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अध्याय - 16 लोक प्रशासन के सिद्धांत। शास्त्रीय सिद्धांत

Public administration theory

लोक प्रशासन के सिद्धांत

Public administration theory.

1. शास्त्रीय सिद्धांत:-

समर्थक-  मूने व रेले
              फेयॉल
              गुलिक व उरविक
              फॉलेट
• इन्होंने लोक प्रशासन के विभिन्न सिद्धांतों का विकास किया।
• ये लोक प्रशासन व निजी प्रशासन को समान मानते हैं।
• लोक प्रशासन की प्रारंभ विषय वस्तु को विकसित किया और  लोक प्रशासन को विज्ञान बनाने के समर्थक है।

फेयॉल का योगदान:-
A. गैंगप्लैंक सिद्धांत -  इसके माध्यम से फेयॉल  ने पद सोपान के कारण कार्य में होने वाली अनावश्यक देरी को दूर करने का प्रयास किया।

B. लोक प्रशासन व निजी प्रशासन समान अवधारणा है।

C. फेयॉल के अनुसार औद्योगिक उपक्रम की गतिविधियां:-  (TCS-FAM)
a. तकनीकी गतिविधियां (उत्पादन कार्य)
b. वाणिज्यिक गतिविधियां (क्रय विक्रय)
c. सुरक्षा गतिविधियां (संपत्ति व कर्मचारियों की सुरक्षा )
d. वित्तीय गतिविधियां (वित्तीय संसाधनों का समुचित प्रयोग सुनिश्चित करना)
e. लेखांकन गतिविधियां (बैलेंस शीट बनाना, वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करना)
f. प्रबंधकीय गतिविधियां- POCCC
   P- Planning  (योजना बनाना)
   O- Organizing (संगठित करना)
   C- commanding  (आदेश देना)
   C- co-ordination  (समन्वय स्थापित करना)
   C- controlling  (नियंत्रण स्थापित करना)

फेयॉल के अनुसार संगठन के 14 सिद्धांत :-
(1) कार्य विभाजन - फेयॉल  के अनुसार संगठन में विशेषीकरण के आधार पर कार्य विभाजन किया जाना चाहिए।
(2) सत्ता व उत्तरदायित्व - फेयॉल के अनुसार सत्ता आदेश देने का अधिकार व उसका पालन करवाने की शक्ति है। इसने सत्ता के साथ उत्तरदायित्व को जोड़ा है अर्थात् जिस व्यक्ति के पास सत्ता है उसके निश्चित उत्तरदायित्व भी होने चाहिए। अर्थात सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए फेयॉल ने सत्ता व उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन का समर्थन किया।
(3) पारिश्रमिक - फेयॉल कार्य  के बदले पर्याप्त पारिश्रमिक का समर्थक है। उसके अनुसार अधिक कार्य करने वाले कर्मचारी को आर्थिक प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए।
(4) अनुशासन - संगठन के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त करने के लिए फेयॉल ने संगठन में अनुशासन का समर्थन किया।
(5) समता - सभी कर्मचारियों के साथ समान व निष्पक्ष व्यवहार किया जाना चाहिए।
(6) आदेश की एकता - संगठन में आदेशों व कार्यों के दोहराव को रोकने के लिए अधीनस्थ को केवल एक उच्च अधिकारी द्वारा आदेश प्राप्त होने चाहिए।
(7) निर्देश की एकता - समान उद्देश्यों वाले कार्यों के लिए एक योजना बनाई जानी चाहिए तथा इसका संचालन भी एक ही व्यक्ति के अधीन किया जाना चाहिए।
(8) केंद्रीकरण - फेयॉल के अनुसार संगठन में निर्णय कार्यकारी बोर्ड के द्वारा लिए जाने चाहिए।
(9) स्केलर चैन (पद सोपान) - संगठन में अधिकारियों व कर्मचारियों के कार्यों व उत्तरदायित्व को पद सोपान द्वारा निश्चित किया जाता है तथा इससे उच्च साधना संबंधों की पहचान भी होती है।
(10) सेवा स्थायित्व का सिद्धांत - संगठन में कार्य करने वाले कर्मचारियों का कार्यकाल स्थाई होना चाहिए।
(11) सहयोग की भावना (एस्प्रीट डे कॉर्प्स) - इसके अनुसार संगठन में कार्य करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के मध्य समन्वय व सहयोग होना चाहिए।
(12) व्यक्तिगत हित के स्थान पर सामान्य हित को महत्व - संगठन में कार्य करने वाले कर्मचारियों को व्यक्तिगत हित के स्थान पर सामान्य हित को महत्व देना चाहिए।
(13) पहल का सिद्धांत - संगठन में अधीनस्थों की पहल का उच्च अधिकारी द्वारा सम्मान किया जाना चाहिए।
(14) व्यवस्था - सही समय पर सही व्यक्ति को सही स्थान पर स्थापित करना व्यवस्था है।


मूने व रेले का योगदान:- 

इन्होंने चार सिद्धांत दिए-
(1) समन्वय का सिद्धांत - मूने व रेले के अनुसार यह संगठन का प्रथम सिद्धांत है
(2) प्रकार्यात्मकता - प्रकार्यात्मकता से अभिप्राय कार्य विभाजन से है। मूने व रेले भी विशेषीकरण के आधार पर कार्य विभाजन का समर्थन करते हैं।
(3) लाइन एंड स्टाफ -
लाइन
वे संगठन व एजेंसियां जो आदेश देती है व निर्णय लेती है। जैसे - कार्मिक विभाग, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय, राज्य सरकार के विभिन्न विभाग

