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खिलाफत आंदोलन। असहयोग आंदोलन

 
Non-cooperation movement


खिलाफत आंदोलन (1919-20 ई.)

• प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफा के साथ ब्रिटेन ने सीवर्स की संधि की थी।
• इसके तहत खलीफा के ऑटोमन साम्राज्य को समाप्त करना था। अतः इसके खिलाफ भारतीय मुसलमानों में गुस्सा था।

• शौकत अली एवं मुहम्मद अली दो भाइयों के नेतृत्व में इस आंदोलन को शुरू किया गया।
• कालांतर में इसका नेतृत्व गांधीजी को सौंप दिया गया।
• गांधीजी व तिलक ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया था जबकि लाला लाजपत राय तथा मदन मोहन मालवीय ने इसका विरोध किया था तथा इसे विशुद्ध धार्मिक मुद्दा बताया था।
• 31 अगस्त 1920 को खिलाफत आंदोलन असहयोग आंदोलन का हिस्सा बन गया।
• 1924 में कमाल मुस्तफा पाशा के नेतृत्व में तुर्की में क्रांति हो गई तथा खलीफा के पद को समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न.खिलाफत आंदोलन का समर्थन करना क्या गांधी जी की गलती थी ?


असहयोग आंदोलन (1 अगस्त 1920)

Non-cooperation movement.

कारण:-
1. स्वदेशी आंदोलन (1905) के बाद कोई बड़ा जनआंदोलन नहीं हुआ था। अतः जनआंदोलन की आवश्यकता थी।
2. लखनऊ अधिवेशन (1916) में नरम दल व गरम दल का विलय हो गया था। अतः लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई थी।
3. होमरूल आंदोलन (1916) के कारण राजनीतिक चेतना का विकास हुआ था। विभिन्न समितियों के निर्माण से आंदोलन को संगठनात्मक स्वरूप प्राप्त हुआ तथा आंदोलन परिणामविहीन था। अतः जनता में असंतोष था।
4. प्रथम विश्व युद्ध के कारण:-
• महंगाई बढ़ गई थी।
• विश्व युद्ध के दौरान युवाओं को सेना में भर्ती किया गया लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया। (बेरोजगारी बढ़ी)
• प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजो की कई स्थानों पर हार हुई इससे उनकी अपराजेयता का भ्रम टूटा।
• प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन ने यूरोप में लोकतंत्र को समर्थन दिया लेकिन उसे भारत में लागू नहीं किया इससे बुद्धिजीवी वर्ग निराश था।

5. रोलेट एक्ट
6. जलियांवाला बाग हत्याकांड
7. हंटर कमेटी की रिपोर्ट
8. खिलाफत आंदोलन के कारण हिंदू /-मुस्लिम एकता स्थापित हुई।
9. 1919 के अधिनियम से भारतीय संतुष्ट नहीं थे।
10. हमें गांधीजी के रूप में एक चमत्कारिक नेतृत्व प्राप्त हो गया था। (चंपारण, खेड़ा)

1 अगस्त 1920 को तिलक की मृत्यु के साथ ही गांधी जी ने असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया तथा गांधीजी ने कहा कि 1 वर्ष के अंदर हम स्वराज प्राप्त कर लेंगे।

कांग्रेस का विशेष अधिवेशन - कलकत्ता (सितंबर 1920)
अध्यक्ष:- लाला लाजपत राय
• गांधी जी ने असहयोग प्रस्ताव पेश किया चितरंजन दास (सीआर दास) ने उसका विरोध किया लेकिन मोतीलाल नेहरू व अली बंधुओं के सहयोग से गांधी जी ने प्रस्ताव पारित करवा लिया।

कांग्रेस का नियमित अधिवेशन - नागपुर (दिसंबर 1920)
अध्यक्ष:- वी राघवाचारी। 
• कांग्रेस के संविधान में कई संशोधन किए गए -
15 सदस्यीय कांग्रेस की कार्यकारिणी का गठन किया गया।
भाषाई आधार पर कांग्रेस समितियों का गठन।
कांग्रेस का सदस्यता शुल्क घटाकर 25 पैसे कर दिया गया।

सीआर दास ने असहयोग का प्रस्ताव पेश किया
सीआर दास व उनकी पत्नी बसंती देवी असहयोग आंदोलन में सबसे पहले गिरफ्तार हुए थे।
मुहम्मद अली को भी गिरफ्तार किया गया था।
गांधी जी ने जुलू, बोअर तथा केसर-ए-हिंद पदक लौटा दिया तथा जमनालाल बजाज ने रायबहादुर की उपाधि लौटा दी थी।
• विदेशी कपड़ों का बहिष्कार सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ।
• ताड़ी (शराब) की दुकानों पर धरना लोकप्रिय हुआ जबकि यह मूल कार्यक्रम में नहीं था।

