आपका स्वागत है, डार्क मोड में पढ़ने के लिए ऊपर क्लिक करें यूट्यूब, टेलीग्राम, प्ले स्टोर पर DevEduNotes सर्च करें।

अध्याय - 14. विकास प्रशासन

Development Administration

विकास प्रशासन

Development Administration.

विकास प्रशासन, प्रशासन का वह भाग है जो सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक, तकनीकी परिवर्तनों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। अतः यह एक बहुआयामी अवधारणा है, जो 4P के माध्यम से लोक कल्याणकारी कार्य करता है।
4P - Plan, Policy, Programme, Project.
                      
विकास प्रशासन शब्द का पहली बार प्रयोग यू एल गोस्वामी द्वारा अपने लेख द स्ट्रक्चर ऑफ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन इन इंडिया  (1955 ईस्वी) में किया।

विकास प्रशासन का पिता जॉर्ज गांट को कहा जाता है जिन्होंने 1979 में डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन : कॉन्सेप्ट, गॉल एंड मेथड की रचना की।


विकास प्रशासन के उदय के कारण:-

1. एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में नव स्वाधीन देशों का उदय (द्वितीय विश्व युद्ध के बाद)
2. नव स्वाधीन देशो को अमेरिका व रूस द्वारा आर्थिक व तकनीकी सहायता प्रदान करना।
3. यूएन द्वारा आर्थिक सहायता
4. परंपरागत प्रशासन अत्यधिक सैद्धांतिक था, जबकि उस समय लक्ष्य केंद्रित प्रशासन की आवश्यकता थी।
5. सीएजी (कंपैरेटिव एडमिनिस्ट्रेशन ग्रुप) का योगदान। (यह अमेरिकन सोसायटी ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन समर्थित संस्थान था)।
6. पाश्चात्य विकास मॉडल की असफलता तथा उस समय एक स्वदेशी विकास मॉडल की आवश्यकता थी, जो विकास प्रशासन बना।


विकास प्रशासन की विशेषताएं:-

1. लक्ष्योन्मुखी:- विकास प्रशासन विकास संबंधी गतिविधियों को लक्ष्य बनाकर प्राप्त करने का प्रयास करता है।

2. परिवर्तनोन्मुखी:- विकास प्रशासन यथास्थिति का विरोध करता है तथा सामाजिक, आर्थिक परिवर्तनों का समर्थक है।

3. बहुआयामी अवधारणा:- विकास प्रशासन सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक, तकनीकी परिवर्तनों का समर्थक है। अतः इसे बहुआयामी अवधारणा भी कहा जाता है।

4. अधिकतम समन्वय पर बल:- विकास प्रशासन विकास संबंधी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रशासनिक विभागों, संगठनों, इकाइयों,  कर्मचारियों में समन्वय का समर्थक है।

5. संसाधनों का समुचित प्रयोग:- विकास प्रशासन मानव संसाधन, वित्तीय संसाधन व भौतिक संसाधनों के समुचित प्रयोग पर बल देता है।

6. ग्राहकोन्मुखी:- विकास प्रशासन निजी क्षेत्र की तरह अपने लाभार्थियों को प्रभावी सेवा वितरण का समर्थक है।

7. समयोन्मुखी:- जहां परंपरागत प्रशासन में कोई भी कार्य समय पर पूरा नहीं होता था वहीं विकास प्रशासन विकास संबंधी कार्यक्रमों, योजनाओं व गतिविधियों को समय पर पूरा करने का समर्थक है।

8. प्रतिबद्ध प्रशासन:- विकास प्रशासन समाज के वंचित, गरीब, पिछड़े, दलित वर्ग को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।


विकास प्रशासन के उद्देश्य:-

1. सामाजिक, आर्थिक आवश्यकताओं व समस्याओं की पहचान करना।
2. विकास संबंधी कार्यक्रमों व योजनाओं का निर्माण करना। 3. उपलब्ध संसाधनों के अंतर्गत कार्यक्रमों व योजनाओं को लागू करना।
4. प्रशासनिक संरचना में सुधार व नवाचार सुनिश्चित करना।
5. विकास संबंधी गतिविधियों व कार्यक्रमों की समीक्षा व मूल्यांकन करना ।
6. विकास कार्यक्रमों में जन भागीदारी सुनिश्चित करना।


विकास प्रशासन के माध्यम या साधन:-

प्राइम मिनिस्टर ऑफिस
सरकार के विभिन्न विभाग / मंत्रिपरिषद
नीति आयोग
चीफ मिनिस्टर ऑफिस
राज्य सचिवालय
राज्य के विभिन्न विभाग व मंत्रिपरिषद
राज्य आयोजना बोर्ड
मुख्यमंत्री सलाहकार संस्था
संविधान
नौकरशाही
मीडिया
विदेशी सहायता


विकास प्रशासन का क्षेत्र:-

1. सामान्य प्रशासन:- इसमें वे सभी संस्थाएं व संगठन शामिल होते हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से विकास संबंधी कार्यक्रमों व योजनाओं से जुड़े हैं। जैसे - सीएमओ, नीति आयोग।

