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रोलेट एक्ट ।। जलियांवाला बाग हत्याकांड

 
Rowlatt act



रोलेट एक्ट

Rowlatt act.

1915 में अंग्रेज डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट लेकर आए।
• 1917 में सर सिडनी रोलेट की अध्यक्षता में एक राजद्रोह समिति (Sedition committee) का गठन किया गया।
• इस समिति की सिफारिशों के आधार पर अराजक एवं क्रांतिकारी अपराध अधिनियम पारित किया गया, जिसे रोलेट एक्ट भी कहा जाता है।
• यह एक काला कानून था, जिसे ना अपील ना वकील ना दलील का कानून कहा जाता है।

• गांधीजी ने इसके खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन चलाया।
बॉम्बे में सत्याग्रह सभा की स्थापना की गई।
• 6 अप्रैल 1919 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की गई।
• गांधीजी, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के बुलाने पर दिल्ली जा रहे थे लेकिन पलवल (हरियाणा) रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिए गए तथा वापस बॉम्बे छोड़ दिया गया।

अमृतसर में रोलेट एक्ट का विरोध कर रहे डॉ सतपाल और सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार कर लिया गया।
इनके समर्थक इसके विरोध में रैली निकाल रहे थे और उग्र भीड़ ने 5 अंग्रेजों की हत्या कर दी।
10 अप्रैल 1919 को पंजाब में मार्शल लॉ लगा दिया गया तथा जनरल आर डायर (Reginald Dyer) को प्रशासन दे दिया गया। 

जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)
• बैसाखी के मेले के कारण जलियांवाला बाग में लोग इकट्ठे हो रखे थे।
• जनरल आर डायर ने वहां पर फायरिंग कर दी।
हंसराज नामक भारतीय ने डायर का साथ दिया था।  
• सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गए थे लेकिन वास्तविकता में मरने वालों की संख्या 1000 से अधिक थी।

• इस हत्याकांड के विरोध में टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि छोड़ दी तथा शंकरन नायर (शिक्षा विभाग) ने गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद से इस्तीफा दे दिया। 

• अंग्रेजों ने हत्याकांड की जांच हेतु हंटर कमेटी (डिसऑर्डर इंक्वायरी कमेटी) का गठन किया।

भारतीय सदस्य
ब्रिटिश 
चिमन लाल सीतलवाड़
हंटर (अध्यक्ष)
जगत नारायण
राइस
सुल्तान अहमद
बैरो

रैकिंग

स्मिथ

स्टोक्स (सचिव)

• गांधी जी ने हंटर कमेटी की रिपोर्ट के बारे में कहा था -
पन्ने दर पन्ने निर्लज्ज लीपापोती

• कांग्रेस ने हत्याकांड की जांच के लिए मदन मोहन मालवीय समिति का गठन किया था।
गांधीजी, मोतीलाल नेहरू व देशबंधु चितरंजन दास भी इसके सदस्य थे।

• ब्रिटेन के उच्च सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने जनरल डायर को ब्रिटिश साम्राज्य का शेर बताया तथा उसे मान की तलवार (Sword of honour) भेंट की।
• पंजाब की गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने जनरल डायर को सिंह की उपाधि तथा सरोपा भेंट किया। (संभव है दबाव रहा हो)

• पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ डायर ने जनरल डायर को निर्दोष बताया था।
13 मार्च 1940 को सरदार उधम सिंह ने इंग्लैंड में माइकल ओ डायर की हत्या कर दी।
आजादी के बाद सरदार उधम सिंह को शहीद-ए-आजम कहा गया।

आगे पढ़े 👉 1919 का भारत परिषद अधिनियम

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