्रथम गवर्नर जनरल था।
• यह व्हीग दल का सदस्य था।
• यह बेेंथम के उपयोगितावाद सिद्धांत में विश्वास रखता था।
•*1829 ई. में धारा 17 के तहत सती प्रथा पर रोक लगा दिया गई थी। प्रारंभ में इसे केवल बंगाल प्रेसिडेंसी में लागू किया गया था। परंतु 1830 ई. में इसे मद्रास व बॉम्बे प्रेसिडेंसी में भी लागू किया गया।
राजा राममोहन राय के प्रयासों के कारण सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया गया था।
राधाकांत देव ने सती प्रथा पर प्रतिबंध का विरोध किया था। धर्मसभा नामक संगठन राधाकांत देव का संगठन था।
कन्या वध तथा नरबलि पर भी रोक लगाई गई।
• कर्नल सलीमैन के नेतृत्व में ठग प्रथा का उन्मूलन किया गया।
अफीम के व्यापार का नियमन (Regulated) किया गया। केवल बॉम्बे बंदरगाह से अफीम का व्यापार किया जा सकता था।
• 1835 ईस्वी में कलकत्ता में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई।
• लॉर्ड मैकाले गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद का प्रथम विधि सदस्य था।
लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में विधि आयोग स्थापित किया गया तथा विधि आयोग ने कानूनों का संहिताकरण किया।
• कॉर्नवालिस द्वारा स्थापित भ्रमणशील अदालतों (circuit courts) को बंद कर दिया गया।
• न्यायालय में फारसी भाषा के स्थान पर स्थानीय भाषाओं का प्रयोग भी किया जा सकता है।

आंग्ल-प्राच्य विवाद:-
1813 ईस्वी के चार्टर एक्ट के अनुसार कंपनी भारत में शिक्षा के विकास के लिए प्रति वर्ष 1 लाख रुपए देगी। 1823 ई. में लोक शिक्षा समिति का गठन किया गया। इसमें 10 सदस्य थे। इन सदस्यों में आंग्ल तथा प्राच्य भाषाओं को लेकर विवाद था। (प्राच्य भाषा - संस्कृत, फारसी)

गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक ने लॉर्ड मैकाले को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।
2 Feb 1835 ई. को लॉर्ड मैकाले ने अपना सुप्रसिद्ध " मैकाले स्मरण पत्र" प्रस्तुत किया।
इसके अनुसार भारत में उच्च वर्ग के लोगों को यूरोपीय शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी जाएगी। यह शिक्षा टपक-टपक कर उच्च वर्ग से साधारण वर्ग तक पहुंच जाएगी। इसे अधोमुखी निस्यंदन सिद्धांत/ विप्रवेशन सिद्धांत भी कहा जाता है।
7 मार्च 1835 ई. को अंग्रेजी सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया।
कालांतर में लॉर्ड ऑकलैंड ने इसे सरकारी नीति के रूप में लागू किया था।

अंग्रेजी शिक्षा लागू करने के कारण:-
(i) कंपनी को सस्ते कर्मचारी चाहिए थे।
(ii) कंपनी अपने प्रशासनिक सुधारों को आसानी से लागू करना चाहती थी।
(iii) अंग्रेज शिक्षा के माध्यम से भारतीयों की मानसिकता बदलना चाहते थे ताकि वे अंग्रेजी राज के समर्थक बन जाए।
(iv) अंग्रेज भारत में अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना चाहते थे तथा अपने व्यापार-वाणिज्य को बढ़ाना चाहते थे।
(v) अंग्रेज भारत में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करना चाहते थे।

1835 ई. में अंग्रेजी को भारत की प्रशासनिक भाषा बना दिया गया।

• विलियम बैंटिक प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थक था।
• बैंटिक ने 1831 में मैसूर तथा 1834 में कुर्ग (कर्नाटक) तथा कछार (असम) को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया था।

नोट:- 1781 में वारेन हेस्टिंग्स के समय कोलकाता में अरबी-फारसी का मदरसा स्थापित किया गया था।
1791 में जोनाथन डंकन ने बनारस में संस्कृत स्कूल की स्थापना की थी।

लोक शिक्षा समिति में अंग्रेजी समर्थक:-
एलफिंस्टन, मुनरो, ट्रैवलिंयन, बैंटिक, मैकाले, राजा राममोहन राय।
प्राच्य समर्थक:- जेम्स प्रिंसेप, थॉमस प्रिंसेप, विल्सन।

