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बंगाल के गवर्नर जनरल। लॉर्ड वेलेजली। लॉर्ड हेस्टिंग्स। लॉर्ड एमहर्स्ट

 Governor general of Bengal

बंगाल के गवर्नर जनरल

4. लॉर्ड रिचर्ड वेलेजली (1798-1805):-
इसने भारत में सहायक संधि व्यवस्था प्रारंभ की।
वारेन हेस्टिंग्स ने भारतीय रियासतों के साथ "घेरे की नीति" अपनाई थी। लॉर्ड वेलेजली ने इसी नीति का विस्तार सहायक संधि व्यवस्था के रूप में किया था।
फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले ने सर्वप्रथम सहायक संधि व्यवस्था अपनाई थी, लेकिन लॉर्ड वेलेजली ने इसे बड़े तौर पर लागू किया था।
सहायक संधि के प्रावधान:- 
(i) भारतीय राजाओं को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी तथा विदेशी मामले कंपनी को देने पड़ते थे।
(ii) कंपनी की सेना भारतीय रियासतों में तैनात की जाती थी।
(iii) कंपनी का रेजीडेंट भारतीय रियासतों में तैनात किया जाता था।
(iv) भारतीय रियासत किसी भी अन्य यूरोपियन को अपनी सेवा में नहीं रख सकती थी।
(v) बड़ी रियासतें कंपनी को संप्रभु क्षेत्र देती थी तथा छोटी रियासतें कंपनी को नगद धन देती थी।

सहायक संधि के कारण/आवश्यकता:-
(i) कंपनी को नेपोलियन का खतरा था क्योंकि नेपोलियन के आक्रमण के समय भारतीय रियासतें उसकी सहायता कर सकती थी।
(ii) मराठों के अतिरिक्त अन्य भारतीय रियासतें अंग्रेजों को चुनौती नहीं दे सकती थी लेकिन भारतीय रियासतें संघ बनाकर अंग्रेजों पर आक्रमण कर सकती थी।
(iii) कंपनी भारत में एक राजनैतिक शक्ति थी लेकिन अब कंपनी राजनीतिक स्थायित्व प्राप्त करना चाहती थी।
(iv) कंपनी भारतीय खर्चे पर अपना सैनिक आधार बढ़ाना चाहती थी।
कंपनी के साथ सहायक संधि करने वाली प्रारंभिक रियासतें:-
(1) हैदराबाद 1798 ई.
(2) मैसूर 1799 ई.
(3) तंजोर 1799 ई.
(4) अवध 1801 ई.
(5) पेशवा 1802 ई.

सहायक संधि से कंपनी को लाभ:-
(1) भारतीय रियासतें अपने विदेशी मामले अंग्रेजों को सौंप चुकी थे। अतः अब भारतीय रियासतें नेपोलियन के साथ कोई समझौता नहीं कर सकती थी। अतः कंपनी पर नेपोलियन का भय समाप्त हो गया था।
(2) अब भारतीय रियासतें आपस में भी कोई संगठन नहीं बना सकती थी।
(3) कंपनी भारतीय खर्चे पर अपना सैनिक आधार बढ़ाने में सफल रही।
(4) कंपनी को राजनीतिक स्थायित्व प्राप्त हुआ।
(5) कंपनी का साम्राज्य विस्तार हुआ क्योंकि बड़ी भारतीय रियासतें कंपनी को संप्रभु क्षेत्र देती थी।
(6) भारत में महत्वपूर्ण सामरिक स्थानों पर अधिकार कर लिया।
(7) कंपनी ने अपने सामरिक तथा व्यापारिक क्षेत्रों को अलग-2 कर दिया था।
(8) कंपनी भारतीय रियासतों के आपसी मामलों में मध्यस्थ बन गई थी।
(9) रेजीडेंट रियासतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता था।

सहायक संधि की कमियां:-
(i) इस व्यवस्था में राजाओं को सुरक्षा प्राप्त हुई थी, लेकिन उन्होंने अपनी स्वतंत्रता खो दी थी।
(ii) राजाओं की सेना भंग कर दी गई थी। अतः सैनिक बेरोजगार हो गए थे।
(iii) अंग्रेजों द्वारा अयोग्य राजाओं को संरक्षण प्रदान किया गया जिससे प्रजा का शोषण हुआ।
(iv) अंग्रेजों के संरक्षण के कारण राजाओं की विलासिता में वृद्धि हुई। अतः राजाओं ने किसानों पर कर बढ़ा दिए, जिससे भारत में किसान विद्रोह प्रारंभ हो गये।
(v) राजाओं द्वारा अंग्रेजों को अत्यधिक धन दिया जाता था। अतः राजा आर्थिक रुप से दिवालिया हो गए थे।
(vi) प्रत्येक राज्य में सत्ता के दो केंद्र बन गए थे -
(A) राजा  (B) रेजीडेंट 
रेजीडेंट राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता था

