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विदेशों में क्रांतिकारी गतिविधियां

Revolutionary activities in foreign countries



विदेशों में क्रांतिकारी गतिविधियां

Revolutionary activities in foreign countries.

1. लंदन में क्रांतिकारी गतिविधियां

श्यामजी कृष्ण वर्मा
संगठन:-  इंडियन होमरूल सोसाइटी
कार्यालय:- इंडिया हाउस
समाचार पत्र:- इंडियन सोशियोलोजिस्ट 

अन्य सहयोगी:-
• अब्दुल्ला सुहरावर्दी
• मैडम भीखाजी कामा
• वीर सावरकर
• मदनलाल धींगडा

• 1907 में 1857 की क्रांति की स्वर्ण जयंती मनाई। (गोल्डन जुबली)
• वीर सावरकर ने ग्रेव वार्निंग नामक पर्चा प्रकाशित किया।
• 1 जुलाई 1909 को मदनलाल धींगडा ने भारत सचिव के राजनीतिक सलाहकार कर्जन वाइली की हत्या कर दी।
• मदनलाल धींगडा को फांसी हुई तथा वीर सावरकर को काले पानी की सजा हुई।
भारत लाते समय सावरकर बंगाल की खाड़ी में कूद गए थे।

मैडम भीखाजी कामा
• पारसी महिला थी।
• दादाभाई नौरोजी की सचिव थी।
• इन्हें भारतीय क्रांति की माता कहा जाता है।
• इन्होंने 1907 में जर्मनी के स्टुटगार्ट में दूसरे अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में भाग लिया और भारतीय झंडा फहराया। (विदेश में भारतीय झंडा फहराने वाली पहली महिला)

2. वैंकूवर में क्रांतिकारी गतिविधियां :-
तारक नाथ दास, जी डी कुमार ने यूनाइटेड इंडिया हाउस की स्थापना की।
• तारक नाथ दास का समाचार पत्र:- फ्री हिंदुस्तान
• जी डी कुमार का समाचार पत्र:- स्वदेशी सेवक
संगठन - स्वदेशी सेवक गृह
• रामनाथ पुरी का समाचार पत्र:- सर्कुलर-ए-हिंद

3. सेन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में :-
• लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना ने युगांतर आश्रम की स्थापना की।
• लाला हरदयाल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे।
• 1 नवंबर 1913 से गदर नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया गया।
यह सबसे पहले उर्दू भाषा में निकाला गया परंतु बाद में मराठी, पंजाबी, पश्तो आदि भाषाओं में भी प्रकाशित किया गया।
इस अखबार के कारण इस आंदोलन को गदर आंदोलन नाम दिया गया था।
• गदर आंदोलनकारियों ने भारत में रास बिहारी बोस को अपना नेता बनाया।
• 21 फरवरी 1915 को भारत में एक साथ क्रांति की योजना बनाई गई लेकिन अंग्रेजों को पता चल जाने के कारण यह योजना असफल हो गई।
गदर क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 
इसे पहला लाहौर षड्यंत्र केस कहा जाता है।

करतार सिंह सराभा और विष्णु पिंगले को फांसी दे दी गई।
भाई परमानंद को काले पानी की सजा दी गई।

नोट:- राजस्थान में क्रांति की जिम्मेदारी राव गोपाल सिंह खरवा को दी गई थी।

4. अफगानिस्तान में:-
रेशमी रुमाल षड्यंत्र (1913)
उबेदुल्ला सिंधी
महमूद हसन

• 1915 में राजा महेंद्र प्रताप (यूपी का था) ने अफगानिस्तान में भारत सरकार का गठन किया। जर्मनी ने इस अस्थायी सरकार का समर्थन किया था।
इन्होंने वृंदावन में प्रेम विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। में


क्रांतिकारी आंदोलन का महत्व

1. इन्होंने व्यक्तिगत त्याग एवं बलिदान के उदाहरण पेश किए। अतः युवा वर्ग राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ा, जिससे राष्ट्रीय आंदोलन का सामाजिक आधार बढ़ा।
2. निष्क्रियता के दौर में आंदोलन को जारी रखा था। इनके कारण राष्ट्रीय आंदोलन गांवों तक पहुंचा क्योंकि क्रांतिकारी गतिविधियों के बाद गांवों में शरण लेते थे। 3. इनके कारण राष्ट्रीय आंदोलन विदेशों तक पहुंचा। जैसे - सैन फ्रांसिस्को।
4. अंग्रेजों को 1909 के सुधार करने पड़े।
5. अंग्रेजों को 1911 में बंगाल विभाजन रद्द करना पड़ा।


क्रांतिकारी आंदोलन की कमियां

1. इनके पास संगठन, नेतृत्व व रणनीति का अभाव था।
2. अंग्रेजी सरकार ने इसे आसानी से कुचल दिया था।
3. भारतीय जनता को अपने साथ जोड़ नहीं पाए थे।
यहां तक कि गरमपंथियों का सहयोग भी प्राप्त नहीं कर पाए थे। 
4.भारत में लोकप्रिय आंदोलन का रूप नहीं ले पाए थे। 5. इन्होंने धार्मिक प्रतीकों का प्रयोग किया था। अतः मुस्लिम वर्ग इनसे जुड़ नहीं पाया था।

आगे पढ़े 👉 राष्ट्रीय आंंदोलन का तीसरा चरण

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