2. चार्ल्स मैटकॉफ(1835-36):-
इसे प्रेस का मुक्तिदाता कहा जाता है।
1818 ई. में राजस्थान की रियासतों के साथ संधि करने के लिए अंग्रेजों का प्रतिनिधि था।

3. लॉर्ड ऑकलैंड (1836-42):-
दिल्ली से कोलकाता के बीच जीटी रोड का पुनर्निर्माण करवाया गया।
प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1839-42):-
कारण:- अफगानिस्तान का शासक दोस्त मोहम्मद, रूस के साथ संबंध स्थापित कर रहा था।

4. लॉर्ड एलनबरो(1842-44):-
1843 ई.मे चार्ल्स नेपियर के नेतृत्व में सिंध को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया गया।
चार्ल्स नेपियर के अनुसार "सिंध का विलय अफगान तूफान की पूंछ थी।"
1843 ई. में धारा 5 के तहत दास प्रथा को समाप्त कर दिया गया। (1833 के चार्टर एक्ट का एक बिंदु)

5. लॉर्ड हॉर्डिंग प्रथम (1844-48):- 
प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-46)

6. लॉर्ड डलहौजी (1848-56):-
आधुनिक भारत का निर्माता।
डलहौजी के सुधार:-
(i) 1852 - भारत में तार सेवा शुरू की। तार विभाग का प्रमुख - ओ शैघनेसी
(ii) 1853 - भारत में रेल सेवा शुरू की।
प्रथम रेल मुंबई से थाने के बीच चली। प्रथम रेल इंजन - फेयरी क्वीन।
(iii) 1854 - डाक सेवा शुरू की गई। डाकघर अधिनियम लाया गया।
डलहौजी ने सैनिकों के लिए भी डाक टिकट अनिवार्य कर दिया।
(iv) 1854 - सार्वजनिक निर्माण विभाग(PWD) की स्थापना की गई।
1854 ई. में गंग नहर (UP) का निर्माण करवाया गया।
(v) 1854 - चार्ल्स वुड के नेतृत्व में शिक्षा में सुधार किए गए, जिन्हें वुड डिस्पैच के नाम से जाना जाता है।
• चार्ल्स वुड बोर्ड ऑफ कंट्रोल का अध्यक्ष था।

वुड डिस्पैच की सिफारिशें:-
उद्देश्य- पाश्चात्य ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना।
(1) अधोमुखी निस्यंदन सिद्धांत को त्याग दिया गया।
(2) प्राथमिक शिक्षा - मातृभाषा/ स्थानीय भाषा में दी जाएगी।
(3) माध्यमिक शिक्षा - स्थानीय तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दी जाएगी। इसके लिए जिला स्तर पर एंग्लो-वर्नेकुलर स्कूल स्थापित किए जाएंगे।
(4) उच्च शिक्षा - केवल अंग्रेजी भाषा में दी जाएगी।
(5) लंदन विश्वविद्यालय की तरह कलकत्ता, बॉम्बे तथा मद्रास में विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे।
(6) प्रत्येक प्रांत में शिक्षा विभाग स्थापित किए जाएंगे तथा इनमें कमिश्नर की नियुक्ति की जाएगी जो सीधे गवर्नर जनरल को रिपोर्ट करेंगे।
(7) निजी प्रयासों को प्रोत्साहन दिया जाएगा तथा उन्हें अनुदान दिए जाएंगे।
(8) अध्यापक प्रशिक्षण स्कूल स्थापित किए जाएंगे।
(9) महिला शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।

• वुड डिस्पैच को "शिक्षा का मैग्नाकार्टा" कहा जाता है।

डलहौजी के सैनिक सुधार:- 
सैनिक मुख्यालय कलकत्ता से शिमला, तोपखाना मुख्यालय कलकत्ता से मेरठ भेजा गया। 
सेना में सिखों तथा गौरखों की संख्या बढ़ाई जाएगी। सेना में यूरोपियन सैनिकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

प्रशासनिक सुधार:- 
नए जीते गए क्षेत्रों में non regulation system लागू किया जाएगा, जिसके तहत इन क्षेत्रों में कमिश्नर की नियुक्ति की जाती थीं जो सीधे गवर्नर जनरल के प्रति उत्तरदायी होते थे।

