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RAS Notes । प्रजातियों के प्रकार

 
Types of species


प्रजातियों के प्रकार 

1.स्थानिक जातियां (Endemic Species)
वे जातियां जो किन्हीं विशेष क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
जैसे - न्यूजीलैंड में कीवी, ऑस्ट्रेलिया में कंगारू, मेडागास्कर में लीमर,  अंडमानी टील, गैलापागोस के कछुए, अमेरिकी कंगारू चूहे।

नोट:- गैलापागोस द्वीपसमूह प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के आसपास फैले ज्वालामुखी द्वीपों का एक द्वीपसमूह है, जो महाद्वीपीय ईक्वाडोर के 972 किमी पश्चिम में स्थित है। यह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

भारत में स्थानिक जातियां
नीलगिरी पहाड़ियों में नीलगिरी थर नामक जंगली भेड़
Lion-tailed macaque - पश्चिमी घाट में लंबी पूछ और मुंह पर शेर जैसे बालों वाला बंदर।
पश्चिमी घाट में मिलने वाला Malabar spotted civet.
पश्चिमी घाट में bronzeback vine snake.
पश्चिमी घाट में पर्पल फ्रॉग 
इसे जल्द ही केरल का राजकीय उभयचर प्राणी घोषित किया जा सकता है।
Nilgiri blue robin bird. 
कश्मीरी हिरण,
गिर में एशियाई शेर (गुजरात का राज्य पशु) 
अन्नामलाई की पहाड़ियों में उड़ने वाला मेंढक (Gliding frog)
नमदाफा नेशनल पार्क - अरुणाचल प्रदेश की उड़न गिलहरियां।
Sangai deer - केबुल लामजाओ नेशनल पार्क (मणिपुर)
Hard ground swamp deer - कान्हा नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश)
Tiger toad - अंबोली (महाराष्ट्र)
अंडमानी जंगली सूअर, निकोबारी कबूतर

2. की-स्टोन प्रजातियां
वह जातियां जिनके सदस्यों की संख्या, जैवभार समुदाय में कम होता है परंतु समुदाय पर प्रभाव सर्वाधिक होता है, उनके कार्य ही समुदाय की संरचना का निर्धारण करते हैं।
उदाहरण - Sea otter, starfish, जंगल में शेर, रेगिस्तान में कंगारू चूहा, उष्णकटिबंधीय वनों में अंजीर।
Sea otter - समुद्री जीवन में केल्प फॉरेस्ट के संरक्षण में सहायक है।
येलोस्टोन पार्क (अमेरिका) में भेड़िया।
मधुमक्खी और हमिंग बर्ड - पॉलिनेशन में सहायक।
अफ्रीकी हाथी घास का संरक्षण करता है।
ऊदबिलाव (Beaver) - नदी किनारे पत्तियों द्वारा छोटे जीवों को आवास उपलब्ध कराता है।
प्रेयरी डॉग - घास के मैदानों में बीज फैलाता है।

• पौधे भी की-स्टोन प्रजाति हो सकते हैं।
जैसे - उष्णकटिबंधीय वनों में अंजीर 6 महीने तक फल देता है, जिससे शाकाहारियों को ऊर्जा मिलती है।

• परभक्षी (Predator) भी की-स्टोन प्रजाति हो सकते हैं।
जैसे - उत्तरी अमेरिका के प्रशांत सागरीय तट पर पाए जाने वाला समुद्री तारा - पाइसैस्टर ओकेरेसियस(IAS सीसैट -2011)

• सूक्ष्मजीव भी की-स्टोन प्रजाति हो सकते हैं।
जैसे - दलहनी पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला राइजोबियम जीवाणु
यह पौधों से कार्बोहाइड्रेट तथा अन्य पोषक पदार्थ प्राप्त करता है। बदले में पौधे इसके द्वारा संचित किए गए नाइट्रोजन का उपयोग अपनी वृद्धि के लिए करते हैं।

• की-स्टोन प्रजातियां पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा के प्रवाह, खाद्य श्रंखला और खनिजों के चक्रण को प्रभावित करती है और अपनी परस्पर क्रियाओं से समुदाय की संरचना और जैविक घटकों को परिवर्तित कर सकती हैं।

3. क्रांतिक योजी प्रजाति (Critical link species)
ऐसी प्रजाति जिसका किसी अन्य जाति के साथ आवश्यक संबंध हो तथा जो दूसरी जाति के अति आवश्यक क्रियाकलापों (जैसे - परागण, पोषण) में सहयोग दें।
उदाहरण:- माइकोराइजा कवक, जंतु तथा पुष्पीय पादपों का संबंध।

4. छत्रक प्रजातियां (Umbrella species)
छत्रक प्रजाति एक व्यापक प्रजाति है, छत्रक प्रजातियों की सुरक्षा स्वचालित (Automatically) रूप से अन्य प्रजातियों को संरक्षण प्रदान करती है।
• छत्रक प्रजातियां अप्रत्यक्ष रूप से कई अन्य प्रजातियों की रक्षा करती है, जो इनके निवास स्थान के पारिस्थितिक समुदाय को बनाती हैं।
उदाहरण:- प्रोजेक्ट टाइगर।
यहां टाइगर छत्रक प्रजाति है, टाइगर का संरक्षण करने पर उस क्षेत्र की अन्य सभी प्रजातियों की सुरक्षा होती है।

