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अंतर्राष्ट्रीय संबंध जनवरी 2021

   International relation 2021



अंतर्राष्ट्रीय संबंध जनवरी 2021

International Relation January 2021

भारत बना सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य
1 जनवरी 2021 को भारत आठवीं बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना है। भारत का कार्यकाल 2 वर्षों का होगा।
17 जून 2020 को हुई बैठक में महासभा के 192 देशों ने भाग लिया। इन में से 184 देशों ने भारत का समर्थन किया।
भारत के अलावा केन्या, आयरलैंड, नॉर्वे, मैक्सिको भी अस्थायी सदस्य बने है।
• संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत - टीएस त्रिमूर्ति
• भारत अगस्त 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष होगा और फिर 2022 में 1 महीने के लिए परिषद की अध्यक्षता करेगा।

19 से 25 जनवरी तक फ्रांस और भारत की वाय सेनाओं के मध्य संयुक्त युद्धाभ्यास 'एक्सरसाइज स्काईरॉस' का आयोजन पोखरण राजस्थान में किया जाएगा।

भारत को नवंबर 2023 तक तीन वर्षों की अवधि के लिए IUCN समर्थित एशिया संरक्षित क्षेत्रीय भागीदारी (Asia Protected Areas Partnership) का संयुक्त-अध्यक्ष चुना गया है। 
भारत दक्षिण कोरिया का स्थान लेगा।

6 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में भारत और जापान सरकार के बीच हुए सहभागिता से जुड़े समझौते को मंजूरी दी गई है। इस मंजूरी के बाद दोनों देश आपस में कुशल कामगारों को अपने-अपने देशों में मौका देने के लिए मूलभूत ढांचा तैयार करेंगे।
अब भारत के कुशल कामगार जापान जाकर अपना हुनर दिखा सकते हैं लेकिन इसके लिए जापानी भाषा का ज्ञान भी जरूरी होगा।
समझौते के तहत जापान में 14 विशेष क्षेत्रों में कुशल भारतीयों को काम करने का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि लगभग 10 साल पहले भारत और जापान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी (सीपा) समझौता हुआ था जिसके तहत भारतीय कामगारों को जापान के सेवा क्षेत्र में मौका देने की बात की गई।

भारत-जर्मनी 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जनवरी को जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से वार्ता की और उन्हें भारत में कोरोना की वैक्सीन से संबंधित गतिविधियों से अवगत कराया।
• दोनों नेताओं ने कोरोना महामारी से निपटने, द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों तथा विशेष रूप से भारत-यूरोपीय संघ संबंधों पर चर्चा की।
• भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ और सामरिक भागीदारी की 20वीं वर्षगांठ के महत्व को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने इसी वर्ष छठा अंतर-सरकारी परामर्श आयोजित करने पर सहमति जताई।

हाल ही भारत 2 साल के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ का अस्थायी सदस्य बना है। अपने कार्यकाल के दौरान भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की 3 समितियों की अध्यक्षता करेगा -
1. तालिबान प्रतिबंध समिति
2. आतंकवाद-रोधी समिति
3. लीबिया प्रतिबंध समिति

6 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने अमेरिकी संसद पर हमला कर दिया।
इसके बाद डेमोक्रेट सांसद डोनाल्ड ट्रंप कि राष्ट्रपति पद की शक्तियों को तुरंत खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
उपराष्ट्रपति माइक पेंस पर 25वें संशोधन को लागू करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह संशोधन राष्ट्रपति से उपराष्ट्रपति को सत्ता हस्तांतरण की अनुमति देता है।

25वां संशोधन इस तरह से करता है काम
25वें संशोधन के अनुसार, यदि राष्ट्रपति अपना कर्तव्य निभाने में असमर्थ होता है, तो यह उप राष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने की अनुमति देता है। 
उदाहरण के लिए यदि वह शारीरिक या मानसिक बीमारी के कारण असमर्थ हो जाता है। संशोधन के चौथे हिस्से की चर्चा की जा रही है, जो उप राष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रंप को अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ घोषित करने की अनुमति देता है। उन्हें एक हस्ताक्षरित पत्र प्रतिनिधि सभा और सीनेट के स्पीकर्स को भेजना होगा, जिसमें यह घोषणा करनी होगी कि राष्ट्रपति सरकार को चलाने के लिए अक्षम हैं या सक्षम नहीं हैं और इसलिए उन्हें कर्तव्यों और अधिकारों से मुक्त किया जाए। इस स्थिति में उप राष्ट्रपति माइक पेंस अपने आप पदभार संभाल लेंगे।