• वेलेजली के समय असैनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की गई लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया तथा हेलबरी (इंग्लैंड) में ईस्ट इंडियन कॉलेज खोला गया।

• रिचर्ड वेलेजली को "बंगाल का शेर" कहा जाता है।

5. लॉर्ड कॉर्नवालिस (1805 ई.):-
यह कॉर्नवालिस की भारत में दूसरी नियुक्ति थी।
1805 ईस्वी में गाजीपुर (यूपी) में उसकी मृत्यु हो गई।

6. जॉर्ज बार्लो (1805 ई.):-
वेल्लोर विद्रोह(1806):- यह एक सैनिक विद्रोह था क्योंकि अंग्रेजों ने सैनिकों के धार्मिक प्रतीकों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इस विद्रोह के समय विलियम बैंटिक मद्रास का गवर्नर था। तथा विलियम बैंटिक के अनुसार प्रेस पर प्रतिबंध के कारण सैनिकों ने विद्रोह किया था।

7. लॉर्ड मिन्टो (1807-13 ई.):- 1809 ई. में अमृतसर की संधि की गई।

चार्टर एक्ट (1813 ई.):-
(1) कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिए गए।
(2) चाय तथा चीन के साथ व्यापार में कंपनी को एकाधिकार दिया गया।
(3) भारत में शिक्षा के विकास के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपए दिए जाएंगे।
(4) ईसाई मिशनरीज भारत में धर्म का प्रचार-प्रसार कर सकते थे।

8. लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-23):-
प्रथम आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814-16) - 
संगोली की संधि द्वारा युद्ध समाप्त हुआ।
संधि की शर्ते :- (i) नेपाल को गढ़वाल, कुमाऊं तथा तराई क्षेत्र अंग्रेजों को देने पड़े।
(ii) नेपाल को सिक्किम पर अपना अधिकार त्यागना पड़ा।
(iii) काठमांडू में अंग्रेजी सेना तैनात कर दी गई।
संधि का महत्व:-
(1) अंग्रेजों को कई स्वास्थ्यवर्धक स्थान प्राप्त हुए। जैसे नैनीताल, शिमला, मसूरी, रानीखेत।
(2) अंग्रेजों को मध्य एशिया के लिए रास्ता प्राप्त हुआ।
(3) अंग्रेजों ने सिक्कम को बफर स्टेट बना दिया।
(4) नेपाली गोरखा अंग्रेजी सेना में शामिल हुए तथा 1857 की क्रांति में ये अंग्रेजों के प्रति वफादार थे।

• लॉर्ड हेस्टिंग्स ने पिंडारीओं का उन्मूलन किया। इसके लिए उतरी सेना का नेतृत्व -  हेस्टिंग्स तथा दक्षिण सेना का नेतृत्व - टॉमस हिस्लोप ने किया था।
पिंडारीओं के नेता:- 
चीतू - इसे जंगल में चीता खा गया था।
वासिल मुहम्मद - जेल में आत्महत्या कर ली।
करीम खां - गोरखपुर में छोटी सी जागीर दी गई।
अमीर खां पिंडारी - टोंक की जागीर दी गई।

मेल्कम ने पिंडारीयों को "मराठा शिकारियों के शिकारी कुत्ते" कहा था।

• लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय दक्षिण भारत में रैय्यतवाड़ी तथा उत्तरी भारत में महालवाड़ी नामक भू-राजस्व व्यवस्थाएं लागू की गई थी।

रैय्यतवाड़ी व्यवस्था:- 
रैय्यत का अर्थ  = किसान
• इस व्यवस्था में किसानों को भूमि का मालिक बनाया गया तथा कंपनी सीधे किसान से भू-राजस्व प्राप्त करती थी।
• 1792 ई. में कैप्टन रीड़ द्वारा इसे बारामहल से शुरू किया गया था।
• कालांतर में टॉमस मुनरो ने मद्रास तथा एलफिन्सटन ने बॉम्बे में इसे बड़े तौर पर लागू किया था।
•• यह ब्रिटिश भारत में 51% क्षेत्र में लागू की गई थी।

रैय्यतवाड़ी व्यवस्था को लागू करने के कारण:-
(I) स्थाई बंदोबस्त में कुछ कमियां थी -
(a) कंपनी भू राजस्व नहीं बढ़ा सकती थी।
(b) जमीदारों ने भूमि में सुधार का कोई प्रयास नहीं किया।
(c) अनुपस्थित जमीदारों की समस्या
(II) दक्षिण भारत में जमींदारी प्रथा का अभाव था।
(III) कंपनी किसानों को अपना समर्थक बनाना चाहती थी ताकि अपने प्रशासनिक सुधारों को आसानी से लागू कर सके।

