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राष्ट्रीय आंदोलन का तीसरा चरण

Third phase of national movement



राष्ट्रीय आंदोलन का तीसरा चरण

Third phase of national movement.

गांधीजी 1893 में अब्दुल्ला भाई का केस लड़ने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए, गांधी जी ने वहां पर रंगभेद नीति के खिलाफ सत्याग्रह किया था।
गांधीजी ने वहां पर टॉलस्टॉय तथा फिनिक्स आश्रम की स्थापना की।
इंडियन ओपिनियन नामक समाचार पत्र निकाला।
गांधी जी ने बोअर (डच किसान) तथा जुलू विद्रोह में अंग्रेजों का साथ दिया इसलिए अंग्रेजों ने इनको बोअर तथा जुलू पदक दिए थे।

नोट:- गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में हिंद स्वराज नामक पुस्तक लिखी।

9 जनवरी 1915 को गांधी जी भारत लौटे। 
गांधीजी ने साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) की स्थापना की।
गांधीजी ने प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय युवाओं को ब्रिटिश फौज में साथ शामिल होने के लिए कहा। इसलिए गांधीजी को भर्ती करने वाला सार्जेंट (Recruitment Sargent) कहा जाने लगा। इसलिए गांधीजी को अंग्रेजों ने केसर-ए-हिंद पदक दिया था।

• गांधी जी ने 1916 में बीएचयू उद्घाटन समारोह में भाग लिया। यह गांधी जी की भारत में पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी।
• गांधीजी ने 1916 के लखनऊ अधिवेशन में भाग लिया यहां पर राजकुमार शुक्ल ने गांधी जी से मुलाकात की एवं गांधी जी को चंपारण के नील किसानों की समस्या के बारे में बताया।


चंपारण सत्याग्रह (1917 ई.)

राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधी की चंपारण गए और तिनकठिया प्रथा के खिलाफ सत्याग्रह शुरू किया।
तिनकठिया प्रथा:-
भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था।
गांधी जी ने किसानों की स्थिति की जांच की।
अंग्रेजों ने एक जांच आयोग का गठन किया, जिसमें गाधीजी को भी सदस्य बनाया गया।
गांधी जी ने किसानों को 25% जुर्माना वापस दिलवाया।
आंदोलन में गांधीजी के सहयोगी:-
डॉ राजेंद्र प्रसाद
जे बी कृपलानी
मजरूल उल हक
नरहारि पारीख
महादेव देसाई (गांधीजी के सचिव)

• जूड़िथ ब्राउन ने अपनी पुस्तक Gandhi's rise to power में इन सहयोगियो को उपठेकेदार कहा है।
• इस आंदोलन की सफलता पर रविंद्र नाथ टैगोर ने गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी।


अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918 ई.)

मिल मजदूरों ने प्लेग भत्ता बंद कर देने के खिलाफ आंदोलन किया तथा गांधीजी ने समर्थन किया।
मिल मालिक अंबालाल साराभाई ने मजदूरों को 20% प्लेग भत्ता दिया गांधी जी ने इसके विरोध में मजदूरों के साथ भूख हड़ताल की।
गांधीजी ने मजदूरों को 35% भत्ता वापस दिलवाया। अंबालाल साराभाई की बहन अनुसूइया बेन साबरमती आश्रम की सदस्य थी।

नोट:- प्लेग फैलने पर अंबालाल साराभाई ने मजदूरों को उनके वेतन का 20% प्लेग भत्ता के रूप में दिया। जैसे - 100 रुपए प्रति माह वेतन वाले को 120 रुपए दिए गए।
• प्लेग समाप्त होने के बाद प्लेग भत्ता बंद कर दिया गया। जिसके खिलाफ आंदोलन किया गया।
अंत में इसी प्लेग भत्ते का 35% (20 रूपए का 20%= 7 रुपए) वेतन में जोडा गया। अर्थात अब प्लेग भत्ता सहित मजदूरों का वेतन 107 रूपए हो गया।


खेड़ा किसान आंदोलन (1918 ई.)

गांधीजी गुजरात किसान सभा के अध्यक्ष थे।
खेड़ा में किसानों की फसल खराब हो गई थी लेकिन फिर भी भू-राजस्व लिया जा रहा था। गांधी जी के खेड़ा पहुंचने पर अंग्रेजों ने भू-राजस्व लेना बंद कर दिया था।
गांधीजी के सहयोगी:-
शंकरलाल बैंकर
वल्लभ भाई पटेल
इंदूलाल याग्निक
महादेव देसाई

• जूड़िथ ब्राउन ने अपनी पुस्तक Gandhi's rise to power में इन सहयोगियो को उपठेकेदार कहा है।

प्रवासी भारतीय दिवस - 9 जनवरी
9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से 21 साल बाद भारत लौटे थे। इस याद में हर 2 साल में 9 जनवरी को एक बार प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है।
2015 में इस दिन को द्विवार्षिक घोषित किया गया था।
पहली बार यह 2003 में मनाया गया था।
16वें प्रवासी दिवस 2021 का विषय:- Contributing to Aatmanirbhar Bharat अर्थात "भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देना" 
• 16वें प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर “Modi India Calling – 2021” नामक एक कॉफी टेबल बुक जारी की गई है। 

आगे पढ़े 👉 रोलेट एक्ट

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