स्टाफ
वे एजेंसियां जो लाइन एजेंसी को सलाह या परामर्श देती है और विभिन्न आंकड़े उपलब्ध करवाती है। जै
जैसे - आरपीएससी, यूपीएससी, पीएमओ, नीति आयोग

(4) पद सोपान


गुलिक का योगदान:-

इसके द्वारा 10 सिद्धांत दिए गए
(1) कार्य विभाजन -  विशेषीकरण के आधार पर कार्य विभाजन होना चाहिए।
(2) लाइन एंड स्टाफ
(3) आदेश की एकता
(4) प्रत्यायोजन
(5) विकेंद्रीकरण
(6) समितियों द्वारा समन्वय
(7) पदसोपान द्वारा संबंधित
(8) सचेत समन्वय - समन्वय  के पहले से प्रयास करना
(9) नियंत्रण का क्षेत्र
(10) विभागीयकरण के आधार - गुलिक के अनुसार विभागीयकरण के आधार 4P है।
Place - यह संगठन स्थान विशेष के लिए बनाया जाता है जैसे उपनिवेशन विभाग, दामोदर घाटी विकास निगम।
Purpuse - इन संगठनों का निर्माण किसी उद्देश्य विशेष के लिए किया जाता है। जैसे - शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग।
Process - इन विभागों में कार्य विभाजन दक्षता के आधार पर किया जाता है। जैसे - अंतरिक्ष विभाग, आईटी विभाग।
Person - इन विभागों का निर्माण व्यक्ति या व्यक्ति विशेष के समूह के लिए किया जाता है। जैसे - महिला एवं बाल विकास विभाग, वृद्धजन कल्याण बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग।

Note - गुलिक ने व्यक्ति आधारित विभागों को बौना प्रशासन कहा है।


उरविक का योगदान:-

इसने 8 सिद्धांत दिए
(1) समन्वय का सिद्धांत
(2) नियंत्रण का क्षेत्र
(3) उद्देश्य का सिद्धांत - संगठन का निर्माण किसी विशेष उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए।
(4) सहसंबद्धता का सिद्धांत - उरविक भी फेयॉल की भाँति व्यवस्था व उत्तरदायित्व के मध्य संतुलन का समर्थक है।
(5) विशेषज्ञता का सिद्धांत - उरविक ने भी विशेषज्ञता के आधार पर कार्य विभाजन का समर्थन किया है।
(6) परिभाषा का सिद्धांत - उरविक ने संगठन में प्रत्येक कार्य की स्पष्ट परिभाषा का समर्थन किया है।
(7) उत्तरदायित्व का सिद्धांत - उच्च अधिकारी का उत्तरदायित्व है कि वह अधीनस्थों से कार्य करवाए
(8) पदसोपान।


शास्त्रीय सिद्धांत की विशेषताएं:-

A. लोक प्रशासन के सिद्धांतों को विकसित किया।
B. लोक प्रशासन की प्रारंभिक विषय वस्तु को विकसित किया।
C. शास्त्रीय विचारकों ने लोक प्रशासन को सर्वमान्य सिद्धांतों के आधार पर विज्ञान बनाने पर बल दिया। ( प्रत्यायोजन, कार्य विभाजन, पद सोपान, समन्वय)
D. शास्त्रीय विचारकों के अनुसार लोक प्रशासन और निजी प्रशासन समान अवधारणाएं हैं।
E. इन विचारकों के अनुसार प्रशासन व प्रबंधन में भी कोई अंतर नहीं है।
F. शास्त्रीय सिद्धांत ने संगठन में अधिकतम समन्वय पर बल दिया।
G. शास्त्रीय विचारक विशेषीकरण के आधार पर कार्य विभाजन के समर्थक है।
H. यह आदर्शवादी सिद्धांत है क्योंकि यह क्या होना चाहिए पर बल देता है।
I. इस सिद्धांत के अनुसार संगठन में सत्ता का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर तथा जवाबदेहिता का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होता है।


शास्त्रीय सिद्धांत की आलोचना:-

A. साइमन के अनुसार लोक प्रशासन के सिद्धांत मुहावरे और कहावतें हैं।
B. शास्त्रीय सिद्धांत ने केवल आर्थिक प्रोत्साहनों पर बल दिया जबकि कर्मचारियों को अनार्थिक प्रोत्साहन भी अभिप्रेरित  करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
C. यह संगठन में कार्य करने वाले कर्मचारियों को मशीन मानता है। अतः इसे यांत्रिक सिद्धांत भी कहा जाता है।
D. यह संगठन को बंद व्यवस्था मानता है जो बाह्य  वातावरण से प्रभावित नहीं होता।


शास्त्रीय सिद्धांत की प्रासंगिकता:-

A. लोक प्रशासन का साहित्य शास्त्रीय सिद्धांत से समृद्ध हुआ।
B. इस सिद्धांत ने लोक प्रशासन में आगामी शोध कार्य व अनुसंधान को प्रोत्साहित किया।
C. शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार लोक प्रशासन व निजी प्रशासन सामान अवधारणाएं है। वर्तमान में भी उनके मध्य  अंतर गौण होता जा रहा है।
D. इसके कुछ सिद्धांत वर्तमान में प्रासंगिक है।
जैसे - प्रत्यायोजन, विकेंद्रीकरण, पारिश्रमिक, कार्य विभाजन, समन्वय का सिद्धांत, पद सोपान, निर्देश की एकता।

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