रैय्यतवाड़ी व्यवस्था के लाभ:-
(i) किसानों ने बंजर भूमि को सुधारने के प्रयास किए थे।
(ii) कंपनी को किसानों के रूप में एक समर्थक वर्ग प्राप्त हुआ। अतः कंपनी को अपने प्रशासनिक सुधार लागू करने में आसानी रही।
(iii) भारत में भूमि वितरण का आदर्श स्थापित किया गया।

रैय्यतवाड़ी व्यवस्था की कमियां:-
(i) भू-राजस्व बहुत अधिक था तथा कंपनी इसे समय-2 पर बढ़ा दिया करती थी।
(ii) भू-राजस्व की वसूली बहुत कठोरता से की जाती थी तथा यदि कोई किसान समय पर भू-राजस्व नहीं जमा करवाता था तो उसकी जमीन जब्त कर ली जाती थी।
(iii) भू-राजस्व नकदी के रूप में लिया जाता था। अतः किसान साहूकारों के चंगुल में फंस गए।
(iv) कंपनी के राजस्व अधिकारी जमीदारों की भूमिका निभाने लग गए थे तथा वह किसानों का शोषण करते थे।
(v) कंपनी ने भूमि सुधार का कोई प्रयास नहीं किया तथा कंपनी ने किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान नहीं की और ना ही कृषि के अनुसंधान में रुचि दिखाई।
(vi) कंपनी दक्षिण भारत की परिस्थितियों से अपरिचित थी। अतः अलग-2 स्थानों के लिए अलग-2 भू-राजस्व निर्धारित कर दिए गए थे।
(vii) प्राचीन भारतीय कृषि व्यवस्था टूट गई तथा भूमि व किसान दोनों चलायमान (Transferable) हो गए।
(viii) राजस्व विभाग में अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता थी। अतः अन्य विभागों के कर्मचारी राजस्व विभाग में लगाए गए, इससे कंपनी की प्रशासनिक कार्य कुशलता प्रभावित हुई।

महालवाड़ी व्यवस्था:-    
महाल का अर्थ = गांव या गांव का समूह।
(i) इस व्यवस्था में पूरे गांव का भू-राजस्व एक साथ निश्चित किया गया तथा ग्राम सभा को भूमि का मालिक बनाया गया।
(ii) यह व्यवस्था 1822 ई. में हॉल्ट मैकेंजी द्वारा शुरू की गई। कालांतर में मार्टिन बर्ड ने इसे बड़े तौर पर लागू किया था। मार्टिन बर्ड को उत्तर भारत में भूमि सुधारों का जनक कहा जाता है।
(iii) जेम्स थॉमसन ने उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत में इस व्यवस्था को लागू किया।
(iv) यह व्यवस्था पंजाब, संयुक्त प्रांत तथा मध्य प्रांत में लागू की गई।
(v) यह ब्रिटिश भारत के 30% क्षेत्र पर लागू की गई।
(vi) भू-राजस्व के निर्धारण में भूमि की उत्पादकता और फसल के बाजार भाव का ध्यान रखा जाता था।

कमियां:-
• भू राजस्व अधिक था इसलिए किसानों का शोषण होता था।
• भूमि पर ग्राम सभा का अधिकार था। ग्राम सभा में बड़े किसानों का दबदबा था, अतः वे छोटे किसानों की भूमि पर कब्जा कर लिया करते थे।
• यदि कोई किसान भू-राजस्व जमा नहीं करता था तो अन्य किसानों को उसका भू-राजस्व देना पड़ता था,जिससे गांव का सामाजिक सद्भाव बिगड़ गया।

नोट:- लॉर्ड हेस्टिंग्स ने बिना बराबरी के मुगल बादशाह से मिलने से मना कर दिया था।

9. लॉर्ड एडम्स (1823):-
यह एक कार्यवाहक गवर्नर जनरल था।
इसने प्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके तहत राजा राममोहन राय का मिरातुल अखबार बंद कर दिया गया।

10. लॉर्ड एमहर्स्ट (1823-28) :-
यह प्रथम गवर्नर जनरल था जिसने बराबरी के स्तर पर मुगल बादशाह से मुलाकात की थी।
प्रथम अंग्रेज-बर्मा युद्ध (1824-26):-
'यान्दूब की संधि' द्वारा यह युद्ध समाप्त हुआ था।
अंग्रेजों ने अराकान तथा तेनासिरम पर अधिकार कर लिया।
इस युद्ध के समय बैरकपुर छावनी में 47वीं NI के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया था क्योंकि वे समुद्र की यात्रा नहीं करना चाहते थे।


SAVE WATER

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