• लिखित प्रक्रिया का होता है मौका :- यदि राष्ट्रपति को लिखित प्रक्रिया का मौका दिया जाता है और वह विरोध करता है, तो कांग्रेस को निर्णय करना होगा। 
राष्ट्रपति को हटाने के लिए सीनेट और हाउस ऑफ कामंस में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। 
मामले के हल होने तक उप राष्ट्रपति को राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना होगा।

• हटाने का एक और रास्ता:- इसके लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दूसरी बार महाभियोग चलाना होगा। ट्रंप पहले भी डेमोक्रेट के नेतृत्व वाले हाउस में दिसंबर 2019 में महाभियोग का सामना कर चुके हैं। आरोप था कि ट्रंप ने यूक्रेन से एक बार फिर से चुनाव जीतने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए मदद मांगी थी। 

नोट:- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इतिहास में तीसरे अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिनके खिलाफ महाभियोग लाया गया। यह एक आपराधिक प्रक्रिया के बजाय एक राजनीतिक प्रक्रिया है। उन पर सत्ता का दुरुपयोग और कांग्रेस के अवरोध के आरोप थे लेकिन बाद में रिपब्लिकन की अगुआई वाली सीनेट ने उन्हें बरी कर दिया।

खुद को माफी दे सकते है ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति को माफी देने का अधिकार है, लेकिन खुद को माफी देने की शक्ति का प्रयोग अभी तक नहीं किया गया है। इस अधिकार की वैधानिकता को लेकर विशेषज्ञों में भी मतभेद है। न्याय विभाग के एक कानूनी मेमो में बताया गया है कि राष्ट्रपति खुद को माफी नहीं दे सकते। लेकिन वह इस्तीफा देकर उप राष्ट्रपति को अपना कार्यभार सौंपकर माफी देने का आग्रह कर सकते हैं। हालांकि इस कानूनी पहलू की बाध्यता नहीं है।

नोट:- अमेरिकी संसद परिसर को कैपिटल कहा जाता है।
• अगर महाभियोग से ट्रंप को हटाया जाता है, तो ट्रंप न केवल समय से पहले हटेंगे बल्कि 2024 में चुनाव में खड़े होने से वंचित हो सकते हैं।
• महाभियोग की स्थिति में ट्रंप अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बन जाएंगे जिन पर एक ही कार्यकाल में दो महाभियोग लाए गए।
• 1967 में 25 वां संशोधन आने के बाद से अभी तक इसका उपयोग नहीं हुआ है।
• उपराष्ट्रपति माइक पेंस और कैबिनेट ट्रंप को संविधान के 25 वें संशोधन के तहत पद से हटाते हैं तो महाभियोग की जरूरत नहीं रहेगी।
महाभियोग की प्रक्रिया:- 
हमारी लोकसभा राज्यसभा की तरह अमेरिका में भी दो सदन होते हैं।
1. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (निचला सदन)
2. सीनेट
सीनेट में कुल 100 वोट है।
महाभियोग पारित करने के लिए सीनेट में दो-तिहाई वोट (67) मिलने जरूरी है।

अमेरिका ने तालिबान के साथ राजनयिक संपर्क स्थापित करने पर लगे प्रतिबंध हटा लिए है।
गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अपनी राजनयिक ताकत का इस्तेमाल कर ताइवान को ऐसे किसी भी संगठन में शामिल होने से रोकता है, जिसकी सदस्यता के लिए देश का दर्जा होना जरूरी है।

13 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ निचले सदन में महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया गया। वह दूसरी बार महाभियोग का सामना करने वाले अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बन गए हैं।
• प्रस्ताव में ट्रंप पर आरोप लगाया गया है, कि उन्होंने 6 जनवरी को संसद परिसर (कैपिटल) पर हमले के लिए भीड़ को उकसाया था।

