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अध्याय - 13. सामान्यज्ञ बनाम विशेषज्ञ

Public Administration


सामान्यज्ञ बनाम विशेषज्ञ

Generalists and Specialists.

इस विवाद की जड़ नॉर्थ कोर्ट ट्रैवलियन रिपोर्ट 1853 थी। जिसका समर्थन मैकाले समिति 1854 द्वारा किया गया।

सामान्यज्ञ:-
सामान्यज्ञ वे अधिकारी होते है जो सामान्य शिक्षा प्राप्त कर भर्ती व परीक्षण के पश्चात उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्त होते है।
तथा POSDCoRB संबंधी कार्य करते है।
जैसे - अतिरिक्त मुख्य सचिव, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, SDM, तहसीलदार

विशेषज्ञ:-
वे अधिकारी/कर्मचारी जो विशेष योग्यता प्राप्त होते है तथा ये सदैव सामान्यज्ञो के अधीनस्थ के रूप में कार्य करते है।
जैसे - भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय सांख्यिकी सेवा,  भारतीय अभियांत्रिकी सेवा (IES)

सामान्यज्ञ
 विशेषज्ञ
(1) ये सामान्य शिक्षा प्राप्त 
(1) तकनीकी शिक्षा/व्यवसायिक शिक्षा
(2) POSDCoRB संबंधी कार्य
(2) तकनीकी कार्य 
(3) राजनीतिको से अधिक निकटता 
(3) तुलनात्मक रूप से कम निकटता
(4) उच्च पदों पर नियुक्ति
(4) निम्न स्तरीय पदों पर अधीनस्थ रहते है।
(5) वेतन व सुविधाएं अधिक
(5) तुलनात्मक रूप से कम
(6) अंर्तविभागीय स्थानांतरण
(6) प्राय: एक ही विभाग में कार्य करते है
(7) नीति निर्माण संबंधी कार्य
(7) नीति क्रियान्वयन संबंधी कार्य
(8) ब्यूरोक्रेटस
जैसे-TRD,  SDM,  ACS
(8) टेक्नोक्रेटस
जैसे-IES,  ISS


सामान्यज्ञ व विशेषज्ञों के मध्य विवाद के कारण:-

(1) अधिक वेतन व सुविधाएं
(2) उच्च प्रशासनिक पद केवल सामान्यज्ञो हेतु आरक्षित है। 
जैसे - ACS, IAS, SDM
(3) सामान्यज्ञो के लिए तीव्र पदोन्नति व्यवस्था
(4) अतार्किक नीति निर्माण
(5) राजनीतिको से सामान्यज्ञो की अधिक निकटता
(6) अंर्तविभागीय स्थानांतरण
(7) सामान्यज्ञो का विशेषज्ञों के प्रति निरंकुश व्यवहार
(8) सामान्यज्ञो द्वारा विशेषज्ञो के कार्यों का आकलन

समाधान/सुझाव

(1) सरकार को पुनर्विचार करना होगा कि किस विभाग का अध्यक्ष/मुखिया विशेषज्ञ होगा और किस विभाग का मुखिया सामान्यज्ञ होगा।
(2) नई अखिल भारतीय सेवाओं का सॄजन
जैसे-अखिल भारतीय शिक्षा सेवाएं, अखिल भारतीय स्वास्थ्य सेवाएं
(3) एकीकृत पदसोपान व्यवस्था (सामान्यज्ञ एवं विशेषज्ञ  एक ही पद सोपान व्यवस्था में) - 1973 में पाक में लागू
(4) सचिवालय व निदेशालय व्यवस्था का विलय कर दिया जाना चाहिए।
(5) लेटरल एंट्री सिस्टम-2018 में लागू
(6) सामान्यज्ञो व विशेषज्ञों के लिए एक ही स्थान पर प्रशिक्षण व्यवस्था
(7) प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (अध्यक्ष -मोरारजी देसाई) -1966 की सिफारिश के अनुसार सेवाओं को दो भागों में बांटा जाना चाहिए
(1) कार्यात्मक सेवाऐं - स्वास्थ्य व कृषि
(2) गैर कार्यात्मक सेवाऐं - सामान्यज्ञ व विशेषज्ञ दोनों नियुक्त

सामान्यज्ञ- विशेषज्ञों के विभिन्न तर्क

सामान्यज्ञ
(1) शासन संचालन एक कला
(2) नीति-निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है, जो केवल सामान्यज्ञो द्वारा की जा सकती है।
(3) सामान्यज्ञो का मानना है कि उनकी यह श्रेष्ठ स्थिति सदियों से है।
(4) सामान्यज्ञ निर्णय लेकर विशेषज्ञों का कार्य आसान करते है।
(5) विशेषज्ञ केवल विशेष क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त होते है।

विशेषज्ञ

(1) प्रशासन संचालन एक सामान्य प्रक्रिया है।
(2) नीति-निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है, इसमें तकनीकी योग्यता की आवश्यकता होती है, जो केवल विशेषज्ञो में विद्यमान होती है।
(3) वर्तमान में सभी को समानता का अधिकार है। अतः विशेषज्ञों को भी सामान्यज्ञो के समान श्रेष्ठ स्थिति प्राप्त होनी चाहिए।
(4) ये निर्णय केवल थोपे हुए आदेश है।
(5) सामान्यज्ञो को भी केवल नियामकीय कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है, फिर भी उनके द्वारा विकास संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जाता है।

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