डलहौजी की विलय नीति/व्यपगत का सिद्धांत (doctrine of lapse):- 
(A) युद्ध द्वारा विलय - 
पंजाब (1849)
सिक्किम (1850) - में दो अंग्रेज डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। अतः डलहौजी ने सिक्किम पर आक्रमण कर दिया तथा सिक्किम के कई क्षेत्रो पर अधिकार कर लिया। जैसे- दार्जिलिंग।
लोअर बर्मा (पीगू) (1852) -
बर्मा की सरकार ने अंग्रेज अधिकारियों पर जुर्माना लगा दिया था। अतः 1852 में डलहौजी ने बर्मा पर आक्रमण किया तथा पीगू पर अधिकार कर लिया। यह दूसरा अंग्रेज-बर्मा युद्ध था।

(B) शांतिपूर्ण नीति द्वारा विलय:- गोद निषेध नीति/हड़प नीति ।
डलहौजी ने भारतीय रियासतों को तीन भागों में बांटा- 
(i) स्वतंत्र रियासतें- वे रियासतें जो अंग्रेजों के आने के समय स्वतंत्र थी तथा बाद में अंग्रेजों से संधि कर लेती है। इन्हें गोद लेने का अधिकार दिया गया।
(ii) वे रियासतें जो पहले मुगलों तथा मराठों के अधीन थी तथा बाद में अंग्रेजों के अधीन हो गई। इन्हें गोद लेने से पहले अंग्रेजों से पूछना पड़ता था तथा इन्हें यथासंभव अनुमति दी जाती थी।
(iii) अंग्रेजों द्वारा स्थापित/ पुनर्स्थापित रियासतें - इन्हें गोद लेने की अनुमति नहीं थी। इनका विलय कर लिया जाता था।

डलहौजी ने विलय किया:- 
सतारा (1848), जैतपुर व संभलपुर (1849),
बघाट (1850),  उदेपुर (1852)
झांसी (1853),  नागपुर (1854)
** करौली (1855):- नरसिंहपाल की मृत्यु के बाद उसके दत्तक पुत्र भरतपाल को करौली का राजा बनाया गया लेकिन डलहौजी ने करौली रियासत का अंग्रेजी साम्राज्य में विलय कर लिया।
कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के कहने पर करौली रियासत का विलय रद्द कर दिया गया तथा मदनपाल को करौली का राजा बना दिया गया।

• 1853 ई. में बकाया धन के बदले हैदराबाद रियासत से बरार छीन लिया गया।
• 1856 ई. मेंं कुशासन के आधार पर अवध का विलय किया गया।
अवध का विलय आउट्रम की रिपोर्ट के आधार पर किया गया। अवध के नवाब वाजिद अली शाह को कोलकाता भेज दिया गया।
अवध का विलय करने के कारण:- 
(i) अंग्रेजों की साम्राज्य विस्तार की नीति।
(ii) अवध की भूमि नील तथा कपास की खेती के लिए उपजाऊ थी।
(iii) अंग्रेज अवध को उत्तरी भारत के बड़े बाजार के रूप में विकसित करना चाहते थे।

• 1853 ई. में डलहौजी ने कर्नाटक के नवाब तथा पेशवा नाना साहब (धुन्धूपंत) की पेंशन बंद कर दी थी।
• 1855 ई. में तंजौर के राजा की उपाधि समाप्त कर दी गई।
• डलहौजी ने मुगल बादशाह की उपाधि छीनने का प्रयास भी किया था।

डलहौजी की हड़प नीति के परिणाम:- 
(1) अंग्रेजी साम्राज्य का तेजी से विस्तार हुआ।
(2) अंग्रेजों ने भारतीय साम्राज्य की प्राकृतिक सीमा प्राप्त कर ली।
(3) भारतीय राजाओं में इस नीति के कारण असंतोष उत्पन्न हुआ।
(4) 1857 की क्रांति।

1853 का चार्टर एक्ट:-
प्रावधान - 
(1) कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के सदस्यों की संख्या 24 से घटाकर 18 कर दी गई।
(2) गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में विधि सदस्य को स्थाई कर दिया गया अर्थात मताधिकार दिया गया।
(3) गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद में 6 अतिरिक्त सदस्य जोड़े गए, जो कानून निर्माण में सहायता करते थे। -  
1 सदस्य = बंगाल, 1 = मद्रास, 1 = बॉम्बे,                    
1 = उत्तरी पश्चिमी प्रांत,    
1 = मुख्य न्यायाधीश,                 
1 = अन्य न्यायाधीश।
(4) कंपनी के उच्च पदों के लिए प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।
(5) कंपनी का शासन भारत में अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया।

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