मुक्त आकाश समझौता (Open Sky Treaty)
रूस ने 15 जनवरी 2021 'ओपन स्काई संधि' (Open Skies Treaty) से अलग होने की घोषणा की है।
संधि का उद्देश्य:- सदस्य देशों के बीच आपसी खुलेपन के माध्यम से विश्वास का निर्माण करना, जिससे आकस्मिक युद्ध की संभावना कम हो जाती है।
• यह संधि 30 से अधिक देशों के बीच एक समझौता है, जो सदस्य देशों को उनके साथी सदस्य देशों के किसी भी हिस्से में निहत्थे निगरानी विमानों को उड़ाने की अनुमति देती है।
रूस पर समझौते के उल्लंघन करने के आरोपों के बाद अमेरिका ने वर्ष 2020 में इस संधि को छोड़ दिया था। रूस ने अब संधि छोड़ने के अपने फैसले के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया है।
1955 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर द्वारा शीत युद्ध के दौरान तनाव को कम करने के साधन के रूप में इस संधि को प्रस्तावित किया गया था।
सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो सदस्यों और पूर्व वारसॉ समझौते वाले देशों के बीच 1992 में ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।
यह संधि 2002 में प्रभावी हुई और इसमें 35 हस्ताक्षरकर्ता थे, जिनमें प्रमुख देश अमेरिका और रूस भी थे।
संधि के तहत, एक सदस्य देश अन्य देश की सहमति से 72 घंटे पहले नोटिस देकर उसके किसी भी हिस्से पर हवाई निगरानी कर सकता है और 24 घंटे पहले अपनी सटीक उड़ान पथ साझा कर सकता है।
सैन्य गतिविधियों, सैन्य अभ्यास और मिसाइल तैनाती पर एकत्रित जानकारी को सभी सदस्य देशों के साथ साझा करना होता है।

जी-7 समूह
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने 11 से 13 जून 2021 के बीच ब्रिटेन की अध्यक्षता में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है। जी-7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल है।

भारत 20 जनवरी को छह देशों भूटान, मालदीव, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश और सेशेल्स को कोरोना वैक्सीन भेजेगा।
यह वैक्सीन भारत की 'पड़ोसी पहले' की नीति के तहत अनुदान सहायता के रूप में दी जाएगी।

भारत ने पड़ोसी पहले की नीति के तहत बांग्लादेश और नेपाल को कोविड से बचाव के लिए वैक्सीन की 30 लाख और 10 लाख खुराकें भेजी है।

20 से 24 जनवरी तक जोधपुर एयरबेस पर भारत और फ्रांस के राफेल के बीच युद्धाभ्यास डेजर्ट नाइट -21 आयोजित किया जा रहा है।

परमाणु हथियार निषेध संधि
परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि को 24 अक्टूबर 2020 को 50 वां अनुमोदन प्राप्त हुआ था और यह 22 जनवरी 2021 से प्रभावी हो गई।
इस संधि को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जुलाई 2017 में मंजूरी दी थी और 120 से अधिक देशों ने इसे स्वीकृति प्रदान की थी। लेकिन अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल जैसे नौ देश जो परमाणु हथियारों से लैस है, ने इस संधि का कभी समर्थन नहीं किया।

महासभा के 75वें सत्र में सुरक्षा परिषद में सुधार पर बनी अंतर सरकारी वार्ता (आइजीएन) की पहली बैठक 25 जनवरी को हुई।
गौरतलब है कि जी-4 समूह के देश भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहे हैं।

नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (New START)
(New Strategic Arms Reduction Treaty)
हाल ही जनवरी 2021 में अमेरिका और रूस न्यू स्टार्ट संधि को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। 
‘नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि’ (START) 5 फरवरी, 2011 को अस्तित्व में आई थी, जो कि 5 फरवरी 2021 को खत्म हो रही है।
• न्यू स्टार्ट संधि अमेरिका और रूस के बीच वर्तमान में कायम एकमात्र समझौता है। यह समझौता रूस के परमाणु बलों पर लगाम लगाने वाला और दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्थिरता के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है।
• इस संधि के तहत 1550 परमाणु हथियार मास्को और वाशिंगटन की ओर से तैनात किए जा सकते है।
• न्यू स्टार्ट संधि शीत युद्ध के अंत में वर्ष 1991 में हुई ‘स्टार्ट संधि’ की जगह आई थी।
‘न्यू स्टार्ट संधि’ फरवरी 2021 में व्यपगत हो जाएगी।

केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और फ्रांस की इकोलॉजिकल ट्रांजिशन मंत्री बारबरा पोम्पिली ने वर्ष 2021 को भारत-फ्रांस पर्यावरण वर्ष के रूप में लांच किया है।

20 जनवरी को भारत द्वारा पड़ोसी देशों को COVID-19 टीके प्रदान करने के लिए वैक्सीन मैत्री पहल शुरू की गई।

SAVE WATER

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