प्रश्न.लाल पांडा परियोजना कब शुरू की गई ? - 1996

5. फ्लैगशिप प्रजाति (Flagship species)
यह किसी क्षेत्र विशेष की विशिष्ट, सुभेद्य (Vulnerable), जनता का समर्थन प्राप्त प्रजाति होती है।
यह प्रमुख प्रजाति है, जो उस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतिनिधित्व करती है।
उदाहरण:- प्रोजेक्ट टाइगर।

सुभेद्य जातियां - वे जातियां जिनकी संख्या घट रही है। यदि संख्या लगातार घटती रही तो इन्हें संकटग्रस्त जातियों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
जैसे - नीली भेड़, एशियाई हाथी, गंगा नदी डॉल्फिन

6. संकेतक प्रजाति (Indicator species)
ऐसी प्रजाति जिसकी उपस्थिति अन्य प्रजातियों के एक समूह की उपस्थिति को इंगित करती है और जिसकी अनुपस्थिति प्रजातियों के पूरे समूह की कमी को इंगित करती है।
• इंडिकेटर प्रजाति पर्यावरण की विशेषता या विशेषताओं को परिभाषित करती है।
उदाहरण:- लाइकेन
लाइकेन वायु प्रदूषण तथा सल्फर डाइऑक्साइड के प्रति संवेदनशील होता है।
लाइकेन की उपस्थिति:- स्वच्छ वातावरण।
लाइकेन की अनुपस्थिति:- वायु प्रदूषण।

7. फाउंडेशन प्रजाति (Foundation species)
ऐसी प्रजाति जो किसी पारिस्थितिकी तंत्र में सर्वाधिक प्रभावशाली और बहुतायत में हो।
यह प्रजाति उस पारिस्थितिकी तंत्र की प्रमुख प्राथमिक उत्पादक होती है।
उदाहरण:- केल्प जंगल में केल्प और प्रवाल भित्तियों में प्रवाल (Corals in coral reefs).



आईयूसीएन द्वारा प्रजातियों का वर्गीकरण

अंतर्राष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण संघ (IUCN) के अनुसार पौधे और प्राणियों की जातियों  को निम्नलिखित श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है -
1. सामान्य जातियां (Normal species)
2. संकटग्रस्त जातियां (Endangered species)
3. सुभेद्य जातियां (Vulnerable species)
4. दुर्लभ जातियां (Rare species)
5. स्थानिक जातियां (Endemic species)
6. लुप्त जातियांं (Extinct species)

1. सामान्य जातियां - वे जातियां जिनकी संख्या जीवित रहने के लिए सामान्य मानी जाती है।
जैसे - पशु, चील

2. संकटग्रस्त जातियां - वे जातियां जिनके लुप्त होने का खतरा है। यदि खतरा लगातार जारी रहा तो इन जाति का जीवित रहना कठिन है।
जैसे - काला हिरण, मगरमच्छ, गैंडा

3. सुभेद्य जातियां - वे जातियां जिनकी संख्या घट रही है। यदि संख्या लगातार घटती रही तो इन्हें संकटग्रस्त जातियों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
जैसे - नीली भेड़, एशियाई हाथी, गंगा नदी डॉल्फिन

4. दुर्लभ जातियां - वह जातियां जिनकी संख्या बहुत ज्यादा कम या सुभेद्य है।

5. स्थानिक जातियां - वे जातियां जो किन्हीं विशेष क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
जैसे - अंडमानी टील, अंडमानी जंगली सूअर, निकोबारी कबूतर

6. लुप्त जातियां - वे जातियां जो स्थानीय क्षेत्र, प्रदेश, देश महाद्वीप या पूरी पृथ्वी से ही लुप्त हो गई है। इनके आवासों में खोज करने पर ये अनुपस्थित पाई गई हैं।
जैसे - एशियाई चीता, गुलाबी सिर वाली बतख, पहाडी कोयल, जंगली चित्तीदार उल्लू


अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ

(The International Union for Conservation of Nature)
IUCN सरकारों तथा नागरिकों दोनों से मिलकर बना एक सदस्यता संघ है।
यह दुनिया की प्राकृतिक स्थिति को संरक्षित रखने के लिये एक वैश्विक प्राधिकरण है, जिसकी स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी।
मुख्यालय:- स्विटज़रलैंड में है।
IUCN द्वारा जारी की जाने वाली लाल सूची दुनिया की सबसे व्यापक सूची है, जिसमें पौधों और जानवरों की प्रजातियों की वैश्विक संरक्षण की स्थिति को दर्शाया जाता है।
इसे जैविक विविधता की स्थिति जानने के लिये सबसे अच्छा स्रोत है।
यह SDG का एक प्रमुख संकेतक भी है।

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