1921 ईस्वी का कांग्रेस अधिवेशन- अहमदाबाद
सी आर दास के जेल में होने के कारण हकीम अजमल खान ने अध्यक्षता की। इस अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया कि 12 फरवरी 1922 से बारदोली से कर नहीं देने का आंदोलन चलाया जाएगा।

• 5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरा-चोरी नामक स्थान पर उग्र भीड़ ने पुलिस थाने को जला दिया, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए।
इस कारण गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।

12 फरवरी को बारदोली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन समाप्ति की घोषणा की।


असहयोग आंदोलन वापस लेने के कारण:-

1. आंदोलन हिंसक हो गया था तथा गलत हाथों में जा सकता था और सरकार द्वारा इसे कुचला जा सकता था।
2. गांधी जी को अपने सत्य व अहिंसा जैसे मूल्य स्वराज से भी अधिक प्रिय थे तथा गांधीजी जानते थे कि हिंसा रूपी गलत साधन के प्रयोग से स्वराज रूपी उचित साध्य नहीं प्राप्त करना चाहिए।
3. संघर्ष-विराम-संघर्ष की रणनीति के तहत आंदोलन को एक ऐसे बिंदु पर रोकना जरूरी था जिससे लोगों में निराशा नहीं आए तथा उनकी ऊर्जा बनी रहे।
4. आंदोलन के प्रारंभ में गांधी जी ने कहा था कि 1 वर्ष में स्वराज प्राप्त कर लेंगे लेकिन 1 वर्ष से अधिक समय हो जाने पर भी ब्रिटिश सरकार ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई।
5. 1921 के अहमदाबाद अधिवेशन के बाद से ही गांधी जी पर 'कर नहीं देने के आंदोलन' का दबाव बनता जा रहा था। तथा गांधीजी जानते थे कि इन परिस्थितियों में ऐसा करना संभव नहीं है।
6. आंदोलन के दौरान भारतीय समाज के आंतरिक विरोध उभरने लग गए थे। (किसान-जमींदार, हिंदू-मुस्लिम, मजदूर-पूंजीपति के बीच विवाद)
7. खिलाफत आंदोलन के कारण मुस्लिम असहयोग आंदोलन से जुड़े थे लेकिन तुर्की में खलीफा के खिलाफ क्रांति के बाद उनकी संख्या कम हो गई थी।


असहयोग आंदोलन का महत्व:-

• भारत का पहला बड़ा जन आंदोलन था जिसमें सभी वर्गों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया तथा इसमें महिलाओं ने भी भाग लिया था।
• असहयोग आंदोलन संपूर्ण भारत में हुआ था।
• राष्ट्रीय आंदोलन को सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह जैसे नए उपकरण मिले।
• विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से हमारे स्वदेशी उद्योग धंधों को फायदा हुआ।
• पहला आंदोलन था जिसे 'स्वराज' के लिए प्रारंभ किया गया।
• अनेक स्वदेशी शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की गई।
• असहयोग आंदोलन में मुस्लिम बड़ी संख्या में जुड़े थे। इसके बाद के अंदर आंदोलनों में ऐसा नहीं देखा गया।


असहयोग आंदोलन की कमियां:-

1. यह आंदोलन कई स्थानों पर हिंसक हो गया था।
जैसे - मोपला विद्रोह, 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा के समय दंगे (बॉम्बे), चौरा-चौरी घटना।
2. हिंदू-मुस्लिम एकता भी आंदोलन के प्रारंभ में स्थापित हुई थी। कालांतर में मुस्लिमों की संख्या कम हो गई थी।
3. गांधी जी ने कहा था कि 1 वर्ष में स्वराज प्राप्त कर लेंगे लेकिन स्वराज को परिभाषित नहीं किया था तथा ना ही स्वराज प्राप्त हो सका था।
4. विदेशी बहिष्कार में भी केवल वस्त्रों का बहिष्कार ही लोकप्रिय हुआ था।

नोट:- सी आर दास ने चुनावों के बहिष्कार का विरोध किया था जबकि लाला लाजपत राय ने स्कूलों व कॉलेजों के बहिष्कार का विरोध किया था।
• 1922 में राजद्रोह की धारा 124 (A) लगाकर गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया। (6 वर्ष के लिए परंतु 2 वर्ष में छोड़ दिया गया।)

आगे पढ़े 👉 स्वराज पार्टी

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