2. विकास एजेंसियां:- इसमें वे सभी विभाग व संस्थाएं शामिल होते हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से विकास गतिविधियों से जुड़े हैं या सामाजिक आर्थिक विकास हेतु उत्तरदायी है।
जैसे - ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्य में ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग।

3. POSDCoRB  तकनीक:- लूथर गुलिक द्वारा प्रतिपादित इस तकनीक का प्रयोग विकास कार्यक्रमों के निर्माण, उनके क्रियान्वयन तथा समीक्षा में किया जाता है।

4. जनसहभागिता:- विकास कार्यक्रमों की सफलता व असफलता जन सहभागिता पर निर्भर करती है। जन सहभागिता बढ़ाने हेतु जनसंपर्क तकनीक का सहारा लिया जाता है।

5. लोक सेवकों को प्रशिक्षण:- विभिन्न नवीन योजनाओं व विकास कार्यक्रमों को लागू करने से पहले लोक सेवकों को समय-2 पर प्रशिक्षण दिया जाता है।

6. प्रशासनिक सुधार व नवाचार:- विकास कार्यक्रमों के निर्माण क्रियान्वयन व समीक्षा में लोक सेवा व लोक प्रशासन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। अतः प्रशासन में भी समय-2 पर प्रशासनिक सुधार व नवाचार अपेक्षित होते हैं।
उल्लेखनीय है, कि भारत में अब तक दो प्रशासनिक सुधार आयोग की स्थापना की जा चुकी है -
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966 ईस्वी)
अध्यक्ष - मोरारजी देसाई।
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2005 ईस्वी)
अध्यक्ष - वीरप्पा मोइली


7. मानवीय मूल्यों और परंपराओं का अध्ययन:- चूंकि  विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन मानव समाज में किया जाता है, वहीं प्रशासन भी मानवीय परंपराओं, मूल्यों व रीति-रिवाजों से प्रभावित होता है। अतः विकास प्रशासन में इनका अध्ययन किया जाता है।


विकास प्रशासन का महत्व:-

1. विकास प्रशासन नियामकी राज्य का पूरक है।
2. यह लोक कल्याणकारी राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।
3. यह सामाजिक, आर्थिक परिवर्तनों का माध्यम है।
4. यह प्रशासनिक सुधार व नवाचारों का भी माध्यम है।
5. यह लोक प्रशासन में जनसहभागिता सुनिश्चित करता है। 6. इसने लोक प्रशासन के साहित्य को समृद्ध बनाया है
7. यह विकास कार्यक्रमों का निर्माणकर्ता, क्रियान्वयनकर्ता व समीक्षाकर्ता है।


विकास प्रशासन की समस्याएं:-

1. विभिन्न विवाद - सामान्यज्ञ बनाम विशेषज्ञ
                           मंत्री बनाम लोकसेवक
2. भ्रष्टाचार
3. प्रशासन में लालफीताशाही
4. जन सहभागिता का अभाव
5. गठबंधन सरकारों का दौर
6. राजनीतिक अस्थिरता।
7. संसाधनों का अभाव
8. जन जागरूकता का अभाव
9. तकनीकी उन्नयन का अभाव
10. कुशल श्रमिकों का अभाव।


परंपरागत प्रशासन और विकास प्रशासन में अंतर:-

परंपरागत प्रशासन/ नियामकीय राज्य/ पुलिस राज्य/ नियामक प्रशासन
1. यह नियामकीय राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। 
2. मुख्य उद्देश्य कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखना था।
3. यथास्थिति का समर्थक है।
4. सिद्धांतों पर बल देता है।
5. इसका संबंध 4P से नहीं है।
6. कार्य समय पर पूरे नहीं होते थे।
7. यह पद सोपान पर बल देता है।
8. केंद्रीकरण का समर्थक
9. यह एक संकुचित अवधारणा है।
10. इसमें जन सहभागिता का अभाव था।
11. यह बहुआयामी अवधारणा नहीं है।
12. रचनात्मकता का विरोध करता है।

विकास प्रशासन/ लोक कल्याणकारी राज्य
1. यह लोक कल्याणकारी राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।
2. कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने के साथ-2 विकास संबंधी गतिविधियों का निर्माण, क्रियान्वयन और समीक्षा को सुनिश्चित करता है।
3. सामाजिक, आर्थिक परिवर्तनों का समर्थक है।
4. यह लक्ष्योन्मुखी व्यवस्था है।
5. यह 4P पर बल देता है।
6. यह समयोन्मुखी  व्यवस्था है।
7. पदसोपान में लचीलेपन का समर्थक है।
8. विकेंद्रीकरण का समर्थक है।
9. यह व्यापक अवधारणा है।
10. जन सहभागिता का समर्थन करता है।
11. यह बहुआयामी अवधारणा है।
12. रचनात्मकता तथा आविष्कारों का समर्थक है।

SAVE WATER

Post a Comment

0 Comments